समांतर श्रेढ़ी क्या है?
श्रेढ़ी यानी किसी नियम से चलने वाली संख्याओं की सूची। समांतर श्रेढ़ी (AP) का नियम है: हर बार एक ही संख्या जोड़ो।
सूची की हर संख्या पद है। पहला पद a कहलाता है। जो निश्चित संख्या बार-बार जुड़ती है, वह सार्व अंतर d है।
d = कोई पद − उससे ठीक पहले वाला पद। 3, 7, 11, 15… में d = 7 − 3 = 4। 20, 17, 14… में d = 17 − 20 = −3 (ऋणात्मक d पर पद घटते हैं)। 5, 5, 5… में d = 0।
जाँच: हर पड़ोसी जोड़े का अंतर निकालिए। सब अंतर बराबर हों तो AP है। 1, 4, 9, 16 AP नहीं है (अंतर 3, 5, 7)।
समांतर श्रेढ़ी का n-वाँ पद
छलाँगें गिनिए: a₁ = a, a₂ = a + d, a₃ = a + 2d, a₄ = a + 3d। छलाँगें हमेशा स्थान से एक कम होती हैं।
aₙ = a + (n − 1)d
इसे व्यापक पद भी कहते हैं। इससे चार तरह के प्रश्न हल होते हैं: कोई पद निकालना, कोई संख्या कौन-सा पद है, दो पदों से a और d निकालना, और कोई संख्या AP में है या नहीं (n धनात्मक पूर्ण संख्या आनी चाहिए)।
अंत से n-वाँ पद
अंतिम पद l हो तो अंत से n-वाँ पद l − (n − 1)d है। बस अंतिम पद से पीछे की ओर चलिए।
पहले n पदों का योग
योग को सीधा और उलटा लिखकर जोड़िए। हर जोड़ा (पहला + अंतिम, दूसरा + अंत से दूसरा, …) एक ही योग 2a + (n − 1)d देता है। ऐसे n जोड़े हैं, इसलिए 2Sₙ = n[2a + (n − 1)d]।
Sₙ = n/2 [2a + (n − 1)d]
अंतिम पद l = a + (n − 1)d पता हो तो Sₙ = n/2 (a + l)।
3D ठीक यही दिखाता है: हरी उलटी कॉपी सीढ़ी को आयत बना देती है।
काम की बातें
- पहली n प्राकृत संख्याओं का योग: 1 + 2 + … + n = n(n + 1)/2।
- aₙ = Sₙ − Sₙ₋₁।
रोज़मर्रा के जीवन के प्रश्न
कहानी में वह चीज़ ढूँढिए जो हर बार बराबर बढ़ती (या घटती) है। फिर a, d और n लिखिए।
- "10वें महीने में कितना?" → aₙ लगाइए।
- "10 महीनों में कुल कितना?" → Sₙ लगाइए।
- "कितने महीनों में कुल … होगा?" → Sₙ से n निकालिए (अक्सर द्विघात समीकरण; सिर्फ़ धनात्मक पूर्ण मान रखिए)।
उदाहरण: बचत योजना, हर साल तय बढ़ोतरी वाला वेतन, पंक्तियों में रखे लट्ठे, सीटों की पंक्तियाँ, रोज़ बढ़ता जुर्माना।
करके देखिए: अपनी सीढ़ी बनाइए
सिक्के या तीलियाँ लीजिए। 1, 3, 5, 7 और 9 की ढेरियाँ बनाइए। सब एक-एक करके गिनिए। अब उलटे क्रम (9, 7, 5, 3, 1) में फिर ढेरियाँ बनाकर पहली के बगल में रखिए। हर जोड़ा 10 बनता है, 5 जोड़े: 50। आधा 25। क्या आपकी गिनती मिली?
3D के आख़िरी चरण में पहले अनुमान लगाइए: a = 6 और d = −2 हो तो 5वाँ पद क्या होगा? फिर स्लाइडर से जाँचिए।
बोर्ड परीक्षा में क्या पूछा जाता है
AP बीजगणित इकाई (लगभग 20 अंक) में है। आम प्रश्न: d या n-वाँ पद (1–2 अंक), कोई संख्या कौन-सा पद है (2 अंक), n पदों का योग या योग से n (3 अंक), और एक केस-स्टडी (4–5 अंक)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सार्व अंतर: d = aₙ₊₁ − aₙ
- n-वाँ पद: aₙ = a + (n − 1)d
- अंत से n-वाँ पद: l − (n − 1)d
- n पदों का योग: Sₙ = n/2 [2a + (n − 1)d]
- अंतिम पद से योग: Sₙ = n/2 (a + l)
- aₙ = Sₙ − Sₙ₋₁; 1 + 2 + … + n = n(n + 1)/2
हल किए गए उदाहरण
1. क्या 5, 9, 13, 17, … AP है? हाँ तो d बताइए।
अंतर: 9 − 5 = 4, 13 − 9 = 4, 17 − 13 = 4। सब बराबर, इसलिए AP है और d = 4।
2. 3, 8, 13, … का 20वाँ पद निकालिए।
a = 3, d = 5, n = 20। a₂₀ = 3 + 19 × 5 = 3 + 95 = 98।
3. AP 7, 11, 15, … का कौन-सा पद 87 है?
a = 7, d = 4। 7 + (n − 1) × 4 = 87 → (n − 1) × 4 = 80 → n = 21। 87 इक्कीसवाँ पद है।
4. किसी AP का चौथा पद 11 और नौवाँ पद 26 है। a और d बताइए।
a + 3d = 11 और a + 8d = 26। घटाइए: 5d = 15, d = 3। a = 11 − 9 = 2। AP: 2, 5, 8, 11, …
5. 4, 7, 10, … के पहले 15 पदों का योग निकालिए।
a = 4, d = 3, n = 15। S₁₅ = 15/2 [8 + 14 × 3] = 15/2 × 50 = 375।
6. 7 से विभाज्य सभी दो अंकों वाली संख्याओं का योग निकालिए।
14, 21, …, 98। a = 14, d = 7, l = 98। 98 = 14 + (n − 1) × 7 → n = 13। S = 13/2 × (14 + 98) = 13/2 × 112 = 728।
7. 24, 21, 18, … के कितने पद लें कि योग 78 हो?
a = 24, d = −3। n/2 [48 + (n − 1)(−3)] = 78 → n(51 − 3n) = 156 → n² − 17n + 52 = 0 → (n − 4)(n − 13) = 0। n = 4 या 13। दोनों सही हैं, क्योंकि 5वें से 13वें पद तक के पदों का योग 0 है (कुछ पद ऋणात्मक हो जाते हैं)।
8. रिया पहले महीने ₹100, दूसरे में ₹150, तीसरे में ₹200 बचाती है, इसी तरह आगे। 12वें महीने में और 12 महीनों में कुल कितना बचाएगी?
a = 100, d = 50। a₁₂ = 100 + 11 × 50 = ₹650। S₁₂ = 12/2 × (100 + 650) = 6 × 750 = ₹4500।
आम गलतियाँ
- n − 1 की जगह n लगाना: 5वाँ पद a + 4d है, a + 5d नहीं।
- d उलटा निकालना: d = बाद वाला पद − पहले वाला पद। 10, 7, 4… में d = −3 है।
- aₙ और Sₙ में गड़बड़: "10वें महीने के पैसे" a₁₀ है; "10 महीनों में कुल" S₁₀ है।
- ऋणात्मक या भिन्न वाला n मान लेना। पदों की संख्या धनात्मक पूर्ण संख्या ही होती है।