क्या चाहिए (बनाने की विधि)
इकट्ठा करो: एक AA या D बैटरी, लगभग 1 मीटर पतला वार्निश वाला तांबे का तार, दो सेफ़्टी पिन या बड़ी पेपर क्लिप (स्टैंड के लिए), एक मज़बूत चुंबक (चपटा गोल या छल्ला), टेप और थोड़ा रेगमाल।
- तार को बैटरी पर 8 से 10 बार लपेटकर गोल कुंडली बनाओ। उतारकर दोनों सिरे लगभग 3 सेमी सीधे छोड़ दो, एक-एक तरफ़ एक सीध में। यही धुरी है।
- वार्निश हटाओ। एक सिरे पर पूरा वार्निश खुरचो। दूसरे सिरे पर केवल ऊपर का आधा खुरचो। यही दिक्परिवर्तक है।
- दोनों पिनों को बैटरी के सिरों पर टेप से खड़ा लगा दो। कुंडली के सिरे पिनों पर टिकाओ। चुंबक को कुंडली के नीचे बैटरी पर रखो।
- कुंडली को हल्का-सा धक्का दो। वह घूमनी चाहिए।
सावधानी: बैटरी को देर तक जुड़ा मत छोड़ो। तार और बैटरी गरम हो सकते हैं। चुंबक को फ़ोन और कार्ड से दूर रखो।
कुंडली पर धक्का क्यों लगता है
धारावाही तार अपना चुंबकीय क्षेत्र बनाता है। जब वह चुंबक के क्षेत्र में होता है, दोनों क्षेत्र एक-दूसरे को धकेलते हैं। तार पर बल लगता है। बल सबसे ज़्यादा तब होता है जब तार क्षेत्र के लंबवत हो।
कुंडली की एक भुजा में धारा एक ओर और दूसरी भुजा में उलटी ओर बहती है। इसलिए एक भुजा ऊपर और दूसरी नीचे धकेली जाती है। दोनों मिलकर कुंडली को घुमाते हैं। फ़्लेमिंग का बायाँ-हाथ नियम लगाओ: तर्जनी = क्षेत्र (N से S), मध्यमा = धारा, अँगूठा = बल।
एक तार पर बल F = B × I × L होता है।
दिक्परिवर्तक की चाल
जब कुंडली खड़ी हो जाती है, उसकी दोनों भुजाओं पर धक्का सीधा आमने-सामने पड़ता है। अब वह घुमाता नहीं और कुंडली रुक जाती है। अगर वह इस बिंदु से आगे निकल भी जाए, तो धक्का उसे वापस घुमा देता।
उपाय है कि कुंडली के खड़ी होते ही धारा उलट दी जाए। असली मोटर में स्प्लिट-रिंग दिक्परिवर्तक यह करता है: दो आधे छल्ले दो स्थिर कार्बन ब्रश को छूते हैं। तुम्हारी घरेलू मोटर में आधा खुरचा सिरा यही काम करता है। आधे चक्कर तक तार पिन को छूता है और धारा बहती है। बाक़ी आधे में नहीं छूता और कुंडली अपनी गति से आगे निकल जाती है। इसलिए धक्का हमेशा एक ही ओर रहता है।
तेज़ करो और गड़बड़ ठीक करो
तीन बातें बल और गति बढ़ाती हैं: ज़्यादा वोल्टेज (ज़्यादा धारा), कुंडली में ज़्यादा फेरे और मज़बूत चुंबक। बैटरी उलटो तो मोटर उलटी घूमेगी। चुंबक उलटो तब भी दिशा उलटती है।
- शुरू नहीं होती: देखो खुरचे सिरे पिन को छू रहे हैं, कुंडली संतुलित है, चुंबक पास है।
- काँपती है पर घूमती नहीं: कुंडली संतुलित नहीं या सिरे एक सीध में नहीं हैं।
- गरम हो जाती है: संपर्क शॉर्ट हो रहा है। बैटरी हटाकर ठीक करो।
असली मोटर में भी कुछ ऊर्जा ऊष्मा और आवाज़ में चली जाती है। ज़्यादातर विद्युत ऊर्जा घूमने की ऊर्जा बनती है।
करके देखो
पहले अंदाज़ा लगाओ, फिर जाँचो। हर जाँच से पहले बताओ क्या होगा। (1) दो बैटरी एक के बाद एक लगाओ: तेज़ या धीमी? (2) 10 की जगह 4 फेरे रखो। (3) चुंबक उलटा करो। (4) दोनों आधे सिरों से वार्निश खुरच दो: क्या फिर भी घूमेगी? अंदाज़ा लिखो, जाँचो और देखा हुआ लिखो। हर जाँच में 10 सेकंड में चक्कर गिनो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- F = B × I × L (चुंबकीय क्षेत्र में तार पर बल)
- मोटर में ऊर्जा: विद्युत ऊर्जा → गतिज ऊर्जा + थोड़ी ऊष्मा
- बायाँ-हाथ नियम: तर्जनी = क्षेत्र, मध्यमा = धारा, अँगूठा = बल
- गति बढ़ती है: वोल्टेज, फेरे और चुंबक की शक्ति बढ़ाने से
हल किए गए उदाहरण
1. 5 सेमी लंबे तार में 2 A धारा है और क्षेत्र 0.1 T है। बल ज्ञात करो।
L = 5 सेमी = 0.05 m। F = B × I × L = 0.1 × 2 × 0.05 = 0.01 N।
2. कुंडली में 10 फेरे हैं और हर फेरे की भुजा पर 0.01 N बल लगता है। कुंडली की उस भुजा पर कुल बल क्या होगा?
10 फेरे एक ही भुजा पर जुड़ते हैं: 10 × 0.01 = 0.1 N।
3. एक मोटर 3 V की बैटरी से 0.5 A धारा 10 s तक लेती है। कितनी विद्युत ऊर्जा लगी?
E = V × I × t = 3 × 0.5 × 10 = 15 J।
4. कुंडली 10 सेकंड में 25 चक्कर लगाती है। प्रति सेकंड कितने चक्कर?
25 ÷ 10 = 2.5 चक्कर प्रति सेकंड (150 चक्कर प्रति मिनट)।
5. दूसरी बैटरी जोड़ने से वोल्टेज 1.5 V से 3 V हो गया। कुंडली का प्रतिरोध 3 Ω है। धारा कैसे बदली?
I = V/R। पहले 1.5/3 = 0.5 A, फिर 3/3 = 1 A। धारा दोगुनी हुई, इसलिए बल दोगुना और मोटर तेज़ घूमी।
6. चुंबक दूर रखने पर मोटर शुरू क्यों नहीं होती?
बल F = B × I × L क्षेत्र B पर निर्भर है। चुंबक से दूर B बहुत छोटा होता है, इसलिए बल कुंडली को हिलाने के लिए कम पड़ता है।
आम गलतियाँ
- दूसरे सिरे के दोनों आधे हिस्सों से वार्निश खुरच देना। तब धारा कभी बंद नहीं होती और कुंडली खड़ी रुक जाती है।
- सिरों पर वार्निश छोड़ देना। वार्निश धारा रोक देता है, कुछ नहीं होता।
- असंतुलित कुंडली या मुड़ी धुरी लेना। वह डगमगाकर रुक जाती है। कुंडली गोल और सिरे एक सीध में रखो।
- यह सोचना कि चुंबक छूकर कुंडली को हिलाता है। बल चुंबक के क्षेत्र में धारा से लगता है, छुए बिना।