उद्देश्य और रसायन
उद्देश्य: प्रयोगशाला में ऑक्सीजन बनाना, इकट्ठी करना और प्रमाणित करना कि वह ऑक्सीजन ही है।
- विधि A (कमरे का तापमान): हाइड्रोजन परॉक्साइड विलयन + एक चम्मच मैंगनीज़ डाइऑक्साइड (MnO₂)। समीकरण: 2H₂O₂ → 2H₂O + O₂ (MnO₂ उत्प्रेरक)।
- विधि B (गरम करके): पोटैशियम परमैंगनेट गरम करें। 2KMnO₄ → K₂MnO₄ + MnO₂ + O₂।
उत्प्रेरक अभिक्रिया की गति बदलता है और अंत में वैसा ही बचता है। हम काले चूर्ण को छानकर, सुखाकर यह दिखा सकते हैं।
उपकरण जोड़ना
- साफ़ फ्लास्क (शंक्वाकार फ्लास्क या परखनली) लीजिए।
- विधि A में हाइड्रोजन परॉक्साइड फ्लास्क में डालिए। विधि B में KMnO₄ को कठोर काँच की परखनली में रखिए, उसे थोड़ा झुकाइए ताकि मुँह थोड़ा नीचे रहे, और मुँह के पास ढीला रुई का फाहा लगाइए।
- एक छेद वाले कॉर्क में मुड़ी निकास नली लगाइए। वायुरोधी जाँचिए: नली का सिरा पानी में रखिए, फ्लास्क को हाथों से गरम कीजिए और बुलबुले देखिए।
- गैस जार पानी से भरिए, काँच की प्लेट से ढकिए, द्रोणी में उल्टा रखिए और प्लेट पानी के अंदर ही हटा दीजिए।
- निकास नली का सिरा जार के मुँह के नीचे रखिए।
भाग जानिए: फ्लास्क, कॉर्क, निकास नली, द्रोणी, गैस जार, स्टैंड, बर्नर (विधि B)।
ऑक्सीजन एकत्र करना
ऑक्सीजन पानी में बहुत कम घुलती है, इसलिए इसे पानी के ऊपर एकत्र किया जा सकता है (पानी का अधोमुखी विस्थापन)। गैस जार से पानी को बाहर धकेल देती है।
- स्थिर बुलबुलों का इंतज़ार कीजिए। पहले बुलबुले फ्लास्क की हवा के होते हैं।
- जार गैस से भर जाए तो पानी के अंदर ही मुँह पर काँच की प्लेट सरकाइए, बाहर निकालिए और मुँह ऊपर करके रखिए।
- ऑक्सीजन हवा से थोड़ी भारी है, इसलिए हवा के ऊर्ध्व विस्थापन से भी इकट्ठी हो सकती है (जार का मुँह ऊपर)। गैस ज़्यादा सूखी मिलती है पर जार भरने का पता लगाना कठिन है।
दो-तीन जार भरिए। पहला जार फेंक दीजिए, क्योंकि उसमें हवा मिली है।
ऑक्सीजन की जाँच और सुरक्षा
परीक्षण
लकड़ी की तीली जलाइए, फूँककर बुझाइए ताकि वह सिर्फ़ लाल सुलगती रहे, और जार में डालिए। ऑक्सीजन में वह फिर जल उठती और तेज़ जलती है। दूसरी गैसों में ऐसा नहीं होता।
दिखाने लायक गुण
ऑक्सीजन रंगहीन, गंधहीन और स्वादहीन है। यह जलने में मदद करती है पर ख़ुद नहीं जलती। पानी में थोड़ी घुलती है, जिससे मछलियाँ जीवित रहती हैं।
सुरक्षा
- सुरक्षा चश्मा पहनिए। हाइड्रोजन परॉक्साइड त्वचा को रंगहीन कर सकता है; KMnO₄ दाग़ देता है।
- गरम करना बंद करने से पहले निकास नली पानी से बाहर निकालिए, वरना ठंडा पानी गरम नली में चढ़ जाएगा।
- परीक्षण के सिवा ऑक्सीजन के जार के पास कोई लौ न हो।
- सफ़ाई: काला चूर्ण और फ्लास्क धोइए, फिर हाथ धोइए।
करके देखें: लिखिए और समझाइए
कॉपी में नामांकित चित्र बनाइए, रसायन, समीकरण, हर चरण में जो देखा, परीक्षण का नतीजा और एक सुरक्षा नियम लिखिए। फिर दो पंक्तियों में समझाइए कि पहला जार क्यों फेंकते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 2H₂O₂ → 2H₂O + O₂ (उत्प्रेरक: MnO₂)
- 2KMnO₄ → K₂MnO₄ + MnO₂ + O₂ (गरम करने पर)
- परीक्षण: सुलगती तीली फिर जले = ऑक्सीजन
- कमरे के तापमान पर मोलर आयतन ≈ 24 L प्रति मोल गैस
- एकत्र करना: पानी के ऊपर या हवा के ऊर्ध्व विस्थापन से
हल किए गए उदाहरण
1. पहला जार भरने से पहले स्थिर बुलबुलों का इंतज़ार क्यों करते हैं?
पहले बुलबुले फ्लास्क और नली की हवा के होते हैं। इंतज़ार से जार में ज़्यादातर ऑक्सीजन आती है।
2. विधि B में परखनली के मुँह के पास रुई का फाहा क्यों लगाते हैं?
गर्मी बैंगनी चूर्ण को उछाल सकती है। रुई उसे निकास नली और पानी में जाने से रोकती है।
3. 17 g हाइड्रोजन परॉक्साइड (34 g प्रति मोल) पूरा टूटता है। कमरे के तापमान पर कितनी ऑक्सीजन बनेगी? 24 L प्रति मोल लीजिए।
17 ÷ 34 = 0.5 mol H₂O₂। 2 mol H₂O₂ से 1 mol O₂ बनता है, इसलिए 0.25 mol O₂। आयतन = 0.25 × 24 = 6 L।
आम गलतियाँ
- पहले बुलबुले इकट्ठे करना। वे हवा हैं, ऑक्सीजन नहीं।
- निकास नली पानी से निकालने से पहले बर्नर बंद करना।
- परीक्षण में जलती तीली इस्तेमाल करना। उसे सिर्फ़ सुलगना चाहिए।
- यह सोचना कि MnO₂ ख़त्म हो जाता है। यह उत्प्रेरक है और अपरिवर्तित बचता है।