बिंदु, रेखा और समतल: मूल नियम
समतल एक सपाट सतह है जो हर दिशा में अनंत तक फैली है। अंतरिक्ष में कुछ सरल नियम (अभिगृहीत) सच हैं:
- दो अलग बिंदुओं से ठीक एक रेखा जाती है।
- एक रेखा पर न पड़ने वाले तीन बिंदुओं से ठीक एक समतल जाता है।
- अगर रेखा के दो बिंदु समतल में हैं, तो पूरी रेखा उसी समतल में है।
- अगर दो अलग समतलों में एक बिंदु साझा है, तो एक पूरी रेखा साझा है।
समतल इनसे भी तय होता है: एक रेखा और उसके बाहर का बिंदु, दो कटती रेखाएँ, या दो समांतर रेखाएँ।
रेखाओं और समतलों की सापेक्ष स्थिति (समांतरता)
दो रेखाएँ
वे प्रतिच्छेदी हैं (एक साझा बिंदु), समांतर हैं (एक दिशा, एक समतल में, कोई साझा बिंदु नहीं), या विषमतलीय हैं (किसी एक समतल में नहीं, इसलिए न मिलतीं, न समांतर)।
रेखा और समतल
रेखा समतल में पड़ी है, उसके समांतर है, या उसे ठीक एक बिंदु पर काटती है। जाँच: रेखा समतल के समांतर है अगर वह समतल के अंदर की किसी रेखा के समांतर हो।
दो समतल
वे समांतर हैं या एक रेखा में मिलते हैं। जाँच: अगर एक समतल की दो कटती रेखाएँ दूसरे समतल के समांतर हों, तो समतल समांतर हैं।
लंब रेखाएँ और समतल; अभिलंब सदिश
रेखा समतल पर लंब है अगर वह समतल की हर रेखा से 90° बनाए। जाँचने के लिए समतल की दो कटती रेखाओं से 90° काफ़ी है।
ऐसी रेखा की दिशा अभिलंब सदिश n = (a, b, c) है। अगर P₀ = (x₀, y₀, z₀) समतल पर है, तो समतल का हर बिंदु a(x − x₀) + b(y − y₀) + c(z − z₀) = 0 मानता है, यानी ax + by + cz = d।
तीन लंबों का प्रमेय: अगर एक तिरछी रेखा समतल से मिलती है और उसकी छाया (प्रक्षेप) समतल की किसी रेखा पर लंब है, तो तिरछी रेखा भी उस रेखा पर लंब है।
दो समतल लंब हैं जब उनके अभिलंब लंब हों: a₁a₂ + b₁b₂ + c₁c₂ = 0।
समीकरणों से रेखा और समतल
बिंदु A से दिशा सदिश u वाली रेखा: r = A + t·u (सदिश रूप)। निर्देशांकों में (प्राचलिक रूप): x = x₁ + t·u₁, y = y₁ + t·u₂, z = z₁ + t·u₃। t हटाने पर सममित रूप (x − x₁)/u₁ = (y − y₁)/u₂ = (z − z₁)/u₃।
A से दो दिशा सदिशों u, v वाला समतल: r = A + s·u + t·v। इसका अभिलंब n = u × v है, जिससे ax + by + cz = d मिलता है।
रेखा समतल से कहाँ मिलती है: प्राचलिक x, y, z को समतल के समीकरण में रखकर t निकालो।
अंतरिक्ष में कोण और दूरियाँ
- दो रेखाओं के बीच कोण (विषमतलीय भी): cos θ = |u·v| ÷ (|u||v|)।
- रेखा और समतल के बीच कोण: रेखा और समतल पर उसके प्रक्षेप के बीच कोण φ; sin φ = |u·n| ÷ (|u||n|)।
- दो समतलों के बीच कोण (द्वितल कोण): अभिलंबों के बीच कोण, cos θ = |n₁·n₂| ÷ (|n₁||n₂|)।
- बिंदु से समतल की दूरी: D = |ax₀ + by₀ + cz₀ − d| ÷ √(a² + b² + c²)।
- समांतर समतलों के बीच दूरी ax + by + cz = d₁ और = d₂: |d₁ − d₂| ÷ √(a² + b² + c²)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- रेखा: r = A + t·u; (x − x₁)/u₁ = (y − y₁)/u₂ = (z − z₁)/u₃
- समतल: ax + by + cz = d, अभिलंब n = (a, b, c); r = A + s·u + t·v, n = u × v
- रेखाओं के बीच कोण: cos θ = |u·v| / (|u||v|)
- रेखा और समतल के बीच कोण: sin φ = |u·n| / (|u||n|)
- समतलों के बीच कोण: cos θ = |n₁·n₂| / (|n₁||n₂|)
- बिंदु से समतल: D = |ax₀ + by₀ + cz₀ − d| / √(a² + b² + c²)
हल किए गए उदाहरण
1. (1, 2, 3) से जाने वाले और अभिलंब (2, −1, 4) वाले समतल का समीकरण निकालो।
2(x − 1) − 1(y − 2) + 4(z − 3) = 0 → 2x − y + 4z − 2 + 2 − 12 = 0 → 2x − y + 4z = 12।
2. A(1, 0, 2) और B(3, 4, 1) से जाने वाली रेखा के प्राचलिक समीकरण लिखो।
दिशा u = B − A = (2, 4, −1)। इसलिए x = 1 + 2t, y = 4t, z = 2 − t।
3. P(1, 2, 3) से समतल 2x + 2y + z = 3 की दूरी निकालो।
D = |2·1 + 2·2 + 1·3 − 3| ÷ √(4 + 4 + 1) = 6 ÷ 3 = 2 इकाई।
4. रेखा x = 1 + t, y = 2t, z = 3 − t समतल x + y + z = 10 से कहाँ मिलती है?
(1 + t) + 2t + (3 − t) = 10 → 4 + 2t = 10 → t = 3। बिंदु: (4, 6, 0)।
5. क्या समतल x + 2y − z = 4 और 2x − y = 7 लंब हैं?
n₁·n₂ = 1·2 + 2·(−1) + (−1)·0 = 0। हाँ, अभिलंब 90° पर हैं, इसलिए समतल लंब हैं।
6. दिशा (1, 1, 0) वाली रेखा और समतल z = 0 के बीच कोण निकालो।
अभिलंब n = (0, 0, 1)। u·n = 0, तो sin φ = 0 और φ = 0°: रेखा समतल के समांतर है (या उसमें पड़ी है)।
7. दिखाओ कि रेखाएँ L₁: (t, 0, 0) और L₂: (0, s, 1) विषमतलीय हैं।
दिशाएँ (1, 0, 0) और (0, 1, 0) समांतर नहीं। साझा बिंदु के लिए z = 0 और z = 1 एक साथ चाहिए: असंभव। न समांतर, न साझा बिंदु, इसलिए विषमतलीय।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि जो दो रेखाएँ नहीं मिलतीं वे ज़रूर समांतर हैं। अंतरिक्ष में वे विषमतलीय हो सकती हैं।
- समतल की सिर्फ़ एक रेखा से लंबता जाँचना। दो कटती रेखाएँ चाहिए।
- दूरी के सूत्र में निरपेक्ष मान या √(a² + b² + c²) भूल जाना।
- रेखा और समतल के कोण के लिए sin की जगह cos लगाना (अभिलंब समतल से 90° पर है)।