सर्वांगसम का मतलब क्या है?
सर्वांगसम (congruent) यानी आकार भी वही और नाप भी वही। एक आकृति काटकर दूसरी पर रखो तो वह पूरी ढक जाए। हम लिखते हैं ΔABC ≅ ΔPQR।
अक्षरों का क्रम ज़रूरी है। ΔABC ≅ ΔPQR का मतलब A, P पर; B, Q पर; C, R पर बैठता है। यानी AB = PQ, BC = QR, CA = RP, ∠A = ∠P, ∠B = ∠Q, ∠C = ∠R।
सर्वांगसमता सिद्ध हो जाए तो सारे संगत भाग बराबर होते हैं। इसे CPCT कहते हैं (सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग)।
त्रिभुज दृढ़ क्यों है?
तीन डंडियों को ढीली पिन से जोड़ो। एक कोने को धकेलो। कुछ नहीं हिलता। अब चार डंडियों से यही करो। वर्ग झुककर तिरछा हो जाता है।
क्यों? तीन लंबाइयों से सिर्फ़ एक त्रिभुज बनता है। चार लंबाइयों से कई चतुर्भुज बन सकते हैं। इसलिए त्रिभुज दृढ़ (rigid) है। SSS नियम इसी बात पर टिका है।
सर्वांगसमता के पाँच नियम
त्रिभुज के छह भाग होते हैं: 3 भुजाएँ और 3 कोण। ये नियम बताते हैं कि कौन से तीन काफ़ी हैं।
- SAS (भुजा-कोण-भुजा): दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण बराबर। इसे हम मूल अभिगृहीत मानते हैं।
- ASA (कोण-भुजा-कोण): दो कोण और उनके बीच की भुजा।
- AAS (कोण-कोण-भुजा): दो कोण और कोई एक दूसरी भुजा। तीसरा कोण 180° में से बाकी दो घटाकर मिल जाता है, इसलिए यह ASA से ही निकलता है।
- SSS (भुजा-भुजा-भुजा): तीनों भुजाएँ।
- RHS (समकोण-कर्ण-भुजा): दोनों में समकोण हो, कर्ण (समकोण के सामने की सबसे लंबी भुजा) बराबर हो और एक और भुजा बराबर हो।
AAA नियम नहीं है। छोटे और बड़े समबाहु त्रिभुज के कोण एक जैसे हैं, पर नाप अलग।
SSA क्यों नहीं चलता?
SSA में कोण दोनों भुजाओं के बीच नहीं होता। AB = 5 और ∠A = 35° तय करो। अब BC = 3.5 को आधार तक पहुँचना है। इसे B के चारों ओर दरवाज़े की तरह घुमाओ। यह आधार को दो अलग जगह, C₁ और C₂, पर छू सकती है। दोनों त्रिभुजों में AB = 5, ∠A = 35°, BC = 3.5 है, फिर भी वे अलग हैं।
एक सुरक्षित हालत है: जब दिया गया कोण 90° हो। तब घूमती भुजा उस ओर आधार को एक ही जगह छूती है। यही RHS नियम है।
समद्विबाहु त्रिभुज
समद्विबाहु त्रिभुज में दो भुजाएँ बराबर होती हैं। मान लो AB = AC।
प्रमेय: बराबर भुजाओं के सामने के कोण बराबर होते हैं, ∠B = ∠C।
क्यों: BC का मध्य-बिंदु M लो और AM मिलाओ। AB = AC, BM = CM और AM दोनों में साझा है। SSS से ΔABM ≅ ΔACM। CPCT से ∠B = ∠C। साथ में ∠AMB = ∠AMC और दोनों का जोड़ 180° है, इसलिए AM ⟂ BC।
विलोम: अगर किसी त्रिभुज के दो कोण बराबर हों, तो उनके सामने की भुजाएँ बराबर होती हैं (AAS से सिद्ध)।
समबाहु त्रिभुज हर तरफ़ से समद्विबाहु है, इसलिए उसका हर कोण 60° है।
कथन और उसका विलोम
कथन (proposition) का रूप होता है “अगर P, तो Q”। उसका विलोम (converse) दोनों हिस्से बदल देता है: “अगर Q, तो P”।
- “दो भुजाएँ बराबर हों तो सामने के कोण बराबर।” विलोम: “दो कोण बराबर हों तो सामने की भुजाएँ बराबर।” दोनों सच।
- “दो त्रिभुज सर्वांगसम हों तो उनके कोण बराबर।” विलोम: “कोण बराबर हों तो त्रिभुज सर्वांगसम।” यह गलत है (AAA नहीं चलता)।
इसलिए विलोम को अलग से सिद्ध करना पड़ता है। मूल कथन सच होने से विलोम अपने-आप सच नहीं होता।
घर पर करके देखो
7 आइसक्रीम की डंडियाँ या स्ट्रॉ और कुछ पिन या धागा लो। 3 से त्रिभुज और 4 से वर्ग बनाओ। दोनों को धीरे से धकेलो। कौन अपना आकार बनाए रखता है?
फिर पैमाने और चाँदे से कागज़ के दो त्रिभुज काटो: भुजाएँ 5 cm और 4 cm, बीच का कोण 60°। एक को दूसरे पर रखो। हर बार ठीक मिलेंगे, कोई भी काटे। यही SAS है। ऊपर 3D में आखिरी चरण खोलो, SSA चुनो और BC खिसकाकर देखो कब दो अलग त्रिभुज बनते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ΔABC ≅ ΔPQR ⇒ AB = PQ, BC = QR, CA = RP और ∠A = ∠P, ∠B = ∠Q, ∠C = ∠R (CPCT)
- SAS, ASA, AAS, SSS, RHS → सर्वांगसम
- SSA और AAA → काफ़ी नहीं
- AB = AC ⇔ ∠B = ∠C (समद्विबाहु त्रिभुज)
- कोणों का योग: ∠A + ∠B + ∠C = 180°
हल किए गए उदाहरण
1. ΔABC और ΔPQR में AB = PQ = 6 cm, ∠B = ∠Q = 50° और BC = QR = 8 cm है। क्या ये सर्वांगसम हैं? कौन सा नियम?
चरण 1: दो भुजाएँ बराबर (AB = PQ, BC = QR)। चरण 2: उनके बीच का कोण बराबर (∠B = ∠Q)। चरण 3: इसलिए SAS से ΔABC ≅ ΔPQR।
2. ΔABC में AB = AC और ∠A = 40° है। ∠B और ∠C ज्ञात करो।
चरण 1: AB = AC, इसलिए ∠B = ∠C (समद्विबाहु)। चरण 2: ∠B + ∠C = 180° − 40° = 140°। चरण 3: हर कोण = 140° ÷ 2 = 70°।
3. दो त्रिभुजों में ∠A = ∠P = 45°, ∠B = ∠Q = 75° और AC = PR = 7 cm है। क्या ये सर्वांगसम हैं?
चरण 1: दो कोण बराबर। चरण 2: AC, ∠A और ∠B के बीच नहीं है, पर दूसरे त्रिभुज की संगत भुजा PR के बराबर है। चरण 3: AAS से ΔABC ≅ ΔPQR।
4. 5 m लंबी सीढ़ी दीवार से टिकी है, उसका पैर दीवार से 3 m दूर है। दूसरी 5 m की सीढ़ी का पैर भी उसी दीवार से 3 m दूर है। दिखाओ कि दोनों त्रिभुज सर्वांगसम हैं।
चरण 1: दोनों में दीवार और ज़मीन के बीच 90° है। चरण 2: कर्ण (सीढ़ी) दोनों में 5 m है। चरण 3: एक भुजा (ज़मीन की दूरी) दोनों में 3 m है। चरण 4: RHS से त्रिभुज सर्वांगसम हैं, इसलिए दोनों सीढ़ियाँ एक ही ऊँचाई (4 m) तक पहुँचती हैं।
5. रेखा l, ∠A को समद्विभाजित करती है। l पर बिंदु P से कोण की दोनों भुजाओं पर लंब PB और PC खींचे गए। सिद्ध करो PB = PC।
चरण 1: ΔAPB और ΔAPC में ∠PAB = ∠PAC (l समद्विभाजक है)। चरण 2: ∠ABP = ∠ACP = 90°। चरण 3: AP दोनों में साझा है। चरण 4: AAS से ΔAPB ≅ ΔAPC। चरण 5: CPCT से PB = PC।
6. ΔABC में ∠B = ∠C = 65° और AB = 9 cm है। AC और ∠A ज्ञात करो।
चरण 1: ∠B = ∠C, इसलिए सामने की भुजाएँ बराबर (समद्विबाहु का विलोम): AC = AB = 9 cm। चरण 2: ∠A = 180° − 65° − 65° = 50°।
आम गलतियाँ
- अक्षरों का गलत क्रम लिखना। अगर A, Q से मिलता है तो ΔABC ≅ ΔPQR नहीं लिख सकते।
- SSA को नियम मान लेना। कोण दोनों भुजाओं के बीच होना चाहिए (SAS), या फिर समकोण हो (RHS)।
- AAA से सर्वांगसमता मान लेना। बराबर कोण सिर्फ़ आकार एक जैसा बताते हैं, नाप नहीं।
- सर्वांगसमता सिद्ध करने से पहले CPCT लगा देना। पहले नियम से ≅ सिद्ध करो, फिर CPCT।