चतुर्भुज और कोणों का योग
चतुर्भुज की 4 भुजाएँ, 4 शीर्ष और 4 कोण होते हैं। आमने-सामने के दो शीर्षों को मिलाने वाली रेखा विकर्ण है।
एक विकर्ण चतुर्भुज को दो त्रिभुजों में बाँट देता है। हर त्रिभुज के कोणों का जोड़ 180° है। इसलिए चारों कोणों का जोड़ 360° है।
परिवार: समलंब में एक जोड़ी भुजाएँ समांतर। समांतर चतुर्भुज में दो जोड़ी। आयत = समकोण वाला समांतर चतुर्भुज। समचतुर्भुज = सभी भुजाएँ बराबर वाला समांतर चतुर्भुज। वर्ग आयत भी है और समचतुर्भुज भी।
समांतर चतुर्भुज के गुण
समांतर चतुर्भुज ABCD में विकर्ण AC खींचो। AB ∥ DC, इसलिए ∠BAC = ∠DCA (एकांतर कोण)। AD ∥ BC, इसलिए ∠BCA = ∠DAC। AC साझा है। ASA से ΔABC ≅ ΔCDA। CPCT से:
- आमने-सामने की भुजाएँ बराबर: AB = CD, AD = BC।
- सम्मुख कोण बराबर: ∠B = ∠D (इसी तरह ∠A = ∠C)।
- पास-पास के कोणों का जोड़ 180°: ∠A + ∠B = 180°।
- विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं: O पर मिलें तो OA = OC, OB = OD (ΔAOB ≅ ΔCOD, ASA से)।
कैसे जाँचें कि चतुर्भुज समांतर है?
इनके विलोम भी सच हैं। इनमें से कोई एक बात हो तो चतुर्भुज समांतर चतुर्भुज है:
- आमने-सामने की दोनों जोड़ी भुजाएँ बराबर;
- सम्मुख कोणों की दोनों जोड़ियाँ बराबर;
- विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करें;
- एक जोड़ी आमने-सामने की भुजाएँ बराबर भी और समांतर भी।
खास समांतर चतुर्भुज: विकर्ण बराबर → आयत। विकर्ण लंबवत → समचतुर्भुज। विकर्ण बराबर और लंबवत → वर्ग।
मध्य-बिंदु प्रमेय और उसका विलोम
मध्य-बिंदु प्रमेय: ΔABC में D, AB का और E, AC का मध्य-बिंदु हो, तो DE ∥ BC और DE = ½ BC।
क्यों: DE को F तक बढ़ाओ ताकि EF = DE, और CF मिलाओ। ΔADE ≅ ΔCFE (SAS: AE = CE, DE = FE, E पर शीर्षाभिमुख कोण)। तो CF = AD = DB और CF ∥ AB। अब DBCF में एक जोड़ी भुजाएँ बराबर और समांतर हैं, तो यह समांतर चतुर्भुज है। इसलिए DF ∥ BC और DF = BC, यानी DE = ½ BC।
विलोम: एक भुजा के मध्य-बिंदु से दूसरी भुजा के समांतर खींची रेखा तीसरी भुजा को उसके मध्य-बिंदु पर काटती है।
माध्यिकाएँ 2 : 1 में मिलती हैं
माध्यिका त्रिभुज के शीर्ष को सामने की भुजा के मध्य-बिंदु से मिलाती है। हर त्रिभुज की तीन माध्यिकाएँ होती हैं और वे हमेशा एक बिंदु पर मिलती हैं। इसे केंद्रक (centroid) G कहते हैं।
G हर माध्यिका पर शीर्ष से दो-तिहाई दूरी पर है: AG : GD = 2 : 1। छोटा कारण: माध्यिकाएँ BE और CF, G पर मिलें। BG और CG के मध्य-बिंदु P, Q लो। मध्य-बिंदु प्रमेय से FE और PQ दोनों BC के समांतर और ½ BC के बराबर हैं। तो FEQP समांतर चतुर्भुज है और इसके विकर्ण एक-दूसरे को आधा करते हैं: GE = GP = PB, GF = GQ = QC। यानी G हर माध्यिका को 2 : 1 में बाँटता है, और तीसरी माध्यिका भी इसी बिंदु से गुज़रती है।
गत्ते के त्रिभुज को केंद्रक पर पेंसिल की नोक पर संतुलित किया जा सकता है।
सममिति और टाइलिंग
सममिति रेखा आकृति को मोड़कर दो मिलते-जुलते हिस्सों में बाँटती है।
- साधारण समांतर चतुर्भुज: 0 रेखाएँ (पर आधा चक्कर घुमाने पर वैसा ही दिखता है)।
- आयत: 2 रेखाएँ (आमने-सामने की भुजाओं के मध्य-बिंदुओं से)।
- समचतुर्भुज: 2 रेखाएँ (उसके विकर्ण)।
- वर्ग: 4 रेखाएँ।
टाइलिंग (tessellation) यानी एक ही आकृति की कॉपियों से फ़र्श ढकना, बिना खाली जगह और बिना एक-दूसरे पर चढ़े। हर समांतर चतुर्भुज टाइल बनता है, क्योंकि फ़र्श के हर कोने पर ∠A, ∠B, ∠C, ∠D मिलते हैं और उनका जोड़ 360° है। असल में कोई भी चतुर्भुज, टेढ़ा-मेढ़ा भी, कॉपियों को आधा घुमाकर फ़र्श ढक सकता है।
घर पर करके देखो
कागज़ का कोई भी त्रिभुज काटो। मोड़कर दो भुजाओं के मध्य-बिंदु निकालो। उन्हें पैमाने से मिलाओ और नापो: रेखा तीसरी भुजा की ठीक आधी है। फिर तीनों मध्य-बिंदु निकालकर तीनों माध्यिकाएँ खींचो। देखो वे एक ही बिंदु पर मिलती हैं। उस बिंदु पर त्रिभुज को पेंसिल की नोक पर टिकाओ।
गत्ते से एक ही चतुर्भुज की 9 कॉपी काटो और बिना खाली जगह छोड़े पन्ना ढकने की कोशिश करो। 3D के आखिरी चरण में कोण 90° करो या भुजाएँ बराबर करो और नाम व सममिति रेखाएँ बदलते देखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- चतुर्भुज के कोणों का योग = 360°
- समांतर चतुर्भुज: AB = CD, AD = BC, ∠A = ∠C, ∠B = ∠D, ∠A + ∠B = 180°
- समांतर चतुर्भुज के विकर्ण: OA = OC, OB = OD
- मध्य-बिंदु प्रमेय: DE ∥ BC, DE = ½ BC
- केंद्रक: AG : GD = 2 : 1, यानी AG = ⅔ AD
हल किए गए उदाहरण
1. एक चतुर्भुज के तीन कोण 80°, 95° और 110° हैं। चौथा कोण ज्ञात करो।
चरण 1: चारों का जोड़ 360°। चरण 2: 80 + 95 + 110 = 285। चरण 3: चौथा कोण = 360 − 285 = 75°।
2. समांतर चतुर्भुज ABCD में ∠A = 70° है। ∠B, ∠C और ∠D ज्ञात करो।
चरण 1: पास-पास के कोणों का जोड़ 180°, तो ∠B = 180 − 70 = 110°। चरण 2: सम्मुख कोण बराबर: ∠C = ∠A = 70°, ∠D = ∠B = 110°।
3. समांतर चतुर्भुज PQRS के विकर्ण O पर मिलते हैं। PO = 4.5 cm और QO = 3 cm। PR और QS ज्ञात करो।
चरण 1: विकर्ण एक-दूसरे को आधा करते हैं, तो OR = 4.5 cm और OS = 3 cm। चरण 2: PR = 4.5 + 4.5 = 9 cm। चरण 3: QS = 3 + 3 = 6 cm।
4. ΔABC में D और E, AB और AC के मध्य-बिंदु हैं। BC = 11 cm। DE ज्ञात करो।
चरण 1: मध्य-बिंदु प्रमेय से DE = ½ BC। चरण 2: DE = 11 ÷ 2 = 5.5 cm। चरण 3: साथ ही DE ∥ BC।
5. एक त्रिभुज की भुजाएँ 6 cm, 8 cm और 10 cm हैं। भुजाओं के मध्य-बिंदुओं को मिलाकर बने त्रिभुज का परिमाप ज्ञात करो।
चरण 1: छोटे त्रिभुज की हर भुजा बड़े की एक भुजा की आधी है। चरण 2: भुजाएँ 3, 4 और 5 cm। चरण 3: परिमाप = 3 + 4 + 5 = 12 cm (24 का आधा)।
6. ΔABC की माध्यिका AD = 12 cm है और G केंद्रक है। AG और GD ज्ञात करो।
चरण 1: AG : GD = 2 : 1, यानी AD के 3 बराबर भाग। चरण 2: एक भाग = 12 ÷ 3 = 4 cm। चरण 3: AG = 2 × 4 = 8 cm, GD = 4 cm।
7. चतुर्भुज ABCD के विकर्ण बराबर हैं और एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं। यह कौन सा चतुर्भुज है?
चरण 1: विकर्ण एक-दूसरे को आधा करते हैं → समांतर चतुर्भुज। चरण 2: विकर्ण बराबर भी हैं → आयत। (लंबवत भी होते तो वर्ग।)
आम गलतियाँ
- यह मान लेना कि हर समांतर चतुर्भुज के विकर्ण बराबर होते हैं। ऐसा सिर्फ़ आयत (और वर्ग) में होता है।
- D और E दोनों मध्य-बिंदु न हों फिर भी DE = ½ BC लिखना। पक्का करो कि दोनों ठीक बीच में हैं।
- AG : GD = 1 : 2 लिखना। लंबा हिस्सा शीर्ष की तरफ़ है: AG : GD = 2 : 1।
- यह सोचना कि समचतुर्भुज की 4 सममिति रेखाएँ हैं। उसकी सिर्फ़ 2 हैं (विकर्ण); वर्ग की 4 हैं।