त्रिभुज क्या है? भाग और संकेत
त्रिभुज एक बंद आकृति है जो 3 बिंदुओं को 3 सीधी रेखाओं से जोड़ने पर बनती है। बिंदुओं को शीर्ष (कोने) कहते हैं और रेखाओं को भुजाएँ। हर शीर्ष पर दो भुजाएँ मिलकर एक कोण बनाती हैं।
त्रिभुज का नाम उसके शीर्षों से रखते हैं, जैसे त्रिभुज ABC, जिसे △ABC लिखते हैं। शीर्ष A के सामने की भुजा a है (यानी BC)। B के सामने की भुजा b और C के सामने की भुजा c है।
कोण योग: ∠A + ∠B + ∠C = 180°। यह हर त्रिभुज के लिए सच है, छोटा हो या बड़ा। दो कोण पता हों तो तीसरा निकल आता है।
त्रिभुज के प्रकार: भुजाओं और कोणों से
भुजाओं के आधार पर
- समबाहु (equilateral): तीनों भुजाएँ बराबर। तीनों कोण 60° के।
- समद्विबाहु (isosceles): दो भुजाएँ बराबर। बराबर भुजाओं के सामने के दोनों कोण भी बराबर।
- विषमबाहु (scalene): तीनों भुजाएँ अलग-अलग, इसलिए तीनों कोण भी अलग।
कोणों के आधार पर
- न्यून कोण त्रिभुज: हर कोण 90° से छोटा।
- समकोण त्रिभुज: एक कोण ठीक 90°। उसके सामने की भुजा सबसे लंबी होती है, उसे कर्ण (hypotenuse) कहते हैं।
- अधिक कोण त्रिभुज: एक कोण 90° से बड़ा।
त्रिभुज में केवल एक समकोण या एक अधिक कोण हो सकता है। दो ऐसे कोण मिलकर पहले ही 180° या उससे ज़्यादा हो जाएँगे, तीसरे के लिए जगह नहीं बचेगी।
त्रिभुज की भुजाएँ: त्रिभुज असमिका
त्रिभुज की किन्हीं दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से बड़ा होता है। इसे त्रिभुज असमिका कहते हैं।
क्यों? एक शीर्ष से दूसरे तक सीधा रास्ता सबसे छोटा होता है। तीसरे शीर्ष से होकर जाना घूमकर जाना है। अगर दो छड़ें बहुत छोटी हों, तो वे मिल नहीं पातीं और बीच में खाली जगह बच जाती है।
जल्दी जाँच: दो छोटी भुजाओं को जोड़िए और सबसे बड़ी भुजा से तुलना कीजिए। छड़ें 3, 4, 6: 3 + 4 = 7 > 6, इसलिए त्रिभुज बन सकता है। छड़ें 3, 4, 8: 3 + 4 = 7 < 8, इसलिए नहीं बन सकता।
तीसरी भुजा की सीमा: अगर दो भुजाएँ 4 और 9 हैं, तो तीसरी भुजा 9 − 4 = 5 से बड़ी और 9 + 4 = 13 से छोटी होनी चाहिए।
माध्यिका, कोण समद्विभाजक और ऊँचाई
त्रिभुज के शीर्ष से तीन ख़ास रेखाएँ खींची जा सकती हैं। हर त्रिभुज में हर तरह की 3 रेखाएँ होती हैं।
- माध्यिका (median): शीर्ष को सामने की भुजा के मध्य-बिंदु से जोड़ती है। वह उस भुजा को दो बराबर भागों में बाँटती है।
- कोण समद्विभाजक (angle bisector): शीर्ष के कोण को दो बराबर कोणों में बाँटता है। वह सामने की भुजा से मिलता है, पर हमेशा उसके मध्य पर नहीं।
- ऊँचाई (altitude): शीर्ष से वह रेखा जो सामने की भुजा से 90° पर मिलती है। अधिक कोण त्रिभुज में दो ऊँचाइयाँ त्रिभुज के बाहर गिरती हैं।
क्षेत्रफल में ऊँचाई काम आती है: क्षेत्रफल = ½ × आधार × ऊँचाई। समद्विबाहु त्रिभुज में ऊपर के शीर्ष से माध्यिका, समद्विभाजक और ऊँचाई एक ही रेखा होती हैं।
त्रिभुज मज़बूत क्यों होते हैं: स्थिरता
चार छड़ों को कोनों पर जोड़कर ढाँचा बनाइए। धक्का देने पर कोने अपने कोण बदल लेते हैं और ढाँचा झुक जाता है। अब तीन छड़ों से ढाँचा बनाइए। तीनों भुजाएँ तय हैं, इसलिए कोण भी तय हैं। वह झुक नहीं सकता। हम कहते हैं कि त्रिभुज दृढ़ (rigid, स्थिर) होता है।
चार भुजा वाला ढाँचा तिरछी पट्टी (विकर्ण) लगाने पर दृढ़ हो जाता है, क्योंकि पट्टी उसे दो त्रिभुजों में बाँट देती है। इसीलिए पुलों, क्रेनों, छत के ढाँचों, गेटों और साइकिल के फ्रेम में त्रिभुज दिखते हैं।
करके देखें: तिनके और छड़ें
3 cm, 4 cm, 5 cm और 9 cm लंबाई के तिनके या छड़ें काटिए। (3, 4, 5), (3, 4, 9) और (4, 5, 9) से त्रिभुज बनाकर देखिए। कौन-से बने? पहले त्रिभुज असमिका से जाँचिए, फिर बनाकर परखिए। फिर 4 तिनकों से चौकोर ढाँचा बनाकर धक्का दीजिए और एक विकर्ण जोड़िए। यही काम 3D के फ्री-प्ले चरण में स्लाइडर से भी कर सकते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कोण योग: ∠A + ∠B + ∠C = 180°।
- त्रिभुज असमिका: a + b > c, b + c > a, a + c > b।
- भुजाएँ p और q हों तो तीसरी भुजा x: |p − q| < x < p + q।
- समबाहु: 3 भुजाएँ बराबर, हर कोण 60°।
- समद्विबाहु: 2 भुजाएँ बराबर, उनके सामने के 2 कोण बराबर।
- समकोण त्रिभुज: एक कोण 90°; बाकी दो का योग 90°।
- त्रिभुज का क्षेत्रफल = ½ × आधार × ऊँचाई।
- माध्यिका: शीर्ष से सामने की भुजा के मध्य तक।
हल किए गए उदाहरण
1. त्रिभुज के दो कोण 40° और 75° हैं। तीसरा कोण निकालिए और बताइए कि यह किस प्रकार का त्रिभुज है।
तीसरा कोण = 180° − 40° − 75° = 65°। तीनों कोण (40°, 75°, 65°) 90° से छोटे हैं और सब अलग-अलग हैं। इसलिए यह न्यून कोण विषमबाहु त्रिभुज है।
2. क्या 5 cm, 7 cm और 13 cm भुजाओं वाला त्रिभुज बन सकता है?
दो छोटी भुजाएँ जोड़िए: 5 + 7 = 12। सबसे लंबी भुजा से तुलना: 12, 13 से बड़ा नहीं है। इसलिए छड़ें मिल नहीं पाएँगी और त्रिभुज नहीं बनेगा।
3. त्रिभुज की दो भुजाएँ 4 cm और 9 cm हैं। तीसरी भुजा किन दो मानों के बीच होगी?
तीसरी भुजा अंतर से बड़ी होगी: 9 − 4 = 5 cm। वह योग से छोटी होगी: 9 + 4 = 13 cm। इसलिए वह 5 cm और 13 cm के बीच है।
4. एक समद्विबाहु त्रिभुज में दोनों बराबर भुजाओं के बीच का कोण 40° है। बाकी दो कोण निकालिए।
बाकी दो कोणों का योग 180° − 40° = 140° है। वे बराबर हैं (बराबर भुजाओं के सामने), इसलिए हर एक 140° ÷ 2 = 70° है।
आम गलतियाँ
- माध्यिका और ऊँचाई को एक ही मान लेना। माध्यिका मध्य तक जाती है; ऊँचाई 90° पर गिरती है। केवल ख़ास स्थितियों में, जैसे समद्विबाहु त्रिभुज के ऊपरी शीर्ष से, ये एक ही रेखा होती हैं।
- त्रिभुज असमिका में सिर्फ़ एक जोड़ी भुजाएँ जाँचना। इतना देखना काफ़ी है कि दो छोटी भुजाओं का योग सबसे बड़ी भुजा से बड़ा हो।
- यह मान लेना कि कोण समद्विभाजक हमेशा सामने की भुजा के मध्य पर पहुँचता है। ऐसा तभी होता है जब उस शीर्ष की दोनों भुजाएँ बराबर हों।
- कोण योग 180° की जगह 360° लगाना (360° चार भुजा वाली आकृति के लिए है)।