France Quatrième Mathematics
अध्याय: 5
1. Numbers and calculations
Signed decimals: multiplication and division · Rational numbers: reciprocal, multiplying and dividing fractions · Square roots: introduction and perfect squares · Powers of ten, scientific notation, unit prefixes · Primes up to 100 and prime factorisation · Algebra: single distributivity, expand and factorise · Equations: unknown, solution, solving first-degree equations
- पूर्णांक और चिह्न वाली संख्याएँ – पूर्णांक यानी पूरी संख्याएँ और उनकी ऋणात्मक संख्याएँ: …, −3, −2, −1, 0, 1, 2, 3, …। संख्या रेखा पर दाएँ जाने पर संख्या बढ़ती है। धनात्मक जोड़ो तो दाएँ, ऋणात्मक जोड़ो तो बाएँ चलो। किसी संख्या को घटाना उसकी उल्टी संख्या जोड़ने जैसा है। गुणा और भाग में: एक जैसे चिह्न → धन, अलग चिह्न → ऋण। यही नियम −2.5 जैसी दशमलव संख्याओं पर भी चलते हैं।
- परिमेय संख्याएँ: संख्या रेखा, सघनता और दशमलव – जिस संख्या को p/q के रूप में लिख सकें, जहाँ p और q पूर्णांक हों और q शून्य न हो, उसे परिमेय संख्या कहते हैं। जैसे 3/4, −5/3, 7 (= 7/1), 0.25 (= 1/4)। p/q को संख्या रेखा पर दिखाने के लिए हर इकाई को q बराबर टुकड़ों में काटो और 0 से p टुकड़े चलो। किन्हीं दो परिमेय संख्याओं के बीच हमेशा एक और परिमेय संख्या होती है (उनका औसत), इसलिए बीच में अनगिनत संख्याएँ हैं। परिमेय संख्या का दशमलव या तो खत्म हो जाता है (सांत) या कोई हिस्सा बार-बार दोहराता है (असांत आवर्ती)।
- वर्गमूल: वर्ग बनाओ, उसकी भुजा खोजो – किसी संख्या n का वर्गमूल वह संख्या है जिसे खुद से गुणा करने पर n मिले। √25 = 5, क्योंकि 5 × 5 = 25। n टाइलों को वर्ग में जमाओ: भुजा ही वर्गमूल है। पूर्ण वर्ग (1, 4, 9, 16, …) के वर्गमूल पूर्ण संख्याएँ हैं। बाकी वर्गमूल अपरिमेय होते हैं और दो पूर्ण संख्याओं के बीच आते हैं; उनका अनुमान लगाते हैं या उन्हें सरल करते हैं, जैसे √50 = 5√2।
- वैज्ञानिक संकेतन (मानक रूप) – वैज्ञानिक संकेतन में हर संख्या को a × 10ⁿ लिखते हैं, जहाँ 1 ≤ a < 10 और n एक पूर्णांक है। बड़ी संख्या में दशमलव बाईं ओर खिसकता है और n धनात्मक होता है। छोटी संख्या में दशमलव दाईं ओर खिसकता है और n ऋणात्मक होता है। गुणा करने के लिए आगे की संख्याएँ गुणा करें और घातें जोड़ें; भाग में आगे की संख्याएँ भाग दें और घातें घटाएँ; फिर a को 1 और 10 के बीच कर दें। किलो (10³), मेगा (10⁶), मिली (10⁻³), माइक्रो (10⁻⁶), नैनो (10⁻⁹) जैसे उपसर्ग 10 की घातों के ही नाम हैं।
- अंकगणित की आधारभूत प्रमेय – 1 से बड़ी हर पूर्ण संख्या या तो अभाज्य है, या अभाज्य संख्याओं का गुणनफल — और यह गुणनफल सिर्फ एक ही तरह से बनता है (क्रम बदल सकता है)। यही अंकगणित की आधारभूत प्रमेय है। HCF = सार्व अभाज्यों की सबसे छोटी घातों का गुणनफल; LCM = सभी अभाज्यों की सबसे बड़ी घातों का गुणनफल। दो संख्याओं के लिए HCF × LCM = a × b.
- बीजीय व्यंजक: चर, पद और सरलीकरण – बीजीय व्यंजक में अक्षर (चर) और संख्याएँ +, −, × और ÷ से जुड़े होते हैं, जैसे 3x + 2। चर एक ऐसी संख्या के लिए खड़ा है जो बदल सकती है। व्यंजक पदों से बनता है (3x और 2)। 3x में 3 गुणांक है; बिना अक्षर वाला पद, जैसे 2, अचर पद है। समान पदों का अक्षर वाला भाग बिल्कुल एक जैसा होता है (3x और 5x) और वे जुड़ सकते हैं; असमान पद (3x और 2, या x और x²) नहीं जुड़ते। प्रतिस्थापन यानी अक्षर की जगह संख्या रखकर मान निकालना। विस्तार कोष्ठक हटाता है: a(b + c) = ab + ac। गुणनखंडन उल्टा है: उभयनिष्ठ गुणनखंड बाहर निकालना। सूत्र एक व्यंजक है जो दूसरी राशियों से एक राशि देता है, और सर्वसमिका अक्षर के हर मान पर सही होती है।
- एक चर वाले रैखिक समीकरण – एक चर वाले रैखिक समीकरण में एक ही अज्ञात राशि (जैसे x) होती है और उसकी घात 1 होती है, जैसे 2x + 3 = 11। समीकरण एक तराज़ू जैसा है: दोनों पक्ष बराबर हैं। हल करने के लिए दोनों पक्षों पर एक जैसा काम करो (एक ही संख्या जोड़ो, घटाओ, गुणा करो या शून्य के अलावा किसी संख्या से भाग दो), जब तक x अकेला न रह जाए। आख़िर में उत्तर वापस रखकर जाँच ज़रूर करो।
2. Data, probability and functions
Statistics: median, counts and frequencies · Probability: events and complementary events · Proportionality: fourth proportional and graphs · Relationship between two quantities: table, formula, graph
- सांख्यिकी: वर्गीकृत आँकड़ों का माध्य, माध्यक और बहुलक – जब आँकड़े वर्गों में बँटे हों (जैसे अंक 20–30), तो हर एक मान नहीं दिखता। माध्य के लिए हर वर्ग का बीच का मान लेते हैं, माध्यक के लिए चलता जोड़ (संचयी बारंबारता), और बहुलक के लिए सबसे ऊँचा खंभा। तीनों अलग तरीके से आँकड़ों का 'केंद्र' बताते हैं।
- प्रायिकता: एक घटना की संभावना – प्रायिकता बताती है कि कोई बात होने की कितनी संभावना है, 0 से 1 तक की एक संख्या में। जब सारे परिणाम समप्रायिक हों, तब P(घटना) = अनुकूल परिणामों की संख्या ÷ कुल परिणामों की संख्या। असंभव घटना की प्रायिकता 0 और निश्चित घटना की 1 होती है।
- अनुपात और समानुपात – अनुपात a : b एक ही तरह की दो मात्राओं की तुलना है। दोनों भागों को एक ही संख्या से भाग देकर अनुपात सरल करते हैं। किसी राशि को अनुपात में बाँटने के लिए भाग जोड़ो, एक भाग निकालो, फिर गुणा करो। y = k·x हो तो प्रत्यक्ष समानुपात (एक दोगुना, दूसरा दोगुना); x·y = k हो तो व्युत्क्रम समानुपात (एक दोगुना, दूसरा आधा)।
- फलन: इनपुट, नियम, आउटपुट – फलन (function) ऐसा नियम है जो हर इनपुट के लिए ठीक एक आउटपुट देता है। इसे f(x) लिखते हैं। f(a) को a का प्रतिबिंब (image) कहते हैं; जो इनपुट कोई दिया हुआ आउटपुट दे, वह पूर्व-प्रतिबिंब (preimage) है। फलन को शब्दों, सारणी, सूत्र या ग्राफ़ से दिखा सकते हैं। ग्राफ़ ऊपर जा सकता है (वर्धमान), नीचे जा सकता है (ह्रासमान), और उसका सबसे ऊँचा (अधिकतम) या सबसे नीचा (न्यूनतम) बिंदु हो सकता है।
3. Quantities and measures
Volume of pyramid and cone · Compound quantities and units · Effect of enlargement or reduction on length, area, volume
- घनाभ, बेलन, शंकु, पिरामिड और गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन – पृष्ठीय क्षेत्रफल किसी ठोस की बाहरी सतह का कुल क्षेत्रफल है — जैसे उसे लपेटने के लिए कितना कागज़ लगेगा। आयतन अंदर की जगह है — जैसे उसमें कितना पानी आएगा। घनाभ का आयतन = उसमें आने वाले 1 सेमी के घनों की गिनती। शंकु में उसी आधार और ऊँचाई वाले बेलन का एक-तिहाई आता है, और पिरामिड में अपने प्रिज़्म का एक-तिहाई।
- संयुक्त इकाइयाँ: चाल, घनत्व, प्रति इकाई मूल्य और दूसरी दरें – संयुक्त इकाई (compound unit) दो इकाइयों को जोड़कर बनती है, जैसे मीटर प्रति सेकंड (m/s) या ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर (g/cm³)। "प्रति" का मतलब है "हर एक में"। दर बताती है कि एक मात्रा का कितना हिस्सा दूसरी मात्रा की एक इकाई में आता है। चाल = दूरी ÷ समय, घनत्व = द्रव्यमान ÷ आयतन, प्रति इकाई मूल्य = दाम ÷ मात्रा। इकाई बदलते समय ऊपर और नीचे की इकाई अलग-अलग बदलो।
- समरूप त्रिभुज – दो आकृतियाँ समरूप होती हैं जब उनका आकार (shape) एक जैसा हो, भले नाप अलग हो। दो त्रिभुज समरूप हैं अगर उनके संगत कोण बराबर हों और संगत भुजाएँ एक ही अनुपात में हों। आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय (BPT): त्रिभुज की एक भुजा के समांतर रेखा बाकी दो भुजाओं को एक ही अनुपात में बाँटती है; इसका विलोम भी सही है। समरूपता AA, SSS या SAS से सिद्ध होती है।
4. Space and geometry
Pythagoras theorem, converse and contrapositive · Intercept theorem (nested triangles) and converse · Cosine in a right triangle · Translations: friezes and tilings · Coordinates in a cuboid; nets of pyramids and cones
- पाइथागोरस प्रमेय – किसी भी समकोण त्रिभुज में सबसे लंबी भुजा (कर्ण) का वर्ग बाकी दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर होता है: a² + b² = c²।
- समरूप त्रिभुज – दो आकृतियाँ समरूप होती हैं जब उनका आकार (shape) एक जैसा हो, भले नाप अलग हो। दो त्रिभुज समरूप हैं अगर उनके संगत कोण बराबर हों और संगत भुजाएँ एक ही अनुपात में हों। आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय (BPT): त्रिभुज की एक भुजा के समांतर रेखा बाकी दो भुजाओं को एक ही अनुपात में बाँटती है; इसका विलोम भी सही है। समरूपता AA, SSS या SAS से सिद्ध होती है।
- त्रिकोणमितीय अनुपात (sin, cos, tan) – समकोण त्रिभुज में एक न्यून कोण θ चुनो। θ के सामने वाली भुजा लंब (सम्मुख), θ को छूने वाली छोटी भुजा आधार (आसन्न), और सबसे लंबी भुजा कर्ण। sin θ = लंब/कर्ण, cos θ = आधार/कर्ण, tan θ = लंब/आधार। cosec, sec, cot इनके उल्टे हैं। ये अनुपात सिर्फ़ कोण पर निर्भर हैं, त्रिभुज के आकार पर नहीं। 0°, 30°, 45°, 60°, 90° की टेबल याद करो।
- रूपांतरण: आकृति को खिसकाना, पलटना, घुमाना और बड़ा करना – रूपांतरण किसी आकृति को नई जगह ले जाता है। स्थानांतरण उसे खिसकाता है, परावर्तन दर्पण रेखा में पलटता है, घूर्णन एक केंद्र के चारों ओर घुमाता है, और आवर्धन माप बदलता है। पहले तीन में माप और आकार वही रहते हैं (सर्वांगसम प्रतिबिंब)। आवर्धन में आकार वही, माप बदलता है (समरूप प्रतिबिंब)। हर एक का आसान निर्देशांक नियम है।
- ठोस ज्यामिति: अंतरिक्ष में बिंदु, रेखाएँ और समतल – ठोस ज्यामिति तीन विमाओं (3D) की आकृतियों का अध्ययन है। एक रेखा पर न पड़ने वाले तीन बिंदु एक समतल तय करते हैं। अंतरिक्ष में दो रेखाएँ समांतर, प्रतिच्छेदी या विषमतलीय (skew, किसी एक तल में नहीं) हो सकती हैं। रेखा समतल में पड़ी हो सकती है, उसे काट सकती है या उसके समांतर हो सकती है; वह समतल पर लंब है अगर वह समतल की दो प्रतिच्छेदी रेखाओं पर लंब हो। अंतरिक्ष के कोण समतल पर प्रक्षेप लेकर समकोण त्रिभुज से निकाले जाते हैं।
5. Algorithms and programming
Block programming level 2: variables, conditions, events
- ब्लॉक प्रोग्रामिंग: एल्गोरिद्म, लूप, चर, घटना और सेंसर – ब्लॉक प्रोग्रामिंग में रंगीन ब्लॉक जोड़कर प्रोग्राम बनाते हैं। एल्गोरिद्म योजना है; प्रोग्राम वही योजना ब्लॉक में लिखी हुई। लूप ब्लॉक दोहराता है, चर बदलने वाला मान रखता है, शर्त काम चुनती है, घटना प्रोग्राम शुरू करती है और सेंसर रोबोट को दुनिया की जानकारी देता है। कस्टम ब्लॉक (उपप्रोग्राम) ब्लॉकों के समूह को नाम देता है ताकि उसे दोबारा इस्तेमाल किया जा सके।