हमें क्या चाहिए: अभिकर्मक
अभिकर्मक यानी अभिक्रिया में काम आने वाला रसायन। CO₂ के लिए दो चाहिए।
- संगमरमर के टुकड़े (CaCO₃) या चूना-पत्थर। चॉक भी चलती है।
- तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl)। तनु यानी खूब पानी मिला हुआ।
अभिक्रिया: CaCO₃ + 2HCl → CaCl₂ + H₂O + CO₂↑। शब्दों में: कैल्शियम कार्बोनेट + हाइड्रोक्लोरिक अम्ल → कैल्शियम क्लोराइड + जल + कार्बन डाइऑक्साइड।
कोई भी कार्बोनेट या हाइड्रोजनकार्बोनेट अम्ल से इसी तरह CO₂ देता है, इसलिए खाने का सोडा और सिरका भी CO₂ बनाते हैं।
यही रसायन क्यों, दूसरे क्यों नहीं?
तनु सल्फ्यूरिक अम्ल क्यों नहीं? इससे कैल्शियम सल्फेट (CaSO₄) बनता है, जो लगभग अघुलनशील है। वह संगमरमर पर परत चढ़ा देता है और अम्ल उस तक पहुँच नहीं पाता। अभिक्रिया जल्दी रुक जाती है।
चूर्ण क्यों नहीं? चूर्ण का सतह क्षेत्र बहुत बड़ा होता है, अभिक्रिया बहुत तेज़ होती है और झाग नली में चढ़ सकता है।
गाढ़ा अम्ल क्यों नहीं? उससे HCl की वाष्प भी निकलकर गैस में मिल जाती है।
उपकरण
सामान्य यंत्र में पाँच भाग होते हैं।
- फ्लास्क जिसमें टुकड़े रखते हैं।
- थिसल कीप जिससे अम्ल डालते हैं। इसका निचला सिरा अम्ल में डूबा रहे, ताकि गैस ऊपर से न निकले।
- कॉर्क जो फ्लास्क को बंद रखता है।
- निकास नली, दो बार मुड़ी हुई। यह गैस को जार तक ले जाती है।
- गैस जार, सीधा रखा हुआ। नली उसके तल के पास तक जाती है।
किप्प उपकरण भी यही काम करता है और नल बंद करके गैस रोक सकते हैं।
गैस इकट्ठा करना
CO₂ हवा से लगभग 1.5 गुना भारी है (आपेक्षिक द्रव्यमान 44, हवा का लगभग 29)। वह पानी में थोड़ी घुलती भी है। इसलिए हम इसे वायु के ऊपर की ओर विस्थापन से इकट्ठा करते हैं, यानी सीधे जार में गैस नीचे बैठती है और हवा ऊपर से बाहर निकलती है।
पानी के ऊपर इकट्ठा करना ठीक नहीं, क्योंकि कुछ गैस घुल जाती है और गैस गीली रहती है। सूखी गैस के लिए पहले गाढ़े सल्फ्यूरिक अम्ल की बोतल से गुज़ारते हैं।
जार भर गया है या नहीं, यह जानने के लिए उसके मुँह पर जलती तीली लाओ: तीली बुझ जाती है।
कार्बन डाइऑक्साइड की जाँच
लौ की जाँच: जलती तीली CO₂ में बुझ जाती है, क्योंकि CO₂ न जलती है, न जलने में मदद करती है।
चूने के पानी की जाँच: गैस को चूने के पानी (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड का घोल) में प्रवाहित करो। वह दूधिया हो जाता है: Ca(OH)₂ + CO₂ → CaCO₃↓ + H₂O। दूध जैसा पदार्थ कैल्शियम कार्बोनेट के महीन कण हैं।
अगर CO₂ और देर तक प्रवाहित करो, तो दूधियापन फिर साफ़ हो जाता है: CaCO₃ + H₂O + CO₂ → Ca(HCO₃)₂, जो घुल जाता है।
पानी में घुली CO₂ से नीला लिटमस हल्का लाल होता है, क्योंकि कार्बोनिक अम्ल दुर्बल है।
करके देखो: घर पर झाग
गिलास में चुटकी भर खाने का सोडा डालो और थोड़ा सिरका मिलाओ। बुलबुले देखो। गिलास के ऊपर जलती तीली लाओ (किसी बड़े की निगरानी में): लौ मद्धम होती है या बुझ जाती है, क्योंकि भारी गैस गिलास में बैठी है। पहले अनुमान लगाओ, फिर जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- CaCO₃ + 2HCl → CaCl₂ + H₂O + CO₂
- Ca(OH)₂ + CO₂ → CaCO₃ (दूधिया) + H₂O
- CaCO₃ + H₂O + CO₂ → Ca(HCO₃)₂ (दूधियापन साफ़)
- 100 g CaCO₃ से 44 g CO₂
- STP पर 1 मोल गैस = 22.4 L
हल किए गए उदाहरण
1. प्रयोगशाला में CO₂ बनाने के दो रसायनों के नाम बताओ और समीकरण लिखो।
संगमरमर (CaCO₃) और तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल। CaCO₃ + 2HCl → CaCl₂ + H₂O + CO₂।
2. थिसल कीप का निचला सिरा अम्ल में क्यों डुबोया जाता है?
ताकि अम्ल कीप को बंद कर दे और गैस कीप से बाहर न जाए। सारी गैस निकास नली से ही जाए।
3. CO₂ कैसे और क्यों इकट्ठा की जाती है?
सीधे गैस जार में वायु के ऊपर की ओर विस्थापन से, क्योंकि CO₂ हवा से भारी है और पानी में थोड़ी घुलती है।
4. 25 g CaCO₃ से (अम्ल पर्याप्त) कितनी CO₂ मिलेगी?
100 g CaCO₃ से 44 g CO₂। अतः 25 g से 25 × 44 / 100 = 11 g।
5. एक गैस चूने के पानी को दूधिया करती है। छात्र कहता है कि यह CO₂ ही है। क्या यह पक्का प्रमाण है?
पूरी तरह नहीं। सल्फर डाइऑक्साइड भी चूने के पानी को दूधिया करती है। जलती तीली की जाँच और गैस बनने का तरीका भी देखो। CO₂ में तीली बुझती है और गैस कार्बोनेट और अम्ल से बनी होती है।
6. 10 g CaCO₃ से STP पर CO₂ का आयतन ज्ञात करो।
CaCO₃ के मोल = 10 / 100 = 0.1। एक मोल से एक मोल CO₂, अतः 0.1 मोल। आयतन = 0.1 × 22.4 = 2.24 L।
आम गलतियाँ
- तनु सल्फ्यूरिक अम्ल लेना: CaSO₄ की परत संगमरमर पर चढ़ जाती है और अभिक्रिया रुक जाती है।
- जार को उल्टा रखकर गैस इकट्ठा करना: भारी गैस गिर जाती है। जार सीधा रखो।
- आग बुझाने वाली हर गैस को "CO₂" कह देना। नाइट्रोजन भी लौ बुझाती है। चूने के पानी की जाँच भी करो।
- थिसल कीप को अम्ल के ऊपर रखना, जिससे गैस वहीं से निकल जाती है।