Ontario Grade 12 CGR4E Living in a Sustainable World (Grade 12, Workplace Preparation)
अध्याय: 5
1. A. Geographic Inquiry and Skill Development
A1 Geographic Inquiry · A2 Developing Transferable Skills
- वैज्ञानिक विधि – वैज्ञानिक विधि वह सावधान तरीका है जिससे वैज्ञानिक पता लगाते हैं कि दुनिया कैसे चलती है। कुछ देखो (प्रेक्षण), परखने लायक प्रश्न पूछो, परिकल्पना बनाओ (साफ़, परखने योग्य अनुमान), निष्पक्ष प्रयोग से परखो (एक चर बदलो, एक मापो, बाकी सब एक जैसा), दोहराओ और आँकड़े लिखो, विश्लेषण करो, निष्कर्ष निकालो और साझा करो ताकि दूसरे जाँच सकें। जो नतीजे परिकल्पना से मेल न खाएँ, वे भी काम के हैं: वे नई परिकल्पना की ओर ले जाते हैं।
- करियर प्लानिंग: ख़ुद को जानने से पहली नौकरी तक – करियर प्लानिंग के पाँच कदम हैं। 1) ख़ुद को जानो: रुचियाँ, कौशल और मूल्य। 2) करियर परिवार खोजो और जानो कि काम क्या है, कौन-सी पढ़ाई चाहिए, वेतन और माँग कितनी है। 3) SMART लक्ष्य और प्लान B के साथ रास्ता बनाओ। 4) CV, आवेदन पत्र, डिजिटल पोर्टफ़ोलियो और इंटरव्यू अभ्यास से नौकरी खोजो। 5) स्कूल से काम की ओर बढ़ो और सीखते रहो, क्योंकि ज़िंदगी भर करियर बदलता है।
2. B. Species and Spaces
B1 Endangered Species and Spaces · B2 Human Impacts on Ecosystems · B3 Ecosystem Characteristics
- जैव विविधता एवं संरक्षण – जैव विविधता यानी जीवन की विविधता, तीन स्तरों पर: आनुवंशिक, जातीय और पारिस्थितिक। यह भूमध्य रेखा के पास सबसे ज़्यादा है और क्षेत्र के साथ बढ़ती है (log S = log C + Z log A)। हर जाति ज़रूरी है, जैसे हवाई जहाज़ की कीलें। 'दुष्ट चौकड़ी' के कारण जातियाँ तेज़ी से खो रही हैं: आवास हानि और विखंडन, अति-दोहन, विदेशी जातियों का आक्रमण और सह-विलुप्ति। IUCN रेड लिस्ट (रेड डेटा बुक) जातियों को 'कम चिंता' से 'विलुप्त' तक बाँटती है। संरक्षण स्व-स्थाने (हॉटस्पॉट, राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र, पवित्र उपवन, रामसर आर्द्रभूमि) और बाह्य-स्थाने (चिड़ियाघर, वानस्पतिक उद्यान, बीज बैंक) होता है।
- जैव विविधता और पारितंत्र पर मानव गतिविधियों का प्रभाव – जैव विविधता यानी धरती पर या एक पारितंत्र में अलग-अलग प्रजातियों की विविधता। ज़्यादा जैव विविधता पारितंत्र को स्थिर बनाती है, क्योंकि जीव भोजन, आश्रय और स्थिर पर्यावरण के लिए एक-दूसरे पर निर्भर हैं, और हमें भोजन, दवाएँ, साफ़ हवा-पानी देती है। बढ़ती आबादी ज़्यादा संसाधन लेती है और ज़्यादा कचरा बनाती है। पानी, ज़मीन और हवा का प्रदूषण, निर्माण-खेती-खदान-कचरा स्थल के लिए ज़मीन, पीट खुदाई, वनों की कटाई और वैश्विक तापन जैव विविधता घटाते हैं। प्रजनन कार्यक्रम, आवास की बहाली, खेतों की बाड़ और किनारे, कम कटाई व कम CO₂, और रीसाइक्लिंग से इसे बचा सकते हैं।
- पारितंत्र: संरचना, उत्पादकता, ऊर्जा प्रवाह और पिरामिड – पारितंत्र प्रकृति की एक कार्यशील इकाई है जहाँ जैविक (जीवित) और अजैविक (निर्जीव) घटक आपस में मिलकर काम करते हैं। पौधे जिस दर से भोजन बनाते हैं वह उत्पादकता है: सकल (GPP) में से श्वसन घटाओ तो शुद्ध (NPP = GPP − R)। मृत पदार्थ पाँच चरणों में टूटता है: खंडन, निक्षालन, अपचय, ह्यूमीकरण और खनिजीकरण। ऊर्जा धूप से आती है, पोषी स्तरों में एक ही दिशा में बहती है और हर बार लगभग 10% ही आगे जाती है। संख्या और जीवभार के पिरामिड उल्टे हो सकते हैं, पर ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा होता है।
3. C. Sustainability of Natural Resources
C1 Strategies and Stewardship Initiatives · C2 Resource Development and Impacts · C3 Distribution and Use of Natural Resources
- प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन: प्रकृति का उपयोग, बिना उसे ख़त्म किए – प्राकृतिक संसाधन प्रकृति की वे चीज़ें हैं जिनका लोग उपयोग करते हैं: पानी, मिट्टी, जंगल, मछली, खनिज और ऊर्जा। कुछ नवीकरणीय भंडार हैं, कुछ अनवीकरणीय, और कुछ धूप जैसे प्रवाह संसाधन। ये असमान रूप से फैले हैं, इसलिए कहीं अधिशेष है, कहीं कमी। संसाधन के विकास से रोज़गार और आय मिलती है, पर ज़मीन, पानी, हवा और लोगों को नुक़सान भी होता है। अच्छा प्रबंधन उपयोग को सतत उपज के भीतर रखता है, संरक्षित क्षेत्र, कोटा, पुनर्चक्रण, मूल्य और सामुदायिक देखभाल जैसे उपायों से।
4. D. Ecosystems and Human Activity
D1 Protecting the Natural Environment · D2 Impacts of Human Activities · D3 Ecological Processes
- पर्यावरण संरक्षण: तकनीक इस्तेमाल करते हुए धरती की देखभाल – पर्यावरण संरक्षण (environmental stewardship) का मतलब है धरती के संसाधनों को सोच-समझकर इस्तेमाल करना ताकि वे लंबे समय तक चलें, और जहाँ नुक़सान हुआ हो उसे ठीक करना। फ़ोन हो या अस्पताल की मशीन, हर उत्पाद का एक जीवन-चक्र होता है: कच्चा माल, निर्माण, परिवहन, उपयोग और जीवन का अंत। हर चरण में ऊर्जा लगती है और कचरा बनता है। अच्छा संरक्षक चीज़ें लंबे समय तक चलाता है, कम बिजली वाली मशीनें चुनता है, कचरा-पदानुक्रम मानता है, ई-कचरा सही जगह देता है और प्रकृति बचाने वाले नियमों का साथ देता है।
- जैव विविधता और पारितंत्र पर मानव गतिविधियों का प्रभाव – जैव विविधता यानी धरती पर या एक पारितंत्र में अलग-अलग प्रजातियों की विविधता। ज़्यादा जैव विविधता पारितंत्र को स्थिर बनाती है, क्योंकि जीव भोजन, आश्रय और स्थिर पर्यावरण के लिए एक-दूसरे पर निर्भर हैं, और हमें भोजन, दवाएँ, साफ़ हवा-पानी देती है। बढ़ती आबादी ज़्यादा संसाधन लेती है और ज़्यादा कचरा बनाती है। पानी, ज़मीन और हवा का प्रदूषण, निर्माण-खेती-खदान-कचरा स्थल के लिए ज़मीन, पीट खुदाई, वनों की कटाई और वैश्विक तापन जैव विविधता घटाते हैं। प्रजनन कार्यक्रम, आवास की बहाली, खेतों की बाड़ और किनारे, कम कटाई व कम CO₂, और रीसाइक्लिंग से इसे बचा सकते हैं।
- पारितंत्र: संरचना, उत्पादकता, ऊर्जा प्रवाह और पिरामिड – पारितंत्र प्रकृति की एक कार्यशील इकाई है जहाँ जैविक (जीवित) और अजैविक (निर्जीव) घटक आपस में मिलकर काम करते हैं। पौधे जिस दर से भोजन बनाते हैं वह उत्पादकता है: सकल (GPP) में से श्वसन घटाओ तो शुद्ध (NPP = GPP − R)। मृत पदार्थ पाँच चरणों में टूटता है: खंडन, निक्षालन, अपचय, ह्यूमीकरण और खनिजीकरण। ऊर्जा धूप से आती है, पोषी स्तरों में एक ही दिशा में बहती है और हर बार लगभग 10% ही आगे जाती है। संख्या और जीवभार के पिरामिड उल्टे हो सकते हैं, पर ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा होता है।
5. E. Community Action
E1 Working Together · E2 Ecological Footprints · E3 Community Infrastructure
- पर्यावरण संरक्षण: तकनीक इस्तेमाल करते हुए धरती की देखभाल – पर्यावरण संरक्षण (environmental stewardship) का मतलब है धरती के संसाधनों को सोच-समझकर इस्तेमाल करना ताकि वे लंबे समय तक चलें, और जहाँ नुक़सान हुआ हो उसे ठीक करना। फ़ोन हो या अस्पताल की मशीन, हर उत्पाद का एक जीवन-चक्र होता है: कच्चा माल, निर्माण, परिवहन, उपयोग और जीवन का अंत। हर चरण में ऊर्जा लगती है और कचरा बनता है। अच्छा संरक्षक चीज़ें लंबे समय तक चलाता है, कम बिजली वाली मशीनें चुनता है, कचरा-पदानुक्रम मानता है, ई-कचरा सही जगह देता है और प्रकृति बचाने वाले नियमों का साथ देता है।