Poland Liceum ogólnokształcące, klasa I Biology
अध्याय: 4
1. I. Chemistry of life
Inorganic components · Organic components
- जैव अणु – कोशिका में ज़्यादातर पानी है, और कार्बन यौगिकों के चार बड़े परिवार: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड और न्यूक्लिक अम्ल। ऊतक को अम्ल में पीसने से छोटे अणु (अम्ल-विलेय भाग) बड़े अणुओं – प्रोटीन, पॉलीसैकेराइड, न्यूक्लिक अम्ल (अम्ल-अविलेय भाग) – से अलग हो जाते हैं। प्रोटीन अमीनो अम्लों की शृंखलाएँ हैं जो चार स्तरों में मुड़ती हैं। पॉलीसैकेराइड शर्करा की शृंखलाएँ हैं; लिपिड ग्लिसरॉल पर वसा अम्ल; न्यूक्लिक अम्ल न्यूक्लियोटाइड की शृंखलाएँ। एंज़ाइम प्रोटीन उत्प्रेरक हैं जो सक्रिय स्थल पर क्रियाधार पकड़ते हैं, सक्रियण ऊर्जा घटाते हैं, और तापमान, pH, क्रियाधार मात्रा व संदमकों से प्रभावित होते हैं।
2. II. The cell
Eukaryotic cell and membrane
- कोशिका: जीवन की मूल इकाई – हर सजीव कोशिकाओं से बना है। 1665 में रॉबर्ट हुक ने कॉर्क में सबसे पहले कोशिकाएँ देखीं। कोशिकाएँ प्रोकैरियोटी (असली केंद्रक नहीं, जैसे जीवाणु) या यूकैरियोटी (असली केंद्रक) होती हैं। पादप कोशिका में कोशिका भित्ति, हरितलवक और बड़ी रिक्तिका होती है, जंतु कोशिका में नहीं। हर कोशिकांग का एक काम है। पानी परासरण से कोशिका में आता-जाता है। नई कोशिकाएँ समसूत्री (वृद्धि) और अर्धसूत्री (जनन कोशिकाएँ) विभाजन से बनती हैं।
3. III. Energy and metabolism
Metabolism and ATP · Enzymes · Cellular respiration
- उपापचय: कोशिका कैसे तोड़ती, बनाती और ऊर्जा चलाती है – उपापचय (metabolism) शरीर के अंदर होने वाली सभी रासायनिक क्रियाओं का नाम है. बड़े अणुओं को छोटे टुकड़ों में तोड़ना अपचय (catabolism) है; इसमें ऊर्जा निकलती है. छोटे अणुओं को जोड़कर बड़ा बनाना उपचय (anabolism) है; इसमें ऊर्जा लगती है. ATP इन दोनों के बीच ऊर्जा ले जाता है, जैसे रिचार्ज होने वाली बैटरी. हर क्रिया का अपना एंज़ाइम होता है और क्रियाएँ जुड़कर उपापचयी पथ बनाती हैं.
- एंजाइम (Enzymes) – एंजाइम प्रोटीन होते हैं जो जैव उत्प्रेरक (biological catalyst) का काम करते हैं: ये कोशिका की क्रियाओं को तेज़ करते हैं और ख़ुद ख़र्च नहीं होते। हर एंजाइम का एक सक्रिय स्थल (active site) होता है जिसमें सिर्फ़ एक तरह का सब्सट्रेट फिट होता है (विशिष्टता)। एंजाइम सक्रियण ऊर्जा घटाकर काम करते हैं। ये एक इष्टतम तापमान और pH पर सबसे अच्छा काम करते हैं; ज़्यादा गर्मी या ग़लत pH से इनका आकार बिगड़ जाता है (विकृतीकरण)।
- श्वसन: वायवीय, अवायवीय और मानव फेफड़े – श्वसन वह प्रक्रम है जिसमें कोशिका के अंदर भोजन (ज़्यादातर ग्लूकोज) टूटकर ऊर्जा देता है, जो ATP में जमा होती है। ऑक्सीजन के साथ (वायवीय) ग्लूकोज पूरा टूटकर CO₂ और जल बनता है और बहुत ऊर्जा मिलती है; ऑक्सीजन के बिना (अवायवीय) थोड़ी ऊर्जा मिलती है और एथेनॉल (यीस्ट) या लैक्टिक अम्ल (पेशी) बनता है। फेफड़ों की लाखों कूपिकाएँ रक्त तक ऑक्सीजन पहुँचाती हैं।
4. IV. Cell division
Cell cycle, mitosis and meiosis
- कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन – कोशिका एक तय क्रम में बढ़ती है, DNA दोहराती है और बँटती है – इसे कोशिका चक्र कहते हैं: अंतरावस्था (G1, S, G2) और M प्रावस्था। S प्रावस्था में DNA दोगुना (2C → 4C) होता है, पर गुणसूत्र संख्या वही रहती है। समसूत्री विभाजन (पूर्वावस्था, मध्यावस्था, पश्चावस्था, अंत्यावस्था) और कोशिकाद्रव्य विभाजन से जनक जैसी दो कोशिकाएँ बनती हैं – यह समीकरणीय विभाजन वृद्धि और मरम्मत के लिए है। अर्धसूत्री विभाजन में दो विभाजन होते हैं; अर्धसूत्री I में समजात गुणसूत्र जोड़ा बनाते हैं, जीन विनिमय करते हैं और अलग होते हैं, जिससे गुणसूत्र संख्या आधी (2n → n) होती है। इससे युग्मकों के लिए चार अगुणित कोशिकाएँ बनती हैं और विविधता आती है।