रचना के औज़ार और नियम
रचना में सिर्फ़ दो औज़ार इस्तेमाल होते हैं:
- परकार: वृत्त और चाप बनाने और लंबाई उतारने के लिए;
- पटरी (सीधा किनारा): सीधी रेखा खींचने के लिए। दी गई लंबाई खींचने में पैमाना इस्तेमाल कर सकते हो, पर नतीजा नापने में नहीं।
नुकीली पेंसिल लो और सारे चाप दिखते रहने दो; ये तुम्हारा तरीका दिखाते हैं। चाँदा (protractor) सिर्फ़ जाँचने के लिए है।
लंब समद्विभाजक और बिंदु से लंब
AB का लंब समद्विभाजक (जो AB को 90° पर आधा काटे):
- परकार AB के आधे से ज़्यादा खोलो।
- A से AB के ऊपर और नीचे चाप लगाओ।
- उसी दूरी से B से चाप लगाओ जो पहले चापों को P और Q पर काटें।
- PQ जोड़ो। यह AB को मध्य-बिंदु M पर मिलती है।
क्यों काम करता है: P और Q, A और B दोनों से बराबर दूर हैं। PQ का हर बिंदु A और B से बराबर दूर है। ऐसी रेखा को बिंदुपथ (locus) कहते हैं: एक नियम मानने वाले सभी बिंदुओं का समूह।
बिंदु P से रेखा पर लंब: P से चाप लगाओ जो रेखा को दो बिंदुओं पर काटे; फिर उन दोनों का लंब समद्विभाजक बनाओ। वह P से होकर जाएगा।
कोण समद्विभाजक और खास कोण (60°, 30°, 90°, 45°)
कोण O का समद्विभाजक: O से चाप लगाओ जो दोनों भुजाओं को X और Y पर काटे। X और Y से बराबर चाप लगाओ जो Z पर मिलें। OZ जोड़ो। OZ का हर बिंदु दोनों भुजाओं से बराबर दूर है।
60°: O से एक किरण खींचो। किसी भी त्रिज्या से O से चाप लगाओ जो किरण को A पर काटे। उसी त्रिज्या से A से चाप लगाओ जो पहले चाप को B पर काटे। कोण AOB = 60°, क्योंकि त्रिभुज OAB की तीनों भुजाएँ बराबर हैं (समबाहु)।
- 30° = 60° को आधा करो।
- 120° = त्रिज्या दो बार रखो।
- 90° = लंब, या 60° और 120° के बीच को आधा करो।
- 45° = 90° को आधा करो।
त्रिभुज की रचना और त्रिभुज असमिका
तीन भुजाएँ (SSS): सबसे लंबी भुजा को आधार बनाओ। एक सिरे से दूसरी लंबाई का चाप, दूसरे सिरे से तीसरी लंबाई का चाप। जहाँ वे कटें, वही तीसरा शीर्ष है।
दो भुजाएँ और बीच का कोण (SAS): एक भुजा खींचो, एक सिरे पर कोण बनाओ, उस पर दूसरी भुजा नापकर निशान लगाओ और जोड़ो।
दो कोण और एक भुजा (ASA): भुजा खींचो, दोनों सिरों पर कोण बनाओ; किरणें तीसरे शीर्ष पर मिलती हैं।
त्रिभुज तभी बनता है जब किन्हीं दो भुजाओं का योग तीसरी से बड़ा हो (त्रिभुज असमिका)। अगर 2 + 3 ≤ 6, तो चाप कभी नहीं मिलेंगे।
सम बहुभुज और डिज़ाइन में रचनाएँ
सम षट्भुज: त्रिज्या r का वृत्त बनाओ। किसी बिंदु से शुरू कर वही त्रिज्या वृत्त पर रखते जाओ; यह ठीक 6 बार आती है। बिंदु जोड़ो। हर भुजा r के बराबर और केंद्र पर हर कोण 360° ÷ 6 = 60°।
- एक-एक छोड़कर बिंदु जोड़ो: समबाहु त्रिभुज।
- दो लंब व्यास से वर्ग; समकोणों को आधा करो तो सम अष्टभुज।
डिज़ाइनर इन्हें मिलाकर टाइलें, रंगोली जैसे पैटर्न, लोगो और तकनीकी चित्र बनाते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- लंब समद्विभाजक: A और B से बराबर दूर सभी बिंदु
- कोण समद्विभाजक: दोनों भुजाओं से बराबर दूर सभी बिंदु
- त्रिज्या वृत्त पर 6 बार → केंद्र पर 60°
- 30° = ½ × 60°; 45° = ½ × 90°; 90° = 60° + 30°
- त्रिभुज असमिका: हर जोड़ी के लिए a + b > c
- सम n-भुज का केंद्रीय कोण = 360° ÷ n
- सम n-भुज का अंतः कोण = (n − 2) × 180° ÷ n
हल किए गए उदाहरण
1. AB = 7 सेमी का लंब समद्विभाजक बनाओ और AM बताओ।
1) AB = 7 सेमी खींचो। 2) परकार लगभग 4.5 सेमी खोलो (3.5 से ज़्यादा)। 3) A से ऊपर-नीचे चाप। 4) उसी दूरी से B से चाप, P और Q पर कटान। 5) PQ जोड़ो, जो AB को M पर मिले। AM = MB = 3.5 सेमी और PQ ⟂ AB।
2. 75° का कोण बनाओ।
75° = 60° और 90° के ठीक बीच। 1) O पर एक ही किरण से 60° और 90° बनाओ। 2) इन दोनों रेखाओं के बीच का कोण आधा करो। समद्विभाजक किरण से 75° बनाता है।
3. क्या 3 सेमी, 4 सेमी और 8 सेमी भुजाओं से त्रिभुज बन सकता है?
नहीं। 3 + 4 = 7, जो 8 से कम है। 8 सेमी आधार के सिरों से 3 और 4 सेमी के चाप कभी नहीं मिलते।
4. त्रिभुज PQR बनाओ: PQ = 6 सेमी, ∠P = 60°, PR = 4 सेमी (SAS)।
1) PQ = 6 सेमी खींचो। 2) P पर 60° बनाओ। 3) परकार 4 सेमी खोलकर उस किरण पर R लगाओ। 4) QR जोड़ो।
5. 3 सेमी भुजा का सम षट्भुज बनाओ। इसके अंतः कोण कितने हैं?
1) 3 सेमी त्रिज्या का वृत्त बनाओ। 2) वृत्त पर 3 सेमी छह बार रखो। 3) बिंदु जोड़ो। अंतः कोण = (6 − 2) × 180° ÷ 6 = 120°।
6. त्रिभुज ABC बनाओ: BC = 5 सेमी, ∠B = 45°, ∠C = 60° (ASA)। ∠A कितना है?
1) BC = 5 सेमी खींचो। 2) B पर 45° (90° को आधा)। 3) C पर 60°। 4) किरणें A पर मिलती हैं। ∠A = 180° − 45° − 60° = 75°।
आम गलतियाँ
- A और B से चाप लगाते समय परकार की चौड़ाई बदल देना। दोनों बराबर होनी चाहिए।
- परकार AB के आधे से कम खोलना, जिससे चाप कटते ही नहीं।
- रचना के चाप मिटा देना। परीक्षक इन्हें ही देखते हैं।
- रचना वाले प्रश्न में चाँदे से कोण बनाना। परकार से बनाओ, फिर जाँचो।