हर त्रिभुज के मूल गुण
त्रिभुज की 3 भुजाएँ और 3 कोण होते हैं। ये तीन नियम हर त्रिभुज पर लागू होते हैं:
- कोण योग: तीनों अंतः कोणों का योग 180° है।
- बहिष्कोण: एक भुजा को आगे बढ़ाने पर बना बाहरी कोण, दोनों दूर वाले अंतः कोणों के योग के बराबर होता है।
- त्रिभुज असमिका: किन्हीं दो भुजाओं का योग तीसरी से बड़ा होता है। इसलिए 3, 4 और 9 सेमी से त्रिभुज नहीं बनता।
सबसे लंबी भुजा हमेशा सबसे बड़े कोण के सामने होती है।
माध्यिका और केन्द्रक
माध्यिका (median) शीर्ष से सामने की भुजा के मध्य-बिंदु तक की रेखा है। तीनों माध्यिकाएँ हमेशा एक बिंदु पर मिलती हैं — केन्द्रक (centroid) G।
G हर माध्यिका को 2 : 1 में बाँटता है: शीर्ष वाला हिस्सा दूसरे से दोगुना। शीर्ष (x₁, y₁), (x₂, y₂), (x₃, y₃) हों तो G = ((x₁+x₂+x₃)/3, (y₁+y₂+y₃)/3)। G त्रिभुज का संतुलन बिंदु है और हमेशा अंदर रहता है।
लंब समद्विभाजक और परिकेन्द्र
भुजा का लंब समद्विभाजक उसके मध्य-बिंदु से 90° पर गुज़रता है। इस पर हर बिंदु भुजा के दोनों सिरों से बराबर दूर है। इसलिए तीनों जहाँ मिलते हैं, वह बिंदु O — A, B, C से बराबर दूरी R पर है। O परिकेन्द्र (circumcentre) है और R त्रिज्या का वृत्त परिवृत्त।
O कहाँ होता है? न्यूनकोण त्रिभुज में अंदर, समकोण त्रिभुज में कर्ण के मध्य-बिंदु पर, और अधिककोण त्रिभुज में बाहर।
कोण समद्विभाजक और अंतःकेन्द्र
कोण समद्विभाजक कोण को दो बराबर हिस्सों में बाँटता है। इस पर हर बिंदु कोण की दोनों भुजाओं से बराबर दूर है। तीनों I पर मिलते हैं — अंतःकेन्द्र (incentre), जो तीनों भुजाओं से बराबर दूरी r पर है। r त्रिज्या का वृत्त अंतःवृत्त है, जो हर भुजा को एक बार छूता है। I हमेशा अंदर रहता है।
काम की बातें: r = क्षेत्रफल ÷ s, जहाँ s = (a + b + c)/2 अर्धपरिमाप है। कोण समद्विभाजक प्रमेय: A से समद्विभाजक BC को AB : AC के अनुपात में बाँटता है।
शीर्षलंब, लंबकेन्द्र और यूलर रेखा
शीर्षलंब (altitude) शीर्ष से सामने की भुजा (या उसके बढ़ाव) पर 90° पर डाली गई रेखा है। तीनों H पर मिलते हैं — लंबकेन्द्र (orthocentre)। समकोण त्रिभुज में H समकोण वाला शीर्ष है; अधिककोण त्रिभुज में बाहर।
जब तीन या अधिक रेखाएँ एक बिंदु से गुज़रें तो वे संगामी (concurrent) कहलाती हैं। हर त्रिभुज में O, G, H एक सीधी रेखा — यूलर रेखा — पर होते हैं और OG : GH = 1 : 2। समबाहु त्रिभुज में चारों केन्द्र एक ही बिंदु होते हैं।
सेवा और मेनेलॉस प्रमेय (बड़ी कक्षाओं के लिए)
सेवा (Ceva): BC पर D, CA पर E, AB पर F लो। रेखाएँ AD, BE, CF एक बिंदु पर तभी मिलती हैं जब (BD/DC) × (CE/EA) × (AF/FB) = 1। माध्यिकाओं में हर अनुपात 1 है, इसलिए वे हमेशा मिलती हैं।
मेनेलॉस (Menelaus): अगर एक सीधी रेखा तीनों भुजाओं (या उनके बढ़ाव) को D, E, F पर काटे, तो लंबाइयों से (BD/DC) × (CE/EA) × (AF/FB) = 1 (चिह्न सहित −1)। सेवा बताता है कि तीन रेखाएँ मिलती हैं या नहीं; मेनेलॉस बताता है कि तीन बिंदु एक रेखा पर हैं या नहीं।
करके देखो: घर पर केन्द्रक ढूँढो
मोटे गत्ते से कोई भी त्रिभुज काटो। भुजाओं के मध्य-बिंदु नापकर तीनों माध्यिकाएँ खींचो। जहाँ वे मिलें, उसके नीचे पेंसिल की नोक रखो — त्रिभुज संतुलित हो जाएगा! फिर कोण समद्विभाजक (एक भुजा को दूसरी पर मोड़कर) बनाओ और देखो कि वे किसी दूसरे बिंदु पर मिलते हैं, जब तक त्रिभुज समबाहु न हो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ∠A + ∠B + ∠C = 180°
- बहिष्कोण = दोनों दूर के अंतः कोणों का योग
- a + b > c (त्रिभुज असमिका)
- G = ((x₁+x₂+x₃)/3, (y₁+y₂+y₃)/3), AG : GD = 2 : 1
- r = क्षेत्रफल ÷ s, s = (a+b+c)/2
- R = abc ÷ (4 × क्षेत्रफल)
- कोण समद्विभाजक: BD/DC = AB/AC
- Ceva: (BD/DC)(CE/EA)(AF/FB) = 1
- यूलर रेखा: OG : GH = 1 : 2
हल किए गए उदाहरण
1. त्रिभुज के दो कोण 48° और 67° हैं। तीसरा कोण ज्ञात करो।
तीसरा = 180° − 48° − 67° = 65°।
2. क्या 5, 6 और 12 सेमी से त्रिभुज बन सकता है?
दो छोटी भुजाएँ जोड़ो: 5 + 6 = 11, जो 12 से कम है। इसलिए त्रिभुज नहीं बनेगा।
3. माध्यिका AD = 12 सेमी है। AG और GD ज्ञात करो।
G, AD को 2 : 1 में बाँटता है। AG = 12 × 2/3 = 8 सेमी, GD = 4 सेमी।
4. शीर्ष (1, 2), (5, 4), (3, 9) वाले त्रिभुज का केन्द्रक ज्ञात करो।
G = ((1+5+3)/3, (2+4+9)/3) = (3, 5)।
5. भुजाएँ 6, 8, 10 सेमी हैं। परित्रिज्या R और अंतःत्रिज्या r ज्ञात करो।
6² + 8² = 100 = 10², तो समकोण त्रिभुज। क्षेत्रफल = ½ × 6 × 8 = 24, s = 12। r = 24 ÷ 12 = 2 सेमी। R = कर्ण का आधा = 5 सेमी।
6. AB = 9, AC = 6, BC = 10 सेमी। ∠A का समद्विभाजक BC को D पर मिलता है। BD ज्ञात करो।
BD/DC = 9/6 = 3/2। BD = 10 × 3/5 = 6 सेमी, DC = 4 सेमी।
7. BD/DC = 2 और CE/EA = 3 है। AB पर F कहाँ हो कि AD, BE, CF एक बिंदु पर मिलें?
सेवा से: 2 × 3 × (AF/FB) = 1, तो AF/FB = 1/6। F, AB को A की ओर से 1 : 6 में बाँटता है।
आम गलतियाँ
- केन्द्रों को आपस में मिला देना। जोड़े याद रखो: माध्यिका → केन्द्रक, लंब समद्विभाजक → परिकेन्द्र, कोण समद्विभाजक → अंतःकेन्द्र, शीर्षलंब → लंबकेन्द्र।
- AG : GD = 1 : 2 लिखना। लंबा हिस्सा शीर्ष की तरफ़ है, इसलिए AG : GD = 2 : 1।
- यह सोचना कि हर केन्द्र अंदर होता है। केवल G और I हमेशा अंदर हैं; अधिककोण त्रिभुज में O और H बाहर चले जाते हैं।
- त्रिभुज असमिका ग़लत जोड़े से जाँचना। हमेशा दो छोटी भुजाएँ जोड़कर सबसे बड़ी से तुलना करो।