France Première Scientific Education
अध्याय: 5
1. A long history of matter
Chemical elements and radioactivity · Ordered structures: crystals · A complex structure: the living cell
- रेडियोधर्मिता: अल्फ़ा, बीटा, गामा और अर्ध-आयु – कुछ परमाणुओं के नाभिक अस्थायी होते हैं। वे स्थायी बनने के लिए अपने आप, यादृच्छिक ढंग से विकिरण छोड़ते हैं। इसे रेडियोधर्मी क्षय कहते हैं। अल्फ़ा (2 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉन), बीटा (तेज़ इलेक्ट्रॉन) और गामा (ऊर्जा की तरंग) मुख्य तीन प्रकार हैं। अर्ध-आयु वह समय है जिसमें आधे अस्थायी नाभिक क्षय हो जाते हैं।
- ठोस अवस्था (Solid State) – ठोस में कण पास-पास होते हैं और अपनी जगह पर सिर्फ़ कंपन करते हैं, इसलिए ठोस का आकार तय रहता है। क्रिस्टलीय ठोस में कण एक नियमित पैटर्न में दोहराते हैं; अक्रिस्टलीय ठोस (जैसे काँच) में नहीं। सबसे छोटा दोहराने वाला डिब्बा एकक कोष्ठिका है। सरल घन में 1, अंतःकेंद्रित घन में 2 और फलक-केंद्रित घन में 4 कण होते हैं। बंधन के आधार पर क्रिस्टल आयनिक, सहसंयोजक जालक, आण्विक या धात्विक होते हैं।
- कोशिका: जीवन की मूल इकाई – हर सजीव कोशिकाओं से बना है। 1665 में रॉबर्ट हुक ने कॉर्क में सबसे पहले कोशिकाएँ देखीं। कोशिकाएँ प्रोकैरियोटी (असली केंद्रक नहीं, जैसे जीवाणु) या यूकैरियोटी (असली केंद्रक) होती हैं। पादप कोशिका में कोशिका भित्ति, हरितलवक और बड़ी रिक्तिका होती है, जंतु कोशिका में नहीं। हर कोशिकांग का एक काम है। पानी परासरण से कोशिका में आता-जाता है। नई कोशिकाएँ समसूत्री (वृद्धि) और अर्धसूत्री (जनन कोशिकाएँ) विभाजन से बनती हैं।
2. The Sun, our energy source
Solar radiation · Earth’s radiation balance · Photosynthesis · Heat balance of the human body
- सौर ऊर्जा: सूर्य से आपके प्लग तक – सूर्य नाभिकीय संलयन से ऊर्जा बनाता है: हाइड्रोजन के नाभिक जुड़कर हीलियम बनाते हैं और थोड़ा-सा द्रव्यमान बहुत ऊर्जा बन जाता है (E = mc²)। गरम सतह (लगभग 5800 K) ज़्यादातर दृश्य प्रकाश देती है (वीन नियम), और कुल शक्ति T⁴ के अनुपात में बढ़ती है (स्टीफ़न नियम)। वायुमंडल के ऊपर सूर्य के सामने हर वर्ग मीटर पर लगभग 1361 W पहुँचता है; साफ़ दिन में ज़मीन पर लगभग 1000 W/m²। तिरछी किरणें बड़े क्षेत्र में फैलती हैं, इसी से अक्षांश और ऋतुओं का फ़र्क है। सौर सेल प्रकाश को बिजली में बदलते हैं: P = तीव्रता × क्षेत्रफल × दक्षता × cos(कोण)। सौर जल तापक प्रकाश को ऊष्मा में बदलते हैं।
- ग्रीनहाउस प्रभाव – सूर्य पृथ्वी को दृश्य प्रकाश से गर्म करता है। लगभग 30% प्रकाश सीधे अंतरिक्ष में लौट जाता है (एल्बिडो ≈ 0.30)। बाक़ी ज़मीन को गर्म करता है, और गर्म ज़मीन अवरक्त विकिरण छोड़ती है। ग्रीनहाउस गैसें – जलवाष्प, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड – दृश्य प्रकाश को जाने देती हैं, पर अवरक्त को सोखकर उसका कुछ भाग वापस नीचे भेजती हैं। पृथ्वी उस तापमान पर टिकती है जहाँ आने वाली ऊर्जा = जाने वाली ऊर्जा। इन गैसों के बिना औसत तापमान लगभग −18 °C होता; इनके साथ लगभग +15 °C है। ईंधन जलाने, खेती और कूड़े के ढेरों से CO₂ और CH₄ बढ़ने पर यह प्रभाव तेज़ होता है और धरती गर्म होती है।
- जैव प्रक्रम और प्रकाश संश्लेषण – जैव प्रक्रम वे काम हैं जो ज़िंदा रहने के लिए शरीर को लगातार करने पड़ते हैं: पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन। हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण से पोषण करते हैं: सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की मदद से वे कार्बन डाइऑक्साइड और जल से ग्लूकोज बनाते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
- समस्थापन (Homeostasis) – समस्थापन वह तरीका है जिससे शरीर अपना आंतरिक वातावरण (रक्त और ऊतक द्रव) स्थिर रखता है, चाहे बाहर का मौसम बदले। यह शरीर का ताप (लगभग 37 °C), रक्त ग्लूकोज़ (लगभग 4–6 mmol/L), पानी-लवण और रक्त pH (लगभग 7.4) नियंत्रित करता है। ज़्यादातर यह ऋणात्मक पुनर्भरण से होता है: ग्राही बदलाव पहचानता है, नियंत्रण केंद्र तय करता है, और प्रभावक स्तर को निर्धारित बिंदु पर लौटाता है।
3. Earth, a singular planet
The shape of the Earth · Dating the Earth · Earth in the Universe
- पृथ्वी का आकार और माप – पृथ्वी थोड़ी चपटी गेंद जैसी है, इसकी त्रिज्या लगभग 6,371 km है। एराटोस्थनीज़ ने दो शहरों में छाया का कोण देखकर इसका आकार निकाला: परिधि = शहरों की दूरी × 360 ÷ कोण। सर्वेक्षक त्रिभुजन का उपयोग करते हैं, और अक्षांश-देशांतर से गोले पर दूरी निकलती है (1 अंश अक्षांश लगभग 111 km)।
- सौरमंडल – सौरमंडल = सूर्य और वह सब कुछ जिसे उसका गुरुत्व थामे रखता है: 8 ग्रह, उनके चंद्रमा, बौने ग्रह, क्षुद्रग्रह, धूमकेतु और धूल। भीतरी चार ग्रह (बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल) छोटे और चट्टानी हैं। क्षुद्रग्रह पट्टी के बाद विशाल ग्रह: गैस दानव बृहस्पति और शनि, हिम दानव यूरेनस और नेपच्यून। गुरुत्व ग्रहों को सूर्य की ओर खींचता है जबकि वे बगल में चलते हैं, इसलिए वे कक्षा में घूमते हैं; पास वाले तेज़ चलते हैं और उनका वर्ष छोटा होता है। यह सब लगभग 4.6 अरब साल पहले गैस और धूल के घूमते बादल से बना।
4. Sound and music
Sound as vibration · Music and numbers (scales) · Digitising sound · Hearing music
- ध्वनि – ध्वनि कंपन करती वस्तुओं से बनती है। यह किसी माध्यम (हवा, पानी, ठोस) में अनुदैर्ध्य तरंग के रूप में चलती है: कण आगे-पीछे हिलते हैं, कहीं घने हो जाते हैं (संपीडन) और कहीं फैल जाते हैं (विरलन)। आवृत्ति (Hz) से तारत्व (पिच), आयाम से प्रबलता तय होती है, और चाल v = f × λ। निर्वात में ध्वनि नहीं चलती। हम 20 Hz से 20,000 Hz सुनते हैं; इससे कम अवश्रव्य, ज़्यादा पराश्रव्य। परावर्तित ध्वनि से प्रतिध्वनि बनती है।
- संगीत में गणित – ध्वनि एक तरंग है। उसकी आवृत्ति f (हर्ट्ज़ में) ही तारत्व (सुर की ऊँचाई) है और आवर्तकाल T = 1 / f। 1 : 2 अनुपात की लंबाई वाले तार एक सप्तक का अंतर देते हैं, 2 : 3 पंचम का। पियानो के एक सप्तक में 12 बराबर सीढ़ियाँ होती हैं, हर सीढ़ी 2^(1/12) = 1.0595 गुना। ताल एक आवर्त को भिन्नों में बाँटती है, जैसे 3 + 3 + 2 = 8 मात्राएँ।
- डेटा निरूपण: कंप्यूटर संख्या, अक्षर, चित्र और आवाज़ कैसे रखता है – डेटा कच्चे तथ्य हैं; अर्थ मिलने पर वह सूचना (information) बनता है; जिस सूचना से हम काम ले सकें वह ज्ञान है। कंप्यूटर सारा डेटा बिट (0 या 1) में रखता है। 8 बिट = 1 बाइट; 1 kB = 1000 बाइट, 1 MB = 1000 kB, 1 GB = 1000 MB, 1 TB = 1000 GB। संख्याएँ बाइनरी में रहती हैं, जहाँ स्थानीय मान दोगुने होते जाते हैं: 1, 2, 4, 8… अक्षरों के लिए कैरेक्टर सेट होता है: ASCII में 'A' = 65; यूनिकोड में हर लिपि है। बिटमैप चित्र पिक्सेल का जाल है; साइज़ = चौड़ाई × ऊँचाई × कलर डेप्थ। ध्वनि के सैंपल लिए जाते हैं: साइज़ = सैंपल रेट × बिट डेप्थ × सेकंड। वेक्टर चित्र पिक्सेल की जगह आकृतियाँ रखता है। कम्प्रेशन फ़ाइल छोटी करता है: लॉसलेस हर बिट बचाता है, लॉसी कुछ बारीकी हटा देता है।
- कान की भौतिकी – कान हवा के दबाव की छोटी-छोटी तरंगों को नस के संकेतों में बदलता है। कान का पर्दा कंपन करता है, तीन छोटी हड्डियाँ (अस्थिकाएँ) लीवर का काम करती हैं, और पर्दा अंडाकार खिड़की से बहुत बड़ा होने से दबाव लगभग 20 गुना बढ़ जाता है। कोक्लिया में बेसिलर झिल्ली आवृत्ति के अनुसार अलग जगह पर कंपन करती है: ऊँची आवृत्ति आधार (base) पर, नीची शिखर (apex) पर। स्वस्थ युवा कान लगभग 20 Hz से 20 kHz सुनता है और 2–5 kHz पर सबसे संवेदनशील है। 1 kHz पर श्रवण दहलीज़ I₀ = 1.0 × 10⁻¹² W m⁻² है। तीव्रता स्तर L = 10 log₁₀(I/I₀) dB। उम्र से (ऊँची आवृत्तियाँ) और तेज़ शोर से (4 kHz के पास गड्ढा) सुनना कमज़ोर होता है।
5. Experimental and digital project
Measurement and data project
- वैज्ञानिक विधि – वैज्ञानिक विधि वह सावधान तरीका है जिससे वैज्ञानिक पता लगाते हैं कि दुनिया कैसे चलती है। कुछ देखो (प्रेक्षण), परखने लायक प्रश्न पूछो, परिकल्पना बनाओ (साफ़, परखने योग्य अनुमान), निष्पक्ष प्रयोग से परखो (एक चर बदलो, एक मापो, बाकी सब एक जैसा), दोहराओ और आँकड़े लिखो, विश्लेषण करो, निष्कर्ष निकालो और साझा करो ताकि दूसरे जाँच सकें। जो नतीजे परिकल्पना से मेल न खाएँ, वे भी काम के हैं: वे नई परिकल्पना की ओर ले जाते हैं।