ठोस, ठोस क्यों है?
पदार्थ ठोस, द्रव या गैस हो सकता है। इन्हें पदार्थ की अवस्थाएँ कहते हैं। ठोस में कण (परमाणु, आयन या अणु) कसकर भरे होते हैं। प्रबल बल इन्हें पकड़े रहते हैं। ये बस अपनी जगह पर काँपते (कंपन) हैं। इसलिए ठोस का आकार और आयतन निश्चित होता है और उसे दबाना कठिन है।
क्रिस्टलीय और अक्रिस्टलीय ठोस
क्रिस्टलीय ठोस: कण लंबी दूरी तक एक ही पैटर्न में दोहराते हैं (दीर्घ परास व्यवस्था)। एक निश्चित ताप पर तेज़ी से पिघलता है। सपाट सतहों पर टूटता है। दिशा बदलने पर गुण बदल सकते हैं (विषमदैशिक)। उदाहरण: नमक, क्वार्ट्ज़, बर्फ़, धातुएँ।
अक्रिस्टलीय ठोस: कणों में सिर्फ़ थोड़ी दूरी तक व्यवस्था (लघु परास)। ताप की एक सीमा में धीरे-धीरे नरम होता है। टेढ़े-मेढ़े किनारों से टूटता है। हर दिशा में समान (समदैशिक)। उदाहरण: काँच, रबर, प्लास्टिक। इन्हें कभी-कभी अतिशीतित द्रव भी कहते हैं।
चार तरह के क्रिस्टल
| प्रकार | कण | बल | गुण | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| आयनिक | + और − आयन | आयनिक आकर्षण | कठोर, भंगुर, उच्च गलनांक; सिर्फ़ पिघलने या घुलने पर चालक | NaCl, MgO |
| सहसंयोजक जालक | परमाणु | हर ओर सहसंयोजक बंध | बहुत कठोर, बहुत ऊँचा गलनांक, प्रायः कुचालक (ग्रेफ़ाइट चालक) | हीरा, SiO₂, SiC |
| आण्विक | अणु | अणुओं के बीच दुर्बल बल (परिक्षेपण, द्विध्रुव, हाइड्रोजन बंध) | नरम, कम गलनांक, कुचालक | बर्फ़, शुष्क बर्फ़, आयोडीन, चीनी |
| धात्विक | इलेक्ट्रॉनों के समुद्र में धातु आयन | धात्विक बंध | चमकीले, मुड़ते हैं, ऊष्मा और बिजली के चालक | Cu, Fe, Na |
NaCl जैसे आयनिक क्रिस्टल में हर Na⁺ के चारों ओर 6 Cl⁻ और हर Cl⁻ के चारों ओर 6 Na⁺ होते हैं। अलग-अलग अणु नहीं होते; सूत्र बस 1 : 1 अनुपात बताता है।
एकक कोष्ठिका और कणों की गिनती
क्रिस्टल जालक उन बिंदुओं का 3D पैटर्न है जहाँ कण बैठते हैं। एकक कोष्ठिका वह सबसे छोटा डिब्बा है जिसे दोहराने पर पूरा जालक बनता है। घनाकार कोष्ठिका की कोर लंबाई a है।
- कोने का कण: 8 कोष्ठिकाओं में बँटा → ⅛।
- फलक का कण: 2 में बँटा → ½।
- किनारे का कण: 4 में बँटा → ¼।
- बीच (काय-केंद्र) का कण: 1।
| कोष्ठिका | कण प्रति कोष्ठिका (Z) | उपसहसंयोजन संख्या | भरा स्थान |
|---|---|---|---|
| सरल घन | 1 | 6 | 52% |
| अंतःकेंद्रित घन | 2 | 8 | 68% |
| फलक-केंद्रित घन (घनीय निविड संकुलन) | 4 | 12 | 74% |
घनत्व: ρ = Z × M ÷ (a³ × Nₐ), M मोलर द्रव्यमान, Nₐ = 6.022 × 10²³ mol⁻¹।
असली क्रिस्टलों में छोटे दोष (अपूर्णताएँ) होते हैं, जैसे कोई कण गायब (रिक्तिका)। ये रंग, मज़बूती और चालकता बदलते हैं।
द्रव क्रिस्टल
लंबे, छड़ जैसे अणुओं वाले कुछ पदार्थ ठोस और द्रव के बीच की अवस्था में रहते हैं। वे द्रव की तरह बहते हैं, पर अणु क्रिस्टल की तरह एक दिशा में रहते हैं। इसे द्रव क्रिस्टल कहते हैं। थोड़ा वोल्टेज अणुओं को घुमा देता है, जिससे प्रकाश का गुज़रना बदलता है। घड़ी, कैलकुलेटर और मॉनिटर की LCD स्क्रीन ऐसे ही काम करती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कोना = ⅛, किनारा = ¼, फलक = ½, काय-केंद्र = 1
- Z: SC = 1, BCC = 2, FCC = 4
- उपसहसंयोजन संख्या: SC 6, BCC 8, FCC 12
- संकुलन: SC 52%, BCC 68%, FCC 74%
- घनत्व ρ = Z·M / (a³·Nₐ)
- त्रिज्या: SC a = 2r, BCC √3a = 4r, FCC √2a = 4r
हल किए गए उदाहरण
1. घनीय कोष्ठिका में 8 कोनों और हर फलक के केंद्र पर कण हैं। एक कोष्ठिका में कितने कण?
कोने: 8 × ⅛ = 1; फलक: 6 × ½ = 3। Z = 4 (FCC)।
2. एक यौगिक में A कोनों पर और B फलक-केंद्रों पर हैं। सूत्र?
A = 1, B = 3। अनुपात 1 : 3, सूत्र AB₃।
3. छाँटिए: हीरा, बर्फ़, ताँबा, KCl।
हीरा: सहसंयोजक जालक। बर्फ़: आण्विक (हाइड्रोजन बंध)। ताँबा: धात्विक। KCl: आयनिक।
4. ताँबा FCC है, a = 361 pm। परमाणु त्रिज्या?
FCC में √2 a = 4r, r = 1.414 × 361 / 4 ≈ 128 pm।
5. ताँबा (M = 63.5 g/mol) FCC, a = 3.61 × 10⁻⁸ cm। घनत्व?
a³ = 4.70 × 10⁻²³ cm³। ρ = 254 / (4.70 × 10⁻²³ × 6.022 × 10²³) ≈ 8.97 g/cm³।
6. काँच एक सीमा में नरम होता है पर नमक 801 °C पर तुरंत पिघलता है। क्यों?
नमक में हर बंध एक जैसा है, सब एक ताप पर टूटते हैं। काँच में बेतरतीब व्यवस्था के कारण बंधों की ताकत अलग-अलग है, वे एक-एक करके टूटते हैं।
आम गलतियाँ
- कोने के हर कण को पूरा गिन लेना। एक कोष्ठिका को कोने से सिर्फ़ ⅛ मिलता है।
- यह कहना कि NaCl अणुओं से बना है। यह आयनों का विशाल जालक है; NaCl सिर्फ़ अनुपात है।
- अक्रिस्टलीय का अर्थ "ठोस नहीं" समझना। काँच असली ठोस है, बस उसमें दीर्घ परास व्यवस्था नहीं।
- घनत्व सूत्र में a को pm में ही रख देना। 1 pm = 10⁻¹⁰ cm।