प्रकाश-संश्लेषण कहाँ होता है: स्थान
मुख्य स्थान पत्ती की मीज़ोफिल कोशिकाएँ हैं। हर कोशिका में कई क्लोरोप्लास्ट (हरितलवक) होते हैं। क्लोरोप्लास्ट के अंदर चपटी थैलियाँ होती हैं, जिन्हें थायलाकॉइड कहते हैं। इनके ढेर ग्रैना हैं। चारों ओर का द्रव स्ट्रोमा (पीठिका) है।
- थायलाकॉइड झिल्ली: प्रकाश अभिक्रिया (ATP, NADPH, O₂ बनते हैं)।
- स्ट्रोमा: केल्विन चक्र (शर्करा बनती है), यहीं एंजाइम हैं।
काम का यह बँटवारा क्लोरोप्लास्ट के अंदर श्रम-विभाजन है।
वर्णक: प्रकाश पकड़ने वाले
वर्णक (pigment) रंगीन पदार्थ है जो प्रकाश सोखता है। पत्ती में चार मुख्य वर्णक हैं:
- क्लोरोफिल a (चमकीला नीला-हरा): मुख्य वर्णक, अभिक्रिया केंद्र पर यही है।
- क्लोरोफिल b (पीला-हरा)।
- ज़ैंथोफिल (पीला) और कैरोटिनॉइड (पीला-नारंगी)।
बाकी तीन सहायक वर्णक हैं। ये दूसरे रंग पकड़ते हैं, ऊर्जा क्लोरोफिल a को देते हैं और उसे तेज़ प्रकाश से बचाते हैं।
अवशोषण और क्रिया स्पेक्ट्रम
अवशोषण स्पेक्ट्रम बताता है कि वर्णक हर रंग का कितना प्रकाश सोखता है। क्रिया स्पेक्ट्रम बताता है कि हर रंग में प्रकाश-संश्लेषण कितनी तेज़ी से होता है। दोनों में नीले और लाल पर चोटी होती है। हरा ज़्यादातर लौट जाता है, इसलिए पत्ती हरी दिखती है।
दो चरण: प्रकाश और जैवसंश्लेषी
- प्रकाश अभिक्रिया (प्रकाश-रासायनिक चरण): थायलाकॉइड में। प्रकाश पकड़ा जाता है, पानी टूटता है (प्रकाश-अपघटन), O₂ निकलती है, ATP और NADPH बनते हैं।
- जैवसंश्लेषी चरण (अंधकार अभिक्रिया / केल्विन चक्र): स्ट्रोमा में। यह प्रकाश को सीधे नहीं लेता, पर प्रकाश से बने ATP और NADPH पर चलता है। CO₂ शर्करा में बदलती है।
प्रकाश-संग्राही संकुल और फोटोसिस्टम
सैकड़ों वर्णक अणु एक एंटीना बनाते हैं। वे ऊर्जा अभिक्रिया केंद्र के एक ख़ास क्लोरोफिल a को भेजते हैं। PS I का केंद्र P700 है और PS II का P680। नाम खोज के क्रम से हैं, काम के क्रम से नहीं।
Z-योजना और अचक्रीय फोटोफॉस्फोरिलेशन
फोटोफॉस्फोरिलेशन यानी प्रकाश की मदद से ATP बनाना (ADP में फॉस्फेट जोड़ना)।
- PS II प्रकाश सोखता है। इलेक्ट्रॉन ऊँची ऊर्जा पर उछलता है और वाहकों को मिलता है।
- PS II खोया इलेक्ट्रॉन पानी तोड़कर वापस पाता है: 2H₂O → 4H⁺ + O₂ + 4e⁻। ऑक्सीजन यहीं से आती है।
- इलेक्ट्रॉन वाहकों (साइटोक्रोम b₆f) से होकर नीचे PS I तक आता है। रास्ते में ऊर्जा से H⁺ पंप होते हैं।
- PS I प्रकाश सोखता है, इलेक्ट्रॉन फिर ऊपर उछलता है और अंत में NADP⁺ को NADPH बनाता है।
ऊर्जा के पैमाने पर यह रास्ता लेटे हुए Z जैसा दिखता है। इलेक्ट्रॉन एक ही दिशा में जाते हैं, लौटते नहीं, इसलिए यह अचक्रीय है। उत्पाद: ATP, NADPH, O₂।
चक्रीय फोटोफॉस्फोरिलेशन
केवल PS I काम करता है। इलेक्ट्रॉन वाहकों से होकर फिर PS I पर लौट आता है। यह स्ट्रोमा लैमेली में होता है (वहाँ PS II और NADP रिडक्टेज़ नहीं हैं), और जब 680 nm से अधिक तरंगदैर्ध्य का प्रकाश मिलता है। उत्पाद: केवल ATP। न NADPH, न O₂।
रसायन-परासरण: ATP असल में कैसे बनता है
ATP थायलाकॉइड झिल्ली के आर-पार H⁺ (प्रोटॉन) के अंतर से बनता है। अंदर (ल्यूमेन) H⁺ बढ़ते हैं क्योंकि:
- पानी अंदर की ओर टूटता है और H⁺ छोड़ता है;
- एक वाहक H⁺ को बाहर से अंदर ले जाता है;
- NADP रिडक्टेज़ NADPH बनाने में स्ट्रोमा की ओर के H⁺ ले लेता है।
H⁺ खुद झिल्ली पार नहीं कर सकते। वे केवल ATP सिंथेज़ से बाहर बहते हैं। इस एंजाइम के दो भाग हैं: CF₀ (झिल्ली में नली) और CF₁ (स्ट्रोमा में घुंडी)। बहाव से CF₁ का आकार बदलता है और ADP + Pi जुड़कर ATP बनता है। जैसे बाँध का पानी टरबाइन घुमाता है।
केल्विन चक्र (C₃ चक्र)
वैज्ञानिकों ने रेडियोधर्मी कार्बन (¹⁴C) का पीछा किया और पाया कि पहला स्थिर उत्पाद 3 कार्बन वाला अम्ल 3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल (PGA) है। इसलिए ऐसे पौधे C₃ पौधे कहलाते हैं। चक्र के तीन चरण:
- कार्बोक्सिलन: CO₂ + RuBP (5C) → 2 PGA, एंजाइम RuBisCO से। यह पृथ्वी पर सबसे अधिक पाया जाने वाला प्रोटीन है।
- अपचयन: हर CO₂ पर 2 ATP और 2 NADPH से PGA शर्करा बनता है।
- पुनर्जनन: हर CO₂ पर 1 ATP से RuBP फिर बनता है, ताकि चक्र चलता रहे।
एक ग्लूकोज़ (6 C) के लिए चक्र 6 बार घूमता है: 6 CO₂, 18 ATP और 12 NADPH। ATP : NADPH = 3 : 2, इसलिए अतिरिक्त ATP चक्रीय फोटोफॉस्फोरिलेशन से आता है।
प्रकाश-श्वसन
RuBisCO, CO₂ और O₂ दोनों से जुड़ सकता है। जब CO₂ कम और O₂ अधिक हो (गर्म दिन, रंध्र बंद), तो वह O₂ से जुड़ता है। RuBP + O₂ से एक PGA और एक फॉस्फोग्लाइकोलेट बनता है। यह रास्ता क्लोरोप्लास्ट, परऑक्सीसोम और माइटोकॉन्ड्रिया से होकर CO₂ छोड़ता है और ATP खर्च करता है, पर न शर्करा बनती है, न ATP। यह पूरा नुकसान है।
C₄ पथ (हैच और स्लैक पथ)
C₄ पौधे (मक्का, गन्ना, ज्वार, चौलाई) गर्म, सूखी, तेज़ धूप वाली जगहों के लिए बने हैं। इनकी पत्तियों में क्रैंज़ शरीर-रचना होती है: हर शिरा के चारों ओर बड़ी बंडल आच्छद कोशिकाओं का घेरा, मोटी दीवार, बहुत से क्लोरोप्लास्ट और बीच में कोई खाली जगह नहीं।
- मीज़ोफिल में: PEP (3C) + CO₂ → ऑक्सैलोऐसीटिक अम्ल (OAA, 4C), PEP कार्बोक्सिलेज़ से। यह एंजाइम O₂ से नहीं जुड़ता। पहला स्थिर उत्पाद 4C, इसलिए C₄।
- OAA मैलिक या ऐस्पार्टिक अम्ल बनकर बंडल आच्छद में जाता है।
- वहाँ CO₂ छूटती है। CO₂ बहुत अधिक होने से RuBisCO केवल कार्बोक्सिलेज़ का काम करता है। केल्विन चक्र यहीं चलता है।
- बचा 3C अम्ल मीज़ोफिल लौटकर फिर PEP बनता है (ATP लगता है)।
C₃ और C₄ एक नज़र में
| लक्षण | C₃ | C₄ |
|---|---|---|
| पहला स्थिर उत्पाद | PGA (3C) | OAA (4C) |
| क्रैंज़ शरीर-रचना | नहीं | हाँ |
| प्रकाश-श्वसन | हाँ | लगभग नहीं |
| अनुकूल ताप | 20–25 °C | 30–40 °C |
| उदाहरण | गेहूँ, धान, आम | मक्का, गन्ना |
प्रभावित करने वाले कारक और सीमा कारक का नियम
दर बाहरी कारकों (प्रकाश, CO₂, ताप, पानी) और भीतरी कारकों (पत्तियों की संख्या व आयु, क्लोरोफिल, मीज़ोफिल कोशिकाएँ, पत्ती के अंदर CO₂) पर निर्भर है।
ब्लैकमैन का नियम (1905): जब कोई क्रिया कई कारकों पर निर्भर हो, तो उसकी दर वह कारक तय करता है जो अपने न्यूनतम के सबसे पास है। उसे बढ़ाओ तो दर बढ़ती है, जब तक कोई दूसरा कारक सीमा न बन जाए।
- प्रकाश: कम प्रकाश में दर प्रकाश के साथ बढ़ती है; तेज़ प्रकाश में दूसरे कारक रोकते हैं। बहुत तेज़ प्रकाश क्लोरोफिल को नुकसान कर सकता है।
- CO₂: हवा में केवल लगभग 0.04%, इसलिए अक्सर यही मुख्य सीमा है। C₃ पौधे अधिक CO₂ पर देर तक बढ़ते हैं; C₄ पौधे लगभग 360 µL/L पर संतृप्त हो जाते हैं।
- ताप: अंधकार अभिक्रिया के एंजाइमों को सही ताप चाहिए। C₄ पौधों को अधिक गर्मी पसंद है।
- पानी: कमी से रंध्र बंद (कम CO₂) और पत्ती मुरझाती है, इसलिए असर ज़्यादातर अप्रत्यक्ष है।
करके देखो: घर पर वर्णक और ऑक्सीजन
- वर्णकों की दौड़: पालक की पत्ती को थोड़े नेल-पॉलिश रिमूवर (ऐसीटोन) के साथ पीसो और सफ़ेद चॉक या फ़िल्टर पेपर पर एक बिंदु लगाओ। सिरा द्रव में डुबाओ। 15 मिनट बाद पट्टियाँ दिखेंगी: ऊपर पीली-नारंगी (कैरोटिनॉइड), फिर पीली, नीली-हरी (क्लोरोफिल a) और पीली-हरी (क्लोरोफिल b)।
- बुलबुले गिनो: पानी के पौधे (हाइड्रिला) को गिलास में लैंप के नीचे रखो। 20 cm और 60 cm दूरी पर प्रति मिनट बुलबुले गिनो। चुटकी भर बेकिंग सोडा (अधिक CO₂) डालकर फिर गिनो। पहले अनुमान लगाओ, फिर 3D के आख़िरी चरण से मिलाओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 6CO₂ + 12H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂ + 6H₂O (प्रकाश, क्लोरोफिल)
- प्रकाश-अपघटन: 2H₂O → 4H⁺ + O₂ + 4e⁻
- अचक्रीय: ATP + NADPH + O₂ · चक्रीय: केवल ATP
- कार्बोक्सिलन: RuBP + CO₂ → 2 PGA (RuBisCO)
- 1 ग्लूकोज़ = 6 चक्कर = 6 CO₂ + 18 ATP + 12 NADPH
- C₄: PEP + CO₂ → OAA (PEP कार्बोक्सिलेज़)
हल किए गए उदाहरण
1. एक ग्लूकोज़ के लिए केल्विन चक्र कितनी बार घूमता है, और क्यों?
हर चक्कर में एक CO₂ (एक कार्बन) जुड़ता है। ग्लूकोज़ में 6 कार्बन हैं, इसलिए 6 चक्कर।
2. 1 ग्लूकोज़ के लिए कितने ATP और NADPH चाहिए?
हर CO₂ पर 3 ATP और 2 NADPH। 6 CO₂ के लिए 6 × 3 = 18 ATP और 6 × 2 = 12 NADPH।
3. 3 ग्लूकोज़ अणुओं के लिए कितने ATP और NADPH?
3 ग्लूकोज़ = 18 CO₂। ATP = 18 × 3 = 54, NADPH = 18 × 2 = 36।
4. 12 पानी के अणु टूटें तो कितने O₂ अणु बनेंगे? यह O₂ कहाँ से आती है?
2H₂O से 1 O₂, तो 12 H₂O से 6 O₂। ऑक्सीजन पानी से आती है, CO₂ से नहीं (भारी ऑक्सीजन ¹⁸O से सिद्ध)।
5. अचक्रीय प्रवाह ATP : NADPH लगभग 1 : 1 देता है, पर केल्विन चक्र को 3 : 2 चाहिए। 6 CO₂ के लिए कितना अतिरिक्त ATP चाहिए?
केल्विन को 18 ATP और 12 NADPH चाहिए। 12 NADPH के साथ लगभग 12 ATP मिलते हैं। अतिरिक्त = 18 − 12 = 6 ATP, जो मुख्यतः चक्रीय फोटोफॉस्फोरिलेशन देता है।
6. एक पौधे को प्रकाश 80, CO₂ 30 और अच्छा ताप (90) मिल रहा है। कौन-सा कारक सीमा है? प्रकाश दोगुना करें तो?
CO₂ (30) सबसे कम है, वही सीमा कारक है। प्रकाश दोगुना करने से कुछ नहीं बदलेगा। CO₂ बढ़ाने पर दर तब तक बढ़ेगी जब तक प्रकाश या ताप सीमा न बनें।
7. C₄ पौधा PEP दोबारा बनाने में हर CO₂ पर 2 अतिरिक्त ATP खर्च करता है। एक ग्लूकोज़ पर कुल ATP?
केल्विन: हर CO₂ पर 3 ATP। C₄ अतिरिक्त: 2 ATP। कुल 5 प्रति CO₂। 6 CO₂ के लिए 5 × 6 = 30 ATP (साथ में 12 NADPH)।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि प्रकाश-संश्लेषण की O₂, CO₂ से आती है। यह पानी से आती है, जो PS II पर प्रकाश से टूटता है।
- सोचना कि "अंधकार अभिक्रिया" केवल रात में होती है। इसे प्रकाश से बने ATP और NADPH चाहिए, इसलिए यह दिन में ही चलती है।
- नंबर देखकर सोचना कि PS I पहले काम करता है। इलेक्ट्रॉन PS II → PS I जाते हैं; नाम केवल खोज का क्रम है।
- यह मानना कि C₄ पौधों में केल्विन चक्र नहीं होता। होता है, पर बंडल आच्छद कोशिकाओं में।