Russia 7 класс Geometry (advanced)
अध्याय: 7
1. Beginnings of geometry
Basic concepts and axioms
- यूक्लिड की ज्यामिति: परिभाषाएँ, अभिगृहीत और पाँच अभिधारणाएँ – ज्यामिति की शुरुआत मिस्र, भारत और मेसोपोटामिया में ज़मीन और वेदियाँ नापने से हुई। भारत के शुल्बसूत्रों (जैसे बौधायन) में रस्सी से वर्ग बनाने, वर्ग को दुगना करने और विकर्ण के नियम दिए गए। लगभग 300 ई.पू. में अलेक्ज़ेंड्रिया के यूक्लिड ने ज्यामिति को तर्क की एक कड़ी बना दिया: कुछ परिभाषाओं, सामान्य-समझ वाले अभिगृहीतों और पाँच अभिधारणाओं से शुरू करो, और बाकी सब सिद्ध करो। पाँचवीं अभिधारणा बताती है कि दो रेखाएँ कब मिलती हैं, और इसी से समांतर रेखाओं का विचार आता है।
2. Triangles
Congruence tests
- त्रिभुजों की सर्वांगसमता – दो त्रिभुज सर्वांगसम (congruent) होते हैं जब एक को दूसरे पर रखने से वह पूरा ढक जाए: तीनों भुजाएँ और तीनों कोण बराबर। छहों भाग जाँचने की ज़रूरत नहीं। SAS, SSS, ASA, AAS या RHS में से कोई एक नियम काफ़ी है। SSA काफ़ी नहीं है। समद्विबाहु त्रिभुज में बराबर भुजाओं के सामने के कोण बराबर होते हैं, और इसका उल्टा भी सच है।
3. Parallel lines and polygon angles
Parallel lines · Angle sums
- रेखाएँ और कोण: रैखिक युग्म, शीर्षाभिमुख कोण और समांतर रेखाएँ – एक ही बिंदु से निकली दो किरणों के बीच का घुमाव कोण है। सीधी रेखा पर बने दो आसन्न कोणों का योग 180° होता है (रैखिक युग्म)। दो रेखाएँ काटें तो आमने-सामने के कोण बराबर होते हैं। तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को काटे तो संगत कोण बराबर, एकांतर अंतः कोण बराबर, और एक ही ओर के अंतः कोणों का योग 180° होता है। उल्टी बात भी सच है, और ऐसी बातें हम विरोधाभास से सिद्ध कर सकते हैं: उल्टा मान लो और दिखाओ कि इससे कुछ असंभव निकलता है।
4. Right triangles
Right triangles
- समकोण त्रिभुज (Right Triangles) – समकोण त्रिभुज में एक कोण 90° का होता है। उसके सामने की भुजा कर्ण है; बाकी दो भुजाएँ पाद हैं। इसके दोनों न्यून कोणों का योग 90° होता है। कर्ण की माध्यिका कर्ण की आधी होती है। अगर एक कोण 30° हो तो उसके सामने का पाद कर्ण का आधा होता है। दो समकोण त्रिभुज HL, LL, LA या HA से सर्वांगसम होते हैं।
5. Circle
Circle
- वृत्त: जीवा, स्पर्श रेखा और त्रिभुज के वृत्त – वृत्त उन सब बिंदुओं का समूह है जो केंद्र से एक तय दूरी (त्रिज्या) पर हों। जीवा उस पर दो बिंदुओं को जोड़ती है; सबसे लंबी जीवा व्यास है। रेखा वृत्त को दो बिंदुओं पर काट सकती है (छेदक), एक पर छू सकती है (स्पर्श रेखा) या मिल ही न सकती है। स्पर्श रेखा त्रिज्या पर लंब होती है। हर त्रिभुज का एक अंतःवृत्त और एक परिवृत्त होता है।
6. Locus
Locus method
- बिंदुपथ: नियम मानने वाले बिंदु का रास्ता – बिंदुपथ (locus) उन सभी बिंदुओं का समूह है जो एक नियम मानते हैं, और कोई दूसरा बिंदु नहीं। एक बिंदु से तय दूरी = वृत्त। दो बिंदुओं से बराबर दूरी = लंब समद्विभाजक। दो कटती रेखाओं से बराबर दूरी = कोण समद्विभाजक। दो बिंदुपथ जहाँ मिलते हैं, वहाँ दोनों नियम सच होते हैं, जैसे परिवृत्त का केंद्र। जिन बिंदुओं से AB एक तय कोण पर दिखे, वे एक चाप पर होते हैं।
7. Constructions
Construction problems
- ज्यामितीय रचनाएँ: परकार और पटरी से सटीक चित्र – ज्यामितीय रचना में आकृति सिर्फ़ परकार (compass) और पटरी (सीधी रेखा के लिए) से सटीक बनाई जाती है। मुख्य रचनाएँ: रेखाखंड का लंब समद्विभाजक, कोण का समद्विभाजक, बिंदु से रेखा पर लंब, 60°, 30°, 90° और 45° के कोण, तीन भुजाओं (SSS), दो भुजाओं और बीच के कोण (SAS) या दो कोणों और एक भुजा (ASA) से त्रिभुज, और सम षट्भुज जैसे बहुभुज। ये इसलिए काम करती हैं क्योंकि बराबर चाप बराबर लंबाइयाँ देते हैं, जिनसे सर्वांगसम त्रिभुज बनते हैं।