China 九年级(初三) Mathematics
अध्याय: 10
1. Ch.25 Quadratic equations in one variable
Concept · Solving: square roots, completing the square, formula, factorising · Discriminant; roots and coefficients · Real problems
- द्विघात समीकरण – जिस समीकरण में x की सबसे बड़ी घात 2 हो, वह द्विघात समीकरण है: ax² + bx + c = 0, जहाँ a ≠ 0। इसके ज़्यादा से ज़्यादा दो मूल होते हैं। मूल निकालने के दो तरीक़े: गुणनखंड (मध्य पद को तोड़कर) या सूत्र x = (−b ± √(b² − 4ac)) / 2a। विविक्तकर D = b² − 4ac बताता है: D > 0 तो दो अलग वास्तविक मूल, D = 0 तो दो बराबर मूल, D < 0 तो कोई वास्तविक मूल नहीं।
2. Ch.26 Quadratic functions
Concept · Graphs and properties; vertex form · Quadratic functions and equations (approximate roots) · Maximum/minimum problems
- द्विघात फलन और उनके ग्राफ़ – द्विघात फलन (quadratic function) y = ax² + bx + c है, जहाँ a ≠ 0। इसका ग्राफ़ U-आकार का वक्र होता है जिसे परवलय (parabola) कहते हैं। a > 0 हो तो वक्र ऊपर खुलता है और उसका एक सबसे निचला बिंदु होता है; a < 0 हो तो नीचे खुलता है और सबसे ऊँचा बिंदु होता है। यह मोड़ बिंदु शीर्ष (vertex) है, x = −b/2a पर। शीर्ष रूप y = a(x − h)² + k में शीर्ष (h, k) है।
3. Ch.27 Inverse proportion functions
Concept · Graphs and properties · Real problems · Practice: high-speed rail quantities
- व्युत्क्रम विचरण (प्रतिलोम समानुपात) – दो राशियाँ व्युत्क्रम रूप से बदलती हैं जब उनका गुणनफल वही रहता है: x × y = k, यानी y = k/x। x दोगुना हो तो y आधा हो जाता है। y = k/x (k > 0) का ग्राफ़ एक वक्र है जिसे अतिपरवलय (hyperbola) कहते हैं; यह दोनों अक्षों के पास जाता है पर उन्हें कभी नहीं छूता।
- चाल, दूरी और समय (समय और कार्य सहित) – चाल = दूरी ÷ समय। km/h को m/s में बदलने के लिए 5/18 से गुणा करो। औसत चाल = कुल दूरी ÷ कुल समय। आमने-सामने चलने पर दूरी दोनों चालों के जोड़ से घटती है, एक दिशा में अंतर से। ट्रेन को अपनी लंबाई भी तय करनी पड़ती है। धारा के साथ चाल = नाव + धारा; विरुद्ध = नाव − धारा। काम और नल भी दर हैं: दरें जोड़ो, रिसाव घटाओ।
4. Ch.28 Rotation
Rotation of figures · Central symmetry
- रूपांतरण: आकृति को खिसकाना, पलटना, घुमाना और बड़ा करना – रूपांतरण किसी आकृति को नई जगह ले जाता है। स्थानांतरण उसे खिसकाता है, परावर्तन दर्पण रेखा में पलटता है, घूर्णन एक केंद्र के चारों ओर घुमाता है, और आवर्धन माप बदलता है। पहले तीन में माप और आकार वही रहते हैं (सर्वांगसम प्रतिबिंब)। आवर्धन में आकार वही, माप बदलता है (समरूप प्रतिबिंब)। हर एक का आसान निर्देशांक नियम है।
- सममिति: दर्पण रेखा, केंद्र और समद्विभाजक – जब किसी आकृति का एक भाग दूसरे भाग की बिल्कुल नक़ल हो, तो वह सममित है। रेखा (अक्षीय) सममिति में नक़ल एक रेखा के पार दर्पण प्रतिबिंब होती है। बिंदु (केंद्रीय) सममिति में आकृति को एक केंद्र के चारों ओर आधा चक्कर (180°) घुमाने पर वही आकृति मिलती है। रेखाखंड का लंब समद्विभाजक और कोण का समद्विभाजक भी सममित रेखाएँ हैं, इसलिए उन पर हर बिंदु दो चीज़ों से बराबर दूर होता है।
5. Ch.29 Circles
Circle concepts · Chords, arcs, central and inscribed angles; perpendicular diameter; cyclic quadrilateral · Arc length and sector area
- वृत्त: जीवाएँ और कोण – जीवा वृत्त के दो बिंदुओं को मिलाती है। लंबी जीवा केंद्र पर बड़ा कोण बनाती है, और बराबर जीवाएँ बराबर कोण। केंद्र से जीवा पर डाला लंब उसे आधा करता है, और बराबर जीवाएँ केंद्र से बराबर दूरी पर होती हैं। कोई चाप केंद्र पर जो कोण बनाता है, वह वृत्त के बाकी हिस्से के किसी भी बिंदु पर बने कोण का दोगुना होता है, इसलिए अर्धवृत्त का कोण 90° है। चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का जोड़ 180° होता है।
- त्रिज्यखंड और वृत्तखंड का क्षेत्रफल – त्रिज्यखंड वृत्त का पिज़्ज़ा जैसा टुकड़ा है: क्षेत्रफल = θ/360 × πr²। उसका किनारा चाप है: लंबाई = θ/360 × 2πr। वृत्तखंड = त्रिज्यखंड − अंदर का त्रिभुज।
6. Ch.30 Lines and circles
Line–circle positions; tangents; tangent-length theorem · Incircle and circumcircle · Regular polygons and circles · Practice: optimisation in daily life
- वृत्त की स्पर्श रेखा – स्पर्श रेखा वह रेखा है जो वृत्त को सिर्फ़ एक बिंदु पर छूती है। उस बिंदु पर वह त्रिज्या से 90° का कोण बनाती है। बाहर के एक बिंदु से खींची गई दोनों स्पर्श रेखाएँ हमेशा बराबर होती हैं।
- वृत्त: जीवा, स्पर्श रेखा और त्रिभुज के वृत्त – वृत्त उन सब बिंदुओं का समूह है जो केंद्र से एक तय दूरी (त्रिज्या) पर हों। जीवा उस पर दो बिंदुओं को जोड़ती है; सबसे लंबी जीवा व्यास है। रेखा वृत्त को दो बिंदुओं पर काट सकती है (छेदक), एक पर छू सकती है (स्पर्श रेखा) या मिल ही न सकती है। स्पर्श रेखा त्रिज्या पर लंब होती है। हर त्रिभुज का एक अंतःवृत्त और एक परिवृत्त होता है।
- सम बहुभुज और उनके वृत्त – सम बहुभुज (regular polygon) की सभी भुजाएँ बराबर और सभी कोण बराबर होते हैं। हर सम बहुभुज का एक केंद्र O होता है, सभी शीर्षों से गुज़रने वाला परिवृत्त (त्रिज्या R) और हर भुजा को छूने वाला अंतर्वृत्त (त्रिज्या r, जिसे शीर्षलंब/एपोथम कहते हैं)। n भुजाओं और भुजा a के लिए: केंद्रीय कोण = 360°/n, अंतः कोण = (n − 2)·180°/n, R = a / (2 sin(180°/n)), r = a / (2 tan(180°/n)), क्षेत्रफल = ½ · परिमाप · r। खास स्थितियाँ: त्रिभुज R = a/√3, r = a/(2√3); वर्ग R = a/√2, r = a/2; षट्भुज R = a, r = a√3/2।
- इष्टतमीकरण: द्विघात फलन से सबसे अच्छा मान खोजना – इष्टतमीकरण (optimisation) का मतलब है सबसे अच्छा मान खोजना: सबसे बड़ा क्षेत्रफल, सबसे ज़्यादा लाभ या सबसे कम खर्च। हम मात्रा को द्विघात फलन के रूप में लिखते हैं; उसके परवलय का शीर्ष सबसे अच्छा मान देता है। y = ax² + bx + c का शीर्ष x = −b/(2a) पर है; a < 0 हो तो अधिकतम, a > 0 हो तो न्यूनतम।
7. Similarity (下册)
Similar figures; ratio, golden section · Similar triangles: tests and properties · Dilation (homothety) incl. coordinates
- समरूप त्रिभुज – दो आकृतियाँ समरूप होती हैं जब उनका आकार (shape) एक जैसा हो, भले नाप अलग हो। दो त्रिभुज समरूप हैं अगर उनके संगत कोण बराबर हों और संगत भुजाएँ एक ही अनुपात में हों। आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय (BPT): त्रिभुज की एक भुजा के समांतर रेखा बाकी दो भुजाओं को एक ही अनुपात में बाँटती है; इसका विलोम भी सही है। समरूपता AA, SSS या SAS से सिद्ध होती है।
- रूपांतरण: आकृति को खिसकाना, पलटना, घुमाना और बड़ा करना – रूपांतरण किसी आकृति को नई जगह ले जाता है। स्थानांतरण उसे खिसकाता है, परावर्तन दर्पण रेखा में पलटता है, घूर्णन एक केंद्र के चारों ओर घुमाता है, और आवर्धन माप बदलता है। पहले तीन में माप और आकार वही रहते हैं (सर्वांगसम प्रतिबिंब)। आवर्धन में आकार वही, माप बदलता है (समरूप प्रतिबिंब)। हर एक का आसान निर्देशांक नियम है।
8. Acute-angle trigonometry (下册)
sin, cos, tan; values of 30°, 45°, 60° · Solving right triangles; applications
- त्रिकोणमितीय अनुपात (sin, cos, tan) – समकोण त्रिभुज में एक न्यून कोण θ चुनो। θ के सामने वाली भुजा लंब (सम्मुख), θ को छूने वाली छोटी भुजा आधार (आसन्न), और सबसे लंबी भुजा कर्ण। sin θ = लंब/कर्ण, cos θ = आधार/कर्ण, tan θ = लंब/आधार। cosec, sec, cot इनके उल्टे हैं। ये अनुपात सिर्फ़ कोण पर निर्भर हैं, त्रिभुज के आकार पर नहीं। 0°, 30°, 45°, 60°, 90° की टेबल याद करो।
- ऊँचाई और दूरियाँ – दृष्टि रेखा आँख को वस्तु से जोड़ती है। वस्तु ऊपर हो तो दृष्टि रेखा और क्षैतिज रेखा के बीच का कोण उन्नयन कोण है। वस्तु नीचे हो तो यही कोण अवनमन कोण है। वस्तु, ज़मीन और दृष्टि रेखा से समकोण त्रिभुज बनता है, इसलिए tan θ = ऊँचाई ÷ दूरी। चोटी से अवनमन कोण, नीचे से उन्नयन कोण के बराबर होता है। कठिन सवालों में एक भुजा साझा करने वाले दो त्रिभुज होते हैं।
9. Projection and views (下册)
Central and parallel projection · Three views; nets of prisms and cones
- प्रक्षेप (Projection): केंद्रीय, समांतर और लंबकोणीय – प्रक्षेप यानी 3D वस्तु को सीधी किरणों की मदद से एक सपाट सतह पर बनाना। अगर सारी किरणें एक बिंदु (दीपक, आँख) से निकलें तो केंद्रीय प्रक्षेप: छवि का आकार दूरी से बदलता है। अगर किरणें समांतर हों (धूप) तो समांतर प्रक्षेप: आकार दूरी पर निर्भर नहीं। अगर समांतर किरणें पर्दे पर 90° पर पड़ें तो लंबकोणीय प्रक्षेप: पर्दे के समांतर फलक असली माप में दिखता है। इंजीनियर लंबकोणीय दृश्य बनाते हैं, कलाकार परिप्रेक्ष्य।
- ठोसों के लंबकोणीय दृश्य – लंबकोणीय (orthographic) दृश्य किसी ठोस को एक दिशा से बिल्कुल सीधा देखने पर दिखता है, बिना परिप्रेक्ष्य के। तीन मुख्य दृश्य हैं: सामने का दृश्य (उन्नयन), ऊपर का दृश्य (योजना) और पार्श्व दृश्य (बगल का उन्नयन)। हर दृश्य एक माप छिपा देता है, इसलिए आकार तय करने के लिए आम तौर पर तीनों चाहिए। दृश्य एक तय क्रम में रखे जाते हैं: प्रथम कोण प्रक्षेप (योजना सामने के दृश्य के नीचे; भारत, यूरोप, ISO) या तृतीय कोण प्रक्षेप (योजना ऊपर; अमेरिका)। दिखने वाले किनारे मोटी सतत रेखा, छिपे किनारे टूटी रेखा, और केंद्र रेखाएँ शृंखला रेखा से बनती हैं। जाल वह समतल आकृति है जो मुड़कर ठोस बनती है, और अनुप्रस्थ काट ठोस को काटने पर दिखने वाली सतह है।
10. Probability and statistics (standard, placement varies)
Listing outcomes with tables and tree diagrams · Estimating probability by frequency · Simple random sampling; pie charts; frequency histograms
- प्रायिकता: एक घटना की संभावना – प्रायिकता बताती है कि कोई बात होने की कितनी संभावना है, 0 से 1 तक की एक संख्या में। जब सारे परिणाम समप्रायिक हों, तब P(घटना) = अनुकूल परिणामों की संख्या ÷ कुल परिणामों की संख्या। असंभव घटना की प्रायिकता 0 और निश्चित घटना की 1 होती है।
- प्रायिकता का परिचय: पैमाना, प्रयोग, प्रतिदर्श समष्टि और वृक्ष आरेख – प्रायिकता 0 से 1 के बीच की एक संख्या है जो बताती है कि कोई बात होने की कितनी संभावना है। 0 मतलब कभी नहीं होगी, 1 मतलब ज़रूर होगी। इसे हम प्रयोग कई बार करके (आनुभविक प्रायिकता) या सारे संभव परिणाम लिखकर (प्रतिदर्श समष्टि) और चाहे गए परिणाम गिनकर निकाल सकते हैं। जब दो चीज़ें साथ हों, तो वृक्ष आरेख और सारणी परिणाम लिखने में मदद करते हैं।
- प्रतिचयन: प्रतिदर्श से पूरी समष्टि को जानना – समष्टि (population) वह पूरा समूह है जिसके बारे में हम जानना चाहते हैं; प्रतिदर्श (sample) उसका छोटा भाग है जिसे हम सच में जाँचते हैं। अच्छा प्रतिदर्श यादृच्छिक रूप से चुना जाता है ताकि वह पूरी समष्टि जैसा दिखे। सरल यादृच्छिक प्रतिचयन में सबको बराबर मौका; स्तरीकृत में हर समूह से सही हिस्सा; क्रमबद्ध में हर k-वाँ सदस्य। अलग-अलग प्रतिदर्श थोड़े अलग उत्तर देते हैं (प्रतिचयन-विचलन), पर बड़े प्रतिदर्श कम डगमगाते हैं (बड़ी संख्याओं का नियम)। पक्षपाती प्रतिदर्श कितना भी बड़ा हो, ग़लत उत्तर देता है।