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पृथ्वी का आकार और माप

पृथ्वी थोड़ी चपटी गेंद जैसी है, इसकी त्रिज्या लगभग 6,371 km है। एराटोस्थनीज़ ने दो शहरों में छाया का कोण देखकर इसका आकार निकाला: परिधि = शहरों की दूरी × 360 ÷ कोण। सर्वेक्षक त्रिभुजन का उपयोग करते हैं, और अक्षांश-देशांतर से गोले पर दूरी निकलती है (1 अंश अक्षांश लगभग 111 km)।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह पृथ्वी है। दो शहरों, सीन (Syene) और अलेक्ज़ैंड्रिया में दो सीधी छड़ें खड़ी हैं।
  2. सूरज बहुत दूर है। उसकी किरणें हम तक एक-दूसरे के बराबर, यानी समानांतर आती हैं।
  3. सीन में सूरज ठीक सिर के ऊपर है। छड़ की छाया नहीं बनती।
  4. उसी समय अलेक्ज़ैंड्रिया में छड़ की छाया बनती है। कोण लगभग 7.2 अंश है।
  5. दोनों छड़ें पृथ्वी के केंद्र की ओर जाती हैं। इसलिए केंद्र पर भी वही 7.2 अंश का कोण बनता है।
  6. अब खुद करिए: शहरों की दूरी बदलिए। कोण बदलेगा, पर पृथ्वी का आकार वही रहेगा, लगभग 40,000 km।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

दोनों छड़ों की छाया एक ही समय क्यों नहीं बनती?

पृथ्वी मुड़ी हुई है। एक छड़ किरणों के बराबर है, दूसरी किरणों से हटकर झुकी है। 3D में देखिए कि दोनों छड़ें अलग दिशाओं में खड़ी हैं।

हम सूरज की किरणों को समानांतर क्यों मान लेते हैं?

सूरज लगभग 15 करोड़ km दूर है और उसके सामने पृथ्वी बहुत छोटी है। इसलिए दोनों शहरों पर आने वाली किरणें लगभग बराबर-बराबर हैं।

छाया का कोण केंद्र के कोण के बराबर क्यों है?

दोनों छड़ें केंद्र की ओर जाती हैं। किरणें समानांतर हैं, इसलिए दूसरी छड़ पर छाया का कोण केंद्र के कोण के बराबर होता है (एकांतर कोण)।

शहर दूर हों या पास, क्या उत्तर बदलता है?

नहीं। दूरी बड़ी तो कोण भी बड़ा, पर दूरी × 360 ÷ कोण लगभग 40,000 km ही रहता है। स्लाइडर चलाकर जाँचिए।

दोनों शहर उत्तर-दक्षिण में ही क्यों होने चाहिए?

तब कोण सिर्फ उत्तर-दक्षिण दिशा के मुड़ाव से बनता है, यानी याम्योत्तर के चाप से। सूत्र में यही चाप लगता है।

क्या पृथ्वी गोल है? आसान प्रमाण

बहुत पहले से लोगों को संकेत मिल गए थे कि पृथ्वी गेंद जैसी गोल है।

पृथ्वी पूरी तरह गेंद नहीं है। घूमने के कारण यह भूमध्य रेखा पर थोड़ी उभरी है। इसकी त्रिज्या लगभग 6,371 km और परिधि लगभग 40,000 km है। इस आकार को चपटा गोलाभ (oblate sphere) कहते हैं।

एराटोस्थनीज़ ने पृथ्वी को कैसे नापा

लगभग 2,200 साल पहले यूनानी विद्वान एराटोस्थनीज़ ने सुना कि सीन (Syene) शहर में दोपहर को सूरज गहरे कुएँ की तली तक चमकता है, यानी सूरज ठीक सिर के ऊपर होता है। उसी दिन उत्तर में दूर अलेक्ज़ैंड्रिया में खड़ी छड़ की छाया बनती थी।

उसने छाया का कोण नापा: लगभग 7.2 अंश। यह पूरे वृत्त (360 अंश) का 1/50 भाग है। यानी अलेक्ज़ैंड्रिया, सीन से पृथ्वी का 1/50 भाग आगे है।

दोनों शहरों के बीच दूरी लगभग 800 km है। इसलिए:

परिधि = 800 km × 50 = 40,000 km।

यह क्यों चलता है? सूरज इतना दूर है कि उसकी किरणें समानांतर हैं। दोनों सीधी छड़ें पृथ्वी के केंद्र की ओर जाती हैं। केंद्र पर बना कोण, छाया के कोण के बराबर होता है (समानांतर रेखाओं के एकांतर कोणों की तरह)।

त्रिभुजन और याम्योत्तर की लंबाई

बाद में सर्वेक्षकों को और अच्छा तरीका चाहिए था। याम्योत्तर (meridian) उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक की काल्पनिक रेखा है। इसकी लंबाई नापने के लिए त्रिभुजन (triangulation) का उपयोग हुआ।

  1. एक सीधी, समतल दूरी बहुत सावधानी से नापें। यह आधार-रेखा (baseline) है।
  2. दोनों सिरों से दूर के निशान (पहाड़ी पर मीनार) तक के कोण नापें।
  3. कोण और आधार-रेखा से त्रिकोणमिति द्वारा त्रिभुज की बाकी भुजाएँ निकालें।
  4. नई भुजा को अगले त्रिभुज की आधार-रेखा बनाएँ। इस तरह त्रिभुजों की श्रृंखला बनती है।

फ्रांस में 1790 के दशक में याम्योत्तर इसी तरह नापी गई। भारत में महान त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण (Great Trigonometrical Survey) ने दक्षिण से उत्तर तक लंबा चाप नापा। लंबे चाप और दोनों सिरों के अक्षांश से पृथ्वी का आकार निकलता है। कोण नापना आसान है, लंबी दूरी नापना कठिन; त्रिभुजन में सिर्फ एक आधार-रेखा चाहिए।

अक्षांश और देशांतर

अक्षांश (latitude) बताता है कि कोई जगह भूमध्य रेखा से कितनी उत्तर या दक्षिण है (0 से 90 अंश)। देशांतर (longitude) बताता है कि वह प्रधान याम्योत्तर से कितनी पूर्व या पश्चिम है (0 से 180 अंश)। दोनों मिलकर किसी भी जगह का पता बनाते हैं। पूरी जानकारी पाठ अक्षांश और देशांतर में है।

अक्षांश की रेखाएँ समानांतर वृत्त हैं। देशांतर की रेखाएँ अर्धवृत्त हैं जो ध्रुवों पर मिलती हैं।

गोले पर दूरी

सपाट नक्शे की सीधी रेखा गेंद पर सबसे छोटा रास्ता नहीं होती। गोले पर सबसे छोटा रास्ता बृहत् वृत्त (great circle) का चाप है, यानी वह वृत्त जो पृथ्वी को दो बराबर हिस्सों में बाँटे (भूमध्य रेखा और सभी याम्योत्तर)। हवाई जहाज़ इसी रास्ते पर उड़ते हैं।

चाप की लंबाई = त्रिज्या × कोण (रेडियन में), या दूरी = (कोण ÷ 360) × 40,000 km।

खुद करके देखिए: छड़ से सूरज का कोण

दोपहर में समतल ज़मीन पर एक सीधी छड़ खड़ी करें। छाया का सिरा निशान लगाएँ और छड़ व छाया की लंबाई नापें। कागज़ पर त्रिभुज बनाकर चाँदे से छाया का कोण निकालें। कम से कम 300 km उत्तर या दक्षिण में रहने वाला दोस्त उसी मिनट यही करे। दोनों कोणों का अंतर और आपकी दूरी ऊपर के सूत्र में डालकर परिधि निकलेगी। 3D में भी देखिए: दूरी का स्लाइडर चलाइए और देखिए कि उत्तर 40,000 km के आसपास ही रहता है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. दो शहर 800 km दूर हैं। एक ही समय छाया के कोणों का अंतर 7.2 अंश है। पृथ्वी की परिधि निकालिए।

7.2 ÷ 360 = 1/50 वृत्त। परिधि = 800 × 50 = 40,000 km।

2. पृथ्वी की परिधि 40,000 km है। इसकी त्रिज्या निकालिए।

R = C ÷ (2π) = 40,000 ÷ 6.28 = लगभग 6,370 km।

3. एक ही याम्योत्तर पर दो जगहों के अक्षांश में 5 अंश का अंतर है। उनके बीच दूरी कितनी है?

1 अंश ≈ 111 km। दूरी = 5 × 111 = 555 km।

4. दो शहर 1,100 km दूर हैं और छाया के कोणों में 10 अंश का अंतर है। परिधि कितनी आती है?

परिधि = 1,100 × 360 ÷ 10 = 39,600 km।

5. एक सर्वेक्षक की आधार-रेखा AB = 10 km है। A पर मीनार C तक का कोण 90° और B पर 45° है। AC निकालिए।

त्रिभुज के कोण 90, 45 और इसलिए C पर 45। तो AC = AB = 10 km।

6. 60° उत्तर पर 1 अंश देशांतर कितना लंबा है?

लंबाई = 111 × cos 60 = 111 × 0.5 = लगभग 55.5 km।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. एराटोस्थनीज़ ने क्या उपयोग किया?
2. 7.2 अंश का कोण पूरे वृत्त का कौन-सा भाग है?
3. 1 अंश अक्षांश लगभग कितना लंबा होता है?
4. पृथ्वी पर दो जगहों के बीच सबसे छोटा रास्ता किसका चाप है?
5. त्रिभुजन में सबसे पहले सावधानी से क्या नापते हैं?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एराटोस्थनीज़ ने पृथ्वी की परिधि कैसे मापी?

उसने दो शहरों में दोपहर की छाया के कोण की तुलना की। कोण 7.2 अंश यानी वृत्त का 1/50 था, इसलिए पृथ्वी शहरों की दूरी की 50 गुना है, लगभग 40,000 km।

पृथ्वी की परिधि कितनी है?

भूमध्य रेखा पर लगभग 40,075 km और ध्रुवों से होकर लगभग 40,008 km। त्रिज्या लगभग 6,371 km है।

क्या पृथ्वी पूरी तरह गोल है?

नहीं। घूमने से यह भूमध्य रेखा पर थोड़ी उभरी है, यानी थोड़ी चपटी गेंद है। स्कूल के ज़्यादातर सवालों में इसे गोला मान लेते हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

फ्रांसPremièreEarth, a singular planet

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