China 八年级(初二) Mathematics
अध्याय: 12
1. Ch.13 Triangles
Concept of a triangle · Sides; medians, angle bisectors, altitudes · Interior and exterior angles · Why proofs are needed · Practice: centre of gravity of a thin plate
- त्रिभुज: प्रकार, भुजाएँ, माध्यिका और ऊँचाई – त्रिभुज एक बंद आकृति है जिसकी 3 भुजाएँ, 3 शीर्ष (कोने) और 3 कोण होते हैं। तीनों कोणों का योग हमेशा 180° होता है। भुजाओं के आधार पर त्रिभुज समबाहु (तीनों भुजाएँ बराबर), समद्विबाहु (दो बराबर) या विषमबाहु (कोई बराबर नहीं) होता है। कोणों के आधार पर वह न्यून कोण (सब कोण 90° से छोटे), समकोण (एक कोण 90°) या अधिक कोण (एक कोण 90° से बड़ा) होता है। किन्हीं दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से बड़ा होना चाहिए: यह त्रिभुज असमिका है। माध्यिका शीर्ष को सामने की भुजा के मध्य से जोड़ती है, कोण समद्विभाजक कोण को बराबर दो भागों में बाँटता है और ऊँचाई 90° पर सीधी नीचे आती है। धक्का देने पर त्रिभुज का आकार नहीं बदलता, इसलिए पुल, छत और टावर में वही सबसे मज़बूत आकार है।
- रेखाएँ और कोण: रैखिक युग्म, शीर्षाभिमुख कोण और समांतर रेखाएँ – एक ही बिंदु से निकली दो किरणों के बीच का घुमाव कोण है। सीधी रेखा पर बने दो आसन्न कोणों का योग 180° होता है (रैखिक युग्म)। दो रेखाएँ काटें तो आमने-सामने के कोण बराबर होते हैं। तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को काटे तो संगत कोण बराबर, एकांतर अंतः कोण बराबर, और एक ही ओर के अंतः कोणों का योग 180° होता है। उल्टी बात भी सच है, और ऐसी बातें हम विरोधाभास से सिद्ध कर सकते हैं: उल्टा मान लो और दिखाओ कि इससे कुछ असंभव निकलता है।
- तर्क और उपपत्ति: गणितज्ञ कैसे दिखाते हैं कि कोई बात हमेशा सत्य है – उपपत्ति (proof) सही कारणों की ऐसी कड़ी है जो दिखाती है कि कथन हर स्थिति में सत्य है। कथन सत्य या असत्य होता है; 'यदि P तो Q' (P ⇒ Q) का अर्थ है P होने पर Q ज़रूर होगा, पर उसका विलोम Q ⇒ P ग़लत भी हो सकता है। P ⇔ Q का अर्थ दोनों दिशाएँ सही। मुख्य विधियाँ: प्रत्यक्ष उपपत्ति (ज्ञात तथ्यों से क़दम-दर-क़दम, जैसे विषम संख्या 2n + 1); सभी स्थितियाँ जाँचकर उपपत्ति; प्रति-उदाहरण से खंडन (एक असफल स्थिति दावे को गिरा देती है); विरोधाभास से उपपत्ति (उल्टा मानकर असंभव तक पहुँचना)। ज्यामितीय उपपत्ति में हर पंक्ति का कारण लिखा जाता है (समांतर रेखाएँ, सर्वांगसम और समरूप त्रिभुज)। विश्लेषणात्मक उपपत्ति निर्देशांक लेती है; संश्लेषणात्मक उपपत्ति शुद्ध ज्यामिति।
- त्रिभुज के गुण और उसके केन्द्र – हर त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° होता है। त्रिभुज के चार ख़ास केन्द्र हैं। माध्यिकाएँ केन्द्रक G पर मिलती हैं, जो हर माध्यिका को 2 : 1 में बाँटता है। लंब समद्विभाजक परिकेन्द्र O पर मिलते हैं — यह शीर्षों से गुज़रने वाले वृत्त का केन्द्र है। कोण समद्विभाजक अंतःकेन्द्र I पर मिलते हैं — यह भुजाओं को छूने वाले अंदर के वृत्त का केन्द्र है। शीर्षलंब लंबकेन्द्र H पर मिलते हैं। O, G, H एक ही रेखा — यूलर रेखा — पर होते हैं।
2. Ch.14 Congruent triangles
Congruent triangles and properties · Tests for congruence (SAS, ASA, AAS, SSS, HL) · Angle bisector properties · Axiomatic method (history)
- त्रिभुजों की सर्वांगसमता – दो त्रिभुज सर्वांगसम (congruent) होते हैं जब एक को दूसरे पर रखने से वह पूरा ढक जाए: तीनों भुजाएँ और तीनों कोण बराबर। छहों भाग जाँचने की ज़रूरत नहीं। SAS, SSS, ASA, AAS या RHS में से कोई एक नियम काफ़ी है। SSA काफ़ी नहीं है। समद्विबाहु त्रिभुज में बराबर भुजाओं के सामने के कोण बराबर होते हैं, और इसका उल्टा भी सच है।
- कोण का समद्विभाजक – कोण का समद्विभाजक वह किरण है जो कोण को दो बराबर भागों में बाँटती है। इस किरण का हर बिंदु कोण की दोनों भुजाओं से बराबर दूर होता है, और जो बिंदु दोनों भुजाओं से बराबर दूर हो वह इसी किरण पर होता है। इसे सिर्फ परकार और पटरी से बनाया जा सकता है।
- यूक्लिड की ज्यामिति: परिभाषाएँ, अभिगृहीत और पाँच अभिधारणाएँ – ज्यामिति की शुरुआत मिस्र, भारत और मेसोपोटामिया में ज़मीन और वेदियाँ नापने से हुई। भारत के शुल्बसूत्रों (जैसे बौधायन) में रस्सी से वर्ग बनाने, वर्ग को दुगना करने और विकर्ण के नियम दिए गए। लगभग 300 ई.पू. में अलेक्ज़ेंड्रिया के यूक्लिड ने ज्यामिति को तर्क की एक कड़ी बना दिया: कुछ परिभाषाओं, सामान्य-समझ वाले अभिगृहीतों और पाँच अभिधारणाओं से शुरू करो, और बाकी सब सिद्ध करो। पाँचवीं अभिधारणा बताती है कि दो रेखाएँ कब मिलती हैं, और इसी से समांतर रेखाओं का विचार आता है।
3. Ch.15 Axial symmetry
Axial symmetry; perpendicular bisector · Drawing symmetric figures · Isosceles and equilateral triangles · Sides vs angles inequality · Practice: shortest path
- सममिति: दर्पण रेखा, केंद्र और समद्विभाजक – जब किसी आकृति का एक भाग दूसरे भाग की बिल्कुल नक़ल हो, तो वह सममित है। रेखा (अक्षीय) सममिति में नक़ल एक रेखा के पार दर्पण प्रतिबिंब होती है। बिंदु (केंद्रीय) सममिति में आकृति को एक केंद्र के चारों ओर आधा चक्कर (180°) घुमाने पर वही आकृति मिलती है। रेखाखंड का लंब समद्विभाजक और कोण का समद्विभाजक भी सममित रेखाएँ हैं, इसलिए उन पर हर बिंदु दो चीज़ों से बराबर दूर होता है।
- त्रिभुजों की सर्वांगसमता – दो त्रिभुज सर्वांगसम (congruent) होते हैं जब एक को दूसरे पर रखने से वह पूरा ढक जाए: तीनों भुजाएँ और तीनों कोण बराबर। छहों भाग जाँचने की ज़रूरत नहीं। SAS, SSS, ASA, AAS या RHS में से कोई एक नियम काफ़ी है। SSA काफ़ी नहीं है। समद्विबाहु त्रिभुज में बराबर भुजाओं के सामने के कोण बराबर होते हैं, और इसका उल्टा भी सच है।
- परावर्तन से सबसे छोटा रास्ता – A और B सीधी सड़क के एक ही तरफ़ हैं। A से सड़क छूकर B जाना है। B को सड़क के पार पलटकर B′ बनाओ। सबसे छोटा रास्ता A से B′ तक सीधी रेखा है। यह रेखा सड़क को जहाँ काटे, वही सबसे अच्छा रुकने का बिंदु P है। कारण: सड़क पर हर P के लिए PB = PB′, इसलिए AP + PB = AP + PB′ और सीधी रेखा सबसे छोटी होती है।
4. Ch.16 Multiplying polynomials
Laws of powers · Multiplying polynomials · Difference of squares; perfect squares · Yang Hui triangle
- घातांक के नियम – घातांक बताता है कि आधार को कितनी बार खुद से गुणा किया गया। एक ही आधार हो तो: गुणा → घातांक जोड़ें, भाग → घटाएँ, घात की घात → गुणा करें। a⁰ = 1, a⁻ⁿ = 1/aⁿ और a^(1/n) = n-वाँ मूल।
- बहुपदों का गुणन – बहुपदों का गुणा करने के लिए पहले के हर पद को दूसरे के हर पद से गुणा करो (बंटन नियम), फिर समान पद जोड़ो। गुणांक आपस में गुणा होते हैं; एक ही अक्षर की घातें जुड़ती हैं (x² · x³ = x⁵)। टाइलों का आयत हर गुणनफल दिखाता है: (x + 2)(x + 3) = x² + 3x + 2x + 6 = x² + 5x + 6। बहुपद को एकपदी से भाग देने के लिए हर पद को अलग-अलग भाग दो।
- बीजीय सर्वसमिकाओं की खोज – सर्वसमिका (identity) ऐसा समीकरण है जो अक्षरों के हर मान के लिए सही हो। चित्र से इन्हें साबित करते हैं: भुजा (a + b) का वर्ग a², ab, ab और b² में बँटता है, इसलिए (a + b)² = a² + 2ab + b². ऐसे ही (a − b)², a² − b² = (a + b)(a − b), (x + a)(x + b), (a + b + c)² और (a + b)³ मिलते हैं। उल्टा पढ़ें तो ये गुणनखंड, तेज़ गणना और परिमेय व्यंजक सरल करने में मदद करती हैं।
- यांग हुई (पास्कल) त्रिभुज – यांग हुई त्रिभुज में सबसे ऊपर 1 होता है। नीचे की हर संख्या, ऊपर की दो संख्याओं का जोड़ होती है और किनारे सब 1 होते हैं। पंक्ति n से (a + b)ⁿ के गुणांक मिलते हैं। जैसे पंक्ति 4 (1 4 6 4 1) से (a + b)⁴ = a⁴ + 4a³b + 6a²b² + 4ab³ + b⁴। हर पंक्ति सममित है और उसका जोड़ 2ⁿ है। यूरोप में इसे पास्कल त्रिभुज और भारत में मेरु प्रस्तार कहते हैं।
5. Ch.17 Factorisation
Common factor method · Using identities · x²+(p+q)x+pq type
- बीजीय सर्वसमिकाओं की खोज – सर्वसमिका (identity) ऐसा समीकरण है जो अक्षरों के हर मान के लिए सही हो। चित्र से इन्हें साबित करते हैं: भुजा (a + b) का वर्ग a², ab, ab और b² में बँटता है, इसलिए (a + b)² = a² + 2ab + b². ऐसे ही (a − b)², a² − b² = (a + b)(a − b), (x + a)(x + b), (a + b + c)² और (a + b)³ मिलते हैं। उल्टा पढ़ें तो ये गुणनखंड, तेज़ गणना और परिमेय व्यंजक सरल करने में मदद करती हैं।
6. Ch.18 Fractional expressions
Fractional expressions and basic property · Multiplying and dividing · Adding and subtracting · Integer exponents · Fractional equations
- घातांक के नियम – घातांक बताता है कि आधार को कितनी बार खुद से गुणा किया गया। एक ही आधार हो तो: गुणा → घातांक जोड़ें, भाग → घटाएँ, घात की घात → गुणा करें। a⁰ = 1, a⁻ⁿ = 1/aⁿ और a^(1/n) = n-वाँ मूल।
- भिन्नात्मक (परिमेय) समीकरण – भिन्नात्मक या परिमेय समीकरण में अज्ञात x किसी भिन्न के हर में होता है। पहले वे मान लिखिए जिनसे कोई हर शून्य हो जाए: ये मना हैं। फिर हर पद को सबसे छोटे सार्व हर (LCM) से गुणा करके भिन्न हटाइए और बचे समीकरण को हल कीजिए (अक्सर रैखिक या द्विघात)। अंत में हर मूल जाँचिए: जो मूल मना मान हो, वह बाहरी मूल है और हटा दिया जाता है। नाव-धारा और मिलकर काम करने जैसे दर वाले प्रश्न भी इसी तरह हल होते हैं।
7. Ch.19 Quadratic radicals
Radicals and properties · Multiplication and division · Addition and subtraction
- अपरिमेय संख्याएँ: √2, √3, वर्गमूल सर्पिल और वास्तविक संख्याएँ – अपरिमेय संख्या को p/q के रूप में नहीं लिख सकते। इसका दशमलव न कभी खत्म होता है, न दोहराता है, जैसे √2 = 1.41421356… या π। फिर भी √2 को संख्या रेखा पर ठीक-ठीक दिखा सकते हैं: यह 1 भुजा वाले वर्ग का विकर्ण है। √2 और √3 अपरिमेय हैं, यह हम मानकर सिद्ध करते हैं कि वे सरलतम भिन्न हैं और फिर विरोधाभास पाते हैं। वर्गमूल सर्पिल एक-एक समकोण त्रिभुज जोड़कर √2, √3, √4, √5 … बनाता है। परिमेय और अपरिमेय मिलकर वास्तविक संख्याएँ बनाते हैं; हर आवर्ती दशमलव को वापस p/q में बदल सकते हैं।
8. Ch.20 Pythagorean theorem
Pythagorean theorem and uses · Converse and uses
- पाइथागोरस प्रमेय – किसी भी समकोण त्रिभुज में सबसे लंबी भुजा (कर्ण) का वर्ग बाकी दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर होता है: a² + b² = c²।
9. Ch.21 Quadrilaterals
Quadrilaterals and polygons (angle sums) · Parallelograms; midline theorem · Rectangles, rhombuses, squares
- चतुर्भुज – चतुर्भुज की 4 भुजाएँ और 4 कोण होते हैं, कोणों का जोड़ 360° है। समांतर चतुर्भुज में आमने-सामने की भुजाएँ समांतर और बराबर, सम्मुख कोण बराबर, और विकर्ण एक-दूसरे को आधा-आधा काटते हैं। ये बातें जाँच के तौर पर भी काम आती हैं। त्रिभुज की दो भुजाओं के मध्य-बिंदुओं को मिलाने वाली रेखा तीसरी भुजा के समांतर और उसकी आधी होती है। तीनों माध्यिकाएँ एक बिंदु पर मिलती हैं जो हर माध्यिका को 2 : 1 में बाँटता है।
10. Ch.22 Functions
Concept of function · Representing functions
- फलन: इनपुट, नियम, आउटपुट – फलन (function) ऐसा नियम है जो हर इनपुट के लिए ठीक एक आउटपुट देता है। इसे f(x) लिखते हैं। f(a) को a का प्रतिबिंब (image) कहते हैं; जो इनपुट कोई दिया हुआ आउटपुट दे, वह पूर्व-प्रतिबिंब (preimage) है। फलन को शब्दों, सारणी, सूत्र या ग्राफ़ से दिखा सकते हैं। ग्राफ़ ऊपर जा सकता है (वर्धमान), नीचे जा सकता है (ह्रासमान), और उसका सबसे ऊँचा (अधिकतम) या सबसे नीचा (न्यूनतम) बिंदु हो सकता है।
11. Ch.23 Linear functions
Linear function concept · Graphs and properties · Links to equations and inequalities · Real problems · Practice: music and mathematics
- रैखिक फलन (Linear Functions) – रैखिक फलन में x के हर 1 बढ़ने पर y में हमेशा एक बराबर मात्रा जुड़ती है। इसका नियम y = mx + c है (कहीं f(x) = mx + b भी लिखते हैं)। m ढाल है: ऊपर ÷ आगे, यानी x में 1 बढ़ने पर y का बदलाव। c, y-अंतःखंड है: x = 0 पर y का मान। इसका ग्राफ़ हमेशा सीधी रेखा होता है।
- दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म – a₁x + b₁y = c₁ और a₂x + b₂y = c₂ जैसे दो समीकरण दो सीधी रेखाएँ बनाते हैं। जो (x, y) दोनों को सही करे, वह इन रेखाओं का मिलने का बिंदु है। रेखाएँ काटें तो एक हल, समांतर हों तो कोई हल नहीं, और एक-दूसरे पर पड़ी हों तो अनंत हल। हल ग्राफ से, प्रतिस्थापन से या विलोपन से निकालते हैं।
- संगीत में गणित – ध्वनि एक तरंग है। उसकी आवृत्ति f (हर्ट्ज़ में) ही तारत्व (सुर की ऊँचाई) है और आवर्तकाल T = 1 / f। 1 : 2 अनुपात की लंबाई वाले तार एक सप्तक का अंतर देते हैं, 2 : 3 पंचम का। पियानो के एक सप्तक में 12 बराबर सीढ़ियाँ होती हैं, हर सीढ़ी 2^(1/12) = 1.0595 गुना। ताल एक आवर्त को भिन्नों में बाँटती है, जैसे 3 + 3 + 2 = 8 मात्राएँ।
12. Ch.24 Data analysis
Central tendency (mean, weighted mean, median, mode) · Spread (variance) · Quartiles and box plots · Grouping data · Practice: student fitness survey
- सांख्यिकी: प्रश्न पूछना, औसत और स्टैक्ड दंड आलेख – सांख्यिकी एक ऐसे प्रश्न से शुरू होती है जिसके कई जवाब हो सकते हैं। हम आँकड़े इकट्ठा करते हैं, उन्हें व्यवस्थित करते हैं, ग्राफ बनाते हैं और एक संख्या निकालते हैं जो सबका सार बताए। माध्य बराबर का हिस्सा है, माध्यिका बीच का मान है और बहुलक सबसे ज़्यादा आने वाला मान है। भारित माध्य कुछ मानों को ज़्यादा महत्व देता है। स्टैक्ड और 100% स्टैक्ड दंड आलेख दिखाते हैं कि पूरा हिस्सों में कैसे बँटा है।
- प्रकीर्णन की माप: परिसर, माध्य विचलन, प्रसरण और मानक विचलन – प्रकीर्णन का मतलब है फैलाव: मान बीच (केंद्र) से कितनी दूर हैं। परिसर = सबसे बड़ा − सबसे छोटा। माध्य विचलन = माध्य (या माध्यिका) से औसत दूरी। प्रसरण = माध्य से दूरियों के वर्गों का औसत। मानक विचलन = √प्रसरण। वर्गीकृत आँकड़ों में हर पद को बारंबारता f से गुणा करते हैं।
- छात्र फिटनेस सर्वे: शुरू से अंत तक डेटा प्रोजेक्ट – सर्वे प्रोजेक्ट के दो भाग हैं। पहले निष्पक्ष तरीके से डेटा इकट्ठा करो: एक सवाल, एक टेस्ट, सबके लिए एक जैसे नियम, इकाई के साथ परिणाम। फिर विश्लेषण करो: क्रम में लगाओ, माध्य, मध्यिका और चतुर्थक निकालो, बॉक्स प्लॉट बनाओ और साफ़ निष्कर्ष व एक ईमानदार सीमा के साथ छोटी रिपोर्ट लिखो।