South 고등학교 1학년 Integrated Science 2
अध्याय: 3
1. Change and diversity
Earth's changing environment through time · Variation and natural selection · Redox reactions in nature and history · Acids, bases and neutralisation · Energy absorbed and released
- विकास: नए प्रकार के जीव कैसे बनते हैं – जनन के समय विविधताएँ आती हैं। प्रकृति उन विविधताओं को चुनती है जो जीवित रहने में मदद करें, और कई पीढ़ियों में आबादी बदल जाती है: यही विकास है। सिर्फ़ वंशागत (DNA वाले) बदलाव आगे जाते हैं, उपार्जित नहीं। अलग हुई आबादियाँ नई जातियाँ बन सकती हैं। समजात अंग, समरूप अंग और जीवाश्म बताते हैं कि कौन किससे संबंधित है, और जटिल अंग चरण-दर-चरण बने।
- उपचयन और अपचयन: संक्षारण और विकृतगंधिता – ऑक्सीजन पाना (या हाइड्रोजन खोना) उपचयन है; ऑक्सीजन खोना (या हाइड्रोजन पाना) अपचयन है। दोनों साथ-साथ होते हैं, इसलिए इन्हें रेडॉक्स अभिक्रिया कहते हैं। ऑक्सीजन देने वाला उपचायक, लेने वाला अपचायक। रोज़मर्रा में उपचयन से संक्षारण (जैसे लोहे पर जंग) और विकृतगंधिता (तेल-घी वाले खाने का बासी होना) होते हैं।
- अम्ल और क्षारक: गुण, सूचक और अभिक्रियाएँ – अम्ल पानी में H⁺ आयन देता है और क्षारक OH⁻ आयन। सूचक रंग या गंध बदलकर बताता है कि कौन मौजूद है। H⁺ और OH⁻ मिलकर पानी बनाते हैं और पीछे लवण बच जाता है।
- रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार – ज़्यादातर अभिक्रियाएँ कुछ ढाँचों में आती हैं। संयोजन: A + B → AB। वियोजन: AB → A + B। विस्थापन: A + BC → AC + B, जहाँ ज़्यादा क्रियाशील A, B को बाहर कर देता है। द्विविस्थापन: AB + CD → AD + CB, साथी बदल जाते हैं; अघुलनशील ठोस बने तो अवक्षेपण अभिक्रिया। ऊष्मा दे तो ऊष्माक्षेपी, ऊष्मा ले तो ऊष्माशोषी।
2. Environment and energy
Ecosystem components and interactions · Food webs and ecological balance · Greenhouse effect and global warming · Solar energy from fusion · Generators and electrical energy · Energy efficiency and sustainability
- पारितंत्र, आहार श्रृंखला और ऊर्जा प्रवाह – किसी जगह के सभी जीव और उनके आस-पास की निर्जीव चीज़ें मिलकर पारितंत्र बनाते हैं। ऊर्जा सूर्य से आती है, आहार श्रृंखला में एक ही दिशा में ऊपर जाती है, और हर अगले स्तर तक सिर्फ़ लगभग 10% पहुँचती है।
- जलवायु परिवर्तन और हरितगृह प्रभाव – जलवायु किसी जगह का लगभग 30 साल का औसत मौसम है। कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी हरितगृह गैसें पृथ्वी से निकलने वाली कुछ ऊष्मा रोक लेती हैं। मनुष्यों ने ईंधन जलाकर और जंगल काटकर ये गैसें बहुत बढ़ा दी हैं, इसलिए पृथ्वी गर्म हो रही है। इससे बर्फ़ पिघलती है, समुद्र तल बढ़ता है और मौसम उग्र होता है। हम गैसें घटा सकते हैं (शमन) और बदलाव के लिए तैयार हो सकते हैं (अनुकूलन)।
- नाभिकीय संलयन – नाभिकीय संलयन में हल्के नाभिक जुड़कर भारी नाभिक बनाते हैं और ऊर्जा निकलती है। सूर्य के क्रोड में लगभग 1.5 करोड़ °C पर चार हाइड्रोजन नाभिक चरणों में (प्रोटॉन-प्रोटॉन श्रृंखला) जुड़कर एक हीलियम नाभिक बनाते हैं। हीलियम का द्रव्यमान चार हाइड्रोजन से लगभग 0.7% कम होता है; वह खोया द्रव्यमान E = mc² से ऊर्जा बन जाता है। गुरुत्व का अंदर दबाना और संलयन की गर्मी का बाहर धकेलना तारे को अरबों साल स्थिर रखता है।
- धारावाही चालक पर बल, विद्युत मोटर और प्रेरण – चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही तार पर एक धक्का यानी बल लगता है। तार क्षेत्र से 90° पर हो तो बल सबसे ज़्यादा, और क्षेत्र के समांतर हो तो शून्य। बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से मिलती है। मोटर इसी बल से कुंडली घुमाती है; जनित्र उल्टा काम करके गति से धारा बनाता है।
- ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) – हर मशीन ऊर्जा को एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है। इसका कुछ हिस्सा वह बनता है जो हमें चाहिए (उपयोगी ऊर्जा)। बाकी ज़्यादातर ऊष्मा बनकर बिखर जाता है (व्यर्थ ऊर्जा)। दक्षता = उपयोगी ऊर्जा ÷ कुल दी गई ऊर्जा × 100 %। कोई असली मशीन 100 % तक नहीं पहुँचती। दक्ष यंत्र और कम बर्बादी से पैसा और प्रदूषण दोनों बचते हैं।
3. Science and the future
Science against infectious disease · Big data in science and society · AI robots and IoT · Ethics in science and technology
- जन स्वास्थ्य – जन स्वास्थ्य पूरे समुदाय को स्वस्थ रखने का काम है: रोग रोकना, स्वस्थ जीवन को बढ़ावा देना और सबको इलाज पहुँचाना। संक्रामक रोग हवा, पानी, भोजन, स्पर्श और कीड़ों से फैलते हैं; स्वच्छता, साफ़ पानी, शौचालय और टीकाकरण यह कड़ी तोड़ते हैं। जब काफ़ी लोग प्रतिरक्षित हों, सामूहिक प्रतिरक्षा बाकी लोगों को बचाती है। स्वास्थ्य तंत्र स्तरों (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक) में काम करता है और निगरानी के आँकड़ों से महामारी को जल्दी पहचानता है।
- बिग डेटा (Big Data) – बिग डेटा वह डेटा है जो एक साधारण कंप्यूटर और साधारण सॉफ़्टवेयर के लिए बहुत बड़ा, बहुत तेज़ या बहुत मिला-जुला हो। इसे तीन V से समझते हैं: मात्रा (Volume), वेग (Velocity) और विविधता (Variety)। इसे संभालने के लिए काम कई मशीनों में एक साथ बाँटा जाता है (वितरित प्रोसेसिंग, जैसे MapReduce)। बिग डेटा को अक्सर तथ्यों (facts) या ग्राफ (नोड और लिंक) के रूप में रखा जाता है। मौसम, नक्शे, स्वास्थ्य, खरीदारी और AI में इसका उपयोग होता है, पर निजता और निष्पक्षता के सवाल भी उठते हैं।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): मशीनें सोचना कैसे सीखती हैं – कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence, AI) कंप्यूटर प्रणाली की वह क्षमता है जिससे वह ऐसे काम करती है जिनमें आम तौर पर इंसानी दिमाग़ लगता है: देखना, बोली समझना, फ़ैसला करना और सीखना। AI प्रणाली एक एजेंट है जो महसूस करती है, सोचती है और काम करती है। पुरानी AI इंसानों के लिखे नियमों पर चलती थी। आज की AI ज़्यादातर मशीन लर्निंग से चलती है: वह ढेर सारे लेबल वाले उदाहरणों (डेटा) से ख़ुद नियम ढूँढती है। न्यूरल नेटवर्क सरल इकाइयों की परतें हैं जिनकी कड़ियों की ताकत (भार) प्रशिक्षण में बदलती है। AI नक्शों, अनुवाद, स्वास्थ्य, खेती और खेलों में काम आती है। एकतरफ़ा डेटा से यह ग़लत या पक्षपाती हो सकती है, इसलिए इंसान को इसे जाँचना, निजता बचाना और ज़िम्मेदार रहना चाहिए।
- विज्ञान और तकनीक में नैतिकता – विज्ञान और तकनीक बड़ी ताक़त देते हैं, इसलिए हम सिर्फ़ "क्या हम कर सकते हैं?" नहीं, "क्या हमें करना चाहिए?" भी पूछते हैं। विज्ञान की नैतिकता का मतलब है फ़ायदे और ख़तरे को तौलना, लोगों, जानवरों और प्रकृति को सुरक्षित रखना, आँकड़ों में ईमानदार रहना, नतीजों के उपयोग की ज़िम्मेदारी लेना, और विज्ञान के बड़े फ़ैसलों में नागरिकों को हिस्सेदार बनाना।