निर्देशांक तल का छोटा-सा इतिहास
बहुत समय तक बीजगणित (संख्याएँ और अक्षर) और ज्यामिति (आकृतियाँ) अलग-अलग विषय थे। 1600 के दशक में फ़्रांस के विचारक रेने देकार्त ने इन्हें जोड़ा। उनका विचार सरल था: हर बिंदु को दो संख्याएँ दो। एक मशहूर कहानी है कि छत पर बैठी मक्खी को देखकर उन्होंने सोचा कि उसकी जगह ठीक-ठीक कैसे बताई जाए।
लगभग उसी समय पियरे द फ़र्मा ने भी ऐसा ही सोचा। देकार्त के लैटिन नाम कार्टेसियस से इसे कार्तीय तल कहते हैं। इससे बहुत पहले भारत और यूनान के गणितज्ञ वेदियाँ और मंदिर बनाते समय ज़मीन पर ग्रिड और नाप का उपयोग करते थे।
आज यही विचार नक्शों, कंप्यूटर स्क्रीन (हर पिक्सेल का पता (x, y)), वीडियो गेम और GPS में काम आता है।
द्वि-विमीय निर्देशांक और फ़र्श का नक्शा
दो संख्या रेखाएँ लो। एक को बाएँ-दाएँ बिछाओ: यह x-अक्ष है। दूसरी को नीचे-ऊपर खड़ा करो: यह y-अक्ष है। ये मूल बिंदु O(0, 0) पर समकोण बनाते हुए काटती हैं।
- बिंदु की पहली संख्या x-निर्देशांक या भुज है। यह बताती है कि कितना दाएँ (+) या बाएँ (−) जाना है।
- दूसरी संख्या y-निर्देशांक या कोटि है। यह बताती है कि कितना ऊपर (+) या नीचे (−) जाना है।
- (x, y) एक क्रमित युग्म है: क्रम ज़रूरी है। (3, 2) और (2, 3) अलग बिंदु हैं।
चार चतुर्थांश
अक्ष तल को चार भागों में बाँटते हैं, जिन्हें चतुर्थांश कहते हैं। ऊपर-दाएँ से शुरू करके घड़ी की उल्टी दिशा में गिनते हैं।
| चतुर्थांश | चिह्न (x, y) | उदाहरण |
|---|---|---|
| I | (+, +) | (3, 2) |
| II | (−, +) | (−4, 1) |
| III | (−, −) | (−2, −3) |
| IV | (+, −) | (5, −1) |
अक्ष पर पड़ा बिंदु किसी चतुर्थांश में नहीं होता। x-अक्ष पर बिंदु (a, 0) जैसा और y-अक्ष पर (0, b) जैसा होता है।
फ़र्श का नक्शा
फ़र्श का नक्शा पैमाने पर बना कार्तीय तल ही है। अगर कागज़ का एक खाना 1 मीटर हो, तो 5 × 4 खानों का कमरा 5 m × 4 m का है। कमरे के एक कोने को मूल बिंदु मानो, फिर हर दरवाज़े, खिड़की और अलमारी का पता लिख सकते हो।
दो बिंदुओं के बीच की दूरी
A(x₁, y₁) से B(x₂, y₂) तक जाने के लिए पहले आड़ा चलो (x का अंतर = x₂ − x₁), फिर ऊपर चलो (y का अंतर = y₂ − y₁)। ये दोनों रास्ते समकोण पर मिलते हैं, इसलिए AB एक समकोण त्रिभुज का कर्ण है। पाइथागोरस से:
AB = √[(x₂ − x₁)² + (y₂ − y₁)²]
ख़ास बातें: एक ही आड़ी रेखा के दो बिंदुओं की दूरी |x₂ − x₁| है; बिंदु (x, y) की मूल बिंदु से दूरी √(x² + y²) है। अंतर का वर्ग लेते हैं, इसलिए ऋणात्मक अंतर से कोई दिक्कत नहीं।
रेखाखंड का मध्य-बिंदु
AB का मध्य-बिंदु M ठीक बीच में होता है। आधा आड़ा = x का औसत, और आधा ऊपर = y का औसत:
M = ((x₁ + x₂)/2, (y₁ + y₂)/2)
जाँच: AM और MB बराबर होने चाहिए। अगर एक सिरा A और मध्य-बिंदु M पता हो, तो दूसरा सिरा B = (2 × Mx − x₁, 2 × My − y₁)।
संरेखता और समकोण की जाँच
तीनों दूरियाँ AB, BC और AC निकालो। सबसे बड़ी को लंबी भुजा कहो।
- संरेख (एक सीधी रेखा पर): दो छोटी दूरियों का योग ठीक लंबी दूरी के बराबर। जैसे 2√5 + √5 = 3√5।
- समकोण: दो छोटी भुजाओं के वर्गों का योग = लंबी भुजा का वर्ग (पाइथागोरस का विलोम)। समकोण लंबी भुजा के सामने वाले बिंदु पर होता है।
- नहीं तो बिंदु एक साधारण त्रिभुज बनाते हैं।
सुझाव: पहले वर्ग (AB², BC², AC²) की तुलना करो; ये पूर्ण संख्याएँ होते हैं और वर्गमूल की उलझन नहीं होती।
ख़ुद करके देखो (प्रयोग)
घर पर: टाइलों वाला फ़र्श चुनो। एक टाइल के कोने पर चप्पल रखो: यह मूल बिंदु है। टाइल (3, 4) पर खड़े हो जाओ। चप्पल तक सीधा धागा तानो और टाइल की चौड़ाई से नापो। पहले अनुमान लगाओ: √(9 + 16) = 5 टाइल। फिर जाँचो।
नक्शा: खानेदार कागज़ पर अपना कमरा बनाओ, 1 खाना = 50 cm। दरवाज़े और पलंग के निर्देशांक लिखो।
3D में: आख़िरी चरण पर जाओ। A(−3, −2) पर है। अनुमान लगाओ कि C कहाँ हो ताकि A, B(0, 0), C संरेख हों (संकेत: (6, 4) आज़माओ)। फिर स्लाइडर से जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- बिंदु P(x, y): x = भुज (आड़ा), y = कोटि (ऊपर)
- दूरी AB = √[(x₂ − x₁)² + (y₂ − y₁)²]
- मूल बिंदु से दूरी = √(x² + y²)
- मध्य-बिंदु M = ((x₁ + x₂)/2, (y₁ + y₂)/2)
- संरेख: AB + BC = AC (लंबी भुजा)
- B पर समकोण: AB² + BC² = AC²
हल किए गए उदाहरण
1. ये बिंदु किस चतुर्थांश में या किस अक्ष पर हैं: (−3, 5), (4, −2), (0, −6)?
(−3, 5): x ऋणात्मक, y धनात्मक → चतुर्थांश II। (4, −2): x धनात्मक, y ऋणात्मक → चतुर्थांश IV। (0, −6): x = 0 → y-अक्ष पर (किसी चतुर्थांश में नहीं)।
2. A(2, 3) और B(8, 11) के बीच की दूरी निकालो।
x का अंतर = 8 − 2 = 6। y का अंतर = 11 − 3 = 8। AB = √(36 + 64) = √100 = 10 इकाई।
3. P(−5, 12) की मूल बिंदु से दूरी निकालो।
OP = √((−5)² + 12²) = √(25 + 144) = √169 = 13 इकाई।
4. A(−6, 4) और B(2, −8) का मध्य-बिंदु निकालो।
x = (−6 + 2)/2 = −2। y = (4 + (−8))/2 = −2। M = (−2, −2)।
5. M(3, 1) रेखाखंड AB का मध्य-बिंदु है और A = (1, −2)। B निकालो।
(1 + x)/2 = 3 → x = 5। (−2 + y)/2 = 1 → y = 4। B = (5, 4)।
6. कमरे के नक्शे में 1 खाना = 1 m है। दरवाज़ा (0, 2) पर और खिड़की (6, 10) पर है। दोनों कितनी दूर हैं?
अंतर: 6 और 8। दूरी = √(36 + 64) = 10 खाने = 10 m।
7. क्या A(1, 2), B(3, 6), C(4, 8) संरेख हैं?
AB = √(4 + 16) = √20 = 2√5। BC = √(1 + 4) = √5। AC = √(9 + 36) = √45 = 3√5। AB + BC = 3√5 = AC, तो हाँ, संरेख हैं।
8. दिखाओ कि A(1, 1), B(4, 1), C(4, 5) समकोण त्रिभुज बनाते हैं।
AB² = 9, BC² = 16, AC² = 9 + 16 = 25। AB² + BC² = 25 = AC², तो B पर कोण 90° है। (AB आड़ी है और BC सीधी ऊपर।)
आम गलतियाँ
- क्रम उलट देना: (2, 5) का मतलब 2 आड़ा और 5 ऊपर है, 5 आड़ा और 2 ऊपर नहीं।
- दूरी सूत्र में वर्गमूल भूल जाना: √25 = 5 है, 25 नहीं।
- मध्य-बिंदु में जोड़ने की जगह घटाना: यह (x₁ + x₂)/2 है, यानी औसत।
- (0, 4) जैसे बिंदु को चतुर्थांश I में मानना: अक्ष पर पड़ा बिंदु किसी चतुर्थांश में नहीं होता।