South 중학교 2학년 Mathematics 2
अध्याय: 7
1. Rational numbers and decimals
Repeating decimals and rational numbers
- परिमेय संख्याएँ: संख्या रेखा, सघनता और दशमलव – जिस संख्या को p/q के रूप में लिख सकें, जहाँ p और q पूर्णांक हों और q शून्य न हो, उसे परिमेय संख्या कहते हैं। जैसे 3/4, −5/3, 7 (= 7/1), 0.25 (= 1/4)। p/q को संख्या रेखा पर दिखाने के लिए हर इकाई को q बराबर टुकड़ों में काटो और 0 से p टुकड़े चलो। किन्हीं दो परिमेय संख्याओं के बीच हमेशा एक और परिमेय संख्या होती है (उनका औसत), इसलिए बीच में अनगिनत संख्याएँ हैं। परिमेय संख्या का दशमलव या तो खत्म हो जाता है (सांत) या कोई हिस्सा बार-बार दोहराता है (असांत आवर्ती)।
2. Expressions
Laws of exponents · Adding and subtracting polynomials · Multiplying and dividing by monomials
- घातांक के नियम – घातांक बताता है कि आधार को कितनी बार खुद से गुणा किया गया। एक ही आधार हो तो: गुणा → घातांक जोड़ें, भाग → घटाएँ, घात की घात → गुणा करें। a⁰ = 1, a⁻ⁿ = 1/aⁿ और a^(1/n) = n-वाँ मूल।
- बहुपदों का परिचय – बीजीय व्यंजक 3x², −5x, 7 जैसे पदों से बनता है। जब चर (x) की हर घात पूर्ण संख्या (0, 1, 2, …) हो, तो वह बहुपद है। सबसे बड़ी घात को बहुपद की घात कहते हैं। घात 1 वाले बहुपद y = ax + b रैखिक कहलाते हैं। ये हर कदम पर बराबर बढ़ने या घटने वाली चीज़ें दिखाते हैं। a ढाल है (हर कदम का बदलाव) और b y-अंतःखंड (शुरुआती मान)।
3. Inequalities and simultaneous equations
Inequalities and their properties · Solving linear inequalities · Simultaneous linear equations in two unknowns
- एक चर वाली रैखिक असमिकाएँ – असमिका दो व्यंजकों की तुलना <, >, ≤ या ≥ से करती है। एक चर की रैखिक असमिका ax + b < c जैसी होती है। इसका हल आम तौर पर एक संख्या नहीं, बल्कि संख्याओं की पूरी श्रेणी होता है। इसे समीकरण की तरह हल करते हैं: दोनों ओर एक ही संख्या जोड़-घटा सकते हैं, और एक ही धनात्मक संख्या से गुणा-भाग कर सकते हैं। ऋणात्मक संख्या से गुणा या भाग करने पर चिह्न उलट जाता है। हल को संख्या रेखा पर दिखाते हैं: < या > के लिए खोखला गोला (सिरा शामिल नहीं), ≤ या ≥ के लिए भरा गोला (सिरा शामिल), और छायांकित भाग सारे हल दिखाता है। −1 ≤ x < 3 जैसी दोहरी असमिका रेखा का एक टुकड़ा देती है। यदि x प्राकृत या पूर्णांक हो, तो केवल उस श्रेणी की पूर्ण संख्याएँ हल हैं।
- दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म – a₁x + b₁y = c₁ और a₂x + b₂y = c₂ जैसे दो समीकरण दो सीधी रेखाएँ बनाते हैं। जो (x, y) दोनों को सही करे, वह इन रेखाओं का मिलने का बिंदु है। रेखाएँ काटें तो एक हल, समांतर हों तो कोई हल नहीं, और एक-दूसरे पर पड़ी हों तो अनंत हल। हल ग्राफ से, प्रतिस्थापन से या विलोपन से निकालते हैं।
4. Linear functions
Idea of a function · Linear functions and their graphs · Slope and intercepts · Linear functions and two-variable equations · Graphs and simultaneous equations
- फलन: संयुक्त, प्रतिलोम और मानक ग्राफ़ – फलन (function) एक नियम है जो हर मान्य इनपुट को ठीक एक आउटपुट देता है। मान्य इनपुट का समुच्चय प्रांत (domain) और आउटपुट का समुच्चय परिसर (range) है। g(f(x)) का मतलब है पहले f, फिर g। प्रतिलोम फलन f⁻¹, f का काम उल्टा कर देता है और उसका ग्राफ़ रेखा y = x में f के ग्राफ़ की दर्पण-छवि होता है। सिर्फ़ एकैकी (one-to-one) फलन का प्रतिलोम होता है।
- रैखिक फलन (Linear Functions) – रैखिक फलन में x के हर 1 बढ़ने पर y में हमेशा एक बराबर मात्रा जुड़ती है। इसका नियम y = mx + c है (कहीं f(x) = mx + b भी लिखते हैं)। m ढाल है: ऊपर ÷ आगे, यानी x में 1 बढ़ने पर y का बदलाव। c, y-अंतःखंड है: x = 0 पर y का मान। इसका ग्राफ़ हमेशा सीधी रेखा होता है।
- दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म – a₁x + b₁y = c₁ और a₂x + b₂y = c₂ जैसे दो समीकरण दो सीधी रेखाएँ बनाते हैं। जो (x, y) दोनों को सही करे, वह इन रेखाओं का मिलने का बिंदु है। रेखाएँ काटें तो एक हल, समांतर हों तो कोई हल नहीं, और एक-दूसरे पर पड़ी हों तो अनंत हल। हल ग्राफ से, प्रतिस्थापन से या विलोपन से निकालते हैं।
5. Properties of triangles and quadrilaterals
Isosceles triangles · Circumcentre and incentre · Properties of quadrilaterals
- त्रिभुजों की सर्वांगसमता – दो त्रिभुज सर्वांगसम (congruent) होते हैं जब एक को दूसरे पर रखने से वह पूरा ढक जाए: तीनों भुजाएँ और तीनों कोण बराबर। छहों भाग जाँचने की ज़रूरत नहीं। SAS, SSS, ASA, AAS या RHS में से कोई एक नियम काफ़ी है। SSA काफ़ी नहीं है। समद्विबाहु त्रिभुज में बराबर भुजाओं के सामने के कोण बराबर होते हैं, और इसका उल्टा भी सच है।
- त्रिभुज के गुण और उसके केन्द्र – हर त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° होता है। त्रिभुज के चार ख़ास केन्द्र हैं। माध्यिकाएँ केन्द्रक G पर मिलती हैं, जो हर माध्यिका को 2 : 1 में बाँटता है। लंब समद्विभाजक परिकेन्द्र O पर मिलते हैं — यह शीर्षों से गुज़रने वाले वृत्त का केन्द्र है। कोण समद्विभाजक अंतःकेन्द्र I पर मिलते हैं — यह भुजाओं को छूने वाले अंदर के वृत्त का केन्द्र है। शीर्षलंब लंबकेन्द्र H पर मिलते हैं। O, G, H एक ही रेखा — यूलर रेखा — पर होते हैं।
- चतुर्भुज – चतुर्भुज की 4 भुजाएँ और 4 कोण होते हैं, कोणों का जोड़ 360° है। समांतर चतुर्भुज में आमने-सामने की भुजाएँ समांतर और बराबर, सम्मुख कोण बराबर, और विकर्ण एक-दूसरे को आधा-आधा काटते हैं। ये बातें जाँच के तौर पर भी काम आती हैं। त्रिभुज की दो भुजाओं के मध्य-बिंदुओं को मिलाने वाली रेखा तीसरी भुजा के समांतर और उसकी आधी होती है। तीनों माध्यिकाएँ एक बिंदु पर मिलती हैं जो हर माध्यिका को 2 : 1 में बाँटता है।
6. Similarity and Pythagoras
Similar figures and ratio · Similar triangle conditions · Parallel lines and segment ratios · Pythagorean theorem
- समरूप त्रिभुज – दो आकृतियाँ समरूप होती हैं जब उनका आकार (shape) एक जैसा हो, भले नाप अलग हो। दो त्रिभुज समरूप हैं अगर उनके संगत कोण बराबर हों और संगत भुजाएँ एक ही अनुपात में हों। आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय (BPT): त्रिभुज की एक भुजा के समांतर रेखा बाकी दो भुजाओं को एक ही अनुपात में बाँटती है; इसका विलोम भी सही है। समरूपता AA, SSS या SAS से सिद्ध होती है।
- पाइथागोरस प्रमेय – किसी भी समकोण त्रिभुज में सबसे लंबी भुजा (कर्ण) का वर्ग बाकी दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर होता है: a² + b² = c²।
7. Probability
Counting outcomes · Probability and its basic properties
- क्रमचय और संचय – इस अध्याय का मूल है: बिना सूची बनाए गिनना। गणना का मूल सिद्धांत कहता है: यदि एक काम m तरीकों से और उसके बाद दूसरा n तरीकों से हो सकता है, तो दोनों मिलकर m × n तरीकों से होते हैं। n! (n क्रमगुणित) = 1 × 2 × … × n, और 0! = 1। क्रमचय एक व्यवस्था है, जिसमें क्रम मायने रखता है: n भिन्न वस्तुओं में से r को व्यवस्थित करने के तरीके ⁿPᵣ = n!/(n − r)!। संचय एक चयन है, जिसमें क्रम मायने नहीं रखता: ⁿCᵣ = n!/(r!(n − r)!)। हर चयन को r! तरीकों से सजा सकते हैं, इसलिए ⁿPᵣ = ⁿCᵣ × r!। उपयोगी तथ्य: ⁿCᵣ = ⁿCₙ₋ᵣ और ⁿCᵣ + ⁿCᵣ₋₁ = ⁿ⁺¹Cᵣ। कुछ वस्तुएँ समान हों तो हर दोहराव की संख्या के क्रमगुणित से भाग दें।