Russia 9 класс Algebra (basic)
अध्याय: 4
1. Numbers and calculations
Real numbers · Approximations
- अपरिमेय संख्याएँ: √2, √3, वर्गमूल सर्पिल और वास्तविक संख्याएँ – अपरिमेय संख्या को p/q के रूप में नहीं लिख सकते। इसका दशमलव न कभी खत्म होता है, न दोहराता है, जैसे √2 = 1.41421356… या π। फिर भी √2 को संख्या रेखा पर ठीक-ठीक दिखा सकते हैं: यह 1 भुजा वाले वर्ग का विकर्ण है। √2 और √3 अपरिमेय हैं, यह हम मानकर सिद्ध करते हैं कि वे सरलतम भिन्न हैं और फिर विरोधाभास पाते हैं। वर्गमूल सर्पिल एक-एक समकोण त्रिभुज जोड़कर √2, √3, √4, √5 … बनाता है। परिमेय और अपरिमेय मिलकर वास्तविक संख्याएँ बनाते हैं; हर आवर्ती दशमलव को वापस p/q में बदल सकते हैं।
2. Equations and inequalities
Equations in one variable · Systems of equations · Inequalities
- द्विघात समीकरण – जिस समीकरण में x की सबसे बड़ी घात 2 हो, वह द्विघात समीकरण है: ax² + bx + c = 0, जहाँ a ≠ 0। इसके ज़्यादा से ज़्यादा दो मूल होते हैं। मूल निकालने के दो तरीक़े: गुणनखंड (मध्य पद को तोड़कर) या सूत्र x = (−b ± √(b² − 4ac)) / 2a। विविक्तकर D = b² − 4ac बताता है: D > 0 तो दो अलग वास्तविक मूल, D = 0 तो दो बराबर मूल, D < 0 तो कोई वास्तविक मूल नहीं।
- दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म – a₁x + b₁y = c₁ और a₂x + b₂y = c₂ जैसे दो समीकरण दो सीधी रेखाएँ बनाते हैं। जो (x, y) दोनों को सही करे, वह इन रेखाओं का मिलने का बिंदु है। रेखाएँ काटें तो एक हल, समांतर हों तो कोई हल नहीं, और एक-दूसरे पर पड़ी हों तो अनंत हल। हल ग्राफ से, प्रतिस्थापन से या विलोपन से निकालते हैं।
- द्विघात असमिकाएँ – द्विघात असमिका पूछती है कि ax² + bx + c कहाँ शून्य से ऊपर (> 0) या नीचे (< 0) है। मूल निकालें, परवलय की कल्पना करें और ग्राफ़ से उत्तर पढ़ें। a > 0 हो तो वक्र मूलों के बीच शून्य से नीचे और बाहर शून्य से ऊपर होता है। वास्तविक मूल न हों (D < 0) तो वक्र हमेशा x-अक्ष के एक ही ओर रहता है।
3. Functions
Quadratic function · Graphs of basic functions
- द्विघात फलन और उनके ग्राफ़ – द्विघात फलन (quadratic function) y = ax² + bx + c है, जहाँ a ≠ 0। इसका ग्राफ़ U-आकार का वक्र होता है जिसे परवलय (parabola) कहते हैं। a > 0 हो तो वक्र ऊपर खुलता है और उसका एक सबसे निचला बिंदु होता है; a < 0 हो तो नीचे खुलता है और सबसे ऊँचा बिंदु होता है। यह मोड़ बिंदु शीर्ष (vertex) है, x = −b/2a पर। शीर्ष रूप y = a(x − h)² + k में शीर्ष (h, k) है।
- मूल फलनों के ग्राफ़ और ग्राफ़ से समीकरण हल करना – ग्राफ़ वे सारे बिंदु (x, y) दिखाता है जिनमें y = f(x)। पाँच आकार बार-बार आते हैं: परवलय y = x², घन वक्र y = x³, आधा परवलय y = √x, V आकार y = |x| और अतिपरवलय y = k/x। हर एक का प्रांत, परिसर, सममिति, कहाँ बढ़ता-घटता है और अक्षों को कहाँ काटता है, यह सीखो। फिर ग्राफ़ से समीकरण (जहाँ ग्राफ़ कटें) और असमिका (जहाँ एक ग्राफ़ दूसरे से ऊपर हो) हल करो।
4. Sequences and progressions
Sequences · Arithmetic and geometric progressions
- अनुक्रम और श्रेढ़ियाँ – अनुक्रम संख्याओं की ऐसी सूची है जिसका क्रम तय है। इसका नियम दो तरह से लिखते हैं: पुनरावर्ती (पिछले पद से अगला पद) या स्पष्ट (n-वें पद का सीधा सूत्र)। समांतर श्रेढ़ी (AP) में हर बार वही संख्या जुड़ती है। गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP) में हर बार उसी संख्या से गुणा होता है। फ्रैक्टल और हनोई की मीनार में भी यही नियम छिपे हैं।
- समांतर श्रेढ़ी – समांतर श्रेढ़ी (AP) संख्याओं की ऐसी सूची है जिसमें हर अगला पद पिछले पद में एक ही निश्चित संख्या d (सार्व अंतर) जोड़कर बनता है। पहला पद a हो तो n-वाँ पद aₙ = a + (n − 1)d और पहले n पदों का योग Sₙ = n/2 [2a + (n − 1)d] = n/2 (a + l), जहाँ l अंतिम पद है।