सर्वांगसम का क्या अर्थ है?
दो आकृतियाँ सर्वांगसम हैं अगर उनका आकार और माप बिल्कुल एक हो। लिखते हैं ABCD ≅ PQRS।
आसान जाँच: एक आकृति को पतले काग़ज़ पर उतारो। अगर उसे दूसरी आकृति पर बिल्कुल रख सकते हो (खिसकाकर, घुमाकर या पलटकर), तो वे सर्वांगसम हैं।
आकार वही पर माप अलग हो तो सर्वांगसम नहीं; वह समरूप है।
दृढ़ गतियाँ: स्थानांतरण, परावर्तन और घूर्णन
दृढ़ गति (सममितीय रूपांतरण) आकृति को दूरी बदले बिना हिलाती है।
- स्थानांतरण: हर बिंदु एक ही दिशा में एक ही दूरी जाता है, जैसे सदिश (5, 0.6)। निर्देशांक में: (x, y) → (x + a, y + b)।
- परावर्तन: हर बिंदु दर्पण रेखा के दूसरी ओर उतनी ही दूरी पर जाता है। y-अक्ष में: (x, y) → (−x, y)। x-अक्ष में: (x, y) → (x, −y)। आकृति की दिशा उलट जाती है (दक्षिणावर्त नाम वामावर्त हो जाते हैं)।
- घूर्णन: हर बिंदु एक स्थिर केंद्र के चारों ओर एक ही कोण से घूमता है। मूलबिंदु के चारों ओर 90° वामावर्त: (x, y) → (−y, x)। 180°: (x, y) → (−x, −y)।
तीनों में लंबाई, कोण, समांतर रेखाएँ और सीधी रेखाएँ वैसी ही रहती हैं। इसलिए प्रतिबिंब हमेशा सर्वांगसम होता है।
विस्तारण (x, y) → (kx, ky), जहाँ k ≠ 1, लंबाई बदलता है, इसलिए यह दृढ़ गति नहीं है।
दृढ़ गतियों का क्रम और संगत भाग
दो आकृतियाँ तभी सर्वांगसम हैं जब दृढ़ गतियों का कोई क्रम एक को दूसरी पर ले जाए। दिखाने के लिए:
- शीर्षों को क्रम से मिलाओ: A↔A′, B↔B′, C↔C′…
- चालें चुनो: अक्सर पहले परावर्तन (अगर दिशा उलटी है), फिर घूर्णन (दिशा मिलाने के लिए), फिर स्थानांतरण (जगह पर लाने के लिए)।
- जाँचो कि हर शीर्ष अपने साथी पर बैठा।
सर्वांगसम होने पर हर संगत भाग बराबर: AB = A′B′, ∠A = ∠A′ आदि।
SSS, SAS और ASA क्यों काम करते हैं
त्रिभुज के सभी छह भाग जाँचने की ज़रूरत नहीं। अगर दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण मिलें (SAS), तो एक त्रिभुज को खिसकाकर और घुमाकर कोण और दोनों भुजाएँ ऊपर रख सकते हैं; तीसरी भुजा के पास कोई और रास्ता नहीं, वह भी फिट हो जाती है। SSS और ASA भी ऐसे ही निकलते हैं। विस्तार त्रिभुजों की सर्वांगसमता वाले पाठ में है।
रोज़मर्रा, डिज़ाइन और प्रश्नों में सर्वांगसमता
- निर्माण: ईंट, टाइल, पेंच और पुर्ज़े सर्वांगसम होने चाहिए ताकि फिट हों।
- डिज़ाइन और पैटर्न: एक नमूने को खिसकाकर (बॉर्डर), पलटकर (दर्पण सममिति) और घुमाकर (रंगोली, पहिया, फूल) पैटर्न बनता है।
- दूर की दूरी नापना: नदी की चौड़ाई जानने के लिए अपने किनारे पर एक सर्वांगसम त्रिभुज बनाओ और उसे नापो।
घर पर करो
गत्ते से एक आकृति काटो। काग़ज़ पर उसके चारों ओर रेखा खींचो, फिर खिसकाकर, पलटकर या घुमाकर फिर से खींचो। पैमाने और चाँदे से संगत भुजाएँ और कोण नापो: बराबर मिलेंगे।
परीक्षा के प्रश्न: एक आकृति को दूसरी पर ले जाने वाली चालें बताना, संगत भागों से लंबाई या कोण निकालना, और यह तय करना कि कोई रूपांतरण सर्वांगसमता रखता है या नहीं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- स्थानांतरण (a, b): (x, y) → (x + a, y + b)
- y-अक्ष में परावर्तन: (x, y) → (−x, y); x-अक्ष में: (x, y) → (x, −y)
- y = x में परावर्तन: (x, y) → (y, x)
- मूलबिंदु पर 90° वामावर्त घूर्णन: (x, y) → (−y, x); 180°: (−x, −y)
- विस्तारण k: (x, y) → (kx, ky); सर्वांगसम तभी जब k = 1
- सर्वांगसम ⇒ संगत भुजाएँ और कोण बराबर
हल किए गए उदाहरण
1. त्रिभुज के शीर्ष (1, 2), (4, 2), (1, 6) को (−3, 1) से स्थानांतरित करो।
x में −3, y में 1 जोड़ो: (−2, 3), (1, 3), (−2, 7)। भुजाएँ अब भी 3, 4 और 5।
2. बिंदु (3, −2) को y-अक्ष में परावर्तित करो, फिर मूलबिंदु पर 90° वामावर्त घुमाओ।
परावर्तन: (−3, −2)। घूर्णन (x, y) → (−y, x): (2, −3)।
3. PQRS ≅ WXYZ, P↔W, Q↔X। PQ = 7 cm, ∠Q = 110° हो तो WX और ∠X?
संगत भाग बराबर: WX = 7 cm, ∠X = 110°।
4. वर्ग A की भुजा 3 cm, वर्ग B उसका 2 गुना विस्तारण। क्या सर्वांगसम?
नहीं। B की भुजा 6 cm। आकार वही, माप अलग: समरूप।
5. आकृति F के नाम दक्षिणावर्त हैं, उसके प्रतिबिंब G में वही माप पर नाम वामावर्त। क्रम में कौन-सी चाल ज़रूर है?
परावर्तन (विषम संख्या में), क्योंकि सिर्फ़ परावर्तन दिशा उलटता है।
6. त्रिभुज A(0,0), B(2,0), C(0,1) को A′(5,0), B′(5,2), C′(4,0) पर ले जाने वाली चालें बताओ।
मूलबिंदु पर 90° वामावर्त घुमाओ: (0,0), (0,2), (−1,0)। फिर (5, 0) से खिसकाओ: (5,0), (5,2), (4,0)।
आम गलतियाँ
- एक जैसी दिखने वाली पर अलग माप की आकृतियों को सर्वांगसम कहना।
- ग़लत शीर्ष मिलाना: ABC ≅ PQR में A↔P, B↔Q, C↔R, इसी क्रम में।
- उलटी दिखने के कारण परावर्तित आकृति को सर्वांगसम न मानना। पलटने से माप नहीं बदलता।
- घूर्णन का ग़लत नियम: 90° वामावर्त (x, y) → (−y, x) है, (y, −x) नहीं।