South 고등학교 3학년 Practical Mathematics
अध्याय: 3
1. Patterns
Patterns in phenomena · Formulas in daily life · Similarity in daily life · Congruence in daily life · Problems with similarity and congruence
- अनुक्रम और श्रेढ़ियाँ – अनुक्रम संख्याओं की ऐसी सूची है जिसका क्रम तय है। इसका नियम दो तरह से लिखते हैं: पुनरावर्ती (पिछले पद से अगला पद) या स्पष्ट (n-वें पद का सीधा सूत्र)। समांतर श्रेढ़ी (AP) में हर बार वही संख्या जुड़ती है। गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP) में हर बार उसी संख्या से गुणा होता है। फ्रैक्टल और हनोई की मीनार में भी यही नियम छिपे हैं।
- समरूप त्रिभुज – दो आकृतियाँ समरूप होती हैं जब उनका आकार (shape) एक जैसा हो, भले नाप अलग हो। दो त्रिभुज समरूप हैं अगर उनके संगत कोण बराबर हों और संगत भुजाएँ एक ही अनुपात में हों। आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय (BPT): त्रिभुज की एक भुजा के समांतर रेखा बाकी दो भुजाओं को एक ही अनुपात में बाँटती है; इसका विलोम भी सही है। समरूपता AA, SSS या SAS से सिद्ध होती है।
- सर्वांगसमता: वही आकार, वही माप – दो आकृतियाँ सर्वांगसम (≅) होती हैं अगर दृढ़ गतियों से एक को दूसरी पर बिल्कुल बैठाया जा सके: स्थानांतरण (खिसकाना), परावर्तन (पलटना) और घूर्णन (घुमाना), किसी भी क्रम में। दृढ़ गतियाँ हर लंबाई और हर कोण वैसा ही रखती हैं, इसलिए सर्वांगसम आकृतियों की संगत भुजाएँ और संगत कोण बराबर होते हैं। विस्तारण (dilation) माप बदल देता है, इसलिए सर्वांगसमता नहीं रखता; उससे समरूप आकृति बनती है। सर्वांगसमता सिद्ध करने के लिए दृढ़ गतियों का क्रम बताओ और शीर्ष क्रम से मिलाओ (A↔A′, B↔B′…)। त्रिभुजों के लिए SSS, SAS और ASA इन्हीं गतियों से निकलने वाले शॉर्टकट हैं।
2. Space
Shapes of plane and solid figures · Shapes in art · Sketches and nets · Using nets · Designs with figures
- ठोस आकृतियाँ: फलक, किनारे, शीर्ष, जाल और दृश्य – ठोस (3D) आकृति में लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई तीनों होती हैं, इसलिए वह जगह घेरती है। हम उसे फलक (सपाट या मुड़ी सतह), किनारे (जहाँ दो फलक मिलते हैं) और शीर्ष (कोने) गिनकर पहचानते हैं। प्रिज़्म के दो बराबर सिरे आयतों से जुड़े होते हैं; पिरामिड का एक आधार होता है और त्रिभुज एक नोक पर मिलते हैं; बेलन, शंकु और गोले की सतह मुड़ी होती है। जाल (net) एक समतल नक्शा है जो मुड़कर ठोस बनता है। ऊपर, सामने और बगल से देखने पर तीन दृश्य मिलते हैं। सपाट फलकों वाले हर ठोस के लिए फलक + शीर्ष − किनारे = 2 (ऑयलर नियम)।
- कला में गणित: संगीत, चित्र, टाइलें, कविता और फ़िल्म – कला में गणित भरा है। संगीत के सुर तार की लंबाई के अनुपात हैं (आधी लंबाई = सप्तक, 2/3 लंबाई = पंचम)। चित्रकार परिप्रेक्ष्य और स्वर्णिम अनुपात इस्तेमाल करते हैं। टाइलें तभी जुड़ती हैं जब कोनों के कोण मिलकर 360° बनें। कविता में ध्वनि का पैटर्न दोहराया जाता है। फ़िल्म में हर सेकंड 24 तस्वीरें होती हैं।
- डिज़ाइन (Design) क्या है? क्षेत्र, रूप-कार्य और सबके लिए डिज़ाइन – डिज़ाइन यानी किसी चीज़ की सोच-समझकर योजना बनाना ताकि वह लोगों का कोई काम करे। इसके कई क्षेत्र हैं: उत्पाद, ग्राफ़िक, फ़ैशन-वस्त्र, इंटीरियर, लैंडस्केप, वास्तुकला और डिजिटल (UX)। अच्छा डिज़ाइन रूप (आकार, रंग, सामग्री) और कार्य को जोड़ता है: "रूप कार्य के पीछे चलता है"। डिज़ाइनर तत्वों और सिद्धांतों का उपयोग करते हैं, वस्तु को शरीर के अनुसार बनाते हैं (एर्गोनॉमिक्स), सबके लिए (समावेशी) और धरती के लिए कम नुकसानदेह (टिकाऊ) चीज़ें बनाते हैं।
3. Data
Collecting and organising data · Real-life data and graphs · Drawing conclusions · Purposeful data projects
- आँकड़ों का प्रबंधन: इकट्ठा करो, व्यवस्थित करो, दिखाओ – आँकड़े (डेटा) तथ्यों का समूह हैं, जैसे जवाब, गिनती या माप। आँकड़े गुणात्मक (शब्द) या मात्रात्मक (संख्या) होते हैं; संख्याएँ असतत (गिनी हुई) या सतत (नापी हुई) होती हैं। हम सर्वे, अवलोकन, प्रयोग या पहले से मौजूद स्रोतों से आँकड़े इकट्ठा करते हैं, फिर मिलान चिह्नों से बारंबारता सारणी बनाते हैं। सही आलेख चुनते हैं: तुलना के लिए दंड आलेख, पूरे के हिस्सों के लिए पाई चार्ट, समय के साथ बदलाव के लिए रेखा आलेख, दो चीज़ों के रिश्ते के लिए बिंदु आलेख। कंप्यूटर डेटा को संरचित सारणी या असंरचित पाठ, चित्र और आवाज़ के रूप में रखते हैं।
- डेटा विश्लेषण – डेटा विश्लेषण यानी कच्चे आँकड़ों को जवाब में बदलना। इसका एक चक्र है: सवाल पूछो, डेटा इकट्ठा करो, साफ़ करो (ग़लती, दोहराव और खाली जवाब हटाओ), व्यवस्थित करो, माध्य, माध्यिका, परास और पैटर्न से विश्लेषण करो, सही चार्ट बनाओ और सावधानी से निष्कर्ष निकालो। बाहरी मान, छोटे नमूने और पक्षपात पर नज़र रखो, और याद रखो कि दो चीज़ों का साथ बढ़ना (सहसंबंध) यह साबित नहीं करता कि एक दूसरे का कारण है। डेटा को सुरक्षित रखना और अनुमति से इस्तेमाल करना भी ज़रूरी है।
- सांख्यिकीय जाँच चक्र – सांख्यिकीय जाँच आँकड़ों से किसी सवाल का जवाब पाँच चरणों में ढूँढती है: समस्या (साफ़ सवाल), योजना (किससे, क्या, कैसे पूछना है), आँकड़े (इकट्ठा करना और लिखना), विश्लेषण (सारणी, आलेख, औसत) और निष्कर्ष (जवाब, सीमाएँ, नया सवाल)। फिर चक्र दोबारा शुरू हो सकता है।