ध्वनि तरंगें
ध्वनि एक कंपन है जो तरंग की तरह चलता है। आवृत्ति f बताती है कि एक सेकंड में कितने कंपन होते हैं। इसका मात्रक हर्ट्ज़ (Hz) है। आवर्तकाल T एक कंपन का समय है, इसलिए T = 1 / f। जो तार एक सेकंड में 220 बार काँपे, उसकी f = 220 Hz और T = 1/220 s है।
ज़्यादा आवृत्ति का मतलब ऊँचा तारत्व (सुर)। बड़ा झूला (आयाम) ज़्यादा तेज़ आवाज़ देता है। हवा में ध्वनि लगभग 343 m/s से चलती है और तरंगदैर्ध्य λ = v / f होता है।
समान मोटाई और तनाव वाले तार के लिए आवृत्ति लंबाई के व्युत्क्रमानुपाती है: f ∝ 1 / L। आधी लंबाई पर आवृत्ति दोगुनी।
अंतराल यानी अनुपात
दो सुरों के बीच की छलाँग को अंतराल कहते हैं। उसका आकार दोनों आवृत्तियों का अनुपात है, अंतर नहीं।
- सप्तक 2 : 1 (वही सुर, ऊँचा)। भारतीय संगीत में सा से ऊपर का सा।
- पंचम 3 : 2 (सा से प)।
- चतुर्थ 4 : 3।
- बड़ी तृतीय 5 : 4।
सरल अनुपात वाली दो तरंगें बहुत बार एक साथ मिलती हैं, इसलिए साथ में मधुर लगती हैं। इसी वजह से सरल अनुपात सामंजस्य देते हैं।
सुर-स्वर और ताप-समायोजन (temperament)
स्वर-सप्तक (scale) एक सप्तक के भीतर सुरों का समूह है। पुराने यूनानी संगीतकार पंचम जोड़ते-जोड़ते सुर बनाते थे (3/2 से गुणा करो और आधा करके सुर को एक सप्तक में वापस लाओ)। यह पाइथागोरस तरीका है। पर बारह शुद्ध पंचम ठीक सात सप्तक में नहीं बैठते: (3/2)12 = 129.75, जबकि 27 = 128। इस छोटे अंतर का अनुपात लगभग 1.0136 है, इसे पाइथागोरस कॉमा कहते हैं।
इस अंतर से बचने के लिए ज़्यादातर पियानो समान ताप-समायोजन (equal temperament) अपनाते हैं: सप्तक को 12 बराबर सीढ़ियों में बाँटा जाता है, हर सीढ़ी 21/12 ≈ 1.05946 गुना। इसलिए आधार सुर f₀ से n अर्धस्वर ऊपर के सुर की आवृत्ति f₀ × 2n/12 होती है। 12 सीढ़ियों पर गुणक 2, यानी सप्तक। सातवीं सीढ़ी (पंचम) पर 27/12 = 1.4983 मिलता है, जो शुद्ध 1.5 के बहुत पास है।
भारतीय संगीत में 22 छोटी सीढ़ियाँ (श्रुतियाँ) मानी जाती हैं और सुर "सा" से अनुपात द्वारा तय होते हैं, ताकि कान शुद्ध सा-प अनुपात 3 : 2 पर टिक सके। दूसरी पद्धतियाँ दूसरे समझौते चुनती हैं। यही "temperament" का अर्थ है।
ताल (Rhythm)
ताल बराबर मात्राओं में कटा समय है। एक आवर्त मात्राओं का समूह है। स्वरों की लंबाई भिन्न होती है: पूर्ण = 1, आधा = 1/2, चौथाई = 1/4, आठवाँ = 1/8। 4/4 में चार चौथाई स्वर (4 × 1/4 = 1) एक आवर्त भर देते हैं।
लय की गति (tempo) प्रति मिनट मात्राओं (BPM) में होती है। एक मात्रा का समय = 60 ÷ BPM सेकंड। 120 BPM पर एक मात्रा 0.5 s की।
मात्राएँ असमान समूहों में भी बँट सकती हैं: 3 + 3 + 2 = 8 (कई लोक शैलियों में), या 3 + 2 + 2 = 7 जैसे रूपक ताल में। समूहों का जोड़ हमेशा आवर्त की लंबाई के बराबर होता है।
करके देखिए: रबर बैंड और बोतलें
डिब्बे पर रबर बैंड खींचकर छेड़िए। बीच में दबाकर आधी लंबाई कीजिए: सुर एक सप्तक ऊपर चला जाएगा। या 5 एक जैसी बोतलों में अलग-अलग पानी भरिए और ऊपर से फूँकिए। पहले सुरों का क्रम सोचिए, फिर जाँचिए। दोस्त के साथ 3 + 3 + 2 की ताल पर ताली बजाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- f = 1 / T (f हर्ट्ज़ में, T सेकंड में)
- λ = v / f (हवा में v ≈ 343 m/s)
- तार: f ∝ 1 / L (तनाव और मोटाई समान)
- अंतराल = आवृत्ति का अनुपात; सप्तक 2 : 1, पंचम 3 : 2
- समान ताप-समायोजन: f = f₀ × 2^(n/12)
- एक मात्रा का समय = 60 ÷ BPM सेकंड
हल किए गए उदाहरण
1. एक तार को एक कंपन में 0.004 s लगता है। उसकी आवृत्ति निकालिए।
f = 1 / T = 1 / 0.004 = 250 Hz।
2. 440 Hz के सुर की हवा में तरंगदैर्ध्य निकालिए (चाल 343 m/s)।
λ = v / f = 343 / 440 ≈ 0.78 m।
3. 60 cm लंबा तार 330 Hz देता है। उसे 45 cm कर दिया। नई आवृत्ति क्या होगी?
f ∝ 1 / L। नई f = 330 × 60 / 45 = 440 Hz।
4. समान ताप-समायोजन में 220 Hz से 7 अर्धस्वर ऊपर का सुर निकालिए और शुद्ध पंचम से तुलना कीजिए।
f = 220 × 2^(7/12) = 220 × 1.4983 ≈ 329.6 Hz। शुद्ध पंचम 220 × 3/2 = 330 Hz देता है। अंतर 0.5 Hz से कम है।
5. एक गीत 4/4 में 90 BPM पर है। एक आवर्त कितना लंबा है?
एक मात्रा = 60 / 90 = 2/3 s। आवर्त में 4 मात्राएँ, इसलिए 4 × 2/3 = 2.67 s।
6. दिखाइए कि बारह शुद्ध पंचम सात सप्तक से आगे निकल जाते हैं।
(3/2)^12 = 129.746। सात सप्तक 2^7 = 128। अनुपात 129.746 / 128 ≈ 1.0136, यानी लगभग 1.4% का अंतर (पाइथागोरस कॉमा)।
आम गलतियाँ
- ज़्यादा आवाज़ को ऊँचा सुर समझना। आवाज़ की तीव्रता आयाम पर, सुर आवृत्ति पर निर्भर है।
- अंतराल के लिए आवृत्तियाँ जोड़ना। सप्तक में आवृत्ति दोगुनी होती है (गुणा), तय Hz नहीं जुड़ता।
- मान लेना कि समान ताप की सीढ़ियाँ Hz में बराबर हैं। वे अनुपात में बराबर हैं (हर बार ×1.0595), इसलिए ऊपर जाते-जाते Hz में सीढ़ी बड़ी होती जाती है।
- 3/4 को "4 सेकंड की 3 मात्राएँ" पढ़ना। इसका मतलब हर आवर्त में 3 मात्राएँ, हर एक चौथाई स्वर की।