सूर्य की ऊर्जा कहाँ से आती है
सूर्य गरम गैस का एक विशाल गोला है, ज़्यादातर हाइड्रोजन। इसके केंद्र (क्रोड) में ताप लगभग 1.5 करोड़ K है। वहाँ हाइड्रोजन के नाभिक इतनी ज़ोर से टकराते हैं कि जुड़कर हीलियम बन जाते हैं। इसे नाभिकीय संलयन कहते हैं।
बनी हीलियम का द्रव्यमान लगी हाइड्रोजन से थोड़ा कम होता है। यह खोया द्रव्यमान ऊर्जा बन जाता है: E = mc² (c = 3 × 10⁸ m/s)। c² बहुत बड़ा है, इसलिए छोटा-सा द्रव्यमान भी विशाल ऊर्जा देता है। सूर्य हर सेकंड लगभग 40 लाख टन द्रव्यमान को ऊर्जा में बदलता है।
यह ऊर्जा धीरे-धीरे बाहर आकर सतह से विद्युतचुंबकीय विकिरण के रूप में निकलती है: दृश्य प्रकाश, अवरक्त (ऊष्मा) और कुछ पराबैंगनी। हमारी लगभग सारी ऊर्जा, भोजन, हवा, वर्षा और जीवाश्म ईंधन तक, धूप से ही शुरू हुई।
सूर्य का विकिरण: वीन नियम और स्टीफ़न नियम
हर गरम वस्तु चमकती है। उसका रंग और चमक ताप पर निर्भर है।
वीन का नियम: रंग से ताप
वस्तु जिस तरंगदैर्ध्य पर सबसे ज़्यादा चमकती है, वह गरम होने पर छोटी होती जाती है: λmax × T = 2.9 × 10⁻³ m·K। सूर्य की सतह (T ≈ 5800 K) लगभग 500 nm पर, यानी दृश्य प्रकाश में, सबसे चमकीली है। 900 K का हीटर अवरक्त में चरम पर है, इसलिए हल्का लाल दिखता है। नीला तारा लाल तारे से ज़्यादा गरम है।
स्टीफ़न का नियम: ज़्यादा गरम = कहीं ज़्यादा चमक
सतह के हर वर्ग मीटर से निकली शक्ति P/A = σT⁴, जहाँ σ = 5.67 × 10⁻⁸ W m⁻² K⁻⁴। ताप दुगना करने पर शक्ति 2⁴ = 16 गुना हो जाती है।
पृथ्वी तक कितनी शक्ति पहुँचती है? अक्षांश और ऋतुएँ
सूर्य की शक्ति बढ़ते गोले पर फैलती जाती है। पृथ्वी की दूरी (15 करोड़ km) पर, वायुमंडल के ठीक बाहर सूर्य की ओर मुँह किए 1 m² को लगभग 1361 W मिलता है। यही सौर नियतांक है।
- वायुमंडल कुछ हिस्सा लौटाता और सोखता है, इसलिए साफ़ दिन में दोपहर को ज़मीन पर लगभग 1000 W/m² पहुँचता है।
- घूमती पृथ्वी पर दिन-रात का औसत लें तो वायुमंडल के ऊपर लगभग 340 W/m² (1361 ÷ 4, क्योंकि गोले का क्षेत्रफल उसकी छाया-चकती का 4 गुना है)।
- लगभग 30% सीधा लौट जाता है (ऐल्बिडो); बाकी ज़मीन, समुद्र और हवा को गरम करता है।
ध्रुव ठंडे क्यों हैं
भूमध्य रेखा के पास सूर्य ऊँचा होता है और किरणें लगभग सीधी पड़ती हैं। ध्रुवों के पास वही किरण-पुंज तिरछा पड़कर बड़े क्षेत्र में फैलता है, इसलिए हर वर्ग मीटर को कम मिलता है: ज़मीन पर तीव्रता ≈ तीव्रता × sin(सूर्य की ऊँचाई)। तिरछी किरणें ज़्यादा हवा भी पार करती हैं।
ऋतुएँ
पृथ्वी का अक्ष लगभग 23.5° झुका है। जून में उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर झुका होता है: सूर्य ऊँचा, दिन लंबे, तो वहाँ गर्मी और दक्षिण में सर्दी। छह महीने बाद उल्टा। ऋतुएँ झुकाव से होती हैं, पृथ्वी के सूर्य के पास आने से नहीं।
सौर सेल (फ़ोटोवोल्टिक) और सौर ताप
सौर सेल सिलिकॉन की पतली परत है जिसमें दो परतें (p–n संधि) होती हैं। प्रकाश इलेक्ट्रॉनों को छूटने लायक ऊर्जा देता है और संधि उन्हें एक दिशा में धकेलती है, तो धारा बहती है। कई सेल जोड़कर पैनल बनता है।
शक्ति: P = प्रकाश की तीव्रता (W/m²) × क्षेत्रफल (m²) × दक्षता (η) × cos(सूर्य से झुकाव का कोण)। आम पैनलों की η ≈ 15–22%।
I–V वक्र
सेल को परिवर्ती प्रतिरोध, ऐमीटर और वोल्टमीटर से जोड़ें, और कई भारों पर धारा I और वोल्टता V मापें। ग्राफ़ पहले सपाट रहता है (धारा लगभग स्थिर: लघुपथ धारा), फिर खुले परिपथ की वोल्टता (एक सिलिकॉन सेल के लिए लगभग 0.6 V) के पास तेज़ी से गिरता है। शक्ति P = V × I वक्र के "घुटने" पर सबसे ज़्यादा है: अधिकतम शक्ति बिंदु (MPP)।
प्रकाश बढ़ाने पर धारा लगभग उसी अनुपात में बढ़ती है, इसलिए शक्ति प्रकाश की तीव्रता के साथ लगभग बराबर बढ़ती है; वोल्टता थोड़ी ही बदलती है। गर्मी वोल्टता घटाती है, इसलिए गरम पैनल थोड़ा कम काम करते हैं।
पैनल से घर तक
पैनल दिष्ट धारा (DC) देते हैं। इन्वर्टर उसे घर या ग्रिड के लिए प्रत्यावर्ती धारा (AC) में बदलता है। आधुनिक इन्वर्टर MPP ट्रैकिंग करते हैं: भार को लगातार बदलते रहते हैं ताकि पैनल हमेशा अधिकतम शक्ति बिंदु पर चले। बैटरी रात के लिए ऊर्जा रखती है।
सौर ताप
सौर जल तापक में काँच के नीचे काली नलियाँ या प्लेटें होती हैं (काला सबसे अच्छा सोखता है, काँच ऊष्मा रोकता है)। सौर कुकर और बड़े सौर-तापीय संयंत्र दर्पणों से धूप एक जगह केंद्रित करते हैं।
लाभ और सीमाएँ
सौर ऊर्जा नवीकरणीय है, लगने के बाद मुफ़्त है और धुआँ नहीं करती। पर रात में काम नहीं करती, बादलों में कम देती है, और बहुत जगह व भंडारण चाहती है।
खुद आज़माएँ: हाथ से धूप मापें
खाने वाले (ग्राफ़) कागज़ पर टॉर्च सीधी नीचे रखें और गिनें कि कितने खाने रोशन हैं। अब टॉर्च तिरछी करें: वही प्रकाश ज़्यादा खानों में फैलता है, तो हर खाने को कम मिलता है। इसी कारण सर्दी की धूप कमज़ोर है और पैनल सूर्य की ओर झुकाए जाते हैं। सौर कैलकुलेटर या खिलौना हो तो उसके सेल का आधा भाग ढकें और देखें कि वह धीमा हो जाता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- E = mc²
- वीन: λmax × T = 2.9 × 10⁻³ m·K
- स्टीफ़न: P/A = σT⁴, σ = 5.67 × 10⁻⁸ W m⁻² K⁻⁴
- सौर नियतांक ≈ 1361 W/m²; ज़मीन पर ≈ 1000 W/m²
- पैनल की शक्ति P = I × A × η × cos θ
- विद्युत शक्ति P = V × I
हल किए गए उदाहरण
1. 1.5 m² का 20% दक्ष पैनल 1000 W/m² धूप में सूर्य की ओर है। शक्ति निकालें।
P = 1000 × 1.5 × 0.20 = 300 W।
2. वही पैनल सूर्य से 60° दूर झुका दिया। अब शक्ति?
cos 60° = 0.5, तो P = 300 × 0.5 = 150 W।
3. एक घर रोज़ 6 kWh खर्च करता है। पैनल 5 धूप वाले घंटों में औसत 1.2 kW देते हैं। क्या काफ़ी है?
ऊर्जा = 1.2 kW × 5 h = 6 kWh। हाँ, धूप वाले दिन बस पूरा।
4. वीन नियम से सूर्य (T = 5800 K) की चरम तरंगदैर्ध्य निकालें।
λ = 2.9 × 10⁻³ ÷ 5800 = 5 × 10⁻⁷ m = 500 nm (हरा-नीला दृश्य प्रकाश)।
5. एक तारे की सतह का ताप सूर्य का दुगना है। हर m² से कितनी गुना शक्ति निकलेगी?
P/A ∝ T⁴, तो 2⁴ = 16 गुना।
6. I–V परीक्षण में सेल के बिंदु: (0.40 V, 2.8 A), (0.48 V, 2.5 A), (0.55 V, 1.5 A)। कौन-सा MPP के सबसे पास है?
P = 1.12 W, 1.20 W और 0.83 W। बीच वाला बिंदु (0.48 V, 2.5 A) सबसे ज़्यादा शक्ति देता है।
आम गलतियाँ
- कहना कि सूर्य आग की तरह "जलता" है। वह ऑक्सीजन से ईंधन नहीं जलाता; नाभिक जोड़ता है।
- सोचना कि गर्मी इसलिए आती है कि पृथ्वी सूर्य के पास आ जाती है। ऋतुएँ 23.5° के झुकाव से हैं।
- दक्षता भूल जाना: 1000 W/m² में 2 m² पैनल 2000 W नहीं देता; 20% पर 400 W देता है।
- ज़मीन पर रखे पैनल के लिए सौर नियतांक (1361 W/m²) लेना; लगभग 1000 W/m² या कम लें।