Ontario Grade 11 CGF3M Forces of Nature: Physical Processes and Disasters (Grade 11, University/College Preparation)
अध्याय: 5
1. A. Geographic Inquiry and Skill Development
A1 Geographic Inquiry · A2 Developing Transferable Skills
- वैज्ञानिक विधि – वैज्ञानिक विधि वह सावधान तरीका है जिससे वैज्ञानिक पता लगाते हैं कि दुनिया कैसे चलती है। कुछ देखो (प्रेक्षण), परखने लायक प्रश्न पूछो, परिकल्पना बनाओ (साफ़, परखने योग्य अनुमान), निष्पक्ष प्रयोग से परखो (एक चर बदलो, एक मापो, बाकी सब एक जैसा), दोहराओ और आँकड़े लिखो, विश्लेषण करो, निष्कर्ष निकालो और साझा करो ताकि दूसरे जाँच सकें। जो नतीजे परिकल्पना से मेल न खाएँ, वे भी काम के हैं: वे नई परिकल्पना की ओर ले जाते हैं।
- करियर प्लानिंग: ख़ुद को जानने से पहली नौकरी तक – करियर प्लानिंग के पाँच कदम हैं। 1) ख़ुद को जानो: रुचियाँ, कौशल और मूल्य। 2) करियर परिवार खोजो और जानो कि काम क्या है, कौन-सी पढ़ाई चाहिए, वेतन और माँग कितनी है। 3) SMART लक्ष्य और प्लान B के साथ रास्ता बनाओ। 4) CV, आवेदन पत्र, डिजिटल पोर्टफ़ोलियो और इंटरव्यू अभ्यास से नौकरी खोजो। 5) स्कूल से काम की ओर बढ़ो और सीखते रहो, क्योंकि ज़िंदगी भर करियर बदलता है।
2. B. Spatial Organization: Spheres of the Earth
B1 Physical Processes and Natural Hazards · B2 Spatial Connections · B3 Physical Characteristics of the Earth
- प्राकृतिक संकट (Natural Hazards) – प्राकृतिक संकट (hazard) ऐसी प्राकृतिक घटना है जो लोगों और चीज़ों को नुकसान पहुँचा सकती है, जैसे भूकंप, ज्वालामुखी, भूस्खलन, बाढ़, सूखा या चक्रवात। जब यह ऐसे लोगों पर पड़ती है जो तैयार नहीं हैं, तब यह आपदा (disaster) बन जाती है। भूगर्भीय संकट धरती के अंदर से आते हैं, मौसमी संकट हवा और पानी से। जोखिम = संकट × सुभेद्यता ÷ क्षमता, इसलिए चेतावनी, मज़बूत मकान और प्रशिक्षित लोग नुकसान घटाते हैं।
- प्रकृति की शक्तियाँ: पृथ्वी की भौतिक प्रक्रियाएँ और आपदाएँ – पृथ्वी चार जुड़े मंडलों की तरह काम करती है: वायुमंडल (हवा), जलमंडल (पानी), स्थलमंडल (चट्टान और मिट्टी) और जैवमंडल (जीव)। सूर्य की ऊर्जा मौसम, पवन और जल चक्र चलाती है; पृथ्वी के अंदर की गर्मी प्लेटों को खिसकाती है, जिससे भूकंप, ज्वालामुखी और पर्वत बनते हैं। पृथ्वी का 23.5° झुकाव, जो सूर्य की परिक्रमा में वही रहता है, ऋतुएँ देता है। बहता पानी, पवन, हिमनद, लहरें और गुरुत्व ज़मीन घिसते (अपरदन) और कहीं और जमा करते (निक्षेपण) हैं। जीव भी ज़मीन और हवा बदलते हैं। एक मंडल का बदलाव बाक़ी में फैलता है। प्राकृतिक प्रक्रिया जब बिना तैयारी वाले लोगों से टकराती है तो आपदा बनती है, इसलिए हम पैटर्न और रुझान पढ़कर जोखिम घटाते हैं।
- पृथ्वी एक तंत्र: मंडल और ऊर्जा – पृथ्वी एक बड़ी मशीन जैसी है, जिसके पाँच हिस्से हैं: चट्टान (भूमंडल), पानी (जलमंडल), बर्फ (हिममंडल), हवा (वायुमंडल) और जीवन (जीवमंडल)। इस मशीन को सूर्य चलाता है। सूर्य की ऊर्जा कई तरह की किरणों में आती है, जिसे विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम कहते हैं। सूर्य पृथ्वी को बराबर गर्म नहीं करता, इसी से पवनें, समीर और महासागरीय धाराएँ बनती हैं। पानी, कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन मंडलों के बीच गोल-गोल घूमते हैं। इंसान अब इन चक्रों को बदल रहा है, इसलिए हमें पृथ्वी का ध्यान रखना है।
3. C. Forces of Nature: Physical Processes and Disasters
C1 Renewing the Physical Environment · C2 Human Impact on the Physical Environment · C3 Human Use of the Physical Environment
- पर्यावरण संरक्षण: तकनीक इस्तेमाल करते हुए धरती की देखभाल – पर्यावरण संरक्षण (environmental stewardship) का मतलब है धरती के संसाधनों को सोच-समझकर इस्तेमाल करना ताकि वे लंबे समय तक चलें, और जहाँ नुक़सान हुआ हो उसे ठीक करना। फ़ोन हो या अस्पताल की मशीन, हर उत्पाद का एक जीवन-चक्र होता है: कच्चा माल, निर्माण, परिवहन, उपयोग और जीवन का अंत। हर चरण में ऊर्जा लगती है और कचरा बनता है। अच्छा संरक्षक चीज़ें लंबे समय तक चलाता है, कम बिजली वाली मशीनें चुनता है, कचरा-पदानुक्रम मानता है, ई-कचरा सही जगह देता है और प्रकृति बचाने वाले नियमों का साथ देता है।
4. D. Systems: Interaction and Interdependence
D1 Sharing the Physical Environment · D2 Population and Disasters · D3 Earth's Planetary Characteristics and Life
- पर्यावरण संरक्षण: तकनीक इस्तेमाल करते हुए धरती की देखभाल – पर्यावरण संरक्षण (environmental stewardship) का मतलब है धरती के संसाधनों को सोच-समझकर इस्तेमाल करना ताकि वे लंबे समय तक चलें, और जहाँ नुक़सान हुआ हो उसे ठीक करना। फ़ोन हो या अस्पताल की मशीन, हर उत्पाद का एक जीवन-चक्र होता है: कच्चा माल, निर्माण, परिवहन, उपयोग और जीवन का अंत। हर चरण में ऊर्जा लगती है और कचरा बनता है। अच्छा संरक्षक चीज़ें लंबे समय तक चलाता है, कम बिजली वाली मशीनें चुनता है, कचरा-पदानुक्रम मानता है, ई-कचरा सही जगह देता है और प्रकृति बचाने वाले नियमों का साथ देता है।
- विश्व जनसंख्या: वितरण, घनत्व और वृद्धि – धरती पर लोग बराबर नहीं फैले। ज़्यादातर लोग पानी के पास उपजाऊ मैदानों में रहते हैं; मरुस्थल, ऊँचे पर्वत और बर्फ़ीले इलाक़ों में बहुत कम। घनत्व बताता है कि हर वर्ग किमी पर कितने लोग हैं। भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक कारक यह पैटर्न समझाते हैं। हज़ारों साल जनसंख्या धीरे बढ़ी, फिर 1800 के बाद बहुत तेज़ी से। जनसंख्या जन्म, मृत्यु और प्रवास से बदलती है। जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत बताता है कि गाँव की खेती से शहरी उद्योग की ओर बढ़ते समाज में जन्म और मृत्यु दर कैसे गिरती हैं। देश परिवार नियोजन और स्वास्थ्य सेवा से वृद्धि नियंत्रित करते हैं।
- सौरमंडल – सौरमंडल = सूर्य और वह सब कुछ जिसे उसका गुरुत्व थामे रखता है: 8 ग्रह, उनके चंद्रमा, बौने ग्रह, क्षुद्रग्रह, धूमकेतु और धूल। भीतरी चार ग्रह (बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल) छोटे और चट्टानी हैं। क्षुद्रग्रह पट्टी के बाद विशाल ग्रह: गैस दानव बृहस्पति और शनि, हिम दानव यूरेनस और नेपच्यून। गुरुत्व ग्रहों को सूर्य की ओर खींचता है जबकि वे बगल में चलते हैं, इसलिए वे कक्षा में घूमते हैं; पास वाले तेज़ चलते हैं और उनका वर्ष छोटा होता है। यह सब लगभग 4.6 अरब साल पहले गैस और धूल के घूमते बादल से बना।
5. E. Impacts of Change
E1 Impacts of Processes and Disasters · E2 Disaster Preparedness · E3 Processes of Change
- प्राकृतिक संकट (Natural Hazards) – प्राकृतिक संकट (hazard) ऐसी प्राकृतिक घटना है जो लोगों और चीज़ों को नुकसान पहुँचा सकती है, जैसे भूकंप, ज्वालामुखी, भूस्खलन, बाढ़, सूखा या चक्रवात। जब यह ऐसे लोगों पर पड़ती है जो तैयार नहीं हैं, तब यह आपदा (disaster) बन जाती है। भूगर्भीय संकट धरती के अंदर से आते हैं, मौसमी संकट हवा और पानी से। जोखिम = संकट × सुभेद्यता ÷ क्षमता, इसलिए चेतावनी, मज़बूत मकान और प्रशिक्षित लोग नुकसान घटाते हैं।
- प्रकृति की शक्तियाँ: पृथ्वी की भौतिक प्रक्रियाएँ और आपदाएँ – पृथ्वी चार जुड़े मंडलों की तरह काम करती है: वायुमंडल (हवा), जलमंडल (पानी), स्थलमंडल (चट्टान और मिट्टी) और जैवमंडल (जीव)। सूर्य की ऊर्जा मौसम, पवन और जल चक्र चलाती है; पृथ्वी के अंदर की गर्मी प्लेटों को खिसकाती है, जिससे भूकंप, ज्वालामुखी और पर्वत बनते हैं। पृथ्वी का 23.5° झुकाव, जो सूर्य की परिक्रमा में वही रहता है, ऋतुएँ देता है। बहता पानी, पवन, हिमनद, लहरें और गुरुत्व ज़मीन घिसते (अपरदन) और कहीं और जमा करते (निक्षेपण) हैं। जीव भी ज़मीन और हवा बदलते हैं। एक मंडल का बदलाव बाक़ी में फैलता है। प्राकृतिक प्रक्रिया जब बिना तैयारी वाले लोगों से टकराती है तो आपदा बनती है, इसलिए हम पैटर्न और रुझान पढ़कर जोखिम घटाते हैं।