इंसान जानवरों का उपयोग कैसे करता है: शिकार, मछली पकड़ना और पालतू बनाना
इतिहास के ज़्यादातर समय इंसान ने शिकार और मछली पकड़कर भोजन पाया। आज भी मछली प्रोटीन का बड़ा स्रोत है। ख़तरा है अति-दोहन: हर साल जितने पैदा होते हैं, उससे ज़्यादा जानवर ले लेना।
लगभग 10,000–15,000 साल पहले इंसान ने पालतूकरण शुरू किया: जंगली जानवरों को भोजन, काम या साथ के लिए पालना। कुत्ता भेड़िये से, गाय जंगली ऑरॉक्स से, मुर्ग़ी लाल जंगली मुर्ग़े से, भेड़ जंगली मौफ़्लॉन से आई।
नस्लें
नस्ल एक ही जाति के पालतू जानवरों का ऐसा समूह है जिनका रूप और गुण मिलते-जुलते हों। यह कृत्रिम चयन से बनती है: लोग काम के गुण (ज़्यादा दूध, ज़्यादा ऊन, ज़्यादा ताक़त) वाले माता-पिता चुनते रहे, कई पीढ़ियों तक। गिर और साहीवाल गायें ज़्यादा दूध देती हैं; होल्स्टीन गाय दुनिया भर में दूध के लिए मशहूर है। कुत्तों की सारी नस्लें एक ही जाति हैं।
कीट और शहरी जानवर
पीड़क (कीट) वह जानवर है जो हमारी फ़सल, भंडार, सेहत या घर को नुकसान पहुँचाए: टिड्डी, माहू, चूहे, दीमक, मच्छर। रसायनों से इन पर काबू पाया जा सकता है, पर वे उपयोगी जीवों को भी मारते हैं। इसलिए किसान अब जैविक नियंत्रण (प्राकृतिक दुश्मन, जैसे लेडीबर्ड माहू खाती है) और फ़सल-चक्र अपनाते हैं।
शहरी जानवर वे जंगली जानवर हैं जो शहरों में रहना सीख गए: कबूतर, कौए, गौरैया, गिलहरी, बंदर, लोमड़ी और आवारा कुत्ते। ये हमारे कचरे में खाना पाते हैं और इमारतों पर घोंसले बनाते हैं। कुछ अच्छे लगते हैं, कुछ बीमारी फैलाते हैं। शहर साफ़ रखना और जंगली जानवरों को खाना न खिलाना टकराव घटाता है।
जानवर ख़तरे में क्यों हैं, और रेड बुक
मुख्य ख़तरे: आवास का नाश (जंगल कटना, दलदल सुखाना), अति-शिकार और अति-मत्स्यन, प्रदूषण (प्लास्टिक, कीटनाशक), बाहर से लाई गई आक्रामक जातियाँ, और जलवायु परिवर्तन।
रेड बुक (रेड डाटा बुक) दुर्लभ और संकटग्रस्त जातियों की सरकारी सूची है। दुनिया भर की सूची IUCN रेड लिस्ट है। इसमें हर जाति की श्रेणी होती है: कम चिंता → निकट संकट → सुभेद्य → संकटग्रस्त → गंभीर संकटग्रस्त → वन में विलुप्त → विलुप्त। कई देश अपनी राष्ट्रीय रेड बुक भी रखते हैं। सूची में आने से कानूनी सुरक्षा मिलती है: उसका शिकार, व्यापार या नुकसान गैरकानूनी हो जाता है।
ज़मीन पर संरक्षित क्षेत्र
संरक्षित क्षेत्र वह ज़मीन या पानी है जो मुख्य रूप से प्रकृति बचाने के लिए अलग रखा गया हो:
- राष्ट्रीय उद्यान: बड़े क्षेत्र जहाँ वन्यजीव और भू-दृश्य सख़्ती से सुरक्षित हैं; लोग घूम सकते हैं पर शिकार या पेड़ काटना मना है।
- वन्यजीव अभयारण्य: खास जानवरों की रक्षा; कुछ मानव उपयोग की अनुमति हो सकती है।
- जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र: सख़्त कोर, फिर बफ़र, फिर बाहरी पट्टी जहाँ लोग रहते और काम करते हैं।
- प्राकृतिक स्मारक: कोई ख़ास जगह, जैसे झरना, गुफा या बहुत पुराना पेड़।
घर में ही रक्षा (स्व-स्थाने, in situ) सबसे अच्छा तरीका है। चिड़ियाघर, बीज बैंक और प्रजनन केंद्र (बाह्य-स्थाने, ex situ) लगभग ख़त्म जातियों के लिए सहारा हैं।
समुद्र की रक्षा
समुद्र के ख़तरे: अति-मत्स्यन, प्लास्टिक और तेल प्रदूषण, खेतों से बहकर आए पोषक तत्व, और गर्म होता पानी जो प्रवाल भित्तियों को सफ़ेद (ब्लीच) कर देता है। रक्षा के तरीके:
- समुद्री संरक्षित क्षेत्र और नो-टेक ज़ोन जहाँ मछली पकड़ना मना है। अंदर मछलियाँ बड़ी और ज़्यादा होती हैं और पास के पानी में फैल जाती हैं।
- मछली पकड़ने के नियम: पकड़ की सीमा (कोटा), जाल के छेद का न्यूनतम आकार ताकि छोटी मछलियाँ निकल जाएँ, प्रजनन काल में रोक।
- प्रदूषण कानून: कचरा फेंकने पर रोक, तेल ढोने वाले जहाज़ों के नियम, एक बार इस्तेमाल वाले प्लास्टिक में कमी।
- अंतरराष्ट्रीय समझौते, क्योंकि मछलियाँ और प्रदूषण समुद्र में हर सीमा पार करते हैं।
हम भी मदद कर सकते हैं: टिकाऊ तरीके से पकड़ी मछली चुनें, एक बार वाला प्लास्टिक न लें, और समुद्र-तट सफ़ाई में शामिल हों।
खुद करके देखो: मछली-प्रबंधक बनो
3D का आख़िरी चरण खोलो। झील में शुरू में 30 मछलियाँ हैं और अधिकतम 40 रह सकती हैं। पहले अनुमान लगाओ: हर साल सबसे ज़्यादा कितनी मछली पकड़ें कि 10 साल तक मछलियाँ बची रहें? 3, 5, 7 और 9 की पकड़ आज़माओ, अभयारण्य के साथ और बिना। हर नतीजा लिखो। तुम पाओगे कि लगभग 5 तक की पकड़ सुरक्षित है, और अभयारण्य ज़्यादा पकड़ में भी मछलियाँ बचा लेता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अगले साल की संख्या = इस साल + जन्म − मृत्यु − पकड़
- टिकाऊ: पकड़ ≤ हर साल जुड़ी नई मछलियाँ
- पालतूकरण: जंगली जाति → इंसान ने पाला
- नस्ल: कृत्रिम चयन से बनी एक पालतू जाति की किस्म
- स्व-स्थाने = प्राकृतिक घर में रक्षा; बाह्य-स्थाने = बाहर (चिड़ियाघर, बीज बैंक)
- रेड लिस्ट क्रम: LC → NT → VU → EN → CR → EW → EX
हल किए गए उदाहरण
1. एक तालाब में 200 मछलियाँ हैं। हर साल प्रजनन से (प्राकृतिक मौतों के बाद) 50 नई जुड़ती हैं। एक गाँव वाला हर साल 70 पकड़ता है। प्रजनन वैसा ही रहे तो 3 साल बाद कितनी बचेंगी?
हर साल बदलाव = 50 − 70 = −20। 3 साल बाद: 200 − 60 = 140 मछलियाँ। संख्या गिर रही है, यानी पकड़ टिकाऊ नहीं।
2. उसी तालाब में संख्या 200 पर टिकाए रखने के लिए सबसे बड़ी सालाना पकड़ कितनी हो?
पकड़ = जुड़ी नई मछलियाँ: 50 मछलियाँ प्रति साल।
3. क्या लैब्राडोर और गली का कुत्ता एक ही जाति हैं? समझाओ।
हाँ। दोनों Canis familiaris हैं। लोगों के माता-पिता चुनने से अलग नस्लें बनीं, पर वे आपस में प्रजनन करके उपजाऊ पिल्ले दे सकते हैं।
4. एक देश अपने तटीय समुद्र के 20% में मछली पकड़ना बंद करता है। मछुआरे नाराज़ हैं। लंबे समय में यह उनकी मदद कैसे कर सकता है?
नो-टेक ज़ोन में मछलियाँ बड़ी होकर बहुत ज़्यादा अंडे देती हैं। बच्चे और बड़ी मछलियाँ पास के पानी में फैलती हैं, तो कुछ साल बाद बाहर की पकड़ अक्सर बढ़ जाती है।
आम गलतियाँ
- 'संकटग्रस्त' और 'विलुप्त' को एक समझना। संकटग्रस्त जातियाँ अभी हैं और बचाई जा सकती हैं; विलुप्त हमेशा के लिए चली गईं।
- हर कुत्ते की नस्ल को अलग जाति कहना। नस्लें एक ही जाति की किस्में हैं।
- यह मानना कि समुद्र इतना बड़ा है कि उसमें अति-मत्स्यन नहीं हो सकता। पकड़ प्रजनन से ज़्यादा होने पर कई मछली भंडार ढह चुके हैं।
- यह सोचना कि अकेला चिड़ियाघर किसी जाति को बचा लेगा। बाह्य-स्थाने देखभाल सहारा है; लंबे समय के लिए सुरक्षित प्राकृतिक घर चाहिए।