भाग क: सरल सेल बनाओ
सामान: ज़िंक की पट्टी, ताँबे की पट्टी, तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल (या नींबू का रस), बीकर, क्लिप वाले तार और वोल्टमीटर। चश्मा पहनो। पहले पट्टियों को रेगमाल से साफ़ करो।
- बीकर में अम्ल डालो।
- ज़िंक और ताँबे की पट्टी डालो, आपस में छुए बिना।
- एक तार ज़िंक से वोल्टमीटर के ऋण सिरे से और दूसरा ताँबे से धन सिरे से जोड़ो।
- वोल्टेज (लगभग 1.0 V) पढ़ो और ताँबे की पट्टी पर बुलबुले देखो।
क्या होता है: ज़िंक ज़्यादा सक्रिय है, इसलिए वह इलेक्ट्रॉन देता है: Zn → Zn²⁺ + 2e⁻ (ऐनोड, −)। इलेक्ट्रॉन तार से दौड़ते हैं। ताँबे पर हाइड्रोजन आयन उन्हें लेते हैं: 2H⁺ + 2e⁻ → H₂ (कैथोड, +)। यही रासायनिक ऊर्जा का विद्युत ऊर्जा बनना है।
भाग क: धातु-जोड़ी बदलो
वही अम्ल, वही पट्टी का आकार और वही दूरी रखो, सिर्फ़ एक पट्टी बदलो:
| जोड़ी | वोल्टेज (लगभग) |
|---|---|
| Zn–Cu | 1.0 V |
| Fe–Cu | 0.7 V |
| Cu–Cu | 0 V |
सक्रियता श्रेणी में दोनों धातुएँ जितनी दूर होंगी, वोल्टेज उतना बड़ा होगा। एक जैसी दो धातुएँ बिल्कुल धक्का नहीं देतीं। सेलों को श्रेणी में जोड़ने पर वोल्टेज जुड़ते हैं: दो Zn–Cu सेल लगभग 2.0 V देते हैं।
मान अम्ल, पट्टी के क्षेत्रफल और पट्टी की सफ़ाई से थोड़े बदलते हैं। जो असल में पढ़ो वही लिखो।
भाग ख: दर नापना
दर यानी उत्पाद कितनी तेज़ी से बनता है (या अभिकारक कितनी तेज़ी से ख़र्च होता है)। हम संगमरमर के टुकड़े और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल लेते हैं: CaCO₃ + 2HCl → CaCl₂ + H₂O + CO₂। CO₂ को गैस सिरिंज में इकट्ठा करो और हर 10 सेकंड पर आयतन लिखो। आयतन बनाम समय का ग्राफ़ बनाओ।
- दर = गैस का आयतन ÷ समय, जैसे 40 s में 24 mL = 0.6 mL/s।
- रेखा जितनी तीखी, दर उतनी तेज़।
- जब कोई अभिकारक ख़त्म हो जाता है तो रेखा सपाट हो जाती है।
भाग ख: चार कारक
एक कारक बदलो और बाक़ी बराबर रखो। यही निष्पक्ष परीक्षण है: बदला गया कारक चर है, बाक़ी सब नियंत्रित।
| कारक | बदलाव | दर पर असर | क्यों (टक्कर का विचार) |
|---|---|---|---|
| सांद्रता | 1 mol/L → 2 mol/L अम्ल | तेज़ (लगभग 2×) | हर सेकंड ज़्यादा अम्ल-कण संगमरमर से टकराते हैं |
| ताप | +10 °C | तेज़ (अक्सर लगभग 2×) | कण तेज़ चलते हैं और ज़ोर से टकराते हैं |
| पृष्ठ क्षेत्रफल | डली → चूर्ण | बहुत तेज़ | संगमरमर की ज़्यादा सतह अम्ल के संपर्क में आती है |
| उत्प्रेरक | H₂O₂ में MnO₂ | बहुत तेज़ | आसान रास्ता देता है; MnO₂ ख़र्च नहीं होता |
इनमें से कोई भी कुल गैस की मात्रा नहीं बदलता, सिर्फ़ लगने वाला समय बदलता है।
लिखना और सुरक्षा
हर जाँच के लिए समय (s) और आयतन (mL) की तालिका बनाओ और जाँच दो बार दोहराओ। हर बार संगमरमर का वही द्रव्यमान, अम्ल का वही आयतन और वही फ़्लास्क रखो। स्थिर ताप के लिए जल-ऊष्मक (वाटर बाथ) इस्तेमाल करो। अम्ल को खुली लौ पर गरम मत करो। गिरे द्रव को तुरंत पोंछो, हाथ धोओ और इस्तेमाल हुए रसायन लेबल वाली अपशिष्ट बोतल में डालो।
करके देखो: पहले अनुमान, फिर जाँच
चरण 6 से पहले अनुमान लगाओ कि 2 mol/L अम्ल और 40 °C पर अभिक्रिया कितनी गुना तेज़ चलेगी। नियमों से (अम्ल के लिए 2× और +20 °C के लिए 2×2 = 4×) उत्तर लगभग 8× है। फिर स्लाइडर सेट करके मिलाओ। घर पर: एक इफ़ेर्वेसेंट गोली पूरी ठंडे पानी में डालो और दूसरी कुचलकर उतने ही गुनगुने पानी में। दोनों का समय नापो और देखो कौन पहले फ़ेन छोड़ना बंद करती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- दर = उत्पाद की मात्रा ÷ समय (जैसे प्रति सेकंड गैस के mL)
- आयतन–समय ग्राफ़ पर तीखी रेखा = तेज़ दर
- मोटा नियम: हर 10 °C बढ़ने पर दर अक्सर लगभग दुगुनी
- श्रेणी में सेल: कुल V = एक सेल का V × सेलों की संख्या
- Zn → Zn²⁺ + 2e⁻ (ऐनोड); 2H⁺ + 2e⁻ → H₂ (कैथोड)
हल किए गए उदाहरण
1. एक विद्यार्थी 40 s में 24 mL गैस इकट्ठा करता है। औसत दर क्या है?
दर = 24 ÷ 40 = 0.6 mL/s।
2. 20 °C पर जाँच पूरी होने में 80 s लगते हैं। अगर हर 10 °C पर दर दुगुनी हो तो 40 °C पर लगभग कितना समय लगेगा?
+20 °C यानी दो बार दुगुनी, इसलिए दर 4× तेज़। समय = 80 ÷ 4 = 20 s।
3. दो Zn–Cu सेल (हर एक 1.0 V) श्रेणी में जुड़े हैं। वोल्टेज क्या है?
श्रेणी में वोल्टेज जुड़ते हैं: 2 × 1.0 = 2.0 V।
4. एक विद्यार्थी 1 mol/L अम्ल के साथ संगमरमर की डलियों की तुलना 2 mol/L अम्ल के साथ चूर्ण से करता है और कहता है कि चूर्ण पृष्ठ क्षेत्रफल के कारण तेज़ है। क्या यह निष्पक्ष परीक्षण है?
नहीं। आकार और सांद्रता दोनों बदल गए, इसलिए पता नहीं चलता कि तेज़ी किससे आई। एक बार में सिर्फ़ एक कारक बदलो।
आम गलतियाँ
- दर की जाँच में एक साथ दो चीज़ें बदलना, जिससे नतीजा समझाया नहीं जा सकता।
- यह सोचना कि तेज़ अभिक्रिया ज़्यादा उत्पाद बनाती है। कुल मात्रा इस पर निर्भर है कि अभिकारक कितना लिया।
- दर को ग्राफ़ की ढलान की जगह उसके अंतिम मान से पढ़ना।
- सेल में गंदी या आपस में छूती पट्टियाँ लेना, जिससे वोल्टेज कम या ग़लत आता है।