Russia 10 класс Biology (basic)
अध्याय: 7
1. Biology as a science
Biology and methods
- वैज्ञानिक विधि – वैज्ञानिक विधि वह सावधान तरीका है जिससे वैज्ञानिक पता लगाते हैं कि दुनिया कैसे चलती है। कुछ देखो (प्रेक्षण), परखने लायक प्रश्न पूछो, परिकल्पना बनाओ (साफ़, परखने योग्य अनुमान), निष्पक्ष प्रयोग से परखो (एक चर बदलो, एक मापो, बाकी सब एक जैसा), दोहराओ और आँकड़े लिखो, विश्लेषण करो, निष्कर्ष निकालो और साझा करो ताकि दूसरे जाँच सकें। जो नतीजे परिकल्पना से मेल न खाएँ, वे भी काम के हैं: वे नई परिकल्पना की ओर ले जाते हैं।
2. Living systems
Levels of organisation
- जीव जगत – धरती पर लाखों तरह के जीव हैं; इसी विविधता को जैव विविधता कहते हैं। इन्हें पढ़ने के लिए हम इन्हें समूहों में बाँटते हैं। वर्गिकी (टैक्सोनॉमी) में पहचान, नामकरण, वर्णन और वर्गीकरण आता है; सिस्टेमैटिक्स इसके साथ यह भी देखती है कि समूह आपस में कैसे जुड़े हैं। सारा जीवन तीन डोमेन में है: बैक्टीरिया, आर्किया और यूकेरिया। जीवों को जगत से जाति तक 7 मुख्य स्तरों में रखते हैं और हर जाति को दो शब्दों का लैटिन नाम मिलता है, जैसे Mangifera indica।
3. Chemical composition and structure of the cell
Chemistry of the cell · Cell theory and cell structure
- जैव अणु – कोशिका में ज़्यादातर पानी है, और कार्बन यौगिकों के चार बड़े परिवार: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड और न्यूक्लिक अम्ल। ऊतक को अम्ल में पीसने से छोटे अणु (अम्ल-विलेय भाग) बड़े अणुओं – प्रोटीन, पॉलीसैकेराइड, न्यूक्लिक अम्ल (अम्ल-अविलेय भाग) – से अलग हो जाते हैं। प्रोटीन अमीनो अम्लों की शृंखलाएँ हैं जो चार स्तरों में मुड़ती हैं। पॉलीसैकेराइड शर्करा की शृंखलाएँ हैं; लिपिड ग्लिसरॉल पर वसा अम्ल; न्यूक्लिक अम्ल न्यूक्लियोटाइड की शृंखलाएँ। एंज़ाइम प्रोटीन उत्प्रेरक हैं जो सक्रिय स्थल पर क्रियाधार पकड़ते हैं, सक्रियण ऊर्जा घटाते हैं, और तापमान, pH, क्रियाधार मात्रा व संदमकों से प्रभावित होते हैं।
- कोशिका: जीवन की इकाई – हर सजीव कोशिकाओं से बना है और हर नई कोशिका पुरानी कोशिका से बनती है। प्रोकैरियोटी कोशिका (जीवाणु) में केंद्रक आवरण और झिल्ली वाले कोशिकांग नहीं होते; यूकैरियोटी कोशिका में असली केंद्रक और कई कोशिकांग होते हैं। झिल्ली लिपिड और प्रोटीन का तरल मोज़ेक है; पौधों में ऊपर से सेलुलोज़ की भित्ति। ER, गॉल्जी, लयनकाय और रिक्तिका मिलकर अंतःझिल्ली तंत्र बनाते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया और लवक ऊर्जा व भोजन बनाते हैं, राइबोसोम प्रोटीन बनाते हैं, कोशिका कंकाल, पक्ष्माभ, कशाभिका और तारककेंद्र आकार व गति देते हैं, और केंद्रक में DNA रहता है।
4. Life processes of the cell
Metabolism · Protein biosynthesis
- पादप में श्वसन – श्वसन में ग्लूकोज़ जैसा भोजन टूटता है और ऊर्जा ATP के रूप में जमा होती है। पौधे रंध्रों और वातरंध्रों से O₂ लेते हैं। कोशिका-द्रव्य में ग्लाइकोलिसिस ग्लूकोज़ को दो पाइरुवेट में तोड़ता है। O₂ न हो तो पाइरुवेट का किण्वन होकर एथेनॉल या लैक्टिक अम्ल बनता है। O₂ हो तो पाइरुवेट माइटोकॉन्ड्रिया में जाता है, क्रेब्स चक्र चलता है और इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र O₂ की मदद से सबसे ज़्यादा ATP बनाता है: एक ग्लूकोज़ से 38 तक। यही पथ अणु बनाता भी है (उभयचयी)। RQ = निकली CO₂ ÷ ली गई O₂।
- वंशागति का आणविक आधार – ज़्यादातर जीवों में DNA आनुवंशिक पदार्थ है (कुछ वायरस में RNA)। यह द्विकुंडली है: न्यूक्लियोटाइड के दो प्रतिसमांतर सूत्र; A–T दो हाइड्रोजन बंध से, G–C तीन से। लंबा DNA हिस्टोन पर लिपटकर न्यूक्लियोसोम और फिर क्रोमैटिन बनाता है। DNA अर्धसंरक्षी ढंग से प्रतिकृति बनाता है (मेसेल्सन–स्टाल)। केंद्रीय सिद्धांत: DNA → RNA → प्रोटीन। अनुलेखन एक सूत्र से RNA बनाता है; यूकैरियोट में hnRNA पर कैप, पूँछ और स्प्लाइसिंग होती है। आनुवंशिक कूट त्रिक है, 64 कोडॉन (61 अमीनो अम्ल, 3 समापन), AUG से शुरू, लगभग सार्वत्रिक और अपह्रासित। राइबोसोम tRNA की मदद से mRNA को प्रोटीन में बदलता है। जीन चालू-बंद होते हैं; लैक ओपेरॉन इसका उदाहरण है। मानव और चावल जीनोम परियोजनाओं ने पूरा जीनोम पढ़ा, और DNA फिंगरप्रिंटिंग दोहराव वाले DNA (VNTR) से व्यक्ति की पहचान करती है।
5. Reproduction and development
Cell cycle · Reproduction and ontogenesis
- कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन – कोशिका एक तय क्रम में बढ़ती है, DNA दोहराती है और बँटती है – इसे कोशिका चक्र कहते हैं: अंतरावस्था (G1, S, G2) और M प्रावस्था। S प्रावस्था में DNA दोगुना (2C → 4C) होता है, पर गुणसूत्र संख्या वही रहती है। समसूत्री विभाजन (पूर्वावस्था, मध्यावस्था, पश्चावस्था, अंत्यावस्था) और कोशिकाद्रव्य विभाजन से जनक जैसी दो कोशिकाएँ बनती हैं – यह समीकरणीय विभाजन वृद्धि और मरम्मत के लिए है। अर्धसूत्री विभाजन में दो विभाजन होते हैं; अर्धसूत्री I में समजात गुणसूत्र जोड़ा बनाते हैं, जीन विनिमय करते हैं और अलग होते हैं, जिससे गुणसूत्र संख्या आधी (2n → n) होती है। इससे युग्मकों के लिए चार अगुणित कोशिकाएँ बनती हैं और विविधता आती है।
- विकास: एक कोशिका से पूरा शरीर – विकास (व्यक्तिवृत्त, ontogenesis) एक जीव की जीवन कहानी है। युग्मनज विदलन से बँटकर कोशिकाओं की गेंद (कोरकपुटी) बनाता है। कंदुकन में कोशिकाएँ अंदर जाती हैं और तीन जनन स्तर बनते हैं: बाह्यत्वचा, मध्यजनस्तर, अंतर्जनस्तर। फिर कोशिकाएँ विभेदित होती हैं: सबमें एक जैसे जीन, पर हर प्रकार अलग जीन चालू करता है। कोशिकाओं के संकेत (प्रेरण) और Hox जैसे मुख्य जीन तय करते हैं कि कौन-सा अंग कहाँ बने। जन्म के बाद जीव बढ़ता है, सीधे या कायांतरण से विकसित होता है, बूढ़ा होता है और कभी-कभी अंग दोबारा उगा सकता है।
6. Heredity and variation
Genetics · Variation
- वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत – जीन जोड़ों में होते हैं (अलील)। हर माता-पिता हर जोड़े से एक अलील बच्चे को देता है। मेंडल ने प्रभाविता (3 : 1), पृथक्करण और स्वतंत्र अपव्यूहन (9 : 3 : 3 : 1) दिखाया। असली जीवन में मोड़ भी हैं: अपूर्ण प्रभाविता (1 : 2 : 1), सहप्रभाविता (AB रक्त), बहुविकल्पी अलील, बहुप्रभाविता (एक जीन, कई असर) और बहुजीनी लक्षण (कई जीन, एक लक्षण)। जीन गुणसूत्रों पर होते हैं, इसलिए एक ही गुणसूत्र के जीन सहलग्न रहते हैं और केवल जीन विनिमय से अलग होते हैं। लिंग गुणसूत्र लिंग तय करते हैं (मनुष्य XX-XY, पक्षी ZW, मधुमक्खी अगुणित-द्विगुणित) और लिंग-सहलग्न जीन रखते हैं (हीमोफीलिया, वर्णांधता)। जीन की गड़बड़ी से मेंडलीय विकार (थैलेसीमिया, सिकल-सेल) और गुणसूत्र संख्या की गड़बड़ी से डाउन, टर्नर, क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम होते हैं।
7. Breeding and biotechnology
Breeding and biotechnology
- जैव प्रौद्योगिकी: सिद्धांत व प्रक्रम (पुनर्योगज DNA तकनीक) – आनुवंशिक इंजीनियरिंग यानी किसी जीव के जीन जान-बूझकर बदलना। चाहा गया जीन प्रतिबंधन एंज़ाइम (आणविक कैंची) से काटते हैं, DNA लाइगेज़ (आणविक गोंद) से वाहक DNA में जोड़ते हैं, परपोषी कोशिका में डालते हैं, सही कोशिकाएँ चुनते हैं और बड़े टैंक (बायोरिएक्टर) में उगाकर उत्पाद निकालते हैं। PCR जीन की लाखों प्रतियाँ बनाता है और जेल वैद्युतकणसंचलन DNA टुकड़ों को आकार के हिसाब से अलग करता है।