Ukraine 10 клас Mathematics (profile level)
अध्याय: 9
1. Algebra: functions, polynomials, equations and inequalities (36 h)
Sets · Numerical functions · Inverse functions · Equations and inequalities · Polynomials · Mathematical induction
- समुच्चय: निरूपण, प्रकार, उपसमुच्चय, वेन आरेख और संक्रियाएँ – समुच्चय (set) अलग-अलग वस्तुओं का सुपरिभाषित संग्रह है। इसे रोस्टर रूप {2, 4, 6} या समुच्चय-निर्माण रूप {x : x सम है} में लिखते हैं। समुच्चय रिक्त, परिमित, अपरिमित या समान हो सकते हैं। B का हर अवयव A में हो तो B ⊂ A। n अवयवों वाले समुच्चय के 2ⁿ उपसमुच्चय होते हैं। (a, b), [a, b] जैसे अंतराल वास्तविक संख्याओं के उपसमुच्चय हैं। वेन आरेख से सम्मिलन A ∪ B, सर्वनिष्ठ A ∩ B, अंतर A − B और पूरक A′ = U − A साफ़ दिखते हैं।
- संबंध एवं फलन: कार्तीय गुणन, प्रांत, परिसर और ग्राफ़ – क्रमित युग्म (a, b) में पहला और दूसरा स्थान तय है, इसलिए (1, 2) ≠ (2, 1)। कार्तीय गुणन A × B उन सब युग्मों (a, b) का समुच्चय है जिनमें a ∈ A, b ∈ B; n(A × B) = n(A) × n(B)। A × B का कोई भी उपसमुच्चय A से B में संबंध है। पहले अवयवों का समुच्चय प्रांत, दूसरे अवयवों का परिसर, और पूरा B सहप्रांत है। फलन ऐसा संबंध है जिसमें A के हर अवयव का ठीक एक प्रतिबिंब हो। हम अचर, तत्समक, बहुपद, परिमेय, मापांक, चिह्न, घातांकी, लघुगणकीय और महत्तम पूर्णांक फलन और उनके ग्राफ़ पढ़ते हैं, और फलनों को जोड़ना, घटाना, गुणा और भाग करना सीखते हैं।
- प्रतिलोम फलन (Inverse Functions) – प्रतिलोम फलन वह काम उलटा कर देता है जो फलन करता है. अगर f, a को b बनाता है, तो f⁻¹, b को वापस a बनाता है. निकालने के लिए y = f(x) लिखो, x और y की जगह बदलो, फिर y के लिए हल करो. f⁻¹ का ग्राफ़, f के ग्राफ़ का रेखा y = x में दर्पण-प्रतिबिंब होता है. सिर्फ़ एकैकी (one-to-one) फलन का प्रतिलोम होता है; नहीं तो पहले डोमेन सीमित करो (जैसे x ≥ 0 के साथ x² का प्रतिलोम √x).
- असमिकाएँ: नियम, अंतराल और हल करने का तरीका – असमिका बताती है कि एक मात्रा दूसरी से बड़ी है या छोटी, इसके लिए <, >, ≤ या ≥ लगाते हैं। संख्या रेखा पर छोटी संख्या बाईं ओर होती है। दोनों पक्षों में एक ही संख्या जोड़ो-घटाओ, या एक ही धनात्मक संख्या से गुणा-भाग करो, तो चिह्न नहीं बदलता। ऋणात्मक संख्या से गुणा या भाग करो तो चिह्न पलट जाता है। उत्तर अक्सर संख्याओं का पूरा समूह होता है, जिसे (−∞, 4] जैसे अंतराल में लिखते हैं। द्विघात असमिका मूलों और ग्राफ़ के आकार से हल होती है। |x| < a का अर्थ है −a < x < a। कुछ असमिकाएँ हर संख्या के लिए सत्य हैं, जैसे x² ≥ 0 और AM–GM असमिका।
- शेषफल प्रमेय और गुणनखंड प्रमेय – जब बहुपद p(x) को (x − a) से भाग देते हैं, तो शेषफल p(a) होता है। यानी लंबा भाग किए बिना, बस x = a रखो। अगर p(a) = 0 है, तो शेषफल 0 है और (x − a), p(x) का गुणनखंड है। इसे गुणनखंड प्रमेय कहते हैं।
- गणितीय आगमन द्वारा उपपत्ति – गणितीय आगमन (mathematical induction) से हम सिद्ध करते हैं कि कोई कथन P(n) हर प्राकृत संख्या n के लिए सत्य है। चरण 1 (आधार चरण): दिखाओ कि P(1) सत्य है। चरण 2 (आगमन चरण): मान लो किसी k के लिए P(k) सत्य है, और इससे दिखाओ कि P(k + 1) भी सत्य है। फिर डोमिनो की कतार की तरह P(1) से P(2), P(2) से P(3)… हमेशा के लिए सब सत्य।
2. Algebra: power function (30 h)
nth roots · Rational exponents and power functions · Irrational equations and inequalities
- करणी (Radicals) और n-वाँ मूल – किसी संख्या a का n-वाँ मूल वह संख्या है जिसे n बार आपस में गुणा करने पर a मिले। इसे ⁿ√a लिखते हैं और यह a^(1/n) के बराबर है। करणियों को गुणा-भाग कर सकते हैं, पूर्ण घात बाहर निकालकर सरल कर सकते हैं, और हर में मूल हो तो परिमेयीकरण से हटा सकते हैं।
- घात फलन: y = a·xⁿ – घात फलन का रूप y = a·xⁿ है, जहाँ a एक संख्या और n एक स्थिर घातांक है। सम पूर्ण घातें (x², x⁴) U आकार बनाती हैं जो y-अक्ष के प्रति सममित है। विषम घातें (x³, x⁵) S आकार बनाती हैं जो मूलबिंदु के प्रति सममित है। n > 0 वाले सभी y = xⁿ (0, 0) और (1, 1) से गुज़रते हैं। ऋणात्मक घात (x⁻¹ = 1/x) में अनंतस्पर्शी होते हैं और x = 0 पर फलन परिभाषित नहीं। भिन्न घात मूल हैं: x^(1/2) = √x, x^(1/3) = ∛x. मूल फलन मिलती घात का प्रतिलोम है।
- अपरिमेय समीकरण (वर्गमूल वाले समीकरण) – जिस समीकरण में अज्ञात राशि मूल चिह्न के अंदर हो, वह अपरिमेय समीकरण है। इसे हल करने के लिए मूल को अकेला करें, दोनों ओर वर्ग करें, नया समीकरण हल करें और हर उत्तर को मूल समीकरण में रखकर जाँचें। वर्ग करने से फ़ालतू हल आ सकते हैं, इसलिए जाँच ज़रूरी है।
3. Algebra: trigonometric functions (34 h)
Trigonometric functions of a number · Trigonometric formulas
- त्रिकोणमितीय फलन: रेडियन, इकाई वृत्त, ग्राफ़ और सर्वसमिकाएँ – एक रेडियन वह कोण है जिसका चाप त्रिज्या के बराबर हो, इसलिए π रेडियन = 180°। इकाई वृत्त पर कोण x वाला बिंदु P = (cos x, sin x) है, जिससे sin²x + cos²x = 1 मिलता है और sin, cos हर वास्तविक संख्या के लिए बन जाते हैं। चारों चतुर्थांशों में चिह्न 'All, Sin, Tan, Cos' से याद रखो; sin x और cos x हर 2π पर दोहराते हैं और −1 से 1 के बीच रहते हैं। cos(A + B) = cos A cos B − sin A sin B जैसे सूत्रों से tan(A + B), cot(A + B), योग-गुणनफल, द्विगुण और त्रिगुण कोण सूत्र निकलते हैं।
4. Algebra: trigonometric equations and inequalities (32 h)
Inverse trigonometric functions · Trigonometric equations and inequalities
- प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलन (कक्षा 12) – sin x, cos x जैसे फलन बार-बार दोहराते हैं, इसलिए पूरे R पर एकैकी नहीं हैं और उनका प्रतिलोम नहीं बनता। हम हर फलन का एक टुकड़ा (मुख्य मान शाखा) चुनते हैं जहाँ वह एकैकी और आच्छादक हो। उस टुकड़े पर प्रतिलोम बनता है: y = sin⁻¹x यानी sin y = x, जहाँ y ∈ [−π/2, π/2]। प्रतिलोम का ग्राफ शाखा का रेखा y = x में दर्पण प्रतिबिंब है। मुख्य परिसर: sin⁻¹ [−π/2, π/2], cos⁻¹ [0, π], tan⁻¹ (−π/2, π/2), cot⁻¹ (0, π), sec⁻¹ [0, π] − {π/2}, cosec⁻¹ [−π/2, π/2] − {0}।
5. Algebra: limits, continuity and derivative (54 h)
Limit and continuity · Derivative · Investigating functions
- सीमा (कक्षा 11): फलन किस संख्या के पास जाता है – सीमा बताती है कि जब x किसी बिंदु के पास जाता है तो f(x) किस संख्या के पास पहुँचता है। हम बिंदु की ओर बाएँ से भी चलते हैं और दाएँ से भी। दोनों ओर से एक ही संख्या मिले, तो वही सीमा है। यहाँ बहुपद, परिमेय, त्रिकोणमितीय, चरघातांकी और लघुगणकीय फलनों की सीमाएँ और ज़रूरी मानक परिणाम सीखेंगे।
- अवकलज (कक्षा 11): ढाल, परिवर्तन की दर और नियम – अवकलज बताता है कि कोई चीज़ एक पल में कितनी तेज़ी से बदल रही है। ग्राफ़ पर यह स्पर्श रेखा की ढाल है। इसे सीमा से निकालते हैं: छोटा कदम h लो, औसत बदलाव निकालो, और h को 0 की ओर ले जाओ। फिर xⁿ, sin x, cos x, योग, अंतर, गुणनफल और भागफल के आसान नियम सीखेंगे।
- अवकलज के अनुप्रयोग – अवकलज बताता है कि एक राशि दूसरी के साथ कितनी तेज़ी से बदलती है। इसका चिह्न बताता है कि फलन बढ़ रहा है (f′ > 0, वर्धमान) या घट रहा है (f′ < 0, ह्रासमान)। जहाँ f′ = 0 हो वहाँ स्पर्श रेखा सपाट होती है: ये क्रांतिक बिंदु स्थानीय उच्चिष्ठ या निम्निष्ठ हो सकते हैं, जिन्हें प्रथम अवकलज परीक्षण (चिह्न बदलना) या द्वितीय अवकलज परीक्षण (f″ का चिह्न) से जाँचते हैं। इससे सबसे बड़ा डिब्बा या सबसे सस्ता टैंक जैसे असली सवाल हल होते हैं।
6. Geometry: introduction to solid geometry (15 h)
Axioms of solid geometry · First look at polyhedra
- ठोस ज्यामिति: अंतरिक्ष में बिंदु, रेखाएँ और समतल – ठोस ज्यामिति तीन विमाओं (3D) की आकृतियों का अध्ययन है। एक रेखा पर न पड़ने वाले तीन बिंदु एक समतल तय करते हैं। अंतरिक्ष में दो रेखाएँ समांतर, प्रतिच्छेदी या विषमतलीय (skew, किसी एक तल में नहीं) हो सकती हैं। रेखा समतल में पड़ी हो सकती है, उसे काट सकती है या उसके समांतर हो सकती है; वह समतल पर लंब है अगर वह समतल की दो प्रतिच्छेदी रेखाओं पर लंब हो। अंतरिक्ष के कोण समतल पर प्रक्षेप लेकर समकोण त्रिभुज से निकाले जाते हैं।
- बहुफलक: प्रिज़्म, पिरामिड और प्लेटोनिक ठोस – बहुफलक (polyhedron) ऐसा बंद ठोस है जिसकी पूरी सतह समतल बहुभुजों (फलकों) से बनी हो। फलक किनारों पर मिलते हैं और किनारे शीर्षों पर। प्रिज़्म के दो बराबर समांतर आधार होते हैं; पिरामिड का एक आधार और त्रिभुज जो शीर्ष-बिंदु पर मिलते हैं; छिन्नक (frustum) वह पिरामिड है जिसका ऊपरी भाग आधार के समांतर तल से काट दिया गया हो। हर उत्तल बहुफलक के लिए ऑयलर सूत्र V − E + F = 2 सही है। सम (प्लेटोनिक) बहुफलक ठीक पाँच हैं।
7. Geometry: parallelism in space (24 h)
Relative position of lines and planes · Parallel projection and sections
- अंतरिक्ष में रेखाएँ और समतल – दो बिंदु एक रेखा तय करते हैं; एक रेखा पर न पड़ने वाले तीन बिंदु एक समतल। अंतरिक्ष में दो रेखाएँ या तो मिलती हैं, या समांतर हैं, या विषमतलीय। रेखा समतल में पड़ी होती है, उसके समांतर होती है या उसे एक बिंदु पर काटती है; दो समतल समांतर होते हैं या एक रेखा में मिलते हैं। रेखा समतल पर लंब है अगर वह समतल की दो कटती रेखाओं पर लंब हो। अभिलंब n = (a, b, c) से समतल ax + by + cz = d, रेखा r = a + t·u, और बिंदु (x₀, y₀, z₀) से दूरी |ax₀ + by₀ + cz₀ − d| ÷ √(a² + b² + c²)।
- ठोस ज्यामिति: अंतरिक्ष में बिंदु, रेखाएँ और समतल – ठोस ज्यामिति तीन विमाओं (3D) की आकृतियों का अध्ययन है। एक रेखा पर न पड़ने वाले तीन बिंदु एक समतल तय करते हैं। अंतरिक्ष में दो रेखाएँ समांतर, प्रतिच्छेदी या विषमतलीय (skew, किसी एक तल में नहीं) हो सकती हैं। रेखा समतल में पड़ी हो सकती है, उसे काट सकती है या उसके समांतर हो सकती है; वह समतल पर लंब है अगर वह समतल की दो प्रतिच्छेदी रेखाओं पर लंब हो। अंतरिक्ष के कोण समतल पर प्रक्षेप लेकर समकोण त्रिभुज से निकाले जाते हैं।
8. Geometry: perpendicularity in space (26 h)
Perpendicular lines and planes · Angles and distances · Orthogonal projection
- अंतरिक्ष में रेखाएँ और समतल – दो बिंदु एक रेखा तय करते हैं; एक रेखा पर न पड़ने वाले तीन बिंदु एक समतल। अंतरिक्ष में दो रेखाएँ या तो मिलती हैं, या समांतर हैं, या विषमतलीय। रेखा समतल में पड़ी होती है, उसके समांतर होती है या उसे एक बिंदु पर काटती है; दो समतल समांतर होते हैं या एक रेखा में मिलते हैं। रेखा समतल पर लंब है अगर वह समतल की दो कटती रेखाओं पर लंब हो। अभिलंब n = (a, b, c) से समतल ax + by + cz = d, रेखा r = a + t·u, और बिंदु (x₀, y₀, z₀) से दूरी |ax₀ + by₀ + cz₀ − d| ÷ √(a² + b² + c²)।
- ठोस ज्यामिति: अंतरिक्ष में बिंदु, रेखाएँ और समतल – ठोस ज्यामिति तीन विमाओं (3D) की आकृतियों का अध्ययन है। एक रेखा पर न पड़ने वाले तीन बिंदु एक समतल तय करते हैं। अंतरिक्ष में दो रेखाएँ समांतर, प्रतिच्छेदी या विषमतलीय (skew, किसी एक तल में नहीं) हो सकती हैं। रेखा समतल में पड़ी हो सकती है, उसे काट सकती है या उसके समांतर हो सकती है; वह समतल पर लंब है अगर वह समतल की दो प्रतिच्छेदी रेखाओं पर लंब हो। अंतरिक्ष के कोण समतल पर प्रक्षेप लेकर समकोण त्रिभुज से निकाले जाते हैं।
9. Geometry: coordinates, vectors and transformations in space (22 h)
Coordinates in space · Vectors in space · Transformations in space
- त्रिविमीय ज्यामिति का परिचय (कक्षा 11) – अंतरिक्ष में मूल O से होकर तीन परस्पर लंब अक्ष x, y, z लेते हैं। हर दो अक्ष एक निर्देशांक तल बनाते हैं: XY (z = 0), YZ (x = 0), ZX (y = 0)। तीनों तल अंतरिक्ष को आठ अष्टांशों में बाँटते हैं, जिनकी पहचान x, y, z के चिह्नों से होती है। बिंदु P(x, y, z) तक x-अक्ष पर x, फिर y के समांतर y, फिर z के समांतर z चलकर पहुँचते हैं। x-अक्ष पर बिंदु (x, 0, 0), XY-तल पर (x, y, 0)। दूरी PQ = √((x₂ − x₁)² + (y₂ − y₁)² + (z₂ − z₁)²)।
- सदिश बीजगणित – सदिश (vector) में माप (परिमाण) और दिशा दोनों होते हैं। 3D में a = xî + yĵ + zk̂ लिखते हैं। लंबाई |a| = √(x² + y² + z²)। दिक्-कोसाइन l = x/|a|, m = y/|a|, n = z/|a| और l² + m² + n² = 1। सदिश सिर-से-पूँछ (त्रिभुज नियम) या घटक-दर-घटक जुड़ते हैं। ka लंबाई को k गुना करता है, k ऋण हो तो दिशा उल्टी। AB को m : n में बाँटने वाले बिंदु का स्थिति सदिश अंतः (mb + na)/(m + n) और बाह्य (mb − na)/(m − n)। अदिश गुणनफल a·b = |a||b|cosθ एक संख्या है। सदिश गुणनफल a×b दोनों पर लंब नया सदिश है; इसकी लंबाई समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल है।
- रूपांतरण: आकृति को खिसकाना, पलटना, घुमाना और बड़ा करना – रूपांतरण किसी आकृति को नई जगह ले जाता है। स्थानांतरण उसे खिसकाता है, परावर्तन दर्पण रेखा में पलटता है, घूर्णन एक केंद्र के चारों ओर घुमाता है, और आवर्धन माप बदलता है। पहले तीन में माप और आकार वही रहते हैं (सर्वांगसम प्रतिबिंब)। आवर्धन में आकार वही, माप बदलता है (समरूप प्रतिबिंब)। हर एक का आसान निर्देशांक नियम है।