प्रक्षेप क्या है?
प्रक्षेप 3D वस्तु को सपाट सतह पर बनाने का तरीका है। इसमें तीन चीज़ें चाहिए:
- वस्तु (जैसे एक डिब्बा),
- प्रक्षेप-तल या पर्दा (कागज़, दीवार, ज़मीन),
- प्रक्षेपी किरणें: वस्तु के हर बिंदु से गुज़रती सीधी रेखाएँ।
जहाँ किरण तल से मिलती है, वहाँ उस बिंदु की छवि बनती है। कोनों की छवियाँ जोड़ो तो पूरी वस्तु की छवि मिलती है। छाया भी रोशनी से बना प्रक्षेप है।
हर चित्रण-विधि एक सवाल से तय होती है: किरणें कहाँ से आती हैं?
केंद्रीय प्रक्षेप
केंद्रीय प्रक्षेप में सारी किरणें एक बिंदु से निकलती हैं, जिसे प्रक्षेप-केंद्र कहते हैं (दीपक, मोमबत्ती, आँख)।
- केंद्र वस्तु के पास → छवि बड़ी।
- वस्तु पर्दे के पास → छवि छोटी, असली माप के करीब।
- वस्तु की समांतर रेखाएँ छवि में समांतर नहीं भी रह सकतीं; वे एक बिंदु पर मिल सकती हैं।
माप समरूप त्रिभुजों जैसा चलता है: दीपक डंडी से 2 m और दीवार से 6 m दूर है, तो छाया डंडी से 6 ÷ 2 = 3 गुना ऊँची होगी।
समांतर और लंबकोणीय प्रक्षेप
समांतर प्रक्षेप में सारी किरणें समांतर होती हैं। धूप इसका रोज़ का उदाहरण है, क्योंकि सूर्य बहुत दूर है।
- छवि का आकार रोशनी की दूरी पर निर्भर नहीं करता।
- समांतर रेखाएँ समांतर रहती हैं, मध्य-बिंदु मध्य-बिंदु रहता है।
किरणें तल पर तिरछी पड़ें तो तिर्यक (oblique) प्रक्षेप: आकृति खिंचती या दबती है। किरणें तल पर लंब (90°) हों तो लंबकोणीय (orthogonal) प्रक्षेप: तल के समांतर फलक अपना असली आकार और माप रखता है। किसी ठोस के सामने, ऊपर और बगल के दृश्य लंबकोणीय प्रक्षेप ही हैं।
शंक्वाकार परिप्रेक्ष्य: जैसा आँख देखती है
शंक्वाकार (रेखीय) परिप्रेक्ष्य ऐसा केंद्रीय प्रक्षेप है जिसमें केंद्र देखने वाले की आँख है और आँख व वस्तु के बीच एक चित्र-तल है। आँख से निकली किरणें एक शंकु बनाती हैं, इसलिए यह नाम।
- क्षितिज रेखा: आँख की ऊँचाई पर रेखा।
- लुप्त बिंदु: दूर जाती समांतर रेखाएँ यहाँ मिलती दिखती हैं।
- सम्मुख (एक-बिंदु) परिप्रेक्ष्य: वस्तु का एक फलक चित्र-तल के समांतर; दूर जाती रेखाएँ एक लुप्त बिंदु पर। कमरे, सड़क, गलियारे के लिए।
- तिरछा (दो-बिंदु) परिप्रेक्ष्य: वस्तु घुमी हुई; क्षैतिज किनारे क्षितिज पर दो लुप्त बिंदुओं तक। कोने से दिखती इमारत के लिए।
कॉमिक कलाकार क्षितिज ऊपर रखते हैं (ऊपर से देखने पर नायक छोटा) या नीचे (नीचे से देखने पर नायक ताकतवर)।
कौन-सी विधि किस काम की?
| विधि | किरणें | किसके लिए |
|---|---|---|
| लंबकोणीय दृश्य | समांतर, 90° | सटीक माप: नक्शे, मशीन के पुर्ज़े |
| सममितीय (isometric) | समांतर, 90°, वस्तु झुकी हुई | 3D जैसा दृश्य जिसे नापा भी जा सके |
| तिर्यक (cavalier, cabinet) | समांतर, तिरछी | जल्दी स्केच, सामने का फलक असली |
| शंक्वाकार परिप्रेक्ष्य | एक बिंदु से | असली जैसे चित्र: वास्तुकला, कला, कॉमिक, गेम |
करके देखो: रात में एक बल्ब के नीचे और फिर धूप में मेज़ पर पेंसिल खड़ी करो। उसे रोशनी से पास-दूर करते हुए दोनों छायाएँ नापो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- केंद्रीय प्रक्षेप: छवि की ऊँचाई ÷ वस्तु की ऊँचाई = (केंद्र से पर्दे की दूरी) ÷ (केंद्र से वस्तु की दूरी)
- समांतर प्रक्षेप: छवि का आकार दूरी पर निर्भर नहीं
- लंबकोणीय प्रक्षेप: किरणें ⟂ तल; तल के समांतर फलक असली माप में
- तल से θ कोण पर L लंबे खंड की लंबकोणीय छवि = L·cos θ
- परिप्रेक्ष्य: क्षितिज रेखा = आँख की ऊँचाई; दूर जाती समांतर रेखाएँ लुप्त बिंदु पर मिलती हैं
हल किए गए उदाहरण
1. दीपक 20 cm के खिलौने से 1.5 m और दीवार से 4.5 m दूर है। दीवार पर छाया कितनी ऊँची होगी?
केंद्रीय प्रक्षेप: अनुपात = 4.5 ÷ 1.5 = 3। छाया = 3 × 20 cm = 60 cm।
2. धूप में 2 m का खंभा 3 m की छाया बनाता है। उसी समय एक पेड़ की छाया 12 m है। पेड़ कितना ऊँचा है?
धूप की किरणें समांतर हैं, इसलिए ऊँचाई और छाया का अनुपात एक है: 2/3 = h/12, h = 8 m।
3. 10 cm की डंडी कागज़ से 60° का कोण बनाती है। कागज़ पर उसकी लंबकोणीय छवि कितनी लंबी है?
छवि = L cos θ = 10 × cos 60° = 10 × 0.5 = 5 cm।
4. समांतर रेखाओं को समांतर कौन रखता है: केंद्रीय या समांतर प्रक्षेप?
समांतर प्रक्षेप हमेशा रखता है। केंद्रीय प्रक्षेप में वे लुप्त बिंदु पर मिल सकती हैं।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि केंद्रीय प्रक्षेप असली माप देता है। ऐसा तभी, जब सपाट वस्तु पर्दे से सटी हो; वरना माप दूरी से बदलता है।
- हर समांतर प्रक्षेप को लंबकोणीय मान लेना। लंबकोणीय वह खास स्थिति है जब किरणें तल पर 90° हों।
- लुप्त बिंदु कहीं भी रख देना। क्षैतिज रेखाओं का लुप्त बिंदु क्षितिज रेखा (आँख की ऊँचाई) पर ही होगा।
- अनुपात में गलत दूरी लेना: केंद्र से पर्दा ÷ केंद्र से वस्तु लें, वस्तु से पर्दा नहीं।