रोगाणु और संक्रामक रोग
रोगजनक वह रोगाणु है जो रोग करता है। मुख्य चार प्रकार: बैक्टीरिया (एक कोशिका वाले, जैसे टीबी, टाइफ़ाइड), वायरस (बहुत छोटे, हमारी कोशिकाओं के अंदर रहते हैं, जैसे फ़्लू, खसरा, कोविड-19), कवक (जैसे दाद) और परजीवी (जैसे मलेरिया परजीवी, कृमि)।
रोगाणु हवा (खाँसी), पानी-भोजन, छूने, शरीर के द्रवों और मच्छर जैसे जीवों से फैलते हैं। संक्रामक रोग फैलता है; असंक्रामक रोग (मधुमेह) नहीं फैलता।
पहली पंक्ति: अवरोध
- त्वचा: मज़बूत, सूखी दीवार। कटने पर दरवाज़ा खुल जाता है।
- नाक और श्वास नली का श्लेष्मा और छोटे बाल रोगाणु फँसाते हैं; हम उन्हें खाँसकर या छींककर बाहर करते हैं।
- आँसू और लार में एक एंजाइम होता है जो रोगाणु तोड़ता है।
- पेट का अम्ल भोजन के ज़्यादातर रोगाणु मार देता है।
- खून का थक्का घाव जल्दी बंद करता है।
दूसरी पंक्ति: सहज (अविशिष्ट) प्रतिरक्षा
यह जन्म से होती है और हर रोगाणु पर एक जैसा हमला करती है। यह तेज़ है (मिनट से घंटे)।
- सूजन (शोथ): चोट की जगह लाल, गरम, सूजी और दर्द वाली होती है क्योंकि वहाँ ज़्यादा खून आता है और श्वेत रक्त कोशिकाएँ लाता है।
- भक्षक कोशिकाएँ रोगाणु निगलकर पचा लेती हैं। इसे भक्षकाणु क्रिया (फ़ैगोसाइटोसिस) कहते हैं।
- बुखार: शरीर का ज़्यादा तापमान कई रोगाणुओं को धीमा करता है।
तीसरी पंक्ति: उपार्जित (विशिष्ट) प्रतिरक्षा
लसीकाणु (लिम्फ़ोसाइट) अस्थि मज्जा में बनते हैं और थाइमस व लसीका ग्रंथियों में तैयार होते हैं। वे रोगाणु की सतह के प्रतिजन (एंटीजन) को पहचानते हैं।
- B कोशिकाएँ एंटीबॉडी (प्रतिरक्षी) बनाती हैं: Y आकार के प्रोटीन जिनके सिरे सिर्फ़ एक एंटीजन पर फ़िट होते हैं। ये रोगाणुओं को चिपकाते, वायरस को रोकते और भक्षक कोशिकाओं के लिए निशान लगाते हैं। यह तरल (ह्यूमोरल) प्रतिरक्षा है।
- T कोशिकाएँ: सहायक T कोशिकाएँ हमले का निर्देश देती हैं; मारक T कोशिकाएँ वायरस से संक्रमित हमारी अपनी कोशिकाएँ नष्ट करती हैं। यह कोशिका-माध्यित प्रतिरक्षा है।
लसीका तंत्र (लसीका, लसीका ग्रंथियाँ, तिल्ली) इन कोशिकाओं को ले जाता और रखता है। ज़ुकाम में गले की सूजी "गिल्टियाँ" व्यस्त लसीका ग्रंथियाँ हैं।
स्मृति, टीके और प्रतिरक्षा के प्रकार
संक्रमण के बाद कुछ लसीकाणु स्मृति कोशिकाएँ बन जाते हैं। वही रोगाणु दोबारा आए तो जवाब तेज़ और मज़बूत होता है।
टीके में मृत या कमज़ोर रोगाणु, या उसका कोई हानिरहित हिस्सा (या mRNA टीकों में उसे बनाने का निर्देश) होता है। यह बिना बीमारी के स्मृति बनाता है। जब ज़्यादातर लोग टीका लगवा लेते हैं तो रोगाणु आसानी से नहीं फैलता और बिना टीके वाले शिशु भी बचते हैं: सामूहिक (हर्ड) प्रतिरक्षा। भारत का सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम और पोलियो अभियान इसके उदाहरण हैं।
| सक्रिय | निष्क्रिय | |
|---|---|---|
| क्या | शरीर ख़ुद एंटीबॉडी बनाता है | बनी-बनाई एंटीबॉडी दी जाती है |
| उदाहरण | संक्रमण, टीका | माँ का दूध, साँप-विष रोधी इंजेक्शन |
| अवधि | लंबी (स्मृति) | छोटी (कुछ हफ़्ते) |
एंटीबायोटिक बैक्टीरिया मारती हैं, वायरस पर काम नहीं करतीं। ज़्यादा इस्तेमाल से प्रतिरोधी बैक्टीरिया बनते हैं।
जब प्रतिरक्षा गड़बड़ाती है
- एलर्जी: शरीर किसी हानिरहित चीज़ (परागकण, धूल, मूँगफली) पर ज़रूरत से ज़्यादा प्रतिक्रिया करता है। गंभीर एलर्जी (एनाफ़िलैक्सिस) आपात स्थिति है।
- स्व-प्रतिरक्षी रोग: प्रतिरक्षा तंत्र शरीर की अपनी कोशिकाओं पर हमला करता है (टाइप 1 मधुमेह, रूमेटॉइड आर्थराइटिस)।
- प्रतिरक्षा की कमी: तंत्र कमज़ोर होता है। HIV सहायक T कोशिकाएँ नष्ट करता है, जिससे एड्स होता है और आम रोगाणु भी ख़तरनाक बन जाते हैं।
अच्छा भोजन, नींद, व्यायाम, सफ़ाई और टीके प्रतिरक्षा तंत्र को मज़बूत रखते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- रोगजनक = रोग करने वाला रोगाणु (बैक्टीरिया, वायरस, कवक, परजीवी)
- एंटीजन = रोगाणु पर निशान; एंटीबॉडी = Y आकार का प्रोटीन जो उस पर फ़िट होता है
- सहज = तेज़, सामान्य; उपार्जित = पहली बार धीमी, विशिष्ट, स्मृति वाली
- टीका → स्मृति कोशिकाएँ → दूसरी बार तेज़ जवाब
- सक्रिय प्रतिरक्षा (अपनी एंटीबॉडी) बनाम निष्क्रिय प्रतिरक्षा (दी गई एंटीबॉडी)
हल किए गए उदाहरण
1. एक बच्ची का घुटना छिल गया। शाम तक वह लाल, गरम और सूजा है। समझाइए।
यह सूजन (दूसरी पंक्ति) है। रक्त वाहिकाएँ चौड़ी होती हैं, ज़्यादा खून आता है (लाल, गरम), द्रव रिसता है (सूजन), और भक्षक कोशिकाएँ कटी त्वचा से घुसे रोगाणु खाने आती हैं (कटने पर पहली पंक्ति टूट गई थी)।
2. खसरा किसी को दोबारा क्यों नहीं होता?
पहले संक्रमण से खसरा एंटीजन के लिए स्मृति B और T कोशिकाएँ बन जाती हैं। दोबारा हमले पर वे तेज़ी से बढ़कर एक-दो दिन में एंटीबॉडी बना देती हैं, इसलिए बीमारी होने से पहले वायरस हट जाता है।
3. डॉक्टर ज़ुकाम के लिए एंटीबायोटिक नहीं देते। यह सही क्यों है?
ज़ुकाम वायरस से होता है। एंटीबायोटिक सिर्फ़ बैक्टीरिया पर काम करती हैं। बेवजह देने से बैक्टीरिया प्रतिरोधी बनते हैं।
4. साँप के काटने पर टीका नहीं, विष-रोधी दवा क्यों दी जाती है?
विष कुछ घंटों में असर करता है। टीके को स्मृति बनाने में दिन-हफ़्ते लगते हैं। विष-रोधी दवा तुरंत बनी-बनाई एंटीबॉडी देती है: निष्क्रिय प्रतिरक्षा।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि एंटीबायोटिक फ़्लू या ज़ुकाम जैसे वायरस रोग ठीक करती हैं। वे सिर्फ़ बैक्टीरिया पर असर करती हैं।
- एंटीजन और एंटीबॉडी में गड़बड़। एंटीजन रोगाणु पर होता है; एंटीबॉडी हमारी B कोशिकाएँ बनाती हैं।
- यह सोचना कि भक्षक कोशिकाएँ विशिष्ट हैं। वे हर रोगाणु खाती हैं; सिर्फ़ B और T कोशिकाएँ विशिष्ट हैं।
- यह सोचना कि टीका पहले से हुई बीमारी ठीक करता है। वह पहले से स्मृति बनाकर बीमारी रोकता है।