France Troisième Mathematics
अध्याय: 5
1. Numbers and calculations
Irreducible fractions, multiples and divisors · Powers with any base and negative exponents · Using square roots in problems · Double distributivity · Difference of squares, zero-product equations, x² = a
- अंकगणित की आधारभूत प्रमेय – 1 से बड़ी हर पूर्ण संख्या या तो अभाज्य है, या अभाज्य संख्याओं का गुणनफल — और यह गुणनफल सिर्फ एक ही तरह से बनता है (क्रम बदल सकता है)। यही अंकगणित की आधारभूत प्रमेय है। HCF = सार्व अभाज्यों की सबसे छोटी घातों का गुणनफल; LCM = सभी अभाज्यों की सबसे बड़ी घातों का गुणनफल। दो संख्याओं के लिए HCF × LCM = a × b.
- घातांक के नियम – घातांक बताता है कि आधार को कितनी बार खुद से गुणा किया गया। एक ही आधार हो तो: गुणा → घातांक जोड़ें, भाग → घटाएँ, घात की घात → गुणा करें। a⁰ = 1, a⁻ⁿ = 1/aⁿ और a^(1/n) = n-वाँ मूल।
- वर्गमूल: वर्ग बनाओ, उसकी भुजा खोजो – किसी संख्या n का वर्गमूल वह संख्या है जिसे खुद से गुणा करने पर n मिले। √25 = 5, क्योंकि 5 × 5 = 25। n टाइलों को वर्ग में जमाओ: भुजा ही वर्गमूल है। पूर्ण वर्ग (1, 4, 9, 16, …) के वर्गमूल पूर्ण संख्याएँ हैं। बाकी वर्गमूल अपरिमेय होते हैं और दो पूर्ण संख्याओं के बीच आते हैं; उनका अनुमान लगाते हैं या उन्हें सरल करते हैं, जैसे √50 = 5√2।
- बीजीय सर्वसमिकाओं की खोज – सर्वसमिका (identity) ऐसा समीकरण है जो अक्षरों के हर मान के लिए सही हो। चित्र से इन्हें साबित करते हैं: भुजा (a + b) का वर्ग a², ab, ab और b² में बँटता है, इसलिए (a + b)² = a² + 2ab + b². ऐसे ही (a − b)², a² − b² = (a + b)(a − b), (x + a)(x + b), (a + b + c)² और (a + b)³ मिलते हैं। उल्टा पढ़ें तो ये गुणनखंड, तेज़ गणना और परिमेय व्यंजक सरल करने में मदद करती हैं।
- द्विघात समीकरण – जिस समीकरण में x की सबसे बड़ी घात 2 हो, वह द्विघात समीकरण है: ax² + bx + c = 0, जहाँ a ≠ 0। इसके ज़्यादा से ज़्यादा दो मूल होते हैं। मूल निकालने के दो तरीक़े: गुणनखंड (मध्य पद को तोड़कर) या सूत्र x = (−b ± √(b² − 4ac)) / 2a। विविक्तकर D = b² − 4ac बताता है: D > 0 तो दो अलग वास्तविक मूल, D = 0 तो दो बराबर मूल, D < 0 तो कोई वास्तविक मूल नहीं।
2. Data, probability and functions
Statistics: range and histograms · Probability: frequencies stabilise, simulation · Percentage change and multiplier · Functions: variable, image, preimage, notation · Linear and affine functions
- सांख्यिकी: वर्गीकृत आँकड़ों का माध्य, माध्यक और बहुलक – जब आँकड़े वर्गों में बँटे हों (जैसे अंक 20–30), तो हर एक मान नहीं दिखता। माध्य के लिए हर वर्ग का बीच का मान लेते हैं, माध्यक के लिए चलता जोड़ (संचयी बारंबारता), और बहुलक के लिए सबसे ऊँचा खंभा। तीनों अलग तरीके से आँकड़ों का 'केंद्र' बताते हैं।
- प्रायिकता: एक घटना की संभावना – प्रायिकता बताती है कि कोई बात होने की कितनी संभावना है, 0 से 1 तक की एक संख्या में। जब सारे परिणाम समप्रायिक हों, तब P(घटना) = अनुकूल परिणामों की संख्या ÷ कुल परिणामों की संख्या। असंभव घटना की प्रायिकता 0 और निश्चित घटना की 1 होती है।
- प्रतिशत – प्रतिशत का अर्थ है "100 में से", इसलिए x% = x/100। किसी राशि का x% निकालने के लिए उसे x/100 से गुणा करें। प्रतिशत परिवर्तन = (परिवर्तन ÷ मूल) × 100। r% बढ़ाने के लिए (1 + r/100) से, r% घटाने के लिए (1 − r/100) से गुणा करें। क्रमागत परिवर्तनों में गुणकों को गुणा करते हैं। उल्टे प्रतिशत में नए मान को गुणक से भाग देते हैं।
- फलन: इनपुट, नियम, आउटपुट – फलन (function) ऐसा नियम है जो हर इनपुट के लिए ठीक एक आउटपुट देता है। इसे f(x) लिखते हैं। f(a) को a का प्रतिबिंब (image) कहते हैं; जो इनपुट कोई दिया हुआ आउटपुट दे, वह पूर्व-प्रतिबिंब (preimage) है। फलन को शब्दों, सारणी, सूत्र या ग्राफ़ से दिखा सकते हैं। ग्राफ़ ऊपर जा सकता है (वर्धमान), नीचे जा सकता है (ह्रासमान), और उसका सबसे ऊँचा (अधिकतम) या सबसे नीचा (न्यूनतम) बिंदु हो सकता है।
- रैखिक फलन (Linear Functions) – रैखिक फलन में x के हर 1 बढ़ने पर y में हमेशा एक बराबर मात्रा जुड़ती है। इसका नियम y = mx + c है (कहीं f(x) = mx + b भी लिखते हैं)। m ढाल है: ऊपर ÷ आगे, यानी x में 1 बढ़ने पर y का बदलाव। c, y-अंतःखंड है: x = 0 पर y का मान। इसका ग्राफ़ हमेशा सीधी रेखा होता है।
3. Quantities and measures
Volume of a sphere · Effect of transformations on lengths, areas, volumes
- पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन: ठोसों का संयोजन – बहुत सी चीज़ें दो सरल ठोसों को जोड़कर बनती हैं, जैसे बेलन के ऊपर शंकु। पृष्ठीय क्षेत्रफल सिर्फ़ बाहर की सतह है, इसलिए जोड़ वाला छिपा हिस्सा नहीं गिनते। आयतन अंदर की जगह है, इसलिए हिस्सों के आयतन सीधे जोड़ देते हैं।
- रूपांतरण: आकृति को खिसकाना, पलटना, घुमाना और बड़ा करना – रूपांतरण किसी आकृति को नई जगह ले जाता है। स्थानांतरण उसे खिसकाता है, परावर्तन दर्पण रेखा में पलटता है, घूर्णन एक केंद्र के चारों ओर घुमाता है, और आवर्धन माप बदलता है। पहले तीन में माप और आकार वही रहते हैं (सर्वांगसम प्रतिबिंब)। आवर्धन में आकार वही, माप बदलता है (समरूप प्रतिबिंब)। हर एक का आसान निर्देशांक नियम है।
4. Space and geometry
Similar triangles · Intercept theorem (butterfly case) and converse · Right-triangle trigonometry: cos, sin, tan · Rotations and dilations · Latitude and longitude; sections of solids
- समरूप त्रिभुज – दो आकृतियाँ समरूप होती हैं जब उनका आकार (shape) एक जैसा हो, भले नाप अलग हो। दो त्रिभुज समरूप हैं अगर उनके संगत कोण बराबर हों और संगत भुजाएँ एक ही अनुपात में हों। आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय (BPT): त्रिभुज की एक भुजा के समांतर रेखा बाकी दो भुजाओं को एक ही अनुपात में बाँटती है; इसका विलोम भी सही है। समरूपता AA, SSS या SAS से सिद्ध होती है।
- त्रिकोणमितीय अनुपात (sin, cos, tan) – समकोण त्रिभुज में एक न्यून कोण θ चुनो। θ के सामने वाली भुजा लंब (सम्मुख), θ को छूने वाली छोटी भुजा आधार (आसन्न), और सबसे लंबी भुजा कर्ण। sin θ = लंब/कर्ण, cos θ = आधार/कर्ण, tan θ = लंब/आधार। cosec, sec, cot इनके उल्टे हैं। ये अनुपात सिर्फ़ कोण पर निर्भर हैं, त्रिभुज के आकार पर नहीं। 0°, 30°, 45°, 60°, 90° की टेबल याद करो।
- रूपांतरण: आकृति को खिसकाना, पलटना, घुमाना और बड़ा करना – रूपांतरण किसी आकृति को नई जगह ले जाता है। स्थानांतरण उसे खिसकाता है, परावर्तन दर्पण रेखा में पलटता है, घूर्णन एक केंद्र के चारों ओर घुमाता है, और आवर्धन माप बदलता है। पहले तीन में माप और आकार वही रहते हैं (सर्वांगसम प्रतिबिंब)। आवर्धन में आकार वही, माप बदलता है (समरूप प्रतिबिंब)। हर एक का आसान निर्देशांक नियम है।
- ठोस ज्यामिति: अंतरिक्ष में बिंदु, रेखाएँ और समतल – ठोस ज्यामिति तीन विमाओं (3D) की आकृतियों का अध्ययन है। एक रेखा पर न पड़ने वाले तीन बिंदु एक समतल तय करते हैं। अंतरिक्ष में दो रेखाएँ समांतर, प्रतिच्छेदी या विषमतलीय (skew, किसी एक तल में नहीं) हो सकती हैं। रेखा समतल में पड़ी हो सकती है, उसे काट सकती है या उसके समांतर हो सकती है; वह समतल पर लंब है अगर वह समतल की दो प्रतिच्छेदी रेखाओं पर लंब हो। अंतरिक्ष के कोण समतल पर प्रक्षेप लेकर समकोण त्रिभुज से निकाले जाते हैं।
5. Algorithms and programming
Block programming level 3: nested loops, custom blocks
- ब्लॉक प्रोग्रामिंग: एल्गोरिद्म, लूप, चर, घटना और सेंसर – ब्लॉक प्रोग्रामिंग में रंगीन ब्लॉक जोड़कर प्रोग्राम बनाते हैं। एल्गोरिद्म योजना है; प्रोग्राम वही योजना ब्लॉक में लिखी हुई। लूप ब्लॉक दोहराता है, चर बदलने वाला मान रखता है, शर्त काम चुनती है, घटना प्रोग्राम शुरू करती है और सेंसर रोबोट को दुनिया की जानकारी देता है। कस्टम ब्लॉक (उपप्रोग्राम) ब्लॉकों के समूह को नाम देता है ताकि उसे दोबारा इस्तेमाल किया जा सके।