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सरल DC मोटर बनाओ

DC मोटर विद्युत ऊर्जा को घूमने की गति में बदलती है। चुंबकीय क्षेत्र में रखी धारावाही कुंडली की दो भुजाओं पर बल लगता है, एक ऊपर और एक नीचे, इसलिए वह घूमती है। दिक्परिवर्तक (स्प्लिट रिंग) हर आधे चक्कर पर धारा उलट देता है, इसलिए कुंडली एक ही दिशा में घूमती रहती है। वोल्टेज, फेरे या चुंबक बढ़ाने से गति बढ़ती है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. ये भाग हैं: दो चुंबक, तार की कुंडली और बैटरी। बैटरी अभी जुड़ी नहीं है।
  2. बैटरी जोड़ी। कुंडली में धारा बही। लाल तीर धक्का दिखाते हैं: एक भुजा ऊपर, दूसरी नीचे।
  3. कुंडली घूमी, फिर खड़ी होकर रुक गई। वहाँ दोनों धक्के कट जाते हैं। सादी कुंडली आगे नहीं चल सकती।
  4. आधा-छल्ला जोड़ा। वह हर आधे चक्कर पर धारा उलट देता है। अब धक्का हमेशा एक ही दिशा में घुमाता है।
  5. वोल्टेज दोगुना किया। धारा बढ़ी, धक्का बढ़ा, कुंडली तेज़ घूमी।
  6. अब खेलो: वोल्टेज, फेरे और चुंबक बदलो। बैटरी उलटो तो मोटर उलटी घूमेगी।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

बैटरी जोड़ते ही कुंडली क्यों हिलती है?

तार की धारा चुंबक के क्षेत्र में है। क्षेत्र में धारा पर धक्का लगता है, एक भुजा पर ऊपर और दूसरी पर नीचे।

दिक्परिवर्तक के बिना वह खड़ी होकर क्यों रुकती है?

उस स्थिति में दोनों धक्के सीधे आमने-सामने होते हैं और घुमाव नहीं बनता। फिर वे उसे वापस घुमा देते।

स्प्लिट रिंग असल में क्या करती है?

वह हर आधे चक्कर पर धारा उलटती है, इसलिए धक्का हमेशा कुंडली को एक ही दिशा में घुमाता है।

मोटर को तेज़ कैसे करें?

ज़्यादा वोल्टेज यानी ज़्यादा धारा और बड़ा धक्का। ज़्यादा फेरे या मज़बूत चुंबक भी मदद करते हैं।

उलटी दिशा में कैसे घुमाएँ?

बैटरी उलटो। धारा उलटती है, इसलिए धक्का उलटता है।

क्या चाहिए (बनाने की विधि)

इकट्ठा करो: एक AA या D बैटरी, लगभग 1 मीटर पतला वार्निश वाला तांबे का तार, दो सेफ़्टी पिन या बड़ी पेपर क्लिप (स्टैंड के लिए), एक मज़बूत चुंबक (चपटा गोल या छल्ला), टेप और थोड़ा रेगमाल।

  1. तार को बैटरी पर 8 से 10 बार लपेटकर गोल कुंडली बनाओ। उतारकर दोनों सिरे लगभग 3 सेमी सीधे छोड़ दो, एक-एक तरफ़ एक सीध में। यही धुरी है।
  2. वार्निश हटाओ। एक सिरे पर पूरा वार्निश खुरचो। दूसरे सिरे पर केवल ऊपर का आधा खुरचो। यही दिक्परिवर्तक है।
  3. दोनों पिनों को बैटरी के सिरों पर टेप से खड़ा लगा दो। कुंडली के सिरे पिनों पर टिकाओ। चुंबक को कुंडली के नीचे बैटरी पर रखो।
  4. कुंडली को हल्का-सा धक्का दो। वह घूमनी चाहिए।

सावधानी: बैटरी को देर तक जुड़ा मत छोड़ो। तार और बैटरी गरम हो सकते हैं। चुंबक को फ़ोन और कार्ड से दूर रखो।

कुंडली पर धक्का क्यों लगता है

धारावाही तार अपना चुंबकीय क्षेत्र बनाता है। जब वह चुंबक के क्षेत्र में होता है, दोनों क्षेत्र एक-दूसरे को धकेलते हैं। तार पर बल लगता है। बल सबसे ज़्यादा तब होता है जब तार क्षेत्र के लंबवत हो।

कुंडली की एक भुजा में धारा एक ओर और दूसरी भुजा में उलटी ओर बहती है। इसलिए एक भुजा ऊपर और दूसरी नीचे धकेली जाती है। दोनों मिलकर कुंडली को घुमाते हैं। फ़्लेमिंग का बायाँ-हाथ नियम लगाओ: तर्जनी = क्षेत्र (N से S), मध्यमा = धारा, अँगूठा = बल।

एक तार पर बल F = B × I × L होता है।

दिक्परिवर्तक की चाल

जब कुंडली खड़ी हो जाती है, उसकी दोनों भुजाओं पर धक्का सीधा आमने-सामने पड़ता है। अब वह घुमाता नहीं और कुंडली रुक जाती है। अगर वह इस बिंदु से आगे निकल भी जाए, तो धक्का उसे वापस घुमा देता।

उपाय है कि कुंडली के खड़ी होते ही धारा उलट दी जाए। असली मोटर में स्प्लिट-रिंग दिक्परिवर्तक यह करता है: दो आधे छल्ले दो स्थिर कार्बन ब्रश को छूते हैं। तुम्हारी घरेलू मोटर में आधा खुरचा सिरा यही काम करता है। आधे चक्कर तक तार पिन को छूता है और धारा बहती है। बाक़ी आधे में नहीं छूता और कुंडली अपनी गति से आगे निकल जाती है। इसलिए धक्का हमेशा एक ही ओर रहता है।

तेज़ करो और गड़बड़ ठीक करो

तीन बातें बल और गति बढ़ाती हैं: ज़्यादा वोल्टेज (ज़्यादा धारा), कुंडली में ज़्यादा फेरे और मज़बूत चुंबक। बैटरी उलटो तो मोटर उलटी घूमेगी। चुंबक उलटो तब भी दिशा उलटती है।

असली मोटर में भी कुछ ऊर्जा ऊष्मा और आवाज़ में चली जाती है। ज़्यादातर विद्युत ऊर्जा घूमने की ऊर्जा बनती है।

करके देखो

पहले अंदाज़ा लगाओ, फिर जाँचो। हर जाँच से पहले बताओ क्या होगा। (1) दो बैटरी एक के बाद एक लगाओ: तेज़ या धीमी? (2) 10 की जगह 4 फेरे रखो। (3) चुंबक उलटा करो। (4) दोनों आधे सिरों से वार्निश खुरच दो: क्या फिर भी घूमेगी? अंदाज़ा लिखो, जाँचो और देखा हुआ लिखो। हर जाँच में 10 सेकंड में चक्कर गिनो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. 5 सेमी लंबे तार में 2 A धारा है और क्षेत्र 0.1 T है। बल ज्ञात करो।

L = 5 सेमी = 0.05 m। F = B × I × L = 0.1 × 2 × 0.05 = 0.01 N।

2. कुंडली में 10 फेरे हैं और हर फेरे की भुजा पर 0.01 N बल लगता है। कुंडली की उस भुजा पर कुल बल क्या होगा?

10 फेरे एक ही भुजा पर जुड़ते हैं: 10 × 0.01 = 0.1 N।

3. एक मोटर 3 V की बैटरी से 0.5 A धारा 10 s तक लेती है। कितनी विद्युत ऊर्जा लगी?

E = V × I × t = 3 × 0.5 × 10 = 15 J।

4. कुंडली 10 सेकंड में 25 चक्कर लगाती है। प्रति सेकंड कितने चक्कर?

25 ÷ 10 = 2.5 चक्कर प्रति सेकंड (150 चक्कर प्रति मिनट)।

5. दूसरी बैटरी जोड़ने से वोल्टेज 1.5 V से 3 V हो गया। कुंडली का प्रतिरोध 3 Ω है। धारा कैसे बदली?

I = V/R। पहले 1.5/3 = 0.5 A, फिर 3/3 = 1 A। धारा दोगुनी हुई, इसलिए बल दोगुना और मोटर तेज़ घूमी।

6. चुंबक दूर रखने पर मोटर शुरू क्यों नहीं होती?

बल F = B × I × L क्षेत्र B पर निर्भर है। चुंबक से दूर B बहुत छोटा होता है, इसलिए बल कुंडली को हिलाने के लिए कम पड़ता है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. DC मोटर की कुंडली को क्या घुमाता है?
2. दिक्परिवर्तक का काम है:
3. कौन-सा बदलाव मोटर को तेज़ नहीं करता?
4. 0.05 m तार में 2 A, क्षेत्र 0.1 T। बल है:
5. बैटरी उलटने पर मोटर:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरल DC मोटर कैसे काम करती है?

चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही कुंडली रखी होती है। क्षेत्र एक भुजा को ऊपर और दूसरी को नीचे धकेलता है, इसलिए कुंडली घूमती है। दिक्परिवर्तक हर आधे चक्कर पर धारा उलटता है, इसलिए वह घूमती रहती है।

मेरी घरेलू मोटर क्यों नहीं घूमती?

आम कारण: वार्निश नहीं खुरचा, गलत तरफ़ खुरचा, कुंडली असंतुलित, चुंबक दूर या बैटरी कमज़ोर। एक-एक करके जाँचो।

मोटर में कौन-सा ऊर्जा रूपांतरण होता है?

विद्युत ऊर्जा गतिज (गति की) ऊर्जा बनती है, थोड़ा हिस्सा ऊष्मा और आवाज़ में चला जाता है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

चीन九年级(初三)Ch.20 Electricity and magnetism

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