सौरमंडल में क्या-क्या है?
सौरमंडल = एक तारा (सूर्य) और वे सब पिंड जो उसके गुरुत्व से उसके चारों ओर घूमते हैं:
- 8 ग्रह और 290 से ज़्यादा ज्ञात चंद्रमा (उपग्रह);
- बौने ग्रह, जैसे प्लूटो, सेरेस और एरिस;
- लाखों क्षुद्रग्रह (चट्टानी टुकड़े) और धूमकेतु (बर्फ़ीले ढेले);
- धूल और सौर पवन (सूर्य से निकलते आवेशित कण)।
हमारा सौरमंडल आकाशगंगा (मिल्की वे) के अरबों तारा-तंत्रों में से एक है, और आकाशगंगा ब्रह्मांड की अरबों मंदाकिनियों में से एक। सूर्य आकाशगंगा के केंद्र से लगभग 26,000 प्रकाश-वर्ष दूर है।
सूर्य और ग्रह
सूर्य मध्यम आकार का तारा है, पृथ्वी से लगभग 109 गुना चौड़ा, सतह लगभग 5,500 °C। इसके केंद्र में हाइड्रोजन जुड़कर हीलियम बनाती है (नाभिकीय संलयन), जिससे रोशनी और गर्मी निकलती है।
| ग्रह | प्रकार | दूरी (AU) | वर्ष (पृथ्वी वर्ष) |
|---|---|---|---|
| बुध | चट्टानी | 0.39 | 0.24 |
| शुक्र | चट्टानी, सबसे गर्म | 0.72 | 0.62 |
| पृथ्वी | चट्टानी, तरल पानी | 1 | 1 |
| मंगल | चट्टानी, लाल | 1.52 | 1.88 |
| बृहस्पति | गैस दानव, सबसे बड़ा | 5.2 | 11.9 |
| शनि | गैस दानव, चमकीले वलय | 9.5 | 29.5 |
| यूरेनस (अरुण) | हिम दानव, करवट लेटा | 19.2 | 84 |
| नेपच्यून (वरुण) | हिम दानव, सबसे तेज़ हवाएँ | 30.1 | 165 |
1 AU (खगोलीय इकाई) = सूर्य-पृथ्वी की औसत दूरी ≈ 15 करोड़ किमी। रोशनी इसे लगभग 8.3 मिनट में पार करती है।
पृथ्वी पर जीवन क्यों? यह रहने योग्य क्षेत्र में है जहाँ पानी तरल रह सकता है, इसका वायुमंडल ठीक उतनी गर्मी रोकता है, और चुंबकीय क्षेत्र सौर पवन से बचाता है।
गुरुत्व और कक्षाएँ
गुरुत्व किन्हीं दो द्रव्यमानों के बीच का खिंचाव है। सूर्य का विशाल द्रव्यमान हर ग्रह को अपनी ओर खींचता है। उसी समय हर ग्रह बगल की ओर बहुत तेज़ चल रहा है। खिंचाव उसका रास्ता मोड़ता रहता है, तो वह गोल-गोल घूमता है: कक्षा। कक्षाएँ दीर्घवृत्त हैं (थोड़े दबे वृत्त), सूर्य केंद्र के पास।
- सूर्य के पास: ज़्यादा खिंचाव, ज़्यादा चाल, छोटा वर्ष।
- चंद्रमा और कृत्रिम उपग्रह भी ऐसे ही ग्रहों की परिक्रमा करते हैं। स्थिर कक्षा में उपग्रह अपनी ऊँचाई के हिसाब से सही चाल रखता है।
पृथ्वी से ग्रह तारों के बीच भटकते लगते हैं। कभी मंगल कुछ हफ़्ते पीछे चलता दिखता है (वक्री गति): अंदर की तेज़ पटरी पर पृथ्वी उसे पीछे छोड़ रही होती है। सूर्य-पृथ्वी के साथ किसी ग्रह की दो एक जैसी स्थितियों के बीच का समय उसका संयुति काल है (मंगल का लगभग 780 दिन)।
छोटे पिंड: बौने ग्रह, क्षुद्रग्रह, धूमकेतु, उल्का
- बौना ग्रह: गोल है और सूर्य की परिक्रमा करता है, पर अपने रास्ते से दूसरे पिंड साफ़ नहीं कर पाया (प्लूटो 2006 से, सेरेस, एरिस)।
- क्षुद्रग्रह: चट्टानी या धातु पिंड, ज़्यादातर मंगल और बृहस्पति के बीच की पट्टी में।
- नेपच्यून के आगे काइपर पट्टी: प्लूटो समेत बर्फ़ीले पिंड। और बहुत दूर ऊर्ट बादल, जिसमें खरबों धूमकेतु माने जाते हैं।
- धूमकेतु: मैले बर्फ़ के गोले। सूर्य के पास बर्फ़ गैस बनती है और चमकता सिर व पूँछें बनती हैं, जो सूर्य की रोशनी और सौर पवन से सूर्य से दूर की ओर रहती हैं।
- उल्कापिंड (अंतरिक्ष में छोटा पत्थर) → उल्का (हमारी हवा में जलते समय रोशनी की लकीर, "टूटता तारा") → उल्काश्म (ज़मीन तक पहुँचा टुकड़ा)।
सौरमंडल कैसे बना?
लगभग 4.6 अरब साल पहले गैस और धूल का विशाल बादल (नीहारिका) अपने ही गुरुत्व से सिकुड़ने लगा, शायद पास के किसी तारे के फटने के बाद।
- बादल तेज़ घूमने लगा और चपटी तश्तरी बन गया।
- ज़्यादातर पदार्थ केंद्र में गिरा, बहुत गर्म और घना हुआ, और संलयन शुरू हुआ: सूर्य जन्मा।
- तश्तरी में धूल चिपककर बड़े-बड़े ढेले (ग्रहाणु) बनी, जो टकराकर ग्रह बने।
- गर्म सूर्य के पास सिर्फ़ चट्टान और धातु ठोस रह सकते थे, तो चट्टानी ग्रह बने। दूर बर्फ़ भी बन सकती थी, तो कोर इतने बड़े हुए कि ढेर सारी गैस खींच ली: दानव ग्रह।
इसीलिए सारे ग्रह एक ही दिशा में और लगभग एक ही समतल में घूमते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 1 AU ≈ 1.5 × 10⁸ किमी (सूर्य-पृथ्वी दूरी)
- प्रकाश-समय = दूरी ÷ प्रकाश की चाल (3 × 10⁸ m/s); सूर्य से पृथ्वी ≈ 8.3 मिनट
- 1 प्रकाश-वर्ष ≈ 9.46 × 10¹² किमी
- पास की कक्षा → ज़्यादा गुरुत्व → ज़्यादा चाल → छोटा वर्ष
- क्रम: बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल | पट्टी | बृहस्पति, शनि, यूरेनस, नेपच्यून
हल किए गए उदाहरण
1. कौन-से ग्रह चट्टानी हैं और कौन-से विशाल?
चट्टानी: बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल। विशाल: बृहस्पति, शनि (गैस) और यूरेनस, नेपच्यून (हिम)।
2. बृहस्पति सूर्य से 5.2 AU दूर है। किमी में लगभग कितना?
5.2 × 15 करोड़ किमी ≈ 78 करोड़ किमी।
3. सूर्य की रोशनी नेपच्यून (30 AU) तक कितनी देर में पहुँचती है?
30 × 8.3 मिनट ≈ 250 मिनट, 4 घंटे से कुछ ज़्यादा।
4. 2006 में प्लूटो की श्रेणी क्यों बदली?
यह गोल है और सूर्य की परिक्रमा करता है, पर काइपर पट्टी के दूसरे पिंडों से अपना रास्ता साफ़ नहीं कर पाया, इसलिए बौना ग्रह है।
आम गलतियाँ
- बुध को सबसे गर्म ग्रह मानना। शुक्र ज़्यादा गर्म है क्योंकि उसका घना CO₂ वायुमंडल गर्मी रोकता है।
- सोचना कि धूमकेतु की पूँछ उसके पीछे चलती है। पूँछ हमेशा सूर्य से दूर की ओर होती है।
- चित्रों को असली पैमाने का मानना। असली दूरियाँ ग्रहों के आकार की तुलना में बहुत बड़ी हैं।
- चाँद या सूर्य को ग्रह कहना। चाँद प्राकृतिक उपग्रह है; सूर्य तारा है।