पहले ये शब्द जानो
वृत्त का एक केंद्र और एक त्रिज्या होती है। दो वृत्तों की त्रिज्याएँ हम r1 और r2 कहते हैं। दोनों केंद्रों को मिलाने वाली रेखा केंद्र-रेखा है, और उसकी लंबाई d है, यानी केंद्रों की दूरी।
वृत्त की स्पर्श रेखा उसे ठीक एक बिंदु पर छूती है। उभयनिष्ठ स्पर्श रेखा वह एक सीधी रेखा है जो दोनों वृत्तों को छूती है। उभयनिष्ठ बिंदु वह बिंदु है जो दोनों वृत्तों पर हो।
नीचे के सारे तथ्य सिर्फ़ तीन संख्याओं पर निर्भर हैं: r1, r2 और d।
दो वृत्तों की पाँच स्थितियाँ
एक वृत्त को दूसरे की ओर खिसकाओ और d की तुलना योग (r1 + r2) और अंतर (r1 − r2, धनात्मक लेकर) से करो।
- अलग: d > r1 + r2। कोई उभयनिष्ठ बिंदु नहीं। 4 उभयनिष्ठ स्पर्श रेखाएँ।
- बाहर से स्पर्श (बाह्य स्पर्श): d = r1 + r2। एक उभयनिष्ठ बिंदु। 3 उभयनिष्ठ स्पर्श रेखाएँ।
- काटते हुए: अंतर < d < योग। दो उभयनिष्ठ बिंदु। 2 उभयनिष्ठ स्पर्श रेखाएँ।
- अंदर से स्पर्श (आंतरिक स्पर्श): d = अंतर। एक उभयनिष्ठ बिंदु। 1 उभयनिष्ठ स्पर्श रेखा।
- एक दूसरे के अंदर: d < अंतर। कोई उभयनिष्ठ बिंदु नहीं। 0 उभयनिष्ठ स्पर्श रेखाएँ।
जब वृत्त छूते हैं तो स्पर्श बिंदु केंद्र-रेखा पर होता है। बाहर के स्पर्श में वह केंद्रों के बीच होता है; अंदर के स्पर्श में वह उसी रेखा पर छोटे वृत्त के आगे होता है।
उभयनिष्ठ स्पर्श रेखाएँ और उनकी लंबाई
सीधी (बाह्य) उभयनिष्ठ स्पर्श रेखा में दोनों वृत्त एक ही ओर रहते हैं। अनुप्रस्थ (काटने वाली) उभयनिष्ठ स्पर्श रेखा में हर ओर एक वृत्त होता है और वह वृत्तों के बीच केंद्र-रेखा को काटती है।
दोनों स्पर्श बिंदुओं तक की त्रिज्याएँ खींचो। दोनों स्पर्श रेखा पर 90° हैं, इसलिए समांतर हैं। केंद्र मिलाओ और एक रेखा गिराकर समकोण त्रिभुज बनाओ। पाइथागोरस से:
सीधी स्पर्श रेखा की लंबाई = √(d² − (r1 − r2)²)
अनुप्रस्थ स्पर्श रेखा की लंबाई = √(d² − (r1 + r2)²)
अनुप्रस्थ स्पर्श रेखा तभी बनती है जब d ≥ r1 + r2, यानी जब वृत्त अलग हों या बाहर से छूएँ। सीधी तब बनती है जब d ≥ |r1 − r2|।
करके देखो: कागज़ पर दो सिक्के
अलग-अलग आकार के दो सिक्के और एक पटरी लो। बड़ा सिक्का रखकर उसके चारों ओर रेखा खींचो। छोटे सिक्के को तब तक खिसकाओ जब तक वह बाहर से बड़े को बस छू न ले: केंद्रों की दूरी d नापो और जाँचो कि d = r1 + r2। अब छोटे सिक्के को ऊपर किनारे के पास ऐसे रखो कि वह अंदर से बस छुए: जाँचो कि d = r1 − r2। मेज़ पर दो सिक्कों के किनारे पटरी रखो: यही बाह्य उभयनिष्ठ स्पर्श रेखा है!
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अलग: d > r1 + r2 (4 उभयनिष्ठ स्पर्श रेखाएँ)
- बाहर से स्पर्श: d = r1 + r2 (3 उभयनिष्ठ स्पर्श रेखाएँ, 1 उभयनिष्ठ बिंदु)
- काटते हुए: |r1 − r2| < d < r1 + r2 (2 उभयनिष्ठ स्पर्श रेखाएँ, 2 उभयनिष्ठ बिंदु)
- अंदर से स्पर्श: d = |r1 − r2| (1 उभयनिष्ठ स्पर्श रेखा, 1 उभयनिष्ठ बिंदु)
- एक दूसरे के अंदर: d < |r1 − r2| (0 उभयनिष्ठ स्पर्श रेखाएँ)
- सीधी (बाह्य) उभयनिष्ठ स्पर्श रेखा की लंबाई = √(d² − (r1 − r2)²)
- तिरछी (अनुप्रस्थ) उभयनिष्ठ स्पर्श रेखा की लंबाई = √(d² − (r1 + r2)²)
हल किए गए उदाहरण
1. त्रिज्याएँ 5 सेमी और 3 सेमी, केंद्र 10 सेमी दूर। वृत्त कैसे हैं और कितनी उभयनिष्ठ स्पर्श रेखाएँ?
r1 + r2 = 8। d = 10 > 8, इसलिए वृत्त अलग हैं। उभयनिष्ठ स्पर्श रेखाएँ = 4।
2. त्रिज्याएँ 6 सेमी और 2 सेमी, d = 8 सेमी। स्थिति क्या है और स्पर्श बिंदु बड़े केंद्र से कितना दूर है?
r1 + r2 = 8 = d, इसलिए वे बाहर से छूते हैं: 3 उभयनिष्ठ स्पर्श रेखाएँ। स्पर्श बिंदु केंद्र-रेखा पर बड़े केंद्र से 6 सेमी (और छोटे से 2 सेमी) दूर है।
3. त्रिज्याएँ 7 सेमी और 4 सेमी, d = 5 सेमी। स्थिति और उभयनिष्ठ स्पर्श रेखाएँ?
r1 + r2 = 11, r1 − r2 = 3। चूँकि 3 < 5 < 11, वृत्त दो बिंदुओं पर काटते हैं। उभयनिष्ठ स्पर्श रेखाएँ = 2।
4. त्रिज्याएँ 9 सेमी और 4 सेमी, d = 5 सेमी। स्थिति?
r1 − r2 = 5 = d, इसलिए छोटा वृत्त बड़े को अंदर से छूता है। ठीक 1 उभयनिष्ठ स्पर्श रेखा।
5. 4.5 सेमी और 2.5 सेमी त्रिज्या के दो वृत्त छूते हैं। d निकालो अगर वे (a) बाहर से, (b) अंदर से छूएँ।
(a) d = 4.5 + 2.5 = 7 सेमी। (b) d = 4.5 − 2.5 = 2 सेमी।
6. त्रिज्याएँ 8 सेमी और 3 सेमी, d = 13 सेमी। सीधी उभयनिष्ठ स्पर्श रेखा की लंबाई निकालो।
r1 − r2 = 5। लंबाई = √(13² − 5²) = √(169 − 25) = √144 = 12 सेमी।
7. त्रिज्याएँ 5 सेमी और 3 सेमी, d = 10 सेमी। अनुप्रस्थ उभयनिष्ठ स्पर्श रेखा की लंबाई निकालो।
r1 + r2 = 8। लंबाई = √(10² − 8²) = √(100 − 64) = √36 = 6 सेमी।
8. 5 सेमी और 3 सेमी त्रिज्या के दो वृत्त दो बिंदुओं पर काटते हैं। d किन दो संख्याओं के बीच होगी?
अंतर 2 है और योग 8, इसलिए 2 < d < 8 (सेमी में)।
आम गलतियाँ
- बाहर से स्पर्श के लिए d = r1 − r2 लिखना। बाहर के स्पर्श में योग r1 + r2 आता है; अंदर के स्पर्श में अंतर।
- यह भूल जाना कि स्पर्श करते वृत्तों की भी उभयनिष्ठ स्पर्श रेखाएँ होती हैं: बाहर के स्पर्श में 3, अंदर के स्पर्श में 1।
- सीधी स्पर्श रेखा के सूत्र में योग लगाना। सीधी में (r1 − r2) आता है; अनुप्रस्थ में (r1 + r2)।
- "काटना" और "छूना" में गड़बड़ करना। काटते वृत्तों के दो बिंदु उभयनिष्ठ हैं, छूते वृत्तों का ठीक एक।