National Year 9 Mathematics
अध्याय: 6
1. Number
Place value, ordering and integers · Factors, primes and powers · Calculation · Fractions, decimals, percentages · Measures and estimation
- स्थानीय मान, क्रम और ऋणात्मक संख्याएँ – हमारी संख्या पद्धति में हर स्थान अपने दाएँ वाले स्थान से 10 गुना होता है। अंक का मान = अंक × उसके स्थान का मान। तुलना के लिए स्थान मिलाओ और बाएँ से जाँचो। ऋणात्मक संख्याएँ शून्य के बाईं ओर होती हैं; जितनी बाएँ, उतनी छोटी।
- अंकगणित की आधारभूत प्रमेय – 1 से बड़ी हर पूर्ण संख्या या तो अभाज्य है, या अभाज्य संख्याओं का गुणनफल — और यह गुणनफल सिर्फ एक ही तरह से बनता है (क्रम बदल सकता है)। यही अंकगणित की आधारभूत प्रमेय है। HCF = सार्व अभाज्यों की सबसे छोटी घातों का गुणनफल; LCM = सभी अभाज्यों की सबसे बड़ी घातों का गुणनफल। दो संख्याओं के लिए HCF × LCM = a × b.
- भिन्न: चारों संक्रियाएँ आसान भाषा में – भिन्न किसी पूरे का हिस्सा है, जिसे बराबर टुकड़ों में बाँटा गया हो। नीचे की संख्या (हर) बताती है कि पूरा कितने टुकड़ों में बँटा है; ऊपर की संख्या (अंश) बताती है कि हमने कितने टुकड़े लिए। तुल्य भिन्न एक ही मात्रा के अलग नाम हैं (3/4 = 6/8)। जोड़ने-घटाने से पहले हर बराबर करो। गुणा में ऊपर × ऊपर, नीचे × नीचे। भाग में पहली भिन्न रखो, ÷ को × बनाओ और दूसरी को उलट दो। यही नियम दशमलव और ऋणात्मक संख्याओं पर भी लगते हैं, और BODMAS बताता है कि पहले कौन-सी क्रिया करनी है। उलटी संक्रिया से हर उत्तर जाँच सकते हो।
- प्रतिशत – प्रतिशत का अर्थ है "100 में से", इसलिए x% = x/100। किसी राशि का x% निकालने के लिए उसे x/100 से गुणा करें। प्रतिशत परिवर्तन = (परिवर्तन ÷ मूल) × 100। r% बढ़ाने के लिए (1 + r/100) से, r% घटाने के लिए (1 − r/100) से गुणा करें। क्रमागत परिवर्तनों में गुणकों को गुणा करते हैं। उल्टे प्रतिशत में नए मान को गुणक से भाग देते हैं।
- मापन और मात्रक: हम कुछ भी कैसे मापते हैं – किसी चीज़ को मापना यानी उसकी तुलना एक तय मात्रा से करना, जिसे मात्रक (इकाई) कहते हैं. हर माप में एक संख्या और एक मात्रक होता है. दुनिया भर के वैज्ञानिक SI पद्धति इस्तेमाल करते हैं, जिसमें मीटर, किलोग्राम और सेकंड जैसे सात मूल मात्रक हैं. किलो (×1000), सेंटी (÷100) और मिली (÷1000) जैसे उपसर्ग मात्रक को बड़ा या छोटा करते हैं. अच्छा माप शून्य से शुरू होता है, आँख निशान के ठीक ऊपर रखकर पढ़ा जाता है, और सबसे छोटे खाने (अल्पतमांक) जितना ही सटीक होता है. पूर्णांकित मान एक छोटी सीमा छिपाता है, जिसे ऊपरी और निचली सीमा बताती हैं.
2. Algebra
Expressions and formulae · Equations · Graphs · Sequences
- बीजीय सर्वसमिकाओं की खोज – सर्वसमिका (identity) ऐसा समीकरण है जो अक्षरों के हर मान के लिए सही हो। चित्र से इन्हें साबित करते हैं: भुजा (a + b) का वर्ग a², ab, ab और b² में बँटता है, इसलिए (a + b)² = a² + 2ab + b². ऐसे ही (a − b)², a² − b² = (a + b)(a − b), (x + a)(x + b), (a + b + c)² और (a + b)³ मिलते हैं। उल्टा पढ़ें तो ये गुणनखंड, तेज़ गणना और परिमेय व्यंजक सरल करने में मदद करती हैं।
- एक चर वाले रैखिक समीकरण – एक चर वाले रैखिक समीकरण में एक ही अज्ञात राशि (जैसे x) होती है और उसकी घात 1 होती है, जैसे 2x + 3 = 11। समीकरण एक तराज़ू जैसा है: दोनों पक्ष बराबर हैं। हल करने के लिए दोनों पक्षों पर एक जैसा काम करो (एक ही संख्या जोड़ो, घटाओ, गुणा करो या शून्य के अलावा किसी संख्या से भाग दो), जब तक x अकेला न रह जाए। आख़िर में उत्तर वापस रखकर जाँच ज़रूर करो।
- रैखिक ग्राफ़: सीधी रेखा और y = mx + c – रैखिक ग्राफ़ एक सीधी रेखा होता है। इसका समीकरण y = mx + c है। m प्रवणता (ढलान) है: चढ़ाई ÷ चाल। c y-अंतःखंड है: रेखा y-अक्ष को जहाँ काटती है। जिन रेखाओं का m बराबर हो, वे समांतर होती हैं। अगर m₁ × m₂ = −1 हो, तो रेखाएँ लंब होती हैं। दो रेखाएँ जहाँ कटती हैं, वह बिंदु दोनों समीकरणों का हल है। रोज़ के ग्राफ़ में प्रवणता एक दर (जैसे चाल) होती है और ग्राफ़ के नीचे का क्षेत्रफल कुल मात्रा (जैसे दूरी)।
- अनुक्रम और श्रेढ़ियाँ – अनुक्रम संख्याओं की ऐसी सूची है जिसका क्रम तय है। इसका नियम दो तरह से लिखते हैं: पुनरावर्ती (पिछले पद से अगला पद) या स्पष्ट (n-वें पद का सीधा सूत्र)। समांतर श्रेढ़ी (AP) में हर बार वही संख्या जुड़ती है। गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP) में हर बार उसी संख्या से गुणा होता है। फ्रैक्टल और हनोई की मीनार में भी यही नियम छिपे हैं।
3. Ratio, proportion and rates of change
Ratio and scale · Proportion and rates
- अनुपात और समानुपात – अनुपात a : b एक ही तरह की दो मात्राओं की तुलना है। दोनों भागों को एक ही संख्या से भाग देकर अनुपात सरल करते हैं। किसी राशि को अनुपात में बाँटने के लिए भाग जोड़ो, एक भाग निकालो, फिर गुणा करो। y = k·x हो तो प्रत्यक्ष समानुपात (एक दोगुना, दूसरा दोगुना); x·y = k हो तो व्युत्क्रम समानुपात (एक दोगुना, दूसरा आधा)।
- संयुक्त इकाइयाँ: चाल, घनत्व, प्रति इकाई मूल्य और दूसरी दरें – संयुक्त इकाई (compound unit) दो इकाइयों को जोड़कर बनती है, जैसे मीटर प्रति सेकंड (m/s) या ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर (g/cm³)। "प्रति" का मतलब है "हर एक में"। दर बताती है कि एक मात्रा का कितना हिस्सा दूसरी मात्रा की एक इकाई में आता है। चाल = दूरी ÷ समय, घनत्व = द्रव्यमान ÷ आयतन, प्रति इकाई मूल्य = दाम ÷ मात्रा। इकाई बदलते समय ऊपर और नीचे की इकाई अलग-अलग बदलो।
4. Geometry and measures
Perimeter, area and volume · Constructions and properties · Angles · Transformations and similarity · Pythagoras and trigonometry · 3D shapes
- क्षेत्रफल और परिमाप: हीरोन का सूत्र, वृत्त और त्रिज्यखंड – परिमाप यानी किनारे की कुल लंबाई। क्षेत्रफल यानी अंदर की जगह। जब त्रिभुज की तीनों भुजाएँ पता हों, तो हीरोन का सूत्र बिना ऊँचाई के क्षेत्रफल दे देता है। जिस चतुर्भुज के चारों कोने एक वृत्त पर हों, उसके लिए ब्रह्मगुप्त का सूत्र है। वृत्त का किनारा व्यास का π गुना होता है, और त्रिज्यखंड पूरे वृत्त का एक भाग होता है।
- ज्यामितीय रचनाएँ: परकार और पटरी से सटीक चित्र – ज्यामितीय रचना में आकृति सिर्फ़ परकार (compass) और पटरी (सीधी रेखा के लिए) से सटीक बनाई जाती है। मुख्य रचनाएँ: रेखाखंड का लंब समद्विभाजक, कोण का समद्विभाजक, बिंदु से रेखा पर लंब, 60°, 30°, 90° और 45° के कोण, तीन भुजाओं (SSS), दो भुजाओं और बीच के कोण (SAS) या दो कोणों और एक भुजा (ASA) से त्रिभुज, और सम षट्भुज जैसे बहुभुज। ये इसलिए काम करती हैं क्योंकि बराबर चाप बराबर लंबाइयाँ देते हैं, जिनसे सर्वांगसम त्रिभुज बनते हैं।
- रेखाएँ और कोण: रैखिक युग्म, शीर्षाभिमुख कोण और समांतर रेखाएँ – एक ही बिंदु से निकली दो किरणों के बीच का घुमाव कोण है। सीधी रेखा पर बने दो आसन्न कोणों का योग 180° होता है (रैखिक युग्म)। दो रेखाएँ काटें तो आमने-सामने के कोण बराबर होते हैं। तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को काटे तो संगत कोण बराबर, एकांतर अंतः कोण बराबर, और एक ही ओर के अंतः कोणों का योग 180° होता है। उल्टी बात भी सच है, और ऐसी बातें हम विरोधाभास से सिद्ध कर सकते हैं: उल्टा मान लो और दिखाओ कि इससे कुछ असंभव निकलता है।
- रूपांतरण: आकृति को खिसकाना, पलटना, घुमाना और बड़ा करना – रूपांतरण किसी आकृति को नई जगह ले जाता है। स्थानांतरण उसे खिसकाता है, परावर्तन दर्पण रेखा में पलटता है, घूर्णन एक केंद्र के चारों ओर घुमाता है, और आवर्धन माप बदलता है। पहले तीन में माप और आकार वही रहते हैं (सर्वांगसम प्रतिबिंब)। आवर्धन में आकार वही, माप बदलता है (समरूप प्रतिबिंब)। हर एक का आसान निर्देशांक नियम है।
- पाइथागोरस प्रमेय – किसी भी समकोण त्रिभुज में सबसे लंबी भुजा (कर्ण) का वर्ग बाकी दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर होता है: a² + b² = c²।
- ठोस आकृतियाँ: फलक, किनारे, शीर्ष, जाल और दृश्य – ठोस (3D) आकृति में लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई तीनों होती हैं, इसलिए वह जगह घेरती है। हम उसे फलक (सपाट या मुड़ी सतह), किनारे (जहाँ दो फलक मिलते हैं) और शीर्ष (कोने) गिनकर पहचानते हैं। प्रिज़्म के दो बराबर सिरे आयतों से जुड़े होते हैं; पिरामिड का एक आधार होता है और त्रिभुज एक नोक पर मिलते हैं; बेलन, शंकु और गोले की सतह मुड़ी होती है। जाल (net) एक समतल नक्शा है जो मुड़कर ठोस बनता है। ऊपर, सामने और बगल से देखने पर तीन दृश्य मिलते हैं। सपाट फलकों वाले हर ठोस के लिए फलक + शीर्ष − किनारे = 2 (ऑयलर नियम)।
5. Probability
Probability
- प्रायिकता का परिचय: पैमाना, प्रयोग, प्रतिदर्श समष्टि और वृक्ष आरेख – प्रायिकता 0 से 1 के बीच की एक संख्या है जो बताती है कि कोई बात होने की कितनी संभावना है। 0 मतलब कभी नहीं होगी, 1 मतलब ज़रूर होगी। इसे हम प्रयोग कई बार करके (आनुभविक प्रायिकता) या सारे संभव परिणाम लिखकर (प्रतिदर्श समष्टि) और चाहे गए परिणाम गिनकर निकाल सकते हैं। जब दो चीज़ें साथ हों, तो वृक्ष आरेख और सारणी परिणाम लिखने में मदद करते हैं।
6. Statistics
Statistics
- सांख्यिकी: प्रश्न पूछना, औसत और स्टैक्ड दंड आलेख – सांख्यिकी एक ऐसे प्रश्न से शुरू होती है जिसके कई जवाब हो सकते हैं। हम आँकड़े इकट्ठा करते हैं, उन्हें व्यवस्थित करते हैं, ग्राफ बनाते हैं और एक संख्या निकालते हैं जो सबका सार बताए। माध्य बराबर का हिस्सा है, माध्यिका बीच का मान है और बहुलक सबसे ज़्यादा आने वाला मान है। भारित माध्य कुछ मानों को ज़्यादा महत्व देता है। स्टैक्ड और 100% स्टैक्ड दंड आलेख दिखाते हैं कि पूरा हिस्सों में कैसे बँटा है।