रूपांतरण क्या है?
रूपांतरण आकृति के हर बिंदु को नए बिंदु पर ले जाता है। शुरू की आकृति वस्तु है, नई आकृति प्रतिबिंब। प्रतिबिंब बिंदु को डैश से लिखते हैं: A का प्रतिबिंब A′।
चार मुख्य प्रकार: स्थानांतरण (translation, खिसकाना), परावर्तन (reflection, पलटना), घूर्णन (rotation, घुमाना) और आवर्धन (enlargement/dilation, माप बदलना)।
पहले तीन को दृढ़ गति (rigid motion) कहते हैं। इनमें लंबाई और कोण नहीं बदलते, इसलिए प्रतिबिंब वस्तु के सर्वांगसम होता है।
स्थानांतरण: एक सदिश से खिसकाना
हर बिंदु एक ही दिशा में एक ही दूरी चलता है। इसे सदिश से लिखते हैं, जैसे (3, 2): 3 दाएँ, 2 ऊपर।
नियम: (x, y) → (x + a, y + b)। ऋणात्मक a = बाएँ, ऋणात्मक b = नीचे।
आकृति न घूमती है, न पलटती है।
परावर्तन: दर्पण रेखा में पलटना
हर बिंदु दर्पण रेखा के दूसरी ओर उतनी ही दूरी पर जाता है। बिंदु और उसके प्रतिबिंब को जोड़ने वाली रेखा दर्पण पर लंब होती है।
- x-अक्ष में: (x, y) → (x, −y)
- y-अक्ष में: (x, y) → (−x, y)
- रेखा y = x में: (x, y) → (y, x)
दर्पण रेखा पर पड़े बिंदु नहीं हिलते। प्रतिबिंब उल्टा (बायाँ-दायाँ बदला) होता है।
घूर्णन: केंद्र के चारों ओर घुमाना
तीन चीज़ें चाहिए: केंद्र, कोण और दिशा (दक्षिणावर्त या वामावर्त)।
- O के परितः 90° वामावर्त: (x, y) → (−y, x)
- O के परितः 180°: (x, y) → (−x, −y)
- 90° दक्षिणावर्त: (x, y) → (y, −x)
हर बिंदु की केंद्र से दूरी वही रहती है। ट्रेसिंग पेपर पर आकृति बनाकर, केंद्र पर पेंसिल टिकाकर घुमाओ।
आवर्धन (dilation) और समरूपता
आवर्धन में केंद्र और स्केल गुणक k होता है। O से: (x, y) → (kx, ky)।
- k > 1: प्रतिबिंब बड़ा।
- 0 < k < 1: प्रतिबिंब छोटा।
- ऋणात्मक k: प्रतिबिंब केंद्र के दूसरी ओर, उल्टा।
लंबाई k गुना, क्षेत्रफल k² गुना। कोण वही, इसलिए प्रतिबिंब समरूप है, सर्वांगसम नहीं।
रूपांतरण का पूरा वर्णन और संयोजन
स्थानांतरण → सदिश; परावर्तन → दर्पण रेखा; घूर्णन → केंद्र, कोण, दिशा; आवर्धन → केंद्र और स्केल गुणक। एक के बाद दूसरा करना संयोजन है; क्रम से फ़र्क पड़ सकता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सदिश (a, b) से स्थानांतरण: (x, y) → (x + a, y + b)
- x-अक्ष में परावर्तन: (x, y) → (x, −y)
- y-अक्ष में परावर्तन: (x, y) → (−x, y)
- y = x में परावर्तन: (x, y) → (y, x)
- O के परितः 90° वामावर्त: (x, y) → (−y, x)
- O के परितः 180°: (x, y) → (−x, −y)
- O से k गुना आवर्धन: (x, y) → (kx, ky); क्षेत्रफल × k²
हल किए गए उदाहरण
1. P(2, −1) को सदिश (−5, 4) से स्थानांतरित करो।
जोड़ो: x = 2 + (−5) = −3, y = −1 + 4 = 3। तो P′ = (−3, 3)।
2. Q(4, 3) को पहले x-अक्ष में, फिर y-अक्ष में परावर्तित करो।
x-अक्ष में: (4, −3)। फिर y-अक्ष में: (−4, −3)। यह O के परितः 180° घूर्णन जैसा ही है।
3. R(3, 1) को मूल बिंदु के परितः 90° वामावर्त घुमाओ।
नियम (x, y) → (−y, x): R′ = (−1, 3)। O से दूरी: पहले √10, बाद में भी √10।
4. 3 cm भुजा वाले वर्ग को स्केल गुणक 4 से आवर्धित किया। नई भुजा और क्षेत्रफल?
भुजा = 3 × 4 = 12 cm। पुराना क्षेत्रफल 9 cm², नया = 9 × 16 = 144 cm²।
5. A(1, 1), B(3, 1), C(1, 3) का प्रतिबिंब A′(−1, 1), B′(−1, 3), C′(−3, 1) है। रूपांतरण बताओ।
(x, y) → (−y, x) जाँचो: तीनों बिंदु मिलते हैं। यह O के परितः 90° वामावर्त घूर्णन है।
6. D(2, 6) को O से गुणक ½ से आवर्धित करो, फिर (1, −1) से खिसकाओ।
आवर्धन: (1, 3)। स्थानांतरण: (2, 2)।
आम गलतियाँ
- परावर्तन के नियम उलझाना: x-अक्ष में y का चिह्न बदलता है।
- घूर्णन में केंद्र और दिशा न बताना; सिर्फ़ '90°' अधूरा उत्तर है।
- सोचना कि k = ½ आवर्धन नहीं है; यह भी आवर्धन है, बस आकृति छोटी होती है।
- आवर्धन के बाद क्षेत्रफल को k² की जगह k से गुणा करना।