अनावृतबीजी पौधे क्या हैं?
अनावृतबीजी (gymnosperms) बीज बनाने वाले पौधे हैं, पर इनके बीज नग्न होते हैं। उन्हें अंडाशय या फल नहीं ढकता। बीज शंकु (cone) की शल्कों की सतह पर रहते हैं। इनमें असली फूल नहीं होते।
मुख्य समूह: शंकुधारी (conifers) (चीड़, स्प्रूस, फ़र, देवदार, सीडर, सरू, रेडवुड), साइकस (cycads) (ताड़ जैसे), जिंगो (आज एक ही जीवित जाति) और एफ़ेड्रा जैसे नीटोफ़ाइट। इनमें जाइलम और फ़्लोएम, सच्ची जड़, तना और पत्तियाँ होती हैं। ज़्यादातर पेड़ या झाड़ियाँ हैं और सालभर हरी रहती हैं (सदाबहार)।
शंकुधारी: पेड़ का आकार और सुई जैसी पत्तियाँ
शंकुधारी पेड़ पहाड़ों और उत्तरी जंगलों जैसी ठंडी या सूखी जगहों में उगते हैं। उनकी विशेषताएँ उसी जीवन के अनुकूल हैं।
- नुकीला शंकु जैसा मुकुट: ढलवाँ टहनियों से भारी बर्फ़ फिसल जाती है और टहनियाँ नहीं टूटतीं।
- सुई जैसी पत्तियाँ: पतली, मोटी मोमी परत और धँसे रंध्रों वाली। पानी कम उड़ता है, जो जमी या सूखी मिट्टी में काम आता है।
- सदाबहार: पत्तियाँ थोड़ी-थोड़ी करके बदलती हैं, इसलिए जब भी गर्मी हो पेड़ भोजन बना सकता है।
- राल नलिकाएँ: चिपचिपी राल घाव भरती है और कीड़ों को दूर रखती है।
- सीधा मज़बूत तना जिसकी नरम लकड़ी वाहिनिकाओं (पानी ले जाने और मज़बूती देने वाली लंबी कोशिकाओं) से बनी होती है।
चीड़ का जीवन-चक्र
बड़ा चीड़ का पेड़ बीजाणुद्भिद (sporophyte) (2n) है। एक ही पेड़ पर दो तरह के शंकु लगते हैं।
- नर शंकु छोटे होते हैं और गुच्छों में लगते हैं। इनके भीतर कोशिकाएँ अर्धसूत्री विभाजन से लाखों पराग कण (n) बनाती हैं। हर कण में दो हवा की थैलियाँ होती हैं जो उसे तैरने में मदद करती हैं।
- मादा शंकु बड़े और काष्ठीय होते हैं। हर शल्क पर दो बीजांड (ovules) होते हैं। बीजांड के भीतर एक कोशिका बँटकर मादा युग्मकोद्भिद बनाती है जिसमें अंडा होता है।
- परागण: हवा पराग को मादा शंकु तक पहुँचाती है। ज़्यादातर पराग बेकार जाता है, इसलिए पेड़ बहुत ज़्यादा बनाता है।
- पराग कण बीजांड के पास चिपककर पराग नलिका उगाता है। इसमें कई महीने लगते हैं। शुक्राणुओं को पानी में तैरना नहीं पड़ता।
- निषेचन: शुक्राणु अंडे तक पहुँचता है। युग्मनज (2n) से भ्रूण बनता है। बीजांड बीज बन जाता है।
- शंकु लगभग दो साल में पकता है। शल्कें खुलती हैं और पंख वाले बीज उड़ते हैं। अच्छी मिट्टी में बीज से नन्हा पौधा बनता है, जिसकी पहली पत्तियाँ सुई जैसी और गोलाई में होती हैं।
काई और फ़र्न से अलग, अनावृतबीजी को निषेचन के लिए पानी नहीं चाहिए, और बीज नन्हे पौधे को भोजन-भंडार और सुरक्षा देता है।
अनावृतबीजी का महत्व
- इमारती लकड़ी: मकान, फ़र्नीचर, खंभे और नावों के लिए नरम सीधी लकड़ी।
- कागज़: कागज़ और गत्ते के लिए लकड़ी की लुगदी।
- राल: पेंट, वार्निश, साबुन और दवाओं के लिए तारपीन और रोज़िन।
- भोजन: चिलगोज़ा जैसे चीड़ के बीज।
- दवा: एफ़ेड्रा से साँस की नलियाँ खोलने वाली दवा मिलती है।
- पर्यावरण: जंगल मिट्टी रोकते हैं, ढलानों पर पानी धीमा करते हैं, कार्बन जमा करते हैं और जानवरों को आसरा देते हैं।
- बगीचे और त्योहार के पौधे: साइकस, जिंगो और क्रिसमस ट्री।
बहुत से शंकुधारी पेड़ धीरे बढ़ते हैं, इसलिए उन्हें सोच-समझकर काटना और नए पेड़ लगाना ज़रूरी है।
करके देखिए: शंकु जासूस
पहाड़ी पार्क की सैर में गिरा हुआ चीड़ का शंकु उठाइए। उसे एक दिन सुखाइए। क्या शल्कें खुलती हैं? शल्कों के बीच छोटे पंख वाले बीज खोजिए। एक कतार की शल्कें गिनिए। फिर एक बीज को ऊँचाई से गिराकर घूमता देखिए। मटर की फली के बीज से तुलना कीजिए। किसका बीज ढका है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: अनावृतबीजी = नग्न बीज वाला पौधा (फल नहीं)
- मुख्य शब्द: शंकु, बीजांड, पराग कण, पराग नलिका, पंख वाला बीज
- बड़ा चीड़ का पेड़ = बीजाणुद्भिद (2n); पराग और अंडे वाले भाग = छोटे युग्मकोद्भिद (n)
- क्रम: पराग → हवा → बीजांड → पराग नलिका → निषेचन → बीज (लगभग 2 साल) → नन्हा पौधा
- उदाहरण: चीड़, देवदार, स्प्रूस, फ़र, साइकस, जिंगो, एफ़ेड्रा
हल किए गए उदाहरण
1. शंकुधारी पेड़ों की पत्तियाँ पतली सुई जैसी और मोमी क्यों होती हैं?
पतली मोमी पत्ती से बहुत कम पानी उड़ता है। यह वहाँ काम आता है जहाँ पानी जमा हुआ या कम है। आकार से बर्फ़ भी फिसल जाती है।
2. एक नर शंकु 20,00,000 पराग कण बनाता है और उनमें से सिर्फ़ 0.01% बीजांड तक पहुँचते हैं। कितने पहुँचेंगे?
20,00,000 का 0.01% = 20,00,000 × 0.0001 = 200 कण। ज़्यादातर बेकार जाते हैं, इसीलिए इतने बनाए जाते हैं।
3. अनावृतबीजी का बीज आम या मटर के बीज से कैसे अलग है?
अनावृतबीजी का बीज नग्न होता है और शंकु की शल्क पर रहता है। आम या मटर का बीज अंडाशय से बने फल के भीतर होता है, जैसा आवृतबीजी में होता है।
4. फ़र्न की तरह चीड़ को निषेचन के लिए पानी क्यों नहीं चाहिए?
पराग नलिका शुक्राणुओं को बीजांड के ऊतक के भीतर से अंडे तक पहुँचा देती है, इसलिए उन्हें पानी की परत में तैरना नहीं पड़ता।
आम गलतियाँ
- अनावृतबीजी में फूल या फल मान लेना। इनमें शंकु और नग्न बीज होते हैं।
- शंकु को फल समझना। शंकु शल्कों का समूह है जो बीजाणु या बीज धारण करता है।
- सभी अनावृतबीजी को चीड़ समझना। साइकस, जिंगो और एफ़ेड्रा भी अनावृतबीजी हैं।
- सोचना कि शंकुधारी पेड़ पतझड़ में सारी पत्तियाँ गिरा देते हैं। ज़्यादातर सदाबहार हैं।