सरलता: थोड़े नियम, बड़ा नतीजा
कोई आकृति या पैटर्न सरल है अगर एक छोटा नियम उसे पूरा बना दे। वृत्त वह है जिसमें हर बिंदु केंद्र से बराबर दूरी पर हो। 8 पंखुड़ियों वाली रंगोली एक पंखुड़ी को 8 बार बनाने से बनती है। नियम जितना छोटा, नतीजा अक्सर उतना ही सुंदर लगता है।
गणितज्ञों को भी यही पसंद है। "त्रिभुज के कोणों का योग 180° होता है" जैसा छोटा कथन अनगिनत त्रिभुजों को समझा देता है।
सममिति: दर्पण और घूर्णन
सममिति का मतलब है कि आकृति को किसी तरह हिलाने पर भी वह वैसी ही दिखे।
- दर्पण (रेखा) सममिति: किसी रेखा पर मोड़ने पर दोनों भाग ठीक मिल जाएँ। तितली और अक्षर A में यह होती है। वर्ग की 4 सममिति रेखाएँ हैं, वृत्त की अनगिनत।
- घूर्णन सममिति: आकृति को केंद्र के चारों ओर एक पूरे चक्कर से कम घुमाने पर वह वैसी ही दिखे। एक पूरे चक्कर में वह जितनी बार मेल खाए, वह उसकी कोटि n है। सबसे छोटा घुमाव 360° ÷ n होता है। तारामछली की कोटि 5 है, इसलिए घुमाव 72°। हिम-कण की कोटि 6 है, इसलिए घुमाव 60°।
आकृति में सिर्फ़ एक ही तरह की सममिति हो सकती है। अक्षर S की घूर्णन कोटि 2 है पर कोई दर्पण रेखा नहीं। अक्षर E में दर्पण रेखा है पर घूर्णन सममिति नहीं।
आवर्तिता: दोहराते पैटर्न
पैटर्न आवर्ती है अगर वह तय दूरी या समय के बाद दोहराए। उस दूरी को आवर्तकाल (period) कहते हैं। "फूल, पत्ती, पत्ती, फूल, पत्ती, पत्ती..." की किनारी का आवर्तकाल 3 चीज़ें है। दिल की धड़कन, दिन-रात और झूलते लोलक का दोलन समय में आवर्ती हैं।
सबसे ज़रूरी आवर्ती वक्र ज्या-तरंग (sine wave) है। एक ऊपर का उभार और एक नीचे का उभार मिलकर एक पूरा आवर्त बनाते हैं। अगर 12 cm में 3 पूरी तरंगें आती हैं, तो आवर्तकाल 12 ÷ 3 = 4 cm है।
दोहराते पैटर्न में किसी स्थान की चीज़ पता करने के लिए स्थान की संख्या को आवर्तकाल से भाग दीजिए और शेषफल देखिए।
सामंजस्य: सरल अनुपात और संतुलन
सामंजस्य का मतलब है कि हिस्से आपस में अच्छी तरह मेल खाएँ। गणित में यह अक्सर सरल अनुपात के रूप में दिखता है। जिन दो तारों की लंबाइयों का अनुपात 1 : 2 हो, वे एक सप्तक के अंतर पर वही सुर देते हैं। 2 : 3 का अनुपात भी मीठा लगता है। उनकी तरंगें बार-बार एक साथ मिलती हैं, इसलिए कान को आवाज़ शांत लगती है।
यही बात देखने में भी लागू होती है। सुनहरा अनुपात, लगभग 1.618 : 1, वह आयत देता है जो कई कलाकारों को संतुलित लगता है। आगे पढ़िए सुनहरा अनुपात और संगीत में गणित।
करके देखिए: मोड़िए और काटिए
एक चौकोर कागज़ को आधा मोड़िए, मोड़ पर कोई आकृति काटिए और खोलिए। आपको दर्पण सममिति मिलेगी। अब कागज़ को दो बार आधा मोड़िए, फिर एक बार तिरछा। काटकर खोलिए: घूर्णन सममिति मिलेगी। कोटि गिनिए और जाँचिए कि घुमाव का कोण 360° ÷ कोटि है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- घूर्णन कोण = 360° ÷ n (n = घूर्णन सममिति की कोटि)
- n भुजाओं वाले समबहुभुज की n सममिति रेखाएँ और घूर्णन कोटि n होती है
- आवर्तकाल = एक पूरे दोहराव की लंबाई
- दोहराते पैटर्न में स्थान: (स्थान ÷ आवर्तकाल) का शेषफल देखिए
- 1 : 2 और 2 : 3 जैसे सरल अनुपात सामंजस्य देते हैं
हल किए गए उदाहरण
1. समषट्भुज की कितनी सममिति रेखाएँ हैं, घूर्णन कोटि क्या है और सबसे छोटा घुमाव कितना है?
समषट्भुज की 6 भुजाएँ हैं, इसलिए 6 सममिति रेखाएँ और कोटि 6। सबसे छोटा घुमाव = 360° ÷ 6 = 60°।
2. अक्षर H की सममिति बताइए।
इसकी 2 सममिति रेखाएँ हैं (एक ऊपर-नीचे, एक बाएँ-दाएँ)। आधा चक्कर (180°) घुमाने पर यह वैसा ही दिखता है, इसलिए घूर्णन कोटि 2 है।
3. साड़ी की किनारी में "फूल, पत्ती, पत्ती" दोहराता है। 20वीं चीज़ क्या होगी?
आवर्तकाल 3 है। 20 ÷ 3 = 6 शेष 2। समूह की दूसरी चीज़ पत्ती है, इसलिए 20वीं चीज़ पत्ती होगी।
4. एक तरंग 20 cm में 5 पूरे चक्र बनाती है। उसका आवर्तकाल निकालिए।
आवर्तकाल = 20 ÷ 5 = 4 cm।
5. एक तरंग में 2 चक्र और दूसरी में 3 चक्र उतनी ही लंबाई में हैं। इस लंबाई में जोड़ कितनी बार दोहराता है?
2 और 3 में 1 के सिवा कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं, इसलिए जोड़ पूरी लंबाई में एक ही बार दोहराता है। छोटी संख्याएँ मतलब छोटा और साफ़ दोहराव।
6. रंगोली की घूर्णन कोटि 12 है। दोस्त उसे 45° घुमाता है। क्या वह वैसी ही दिखेगी?
सबसे छोटा मेल खाने वाला घुमाव 360° ÷ 12 = 30° है। 45°, 30° का गुणज नहीं है, इसलिए वह वैसी नहीं दिखेगी।
आम गलतियाँ
- आयत की 4 सममिति रेखाएँ मान लेना। आयत की सिर्फ़ 2 होती हैं (वर्ग की 4)।
- कोटि और कोण को मिला देना। कोटि n का मतलब एक चक्कर में कितनी बार मेल खाए; कोण = 360° ÷ n।
- समांतर चतुर्भुज की सममिति रेखाएँ मानना। उसकी कोई नहीं, सिर्फ़ घूर्णन कोटि 2।
- "आवर्ती" का मतलब "बेतरतीब" समझना। आवर्ती पैटर्न आवर्तकाल के बाद ठीक वैसा ही लौटता है।