स्वतः प्रक्रम: केवल ΔH काफ़ी क्यों नहीं
स्वतः प्रक्रम (spontaneous process) एक बार शुरू होकर बिना लगातार बाहरी मदद के अपने-आप चलता है: पानी का ढलान पर बहना, गैस का कमरे में फैलना, लोहे पर जंग। स्वतः का मतलब तेज़ नहीं (हीरे का ग्रेफाइट बनना स्वतः है पर बेहद धीमा)।
बहुत-सी स्वतः अभिक्रियाएँ ऊष्माक्षेपी हैं, तो लगता है 'ΔH < 0 मतलब स्वतः'। पर कमरे के ताप पर बर्फ़ का पिघलना, अमोनियम नाइट्रेट का घुलना और पानी का वाष्पित होना सब ऊष्माशोषी हैं और फिर भी स्वतः। इसलिए दूसरी चीज़ चाहिए: एन्ट्रॉपी।
एन्ट्रॉपी और द्वितीय व तृतीय नियम
एन्ट्रॉपी (S) बताती है कि कण और उनकी ऊर्जा कितने बिखरे (अव्यवस्थित) हैं। यह अवस्था फलन है। S बढ़ती है: ठोस → द्रव → गैस में, ठोस घुलने पर, गैस के मोल बढ़ने पर और ताप बढ़ने पर।
ताप T पर उत्क्रमणीय बदलाव के लिए: ΔS = q_rev / T (मात्रक J K⁻¹ mol⁻¹)। कम ताप पर दी गई ऊष्मा ज़्यादा ताप की तुलना में अव्यवस्था ज़्यादा बढ़ाती है।
अभिक्रिया का एन्ट्रॉपी परिवर्तन
ΔrS° = ΣS°(उत्पाद) − ΣS°(अभिकारक)। ध्यान दो: तत्वों का S° शून्य नहीं होता (ΔfH° के उलट)।
द्वितीय नियम
हर स्वतः परिवर्तन में विलगित निकाय (ब्रह्मांड) की एन्ट्रॉपी बढ़ती है: ΔS_कुल = ΔS_निकाय + ΔS_परिवेश > 0। साम्य पर ΔS_कुल = 0। परिवेश के लिए ΔS_परिवेश = −ΔH_निकाय / T।
तृतीय नियम
परम शून्य (0 K) पर पूर्ण क्रिस्टलीय शुद्ध पदार्थ की एन्ट्रॉपी शून्य होती है। इससे पदार्थों की निरपेक्ष एन्ट्रॉपी निकाली जाती है।
गिब्स ऊर्जा परिवर्तन: ΔG = ΔH − TΔS
परिवेश को मापना मुश्किल है, इसलिए जे. डब्ल्यू. गिब्स ने केवल निकाय का एक फलन बनाया: G = H − TS। स्थिर ताप और दाब पर: ΔG = ΔH − TΔS। यह ΔS_कुल = ΔS_निकाय − ΔH_निकाय/T से आता है; −T से गुणा करने पर −TΔS_कुल = ΔH − TΔS = ΔG। यानी ΔS_कुल > 0 और ΔG < 0 एक ही बात है।
- ΔG < 0: स्वतः।
- ΔG = 0: साम्य पर।
- ΔG > 0: स्वतः नहीं (उलटी दिशा स्वतः)।
ताप का प्रभाव (चार स्थितियाँ)
- ΔH −, ΔS + → ΔG हमेशा ऋणात्मक: हर ताप पर स्वतः।
- ΔH +, ΔS − → ΔG हमेशा धनात्मक: कभी स्वतः नहीं।
- ΔH −, ΔS − → कम ताप पर स्वतः (T = ΔH/ΔS से नीचे)।
- ΔH +, ΔS + → ऊँचे ताप पर स्वतः (T = ΔH/ΔS से ऊपर)।
ΔG वह अधिकतम उपयोगी (प्रसार के अलावा) कार्य भी है जो निकाय कर सकता है, इसलिए इसे मुक्त ऊर्जा कहते हैं।
गिब्स ऊर्जा और साम्य
अभिक्रिया आगे बढ़ती है तो मिश्रण का G घटता जाता है और एक न्यूनतम पर पहुँचता है। वहाँ अग्र और पश्च अभिक्रियाएँ बराबर हो जाती हैं: साम्य, जहाँ ΔG = 0।
सामान्य संबंध ΔG = ΔG° + RT ln Q है, जहाँ Q अभिक्रिया भागफल है। साम्य पर ΔG = 0 और Q = K, इसलिए ΔG° = −RT ln K = −2.303 RT log K।
- ΔG° ऋणात्मक → K > 1 → उत्पाद ज़्यादा।
- ΔG° धनात्मक → K < 1 → अभिकारक ज़्यादा।
- ΔG° = 0 → K = 1।
इससे केवल ऊष्मीय आँकड़ों से बता सकते हैं कि अभिक्रिया कितनी आगे जाएगी। साथ ही ΔG° = ΔH° − TΔS°, तो दोनों रास्ते जोड़े जा सकते हैं।
परीक्षा में
चिह्न तालिका (2 अंक), ΔG और सीमांत ताप (3 अंक), और ΔG° से K (3 अंक) पर प्रश्न आते हैं। मात्रक एक जैसे रखो: ΔS को J से kJ में बदलो, और R = 8.314 J K⁻¹ mol⁻¹ के साथ ΔG° जूल में लो।
करके देखो: पहले अनुमान, फिर जाँच
घर पर: शांत पानी में खाने के रंग की एक बूँद डालो और उसे अपने-आप फैलते देखो (ΔS > 0)। सोचो: क्या रंग खुद वापस एक बूँद में इकट्ठा हो सकता है? 3D फ्री प्ले में ΔH = +40 kJ और ΔS = +110 J/K रखो (पानी के उबलने जैसा)। अनुमान लगाओ किस ताप पर ΔG शून्य होगा (40 000 ÷ 110 ≈ 364 K), फिर T खिसकाकर देखो कि ΔG का चिह्न कहाँ बदलता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ΔS = q_rev / T
- ΔrS° = ΣS°(उत्पाद) − ΣS°(अभिकारक)
- ΔS_कुल = ΔS_निकाय + ΔS_परिवेश > 0 (स्वतः); ΔS_परिवेश = −ΔH_निकाय / T
- G = H − TS; ΔG = ΔH − TΔS (स्थिर T, p)
- ΔG < 0 स्वतः; ΔG = 0 साम्य; ΔG > 0 स्वतः नहीं
- सीमांत ताप: T = ΔH / ΔS
- ΔG = ΔG° + RT ln Q; ΔG° = −RT ln K = −2.303 RT log K
हल किए गए उदाहरण
1. 273 K पर 1 mol बर्फ़ पिघलने का ΔS ज्ञात करो (ΔfusH = 6.01 kJ mol⁻¹)।
ΔS = q_rev / T = 6010 ÷ 273 = +22.0 J K⁻¹ mol⁻¹। धनात्मक: द्रव ज़्यादा अव्यवस्थित है।
2. 373 K पर पानी की वाष्पन एन्ट्रॉपी ज्ञात करो (ΔvapH = 40.79 kJ mol⁻¹)।
ΔS = 40 790 ÷ 373 = +109.4 J K⁻¹ mol⁻¹।
3. 300 K पर एक अभिक्रिया का ΔH = −100 kJ और ΔS_निकाय = −200 J K⁻¹ है। कुल एन्ट्रॉपी से बताओ, क्या यह स्वतः है?
ΔS_परिवेश = −ΔH/T = +100 000 ÷ 300 = +333 J K⁻¹। ΔS_कुल = −200 + 333 = +133 J K⁻¹ > 0, इसलिए स्वतः।
4. उसी अभिक्रिया को ΔG से जाँचो।
ΔG = ΔH − TΔS = −100 − 300 × (−0.200) = −100 + 60 = −40 kJ। ऋणात्मक, तो स्वतः। (−TΔS_कुल = −300 × 0.133 = −40 kJ, वही।)
5. CaCO₃(s) → CaO(s) + CO₂(g) के लिए ΔH° = +178 kJ और ΔS° = +160.6 J K⁻¹। क्या यह 298 K पर स्वतः है?
ΔG° = 178 − 298 × 0.1606 = 178 − 47.9 = +130.1 kJ। धनात्मक, तो कमरे के ताप पर स्वतः नहीं।
6. CaCO₃ का अपघटन (उदाहरण 5) किस ताप से ऊपर स्वतः होगा?
सीमा पर ΔG = 0: T = ΔH/ΔS = 178 000 ÷ 160.6 = 1108 K (लगभग 835 °C)। इससे ऊपर ΔG < 0।
7. 298 K पर किसी अभिक्रिया का साम्य स्थिरांक 10 है। ΔG° ज्ञात करो।
ΔG° = −2.303 RT log K = −2.303 × 8.314 × 298 × log 10 = −5706 J ≈ −5.71 kJ mol⁻¹।
8. 298 K पर किसी अभिक्रिया का ΔG° = −11.42 kJ mol⁻¹ है। K ज्ञात करो।
log K = −ΔG° ÷ (2.303 RT) = 11 420 ÷ (2.303 × 8.314 × 298) = 11 420 ÷ 5706 = 2.00। K = 10² = 100।
9. 298 K पर N₂(g) + 3H₂(g) → 2NH₃(g) के लिए: S° (J K⁻¹ mol⁻¹) N₂ 191.6, H₂ 130.7, NH₃ 192.5; ΔH° = −92.2 kJ। ΔS°, ΔG° और K ज्ञात करो।
ΔS° = 2(192.5) − [191.6 + 3(130.7)] = 385.0 − 583.7 = −198.7 J K⁻¹। ΔG° = −92.2 − 298 × (−0.1987) = −92.2 + 59.2 = −33.0 kJ। log K = 33 000 ÷ 5706 = 5.78, तो K ≈ 6 × 10⁵। 298 K पर स्वतः; उत्पाद ज़्यादा।
आम गलतियाँ
- ΔG = ΔH − TΔS में मात्रक मिलाना: ΔH kJ में, ΔS J K⁻¹ में। पहले ΔS को 1000 से भाग दो।
- 'स्वतः' को 'तेज़' समझना। ऊष्मागतिकी बताती है कि बदलाव हो सकता है या नहीं, कितनी जल्दी नहीं।
- तत्वों का S° शून्य मानना। केवल तत्वों का ΔfH° शून्य है; S° धनात्मक होता है।
- ΔG° = −2.303 RT log K में ΔG° को kJ में और R = 8.314 लेना। R J K⁻¹ mol⁻¹ में हो तो ΔG° जूल में रखो।