समुद्री उत्पादकता: कुछ समुद्र उपजाऊ क्यों?
उत्पादकता का मतलब है पौधे और शैवाल कितनी तेज़ी से नया जीव-पदार्थ बनाते हैं। समुद्र में यह ज़्यादातर छोटे तैरते शैवाल, पादप प्लवक (phytoplankton), से आती है। इन्हें दो चीज़ें चाहिए: धूप (सिर्फ़ ऊपरी लगभग 0–200 m में) और पोषक तत्व जैसे नाइट्रेट और फ़ॉस्फ़ेट।
- महाद्वीपीय मग्नतट: उथले हैं, इसलिए नदियों और तल के पोषक तत्व धूप के पास रहते हैं।
- उत्प्रवाह क्षेत्र: हवा सतह का पानी दूर धकेलती है और नीचे से ठंडा, पोषक पानी ऊपर आता है (पेरू, उत्तर-पश्चिम अफ़्रीका, दक्षिण-पश्चिम भारत)।
- ज्वारनदमुख, मैंग्रोव, प्रवाल भित्ति, केल्प वन: बहुत उपजाऊ, छोटी मछलियों की नर्सरी।
- खुला महासागर: धूप बहुत, पर पोषक कम, क्योंकि मृत पदार्थ नीचे डूब जाता है।
खाद्य शृंखला में ऊर्जा लगभग 10% दक्षता से आगे जाती है। 1000 kJ प्लवक से लगभग 1 kJ टूना बनता है। इसलिए शैवाल, सीप, रोहू-कतला या सार्डिन जैसे निचले स्तर के जीव उतनी ही धूप से कहीं ज़्यादा भोजन देते हैं।
मछली पकड़ने के तरीक़े और अति-मत्स्यन
- तल ट्रॉल (bottom trawl): समुद्र-तल पर घसीटा जाने वाला जाल। पकड़ बड़ी, पर bycatch और तल की तबाही भी बड़ी।
- पर्स सीन: मछलियों के झुंड को जाल से घेरना। सार्डिन जैसी झुंड वाली मछलियों के लिए; डॉल्फ़िन या छोटी टूना भी फँस सकती हैं।
- लॉन्गलाइन: हज़ारों चारा लगे काँटों वाली डोरी। समुद्री पक्षी, कछुए, शार्क फँसते हैं।
- पोल-एंड-लाइन, जाल-पिंजरे, हाथ की डोरी: बहुत चुनिंदा, bycatch कम, पर पकड़ छोटी।
- गिल नेट: अदृश्य जाल की दीवार; समुद्री स्तनधारियों का bycatch ज़्यादा।
सोनार, GPS, बड़ी नावें और फ़्रीज़र जहाज़ पकड़ना आसान बनाते हैं। अति-मत्स्यन तब है जब पकड़ स्टॉक की प्राकृतिक बढ़त से ज़्यादा हो। निशानियाँ: प्रति घंटे कम पकड़, छोटी और कम उम्र की मछलियाँ, प्रजनन करने वाली मछलियों की कमी।
अधिकतम टिकाऊ उपज (MSY): सबसे बड़ी पकड़ जो हर साल ली जा सके और स्टॉक न घटे। आबादी लगभग आधी वहन क्षमता पर सबसे तेज़ बढ़ती है, इसलिए MSY वहीं मिलती है।
प्रबंधन के उपाय: पकड़ कोटा, जाल के छेद और मछली का न्यूनतम आकार, बंद मौसम (जैसे भारत में मानसून में मछली पकड़ने पर रोक), समुद्री संरक्षित क्षेत्र, नावों और दिनों की सीमा, कछुआ बचाने वाले उपकरण (TED), और टिकाऊ मछली के इको-लेबल।
जल-कृषि: पानी में खेती
जल-कृषि (aquaculture) का मतलब है मछली, सीप या शैवाल को तालाब, टैंक, समुद्री पिंजरे या रस्सियों पर पालना। आज दुनिया की आधी से ज़्यादा खाई जाने वाली मछली इसी से आती है। चीन, भारत, इंडोनेशिया और वियतनाम आगे हैं।
लाभ
- जंगली मछलियों पर दबाव कम।
- मछली चारे को कुशलता से शरीर में बदलती है (लगभग 1.2–1.5 kg चारा → 1 kg मछली), गाय-भैंस से कहीं बेहतर, क्योंकि वह ठंडे ख़ून वाली है और पानी उसे सहारा देता है।
- नियंत्रित आपूर्ति, गुणवत्ता और रोज़गार।
समस्याएँ
- प्रदूषण: बचा चारा और मल सुपोषण (eutrophication) करते हैं; एंटीबायोटिक और कीटनाशक पानी में जाते हैं।
- रोग और परजीवी जंगली मछलियों तक फैलते हैं।
- भागी मछलियाँ जंगली मछलियों से होड़ या प्रजनन करती हैं।
- आवास-हानि, जैसे झींगा तालाबों के लिए मैंग्रोव कटना।
- सैल्मन और झींगे को जंगली मछली से बना फ़िशमील खिलाया जाता है।
बेहतर तरीक़े: शाकाहारी और छन्ना-भोजी जीव (कतला, तिलापिया, सीप, शैवाल) पालना; एकीकृत बहु-पोषी जल-कृषि जिसमें शैवाल और सीप पिंजरे का कचरा सोखते हैं; ज़मीन पर पुनर्चक्रण टैंक; धान-मछली खेती।
करके देखो: सबसे अच्छी पकड़
आख़िरी चरण में हर साल की पकड़ 10%, 25%, 40% और 60% रखो। 20 साल बाद कुल पकड़ और बचा स्टॉक लिखो। तुम पाओगे कि बीच का मान (लगभग 25%) सबसे ज़्यादा कुल पकड़ देता है और स्टॉक भी बचाता है। यही अधिकतम टिकाऊ उपज का विचार है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- उत्पादकता के लिए चाहिए: धूप + पोषक तत्व
- एक पोषी स्तर से अगले तक ऊर्जा ≈ 10%
- अति-मत्स्यन: पकड़ > स्टॉक की प्राकृतिक बढ़त
- MSY लगभग आधी वहन क्षमता (K/2) पर
- चारा रूपांतरण अनुपात (FCR) = दिया गया चारा ÷ बढ़ा वज़न
हल किए गए उदाहरण
1. एक क्षेत्र के प्लवक में 50 000 kJ ऊर्जा है। 10% नियम से तीसरे उपभोक्ता (प्लवक → छोटी मछली → बड़ी मछली → टूना) तक कितनी पहुँचेगी?
छोटी मछली: 5000 kJ; बड़ी मछली: 500 kJ; टूना: 50 kJ।
2. एक मछली फ़ार्म 1300 kg चारा देता है और मछलियों का वज़न 1000 kg बढ़ता है। FCR निकालो।
FCR = 1300 ÷ 1000 = 1.3।
3. समझाओ कि पेरू के पास का समुद्र इतना उपजाऊ क्यों है, जबकि मध्य प्रशांत नहीं।
पेरू के पास हवा सतह का पानी दूर धकेलती है और नाइट्रेट-फ़ॉस्फ़ेट से भरा ठंडा गहरा पानी धूप वाली परत में आता है। इससे प्लवक तेज़ी से बढ़ते हैं और एन्कोवी के बड़े झुंड पलते हैं। मध्य प्रशांत में धूप है, पर पोषक नीचे डूब जाते हैं।
4. एक स्टॉक की वहन क्षमता 200 000 टन है। MSY लगभग किस स्टॉक पर मिलेगी?
लगभग आधी वहन क्षमता पर: 100 000 टन।
आम गलतियाँ
- खुले महासागर को बड़ा होने के कारण उपजाऊ समझना। प्रति वर्ग मीटर यह ग़रीब है, क्योंकि पोषक तत्व कम हैं।
- यह मानना कि जल-कृषि हमेशा जंगली मछली बचाती है। सैल्मन और झींगे को अक्सर जंगली मछली से बना फ़िशमील मिलता है।
- यह सोचना कि कम पकड़ना हमेशा भोजन के लिए बेहतर है। बहुत कम पकड़ से स्टॉक की बढ़त बेकार जाती है; MSY बीच में है।
- bycatch (अनचाही पकड़) और discards (वापस फेंकी गई, अक्सर मरी हुई पकड़) को एक समझना।