Japan 高校1年 Mathematics A
अध्याय: 3
1. Properties of figures
Triangle properties (centres, Ceva, Menelaus) · Circle properties (tangents, cyclic quadrilaterals) · Solid figures (Euler's formula)
- त्रिभुज के गुण और उसके केन्द्र – हर त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° होता है। त्रिभुज के चार ख़ास केन्द्र हैं। माध्यिकाएँ केन्द्रक G पर मिलती हैं, जो हर माध्यिका को 2 : 1 में बाँटता है। लंब समद्विभाजक परिकेन्द्र O पर मिलते हैं — यह शीर्षों से गुज़रने वाले वृत्त का केन्द्र है। कोण समद्विभाजक अंतःकेन्द्र I पर मिलते हैं — यह भुजाओं को छूने वाले अंदर के वृत्त का केन्द्र है। शीर्षलंब लंबकेन्द्र H पर मिलते हैं। O, G, H एक ही रेखा — यूलर रेखा — पर होते हैं।
- वृत्त की स्पर्श रेखा – स्पर्श रेखा वह रेखा है जो वृत्त को सिर्फ़ एक बिंदु पर छूती है। उस बिंदु पर वह त्रिज्या से 90° का कोण बनाती है। बाहर के एक बिंदु से खींची गई दोनों स्पर्श रेखाएँ हमेशा बराबर होती हैं।
2. Counting and probability
Counting elements of sets · Permutations and combinations · Probability laws · Independent trials · Conditional probability
- समुच्चय: निरूपण, प्रकार, उपसमुच्चय, वेन आरेख और संक्रियाएँ – समुच्चय (set) अलग-अलग वस्तुओं का सुपरिभाषित संग्रह है। इसे रोस्टर रूप {2, 4, 6} या समुच्चय-निर्माण रूप {x : x सम है} में लिखते हैं। समुच्चय रिक्त, परिमित, अपरिमित या समान हो सकते हैं। B का हर अवयव A में हो तो B ⊂ A। n अवयवों वाले समुच्चय के 2ⁿ उपसमुच्चय होते हैं। (a, b), [a, b] जैसे अंतराल वास्तविक संख्याओं के उपसमुच्चय हैं। वेन आरेख से सम्मिलन A ∪ B, सर्वनिष्ठ A ∩ B, अंतर A − B और पूरक A′ = U − A साफ़ दिखते हैं।
- क्रमचय और संचय – इस अध्याय का मूल है: बिना सूची बनाए गिनना। गणना का मूल सिद्धांत कहता है: यदि एक काम m तरीकों से और उसके बाद दूसरा n तरीकों से हो सकता है, तो दोनों मिलकर m × n तरीकों से होते हैं। n! (n क्रमगुणित) = 1 × 2 × … × n, और 0! = 1। क्रमचय एक व्यवस्था है, जिसमें क्रम मायने रखता है: n भिन्न वस्तुओं में से r को व्यवस्थित करने के तरीके ⁿPᵣ = n!/(n − r)!। संचय एक चयन है, जिसमें क्रम मायने नहीं रखता: ⁿCᵣ = n!/(r!(n − r)!)। हर चयन को r! तरीकों से सजा सकते हैं, इसलिए ⁿPᵣ = ⁿCᵣ × r!। उपयोगी तथ्य: ⁿCᵣ = ⁿCₙ₋ᵣ और ⁿCᵣ + ⁿCᵣ₋₁ = ⁿ⁺¹Cᵣ। कुछ वस्तुएँ समान हों तो हर दोहराव की संख्या के क्रमगुणित से भाग दें।
- प्रायिकता: घटनाएँ, घटनाओं का बीजगणित और अभिगृहीत – घटना प्रतिदर्श समष्टि S का कोई भी उपसमुच्चय है। घटनाओं A और B से नई घटनाएँ बनती हैं: A नहीं (A′), A और B (A ∩ B), A या B (A ∪ B)। कोई साझा परिणाम न हो तो घटनाएँ परस्पर अपवर्जी, और मिलकर पूरा S बनाएँ तो निःशेष। अभिगृहीत: हर P(E) ≥ 0, P(S) = 1, और परस्पर अपवर्जी A, B के लिए P(A ∪ B) = P(A) + P(B)। इनसे P(A′) = 1 − P(A) और P(A ∪ B) = P(A) + P(B) − P(A ∩ B) मिलते हैं।
3. Mathematics and human activity
Number and figure concepts in human culture (divisors, base-n, Euclidean algorithm) · Math history, puzzles and games
- अंकगणित की आधारभूत प्रमेय – 1 से बड़ी हर पूर्ण संख्या या तो अभाज्य है, या अभाज्य संख्याओं का गुणनफल — और यह गुणनफल सिर्फ एक ही तरह से बनता है (क्रम बदल सकता है)। यही अंकगणित की आधारभूत प्रमेय है। HCF = सार्व अभाज्यों की सबसे छोटी घातों का गुणनफल; LCM = सभी अभाज्यों की सबसे बड़ी घातों का गुणनफल। दो संख्याओं के लिए HCF × LCM = a × b.