एल्युमिनियम परमाणु और यह कहाँ मिलता है
एल्युमिनियम आवर्त सारणी के समूह 13 में है। इसके परमाणु में 3 बाहरी इलेक्ट्रॉन होते हैं। यह तीनों खोकर आयन Al³⁺ बनाता है, इसलिए इसके यौगिक AlCl₃, Al₂O₃ जैसे होते हैं।
पृथ्वी की पपड़ी में यह सबसे ज़्यादा मिलने वाली धातु है, पर शुद्ध रूप में नहीं मिलती। यह बॉक्साइट (मुख्यतः Al₂O₃) जैसे अयस्क में मिलती है और विद्युत अपघटन से निकाली जाती है। धातु चाँदी जैसी, हल्की (घनत्व लगभग 2.7 g/cm³), मुलायम और ऊष्मा व बिजली की अच्छी सुचालक है।
एल्युमिनियम में ज़ंग क्यों नहीं लगती: ऑक्साइड परत
एल्युमिनियम अभिक्रियाशील धातु है, फिर भी चमकीला बर्तन सालों चलता है। कारण है परत। हवा की ऑक्सीजन सतह से अभिक्रिया करती है: 4Al + 3O₂ → 2Al₂O₃। परत सिर्फ़ कुछ नैनोमीटर मोटी होती है, पर कड़ी होती है, कसकर चिपकी रहती है और हवा-पानी को अंदर नहीं जाने देती। इसलिए अभिक्रिया आगे नहीं बढ़ती। खुरचने पर नई परत तुरंत बन जाती है। (एनोडीकरण में यह परत जानबूझकर मोटी की जाती है।)
एल्युमिनियम ऑक्साइड उभयधर्मी है
उभयधर्मी ऑक्साइड अम्ल के साथ क्षारक जैसा और प्रबल क्षार के साथ अम्ल जैसा व्यवहार करता है। Al₂O₃ दोनों करता है:
अम्ल के साथ: Al₂O₃ + 6HCl → 2AlCl₃ + 3H₂O (लवण और पानी)।
क्षार के साथ: Al₂O₃ + 2NaOH + 3H₂O → 2Na[Al(OH)₄] (सोडियम एल्युमिनेट; कुछ किताबों में NaAlO₂ + H₂O लिखते हैं)।
अन्य उभयधर्मी ऑक्साइड: ZnO, PbO, SnO। उभयधर्मी नहीं: Na₂O (सिर्फ़ क्षारीय) और CO₂ (सिर्फ़ अम्लीय)।
एल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड भी उभयधर्मी है
एल्युमिनियम लवण के घोल में थोड़ा सोडियम हाइड्रॉक्साइड डालो। सफ़ेद, लिसलिसा ठोस बनता है: Al³⁺ + 3OH⁻ → Al(OH)₃। यह पानी में नहीं घुलता। यह दोनों तरफ़ अभिक्रिया करता है:
अम्ल के साथ: Al(OH)₃ + 3HCl → AlCl₃ + 3H₂O।
ज़्यादा क्षार के साथ: Al(OH)₃ + NaOH → Na[Al(OH)₄], इसलिए और NaOH डालने पर सफ़ेद ठोस घुल जाता है।
अमोनिया घोल से जाँचो: यह दुर्बल क्षार है। सफ़ेद ठोस बनता है पर ज़्यादा अमोनिया में नहीं घुलता। इस फ़र्क से Al³⁺ और Zn²⁺ पहचाने जाते हैं (ज़िंक हाइड्रॉक्साइड दोनों में घुलता है)।
धातु की अम्ल, क्षार और पानी से अभिक्रिया
तनु अम्ल: 2Al + 6HCl → 2AlCl₃ + 3H₂। गर्म प्रबल क्षार: 2Al + 2NaOH + 6H₂O → 2Na[Al(OH)₄] + 3H₂। दोनों में हाइड्रोजन गैस बनती है।
पानी: कुछ दिखाई नहीं देता, क्योंकि ऑक्साइड परत है। सांद्र नाइट्रिक अम्ल परत को और मोटा कर देता है (निष्क्रियता), इसलिए इसे एल्युमिनियम टंकी में ले जा सकते हैं। चूर्ण रूप में यह ऑक्सीजन में तेज़ चमक के साथ जलता है और थर्माइट अभिक्रिया में आयरन ऑक्साइड से ऑक्सीजन छीन लेता है: 2Al + Fe₂O₃ → Al₂O₃ + 2Fe (रेल पटरी जोड़ने में काम आता है)।
एल्युमिनियम और उसके यौगिकों के उपयोग
हवाई जहाज़ और साइकिल के लिए हल्की मज़बूत मिश्रधातु (ड्यूरेलुमिन); बिजली के तार (हल्के और अच्छे सुचालक); पन्नी और ड्रिंक कैन; बर्तन; खिड़की के फ़्रेम। Al₂O₃ से रत्न (माणिक, नीलम) बनते हैं, इसे घर्षक और भट्टी की परत में भी लगाते हैं। फिटकरी (द्विगुण सल्फ़ेट) गंदे पानी को साफ़ करती है। Al(OH)₃ कुछ अम्लनाशकों और जल शुद्धिकरण में काम आता है।
खुद करो: खुरचो और डुबाओ
3D में कोई द्रव चुनो और परत खुरचने के लिए डिब्बे पर टिक करो। पहले अनुमान लगाओ: क्या बुलबुले जल्दी शुरू होंगे? फिर जाँचो। घर पर: एल्युमिनियम पन्नी का छोटा टुकड़ा एक गिलास सादे पानी में और दूसरा थोड़े नींबू के रस (अम्ल) में डालो। एक घंटे बाद देखो। सिर्फ़ अम्ल में छोटे बुलबुले दिखने चाहिए। घर पर ड्रेन क्लीनर या तेज़ क्षार इस्तेमाल मत करो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 4Al + 3O₂ → 2Al₂O₃ (सुरक्षा परत)
- Al₂O₃ + 6HCl → 2AlCl₃ + 3H₂O
- Al₂O₃ + 2NaOH + 3H₂O → 2Na[Al(OH)₄]
- Al(OH)₃ + 3HCl → AlCl₃ + 3H₂O; Al(OH)₃ + NaOH → Na[Al(OH)₄]
- 2Al + 6HCl → 2AlCl₃ + 3H₂ (2 मोल Al से 3 मोल H₂)
- मोलर द्रव्यमान: Al = 27 g/mol, Al₂O₃ = 102 g/mol; STP पर 1 मोल गैस = 22.4 L
हल किए गए उदाहरण
1. एल्युमिनियम ऑक्साइड की तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया का समीकरण लिखो।
यहाँ Al₂O₃ क्षारक जैसा व्यवहार करता है और लवण व पानी देता है: Al₂O₃ + 6HCl → 2AlCl₃ + 3H₂O। जाँच: दोनों तरफ़ 2 Al, 3 O, 6 H और 6 Cl हैं।
2. एल्युमिनियम क्लोराइड के घोल में NaOH धीरे-धीरे डालने पर सफ़ेद लिसलिसा ठोस बनता है, और डालने पर गायब हो जाता है। समझाओ।
पहले: AlCl₃ + 3NaOH → Al(OH)₃ + 3NaCl, यही सफ़ेद ठोस है। Al(OH)₃ उभयधर्मी है, इसलिए ज़्यादा क्षार से अभिक्रिया करता है: Al(OH)₃ + NaOH → Na[Al(OH)₄], जो घुल जाता है। इसीलिए ठोस गायब हो जाता है।
3. एल्युमिनियम की पन्नी दिनों तक पानी में पड़ी रहे तो हाइड्रोजन क्यों नहीं बनती?
पतली Al₂O₃ परत पानी को धातु तक पहुँचने नहीं देती। संपर्क के बिना अभिक्रिया नहीं होती। सादा पानी परत को नुकसान नहीं पहुँचाता, इसलिए हाइड्रोजन नहीं बनती।
4. तनु अम्ल से STP पर 6.72 L H₂ बनाने के लिए कितने ग्राम Al चाहिए?
6.72 L ÷ 22.4 = 0.3 मोल H₂। 2Al : 3H₂ से Al के मोल = 0.3 × 2/3 = 0.2 मोल। द्रव्यमान = 0.2 × 27 = 5.4 g।
5. 10.2 g Al₂O₃ से कितने ग्राम HCl अभिक्रिया करता है?
Al₂O₃ के मोल = 10.2 ÷ 102 = 0.1 मोल। 1 मोल Al₂O₃ को 6 मोल HCl चाहिए, यानी 0.6 मोल HCl। द्रव्यमान = 0.6 × 36.5 = 21.9 g।
6. एक छात्र कहता है: "ZnO और Al₂O₃ दोनों NaOH और HCl में घुलते हैं, इसलिए सिर्फ़ NaOH से Zn²⁺ और Al³⁺ अलग नहीं पहचाने जा सकते।" अमोनिया से यह कैसे हल होगा?
दोनों में ज़्यादा अमोनिया घोल डालो। Zn(OH)₂ ज़्यादा अमोनिया में घुल जाता है (संकुल आयन बनता है), पर Al(OH)₃ नहीं घुलता। जो ठोस बचे वह एल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड है।
आम गलतियाँ
- एल्युमिनियम को अक्रिय मान लेना। यह अभिक्रियाशील है; ऑक्साइड परत इसे छिपा देती है।
- उभयधर्मी का मतलब "उदासीन" समझना। इसका मतलब है अम्ल और क्षार दोनों से अभिक्रिया करना।
- H₂ का संतुलन भूलना: 2 Al से 3 H₂ बनता है, 1 नहीं।
- यह लिखना कि Al(OH)₃ ज़्यादा अमोनिया में घुलता है। यह नहीं घुलता; सिर्फ़ NaOH जैसे प्रबल क्षार में घुलता है।