ठोस आकृति क्या है?
वर्ग जैसी चपटी आकृति में सिर्फ़ लंबाई और चौड़ाई होती है। वह 2D है। ठोस (3D) आकृति में ऊँचाई भी होती है। वह जगह घेरती है।
- फलक (face): ठोस की एक सतह। सपाट या मुड़ी हो सकती है।
- किनारा (edge): वह रेखा जहाँ दो फलक मिलते हैं।
- शीर्ष (vertex): कोना, जहाँ किनारे मिलते हैं।
जिस ठोस के सारे फलक सपाट बहुभुज हों, उसे बहुफलक (polyhedron) कहते हैं।
ठोसों के परिवार
| ठोस | फलक | शीर्ष | किनारे |
|---|---|---|---|
| घन | 6 वर्ग | 8 | 12 |
| घनाभ | 6 आयत | 8 | 12 |
| त्रिभुजाकार प्रिज़्म | 5 | 6 | 9 |
| वर्ग पिरामिड | 5 | 5 | 8 |
| चतुष्फलक (tetrahedron) | 4 | 4 | 6 |
| बेलन | 2 सपाट + 1 मुड़ी | 0 | 2 (वक्र) |
| शंकु | 1 सपाट + 1 मुड़ी | 1 (नोक) | 1 (वक्र) |
| गोला | 1 मुड़ी | 0 | 0 |
प्रिज़्म के दो बराबर, समांतर सिरे होते हैं, जो आयतों से जुड़े होते हैं। पिरामिड का एक आधार होता है और त्रिभुज फलक एक बिंदु (शिखर, apex) पर मिलते हैं। नाम आधार के आकार से रखा जाता है।
n भुजा वाले आधार का प्रिज़्म: F = n + 2, V = 2n, E = 3n। पिरामिड: F = n + 1, V = n + 1, E = 2n।
जाल: ठोस को समतल बिछाना
जाल (net) एक समतल नक्शा है जिसे मोड़कर ठोस बनता है। हर फलक जाल में एक बार आता है।
- घन के 11 अलग जाल होते हैं। 4 वर्गों की पंक्ति, एक वर्ग ऊपर और एक नीचे: यह सबसे आम है।
- बेलन का जाल: दो वृत्त और एक आयत। आयत की लंबाई = वृत्त की परिधि।
- शंकु का जाल: एक वृत्त और एक त्रिज्यखंड (sector)।
- वर्ग पिरामिड का जाल: एक वर्ग और चार त्रिभुज।
छह वर्गों का हर नक्शा घन का जाल नहीं होता। अगर मोड़ने पर दो वर्ग एक ही तरफ़ आ जाएँ, तो वह जाल नहीं है।
दृश्य और चित्र
इंजीनियर ठोस को तीन समतल चित्रों में बनाते हैं: सामने का दृश्य, ऊपर का दृश्य (नक्शा) और बगल का दृश्य। खड़ा बेलन सामने से आयत और ऊपर से वृत्त दिखता है। वर्ग पिरामिड सामने से त्रिभुज और ऊपर से विकर्णों वाला वर्ग दिखता है।
कागज़ पर ठोस को आइसोमेट्रिक बिंदु कागज़ पर बनाते हैं; छिपे किनारे बिंदीदार रेखा से दिखाते हैं।
घर पर करके देखो
टूथपेस्ट या चाय का खाली डिब्बा लो। उसके फलक, किनारे और शीर्ष गिनो। फिर कुछ किनारों से सावधानी से काटकर उसे समतल बिछाओ। यही जाल है। डिब्बे को ऊपर, सामने और बगल से देखकर तीनों दृश्य बनाओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ऑयलर नियम (बहुफलक): F + V − E = 2
- n भुजा आधार वाला प्रिज़्म: F = n + 2, V = 2n, E = 3n
- n भुजा आधार वाला पिरामिड: F = n + 1, V = n + 1, E = 2n
- घन: 6 फलक, 8 शीर्ष, 12 किनारे
- दृश्य: सामने, ऊपर (नक्शा), बगल
हल किए गए उदाहरण
1. षट्भुज प्रिज़्म के F, V, E निकालो और ऑयलर नियम जाँचो।
चरण 1: n = 6। चरण 2: F = 6 + 2 = 8। चरण 3: V = 2 × 6 = 12। चरण 4: E = 3 × 6 = 18। जाँच: 8 + 12 − 18 = 2। सही।
2. एक बहुफलक के 7 फलक और 10 शीर्ष हैं। किनारे कितने?
चरण 1: F + V − E = 2। चरण 2: 7 + 10 − E = 2। चरण 3: 17 − E = 2, इसलिए E = 15।
3. बेलन के जाल में वृत्तों की त्रिज्या 7 cm है। आयत कितना लंबा हो?
आयत वृत्त के चारों ओर लिपटता है, इसलिए लंबाई = परिधि = 2 × π × r = 2 × 22/7 × 7 = 44 cm।
आम गलतियाँ
- घन के कोनों को 'किनारे' कहना। किनारे रेखाएँ हैं; शीर्ष कोने के बिंदु हैं।
- सोचना कि कोई भी 6 जुड़े वर्ग घन का जाल हैं। मन में मोड़कर देखो कि कोई दो वर्ग एक-दूसरे पर न आएँ।
- बेलन, शंकु या गोले पर ऑयलर नियम लगाना। यह सिर्फ़ बहुफलक (सपाट फलक) के लिए है।
- प्रिज़्म और पिरामिड में गड़बड़। प्रिज़्म के दो बराबर सिरे हैं; पिरामिड का एक आधार और एक नोक है।