खगोलीय गोला और तारामंडल
तारे अलग-अलग दूरी पर हैं, पर इतने दूर हैं कि आँख फ़र्क़ नहीं पकड़ पाती। इसलिए मानते हैं कि वे एक बड़े खगोलीय गोले पर चिपके हैं और हम बीच में हैं।
- शिरोबिंदु: सिर के ठीक ऊपर का बिंदु।
- क्षितिज: जहाँ आकाश ज़मीन से मिलता दिखता है।
- खगोलीय ध्रुव: पृथ्वी की धुरी आगे बढ़ाने पर गोले से जहाँ मिले। उत्तरी ध्रुव ध्रुव तारे के बहुत पास है।
- खगोलीय विषुवत: पृथ्वी की विषुवत रेखा आकाश पर।
तारामंडल
तारामंडल आकाश का एक तय नाम वाला हिस्सा है। पूरे आकाश को 88 तारामंडलों में बाँटा गया है। एक तारामंडल के तारे सिर्फ़ पास दिखते हैं; अंतरिक्ष में वे एक-दूसरे से बहुत दूर हो सकते हैं।
क्षितिज पद्धति: उन्नतांश और दिगंश
यह पद्धति तुम्हारे क्षितिज पर बनी है।
- उन्नतांश (h): क्षितिज से तारे तक ऊपर का कोण। क्षितिज पर 0°, शिरोबिंदु पर 90°, क्षितिज के नीचे ऋणात्मक।
- दिगंश (A): क्षितिज पर उत्तर से पूर्व की ओर कोण: उ = 0°, पू = 90°, द = 180°, प = 270°।
यह आसान है ("40° ऊपर, दक्षिण-पूर्व में देखो"), पर दो दिक़्क़तें हैं: पृथ्वी घूमने से संख्याएँ हर मिनट बदलती हैं, और अलग जगह के लोगों को एक ही तारे के लिए अलग संख्याएँ मिलती हैं।
ध्रुव का उन्नतांश = अक्षांश
उत्तरी ध्रुव (90°) पर ध्रुव तारा सिर के ऊपर होता है। विषुवत (0°) पर क्षितिज पर। दिल्ली (लगभग 28.6° उ) में लगभग 28.6° ऊपर। इस नियम से आकाश देखकर अक्षांश जान सकते हैं।
विषुवत पद्धति: क्रांति और विषुवांश
यह पद्धति तारों से जुड़ी है, तुमसे नहीं।
- क्रांति (δ): खगोलीय विषुवत से उत्तर (+) या दक्षिण (−) का कोण, −90° से +90°। अक्षांश जैसा।
- विषुवांश (α): बसंत विषुव बिंदु (♈) से पूर्व की ओर विषुवत पर कोण, जहाँ मार्च में सूर्य विषुवत पार करता है। घंटों में: 24 h = 360°, 1 h = 15°। देशांतर जैसा।
यह जाल आकाश के साथ घूमता है, इसलिए तारे के α और δ सालों तक लगभग वही रहते हैं। इसीलिए सूचियाँ और तारा मानचित्र इन्हें उपयोग करते हैं।
तारा मानचित्र पढ़ना
- घंटों वाली रेखाएँ (विषुवांश) और डिग्री वाली रेखाएँ (क्रांति) पहचानो।
- मानचित्र को इस तरह पकड़ो कि आज का महीना या समय दक्षिण की ओर हो (उत्तरी गोलार्ध में)।
- कोई चमकीला पैटर्न, जैसे ओरायन की बेल्ट, मिलाओ और फिर पास के तारों पर जाओ।
करके देखो
हाथ सीधा करके मुट्ठी बनाओ: यह आकाश का लगभग 10° ढकती है। ध्रुव तारा क्षितिज से कितनी मुट्ठी ऊपर है, गिनो। संख्या × 10° लगभग तुम्हारा अक्षांश है।
तारों का कांतिमान: तारा कितना चमकीला दिखता है
आभासी कांतिमान (m) बताता है कि तारा पृथ्वी से कितना चमकीला दिखता है। पैमाना उलटा है: छोटी संख्या = ज़्यादा चमकीला। व्याध (Sirius) −1.46, अभिजित (Vega) लगभग 0, ध्रुव तारा लगभग 2, और अँधेरे आकाश में सबसे धुँधले दिखने वाले तारे लगभग 6।
5 कांतिमान का अंतर = ठीक 100 गुना चमक, यानी 1 कांतिमान ≈ 2.512 गुना।
निरपेक्ष कांतिमान (M) बताता है कि 10 पारसेक की मानक दूरी से तारा कितना चमकीला दिखता। इससे असली शक्ति की तुलना होती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ध्रुव का उन्नतांश = दर्शक का अक्षांश φ
- याम्योत्तर पर उन्नतांश: h = 90° − φ + δ (शिरोबिंदु के दक्षिण का तारा)
- 1 h विषुवांश = 15°; 24 h = 360°
- दिगंश: उ 0°, पू 90°, द 180°, प 270°
- चमक का अनुपात = 2.512^(m₂ − m₁); 5 कांतिमान = 100 गुना
- सदा दिखने वाला (परिध्रुवीय) तारा: δ > 90° − φ
हल किए गए उदाहरण
1. दर्शक 20° उ अक्षांश पर है। उत्तरी खगोलीय ध्रुव कितना ऊँचा?
ध्रुव का उन्नतांश = अक्षांश = 20°, उत्तरी क्षितिज से ऊपर।
2. आर्द्रा (Betelgeuse) की δ = +7.4°। 28° उ से इसका सबसे ऊँचा उन्नतांश?
h = 90 − 28 + 7.4 = 69.4°, दक्षिण में।
3. विषुवांश 6 h को डिग्री में बदलो।
6 × 15° = 90°।
4. तारा A का कांतिमान 1, B का 6। A कितना गुना चमकीला?
अंतर 5 = 100 गुना।
5. 50° उ से कौन-से तारे कभी नहीं डूबते?
जिनकी δ > 90 − 50 = 40°।
6. तारा सूचियाँ उन्नतांश-दिगंश क्यों नहीं लिखतीं?
वे समय और जगह से बदलते हैं। विषुवांश-क्रांति तारे के साथ स्थिर रहते हैं, इसलिए एक सूची सबके काम आती है।
आम गलतियाँ
- बड़ी कांतिमान संख्या को ज़्यादा चमकीला मानना। उलटा है।
- दिगंश दक्षिण से या पश्चिम की ओर मापना। यहाँ उत्तर से पूर्व की ओर।
- विषुवांश सिर्फ़ डिग्री में सोचना। आमतौर पर घंटों में: 1 h = 15°।
- मानना कि तारामंडल के तारे अंतरिक्ष में पास-पास हैं। वे सिर्फ़ एक दिशा में दिखते हैं।