ज्यामिति का इतिहास
ज्यामिति (geometry) शब्द यूनानी भाषा से आया है, जिसका अर्थ है धरती को नापना। नदी की बाढ़ के बाद खेतों की सीमाएँ फिर से बनाने, घर बनाने और मंदिर व यज्ञ-वेदियाँ बनाने के लिए इसकी ज़रूरत थी।
- मिस्र और मेसोपोटामिया: खेतों के क्षेत्रफल और अनाज के भंडार के आयतन के नियम, ज़्यादातर बिना कारण बताए।
- भारत: हड़प्पा के नगरों (लगभग 2500 ई.पू.) में सुनियोजित सड़कें और तय अनुपात वाली ईंटें थीं। बाद में शुल्बसूत्रों (लगभग 800–500 ई.पू.) में वेदियाँ बनाने के लिए रस्सी के सटीक नियम दिए गए।
- यूनान: थेल्स और पाइथागोरस जैसे विचारकों ने पूछना शुरू किया कि कोई नियम क्यों सही है। लगभग 300 ई.पू. में अलेक्ज़ेंड्रिया के यूक्लिड ने ज्यामिति को एलिमेंट्स नाम की पुस्तकों में इकट्ठा किया, जहाँ हर परिणाम सरल शुरुआती बातों से सिद्ध किया गया।
यूक्लिड का बड़ा विचार उनकी विधि है: कुछ स्पष्ट बातें मान लो, फिर बाकी सब चरण-दर-चरण सिद्ध करो। आज पूरा गणित इसी तरह चलता है।
बौधायन के शुल्बसूत्र में वर्ग
शुल्बसूत्र भारतीय ग्रंथ हैं, जिनमें शुल्ब (रस्सी या डोरी) से ठीक आकार और माप की वेदियाँ बनाने की विधि है। बौधायन का शुल्बसूत्र सबसे पुराने में से एक है।
रस्सी से वर्ग बनाना
एक भुजा के लिए दो खूँटियाँ गाड़ो। रस्सी से बराबर दूरी के निशान लगाकर हर कोने पर समकोण बनाओ (जैसे 3 : 4 : 5 अनुपात में गाँठ लगी रस्सी से), फिर चारों बराबर भुजाएँ पूरी करो।
वर्ग को दुगना करना
किसी वर्ग के विकर्ण पर तानी गई रस्सी से बना नया वर्ग दुगने क्षेत्रफल का होता है। भुजा 1 हो तो विकर्ण वाले वर्ग का क्षेत्रफल 2, यानी विकर्ण √2। बौधायन ने √2 का बहुत पास का मान (लगभग 1.4142) भी दिया।
विकर्ण का नियम
आयत के विकर्ण पर बना वर्ग = लंबाई पर बना वर्ग + चौड़ाई पर बना वर्ग। यही वह परिणाम है जिसे आज हम पाइथागोरस प्रमेय कहते हैं: d² = l² + b²।
परिभाषाएँ, अभिगृहीत और पाँच अभिधारणाएँ
परिभाषाएँ
यूक्लिड ने मूल शब्दों का वर्णन किया: बिंदु वह है जिसका कोई भाग नहीं; रेखा चौड़ाई रहित लंबाई है; रेखा के सिरे बिंदु हैं; पृष्ठ में केवल लंबाई और चौड़ाई होती है। इन वर्णनों में ऐसे शब्द आते हैं जिनकी परिभाषा नहीं दी गई, इसलिए आज बिंदु, रेखा और तल को अपरिभाषित पद मानते हैं, जिन्हें हम चित्रों से समझते हैं।
अभिगृहीत (पूरे गणित में सही)
- जो चीज़ें एक ही चीज़ के बराबर हों, वे आपस में बराबर होती हैं।
- बराबर में बराबर जोड़ें तो पूर्ण बराबर होते हैं।
- बराबर में से बराबर घटाएँ तो शेष बराबर होते हैं।
- जो चीज़ें एक-दूसरे से संपाती हों (ठीक ढक लें), वे बराबर होती हैं।
- पूर्ण अपने भाग से बड़ा होता है।
- एक ही चीज़ के दुगने आपस में बराबर होते हैं।
- एक ही चीज़ के आधे आपस में बराबर होते हैं।
अभिधारणाएँ (केवल ज्यामिति के लिए)
- किसी एक बिंदु से किसी दूसरे बिंदु तक एक सीधी रेखा खींची जा सकती है (और वह अद्वितीय है)।
- एक सांत रेखा (रेखाखंड) को अनिश्चित रूप से बढ़ाया जा सकता है।
- किसी भी केंद्र और किसी भी त्रिज्या से वृत्त खींचा जा सकता है।
- सभी समकोण एक-दूसरे के बराबर होते हैं।
- अगर एक रेखा दो रेखाओं पर पड़कर एक ओर के अंतः कोणों का योग दो समकोण (180°) से कम बनाए, तो दोनों रेखाएँ बढ़ाने पर उसी ओर मिलती हैं।
अभिगृहीत हर जगह काम आने वाला सामान्य तथ्य है; अभिधारणा ज्यामिति के बारे में मानी गई बात है। प्रमेय वह कथन है जो इनसे सिद्ध किया जाता है। उदाहरण प्रमेय: दो भिन्न रेखाओं में एक से अधिक बिंदु उभयनिष्ठ नहीं हो सकता।
पाँचवीं अभिधारणा का तुल्य रूप
प्लेफ़ेयर का रूप: किसी रेखा के बाहर के बिंदु से उसके समांतर केवल एक रेखा खींची जा सकती है। 2000 साल तक लोगों ने इसे बाकी चार से सिद्ध करने की कोशिश की और असफल रहे; इसी से नई, अयूक्लिडीय ज्यामितियाँ बनीं।
ख़ुद करके देखो (प्रयोग)
वर्ग दुगना करो: 10 cm भुजा का कागज़ का वर्ग काटो। विकर्ण नापो (लगभग 14.1 cm)। 14.1 cm भुजा का वर्ग बनाओ। अब 10 cm के दो और वर्ग काटकर हर एक को एक विकर्ण से आधा करो। ये 4 आधे-वर्ग बड़े वर्ग में ठीक समा जाते हैं, लंबी भुजा किनारों पर। यानी क्षेत्रफल दुगना है।
डोरी से वृत्त: पेंसिल से डोरी बाँधो, दूसरा सिरा एक जगह दबाकर रखो और घुमाओ। यही अभिधारणा 3 है।
3D में: आख़िरी चरण पर जाओ। अनुमान लगाओ: 90° और 90° पर क्या रेखाएँ मिलेंगी? फिर जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अभिगृहीत 1: a = c और b = c हो, तो a = b
- अभिगृहीत 5: पूर्ण > उसका कोई भी भाग
- अभिधारणा 1: दो बिंदु → ठीक एक रेखा
- अभिधारणा 5: अंतः कोण < 180° → रेखाएँ उसी ओर मिलती हैं
- प्लेफ़ेयर: बाहर के बिंदु से केवल एक समांतर रेखा
- बौधायन: विकर्ण² = लंबाई² + चौड़ाई²; विकर्ण वाला वर्ग = 2 × मूल वर्ग
हल किए गए उदाहरण
1. AB = PQ और PQ = XY है। AB और XY के बारे में क्या कह सकते हो? कौन-सा अभिगृहीत?
AB = XY। जो चीज़ें एक ही चीज़ के बराबर हों, वे आपस में बराबर होती हैं (अभिगृहीत 1)।
2. बिंदु C, रेखा पर A और B के बीच है और AC = BC। दिखाओ कि AC = ½ AB।
AC + BC = AB (C बीच में है, तो भाग मिलकर पूर्ण बनाते हैं)। AC = BC, तो AC + AC = AB, यानी 2AC = AB और AC = ½ AB। (एक ही चीज़ के दुगने बराबर होते हैं।)
3. (a) एक बिंदु से, (b) दो भिन्न बिंदुओं से कितनी रेखाएँ गुज़र सकती हैं?
(a) अनगिनत रेखाएँ। (b) ठीक एक रेखा (अभिधारणा 1)।
4. एक वर्गाकार वेदी की भुजा 3 m है। उसके विकर्ण पर बने वर्ग का क्षेत्रफल कितना है?
वेदी का क्षेत्रफल = 9 m²। विकर्ण वाला वर्ग दुगना: 18 m²। (विकर्ण = 3√2 m, और (3√2)² = 18।)
5. सिद्ध करो कि हर रेखाखंड का एक और केवल एक मध्य-बिंदु होता है।
मान लो AB के दो मध्य-बिंदु C और D हैं। तब AC = ½AB और AD = ½AB, तो AC = AD (एक ही चीज़ के बराबर)। यह तभी हो सकता है जब C और D एक ही बिंदु हों। इसलिए मध्य-बिंदु एक ही है।
6. एक तिर्यक रेखा दो रेखाओं के साथ दाईं ओर 85° और 90° के अंतः कोण बनाती है। रेखाएँ कहाँ मिलेंगी?
85° + 90° = 175°, जो 180° से कम है। अभिधारणा 5 से रेखाएँ दाईं ओर मिलेंगी।
आम गलतियाँ
- अभिगृहीत और अभिधारणा में उलझना: अभिगृहीत पूरे गणित के सामान्य तथ्य हैं; अभिधारणाएँ ज्यामिति के लिए यूक्लिड की मान्यताएँ हैं।
- यह सोचना कि अभिधारणा सिद्ध की जाती है: अभिगृहीत और अभिधारणाएँ बिना प्रमाण मानी जाती हैं; प्रमेय सिद्ध किए जाते हैं।
- पाँचवीं अभिधारणा उल्टी पढ़ना: रेखाएँ उस ओर मिलती हैं जहाँ अंतः कोणों का योग 180° से कम हो।
- रेखा की मोटाई या सिरा मानना: ज्यामिति की रेखा में चौड़ाई नहीं होती और वह दोनों ओर अनंत तक जाती है।