पहले ये शब्द जान लो
स्पर्श रेखा (tangent) वह रेखा है जो वृत्त को ठीक एक बिंदु पर छूती है। उस बिंदु को स्पर्श बिंदु कहते हैं। स्पर्श रेखा हमेशा उस बिंदु की त्रिज्या पर 90° का कोण बनाती है।
छेदक रेखा (secant) वृत्त को दो बिंदुओं पर काटती है। केंद्र O है, त्रिज्या r। इस पाठ में D का मतलब है किसी बिंदु से केंद्र O तक की दूरी।
दो आकृतियाँ तब स्पर्शी कहलाती हैं जब वे एक-दूसरे को छुएँ पर काटें नहीं। उस जगह को स्पर्श (tangency) कहते हैं।
वृत्त के बाहर के बिंदु से स्पर्श रेखाएँ
कैसे बनाएँ। 1) बिंदु P को केंद्र O से मिलाओ। 2) OP का मध्य बिंदु M निकालो। 3) M को केंद्र और MO को त्रिज्या मानकर O और P से गुज़रता वृत्त बनाओ। 4) वह पहले वृत्त को दो बिंदुओं T1 और T2 पर काटता है। 5) P को T1 और T2 से मिलाओ। ये स्पर्श रेखाएँ हैं।
क्यों काम करता है। अर्धवृत्त में बना कोण 90° होता है। इसलिए कोण OT1P = 90°। त्रिज्या पर लंब रेखा स्पर्श रेखा होती है।
लंबाई। त्रिभुज OT1P में T1 पर समकोण है। इसलिए PT² = D² - r²। P से खिंची दोनों स्पर्श रेखाएँ बराबर हैं और OP से बराबर कोण बनाती हैं।
वृत्त के बिंदु पर स्पर्श रेखा। अगर बिंदु वृत्त पर ही है तो उस बिंदु की त्रिज्या पर 90° की रेखा खींच दो।
दो वृत्तों की साझा स्पर्श रेखाएँ
जो रेखा दो वृत्तों को छुए वह उभयनिष्ठ (साझा) स्पर्श रेखा है। दो प्रकार हैं। बाहरी रेखा में दोनों वृत्त एक ही तरफ़ रहते हैं। आड़ी (अनुप्रस्थ) रेखा वृत्तों के बीच से निकलती है और वृत्त उसके दोनों तरफ़ होते हैं।
त्रिज्याएँ r1, r2 और केंद्रों की दूरी d हो तो:
- d > r1 + r2 (दूर): 4 स्पर्श रेखाएँ।
- d = r1 + r2 (बाहर से स्पर्श): 3।
- |r1 - r2| < d < r1 + r2 (एक-दूसरे को काटते हैं): 2।
- d = |r1 - r2| (अंदर से स्पर्श): 1।
- d < |r1 - r2| (एक दूसरे के अंदर): 0।
स्पर्श बिंदुओं के बीच की लंबाई: बाहरी = √(d² - (r1 - r2)²), आड़ी = √(d² - (r1 + r2)²)।
रचना का विचार। बाहरी रेखा के लिए बड़े वृत्त के केंद्र पर r1 - r2 त्रिज्या का सहायक वृत्त बनाओ। दूसरे केंद्र से उस पर स्पर्श रेखा खींचो। फिर उस रेखा को r2 बाहर की तरफ़ खिसका दो। आड़ी रेखा के लिए r1 + r2 लो।
दो पुलियों पर चढ़े पट्टे का आकार यही है। आड़ा पट्टा 8 की शक्ल बनाता है।
रेखाओं और वृत्तों को स्पर्श चाप से जोड़ना
दो रेखाओं के कोने को गोल करने के लिए (त्रिज्या R): हर रेखा के भीतर की तरफ़ R दूरी पर समांतर रेखा खींचो। वे C पर मिलती हैं, यही चाप का केंद्र है। C से दोनों रेखाओं पर लंब डालो। लंब के पाद स्पर्श बिंदु हैं। उनके बीच चाप खींचो।
अगर कोने का आधा कोण φ है तो केंद्र कोने से R / sin φ दूर है और स्पर्श बिंदु कोने से R / tan φ दूर हैं। 90° के कोने में φ = 45°, इसलिए दूरियाँ R और R√2 हैं।
यही विचार दो वृत्तों को चाप से जोड़ने में चलता है। नया चाप किसी वृत्त को बाहर से छुए तो केंद्र और स्पर्श बिंदु एक सरल रेखा में होते हैं और केंद्रों की दूरी त्रिज्याओं का योग होती है। अंदर से छुए तो अंतर।
याद रखो: स्पर्श बिंदु हमेशा दोनों केंद्रों को मिलाने वाली रेखा पर होता है (या त्रिज्या पर)।
तकनीकी वक्र: अंडाकार, ओवॉइड और सर्पिल
ड्राइंग में चिकने वक्र वृत्त के चापों से बनाए जाते हैं। हर जोड़ पर स्पर्श होता है, इसलिए कोई कोना नहीं बनता।
- दो केंद्रों वाला सर्पिल। दो बिंदु A और B लो। A को केंद्र मानकर अर्धवृत्त, फिर B को केंद्र मानकर अर्धवृत्त, और यूँ ही आगे। हर बार त्रिज्या AB जितनी बढ़ती है।
- अंडाकार (oval). चार चाप और चार केंद्र। दो बड़े और दो छोटे चाप, जो केंद्रों की रेखाओं पर बने बिंदुओं पर जुड़ते हैं। यह दीर्घवृत्त जैसा दिखता है पर सिर्फ़ चापों से बना है।
- ओवॉइड (अंडे जैसा आकार). अंडाकार जैसा, पर छोटा चाप अलग लेते हैं, इसलिए एक सिरा पतला होता है।
ये असली दीर्घवृत्त नहीं हैं। कम्पास से जल्दी बन जाते हैं, इसीलिए तकनीकी ड्राइंग में काम आते हैं।
बिंदु की घात (power of a point)
एक बिंदु P और केंद्र O, त्रिज्या r का वृत्त लो। P से कोई भी रेखा खींचो जो वृत्त को A और B पर काटे। तब PA x PB हर रेखा के लिए एक ही संख्या होती है। इस संख्या को P की घात कहते हैं।
P की घात = D² - r², जहाँ D = PO।
- P बाहर: घात धनात्मक। स्पर्श रेखा PT हो तो यह PT² के बराबर।
- P वृत्त पर: घात 0।
- P अंदर: घात ऋणात्मक। P से जाने वाली जीवा के दोनों टुकड़ों का गुणनफल r² - D² होता है।
क्यों। त्रिभुज PAT और PTB में P का कोण साझा है और एकांतर खंड के कारण एक और कोण बराबर है। इसलिए वे समरूप हैं। इससे PA / PT = PT / PB, यानी PA x PB = PT²।
P से दो रेखाएँ: PA x PB = PC x PD। इससे छूटी हुई लंबाई निकलती है।
मूलाक्ष और मूल केंद्र (radical axis, radical centre)
दो वृत्तों का मूलाक्ष उन बिंदुओं का समूह है जिनकी दोनों वृत्तों से घात बराबर है। दोनों वृत्तों के बाहर के बिंदु के लिए इसका मतलब है बराबर स्पर्श लंबाई।
घात D² - r² है, इसलिए बराबर घात से एक सीधी रेखा मिलती है, जो केंद्रों की रेखा पर लंब (90°) होती है। अगर वृत्त दो बिंदुओं पर कटें तो मूलाक्ष उन बिंदुओं से गुज़रने वाली रेखा (उभयनिष्ठ जीवा) है। अगर वे छूएँ तो वह स्पर्श बिंदु पर साझा स्पर्श रेखा है। अगर वृत्त दूर हों तो वह उनके बीच में है और पहले केंद्र से उसकी दूरी (d² + r1² - r2²) / (2d) है।
तीन वृत्तों के तीन मूलाक्ष होते हैं। वे एक ही बिंदु पर मिलते हैं, जिसे मूल केंद्र कहते हैं। वहाँ से तीनों वृत्तों पर स्पर्श लंबाई बराबर होती है। इसलिए उसी लंबाई की त्रिज्या का वृत्त तीनों को समकोण पर काटता है।
जो वृत्त मिलते नहीं, उनका मूलाक्ष कैसे खींचें। कोई भी ऐसा वृत्त बनाओ जो दोनों को काटे। दो उभयनिष्ठ जीवाएँ खींचो। वे मूलाक्ष के एक बिंदु पर मिलती हैं। यही दो बार करके दो बिंदु पाओ और मिला दो।
डिज़ाइन में स्पर्श कहाँ काम आते हैं
- सड़क और रेल: सीधा हिस्सा, फिर स्पर्श चाप, फिर सीधा हिस्सा। अचानक मोड़ नहीं।
- लोगो और अक्षर: S, B, P जैसे अक्षर सीधी रेखाओं और चापों से बनते हैं।
- गियर और पट्टे: साझा स्पर्श रेखाएँ पट्टे का रास्ता देती हैं। पट्टे की लंबाई = 2 x स्पर्श लंबाई + पहियों पर चाप।
- फ़र्नीचर और फ़ोन के कोने: गोल कोने स्पर्श चाप (फ़िलेट) हैं।
- भवन: मेहराब और घुमावदार सीढ़ियाँ साझा स्पर्श वाले चापों से बनती हैं।
ड्राइंग में स्पर्श बिंदु हमेशा चिह्नित करो। वहीं एक वक्र खत्म होता है और दूसरा शुरू।
करके देखो: दो डिब्बों पर पट्टा
अलग-अलग आकार के दो डिब्बे या गिलास लो। उन्हें मेज़ पर थोड़ी दूरी पर रखो। एक धागा दोनों पर कसकर लपेटो, जैसे पट्टा। धागे के सीधे हिस्से बाहरी स्पर्श रेखाएँ हैं। पहले अनुमान लगाओ: डिब्बे पास लाने पर धागा छोटा होगा या नहीं? जाँचो। अब धागे को 8 की शक्ल में क्रॉस करो और आड़ी स्पर्श रेखाएँ देखो। लंबाई नापो और 3D के सूत्र से मिलाओ।
बिंदु से स्पर्श रेखा भी आज़माओ: एक सिक्के से थोड़ी दूर पेंसिल से बिंदु P लगाओ, स्केल को P से ऐसे रखो कि वह सिक्के को सिर्फ़ छुए, और स्पर्श बिंदु चिह्नित करो। दूसरी तरफ़ भी करो। P से दोनों लंबाइयाँ नापो। वे बराबर हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- स्पर्श बिंदु पर स्पर्श रेखा ⟂ त्रिज्या
- P से स्पर्श रेखा की लंबाई: PT = √(D² - r²), D = PO
- बाहरी साझा स्पर्श रेखा: √(d² - (r1 - r2)²); आड़ी: √(d² - (r1 + r2)²)
- दो रेखाओं को जोड़ता चाप (आधा कोण φ): केंद्र R / sin φ और स्पर्श बिंदु R / tan φ दूर
- P की घात = PA x PB = D² - r² (बाहर) = r² - D² (अंदर, जीवा के टुकड़े)
- दो वृत्तों का मूलाक्ष: बराबर घात के बिंदु, केंद्रों की रेखा पर लंब, पहले केंद्र से (d² + r1² - r2²) / (2d) दूर
हल किए गए उदाहरण
1. एक बिंदु P, 5 cm त्रिज्या के वृत्त के केंद्र से 13 cm दूर है। P से स्पर्श रेखा की लंबाई निकालो।
PT = √(D² - r²) = √(169 - 25) = √144 = 12 cm।
2. बिंदु P, 6 cm त्रिज्या के वृत्त के केंद्र से 10 cm दूर है। P की घात निकालो। P से एक छेदक रेखा वृत्त को A और B पर काटती है और PA = 4 cm है। PB निकालो।
घात = D² - r² = 100 - 36 = 64। PA x PB = 64, इसलिए PB = 64 / 4 = 16 cm।
3. P से दो छेदक रेखाएँ हैं। पहली पर PA = 3 और PB = 8। दूसरी पर PC = 4। PD निकालो।
PA x PB = 3 x 8 = 24। PC x PD = 24, इसलिए PD = 24 / 4 = 6।
4. वृत्त के अंदर एक बिंदु पर दो जीवाएँ काटती हैं। एक जीवा 4 और 9 के टुकड़ों में बँटती है। दूसरी जीवा का एक टुकड़ा 6 है। दूसरा टुकड़ा निकालो।
टुकड़ों का गुणनफल बराबर होता है: 4 x 9 = 36। इसलिए 6 x x = 36 और x = 6।
5. दो वृत्तों की त्रिज्याएँ 5 और 2 हैं और केंद्र 25 दूर हैं। स्पर्श बिंदुओं के बीच बाहरी और आड़ी साझा स्पर्श रेखा की लंबाई निकालो।
बाहरी: √(25² - (5 - 2)²) = √(625 - 9) = √616 ≈ 24.8। आड़ी: √(25² - (5 + 2)²) = √(625 - 49) = √576 = 24।
6. वृत्त 1 की त्रिज्या 5, वृत्त 2 की त्रिज्या 3 और केंद्र 8 दूर हैं। केंद्रों की रेखा को मूलाक्ष केंद्र 1 से कितनी दूरी पर काटता है?
x = (d² + r1² - r2²) / (2d) = (64 + 25 - 9) / 16 = 80 / 16 = 5। मूलाक्ष केंद्र 1 से 5 दूर है। यह ठीक वही बिंदु है जहाँ वृत्त मिलते हैं, क्योंकि 5 + 3 = 8: वे वहाँ छूते हैं।
7. दो सीधी सड़कें समकोण पर मिलती हैं। उन्हें 4 m त्रिज्या के चाप से जोड़ो। स्पर्श बिंदु और चाप का केंद्र कोने से कितनी दूर हैं?
आधा कोण φ = 45°। स्पर्श बिंदु: R / tan 45° = 4 m दूर। केंद्र: R / sin 45° = 4 / 0.707 ≈ 5.66 m दूर।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि बिंदु से सिर्फ़ एक स्पर्श रेखा होती है। बाहर के बिंदु से ठीक दो होती हैं और वे बराबर हैं।
- स्पर्श रेखा और त्रिज्या के बीच 90° भूल जाना और रेखा ऐसी खींचना कि वह वृत्त को काट दे।
- PA x PB में A और B ग़लत लेना। हमेशा P से हर बिंदु तक की दूरी लो, एक ही रेखा पर, A से B तक नहीं।
- छूते हुए दो वृत्तों का स्पर्श बिंदु कहीं भी रख देना। वह केंद्रों की रेखा पर ही होना चाहिए।